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    रुपया शुरुआती मजबूती खोकर 91.79 पर बंद, भारत-ईयू व्यापार समझौते के बाद उतार-चढ़ाव जारी

    9 hours ago

    भारतीय रुपये ने बुधवार को शुरुआती मजबूती दिखाई, लेकिन विदेशी निवेशकों के बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के दबाव में दिन का कारोबार 11 पैसे की गिरावट के साथ 91.79 प्रति डॉलर पर समाप्त हुआ। इंटरबैंक विदेशी विनिमय बाजार में रुपया सुबह 91.60 पर खुला और दिन के शुरुआती उच्च स्तर 91.50 तक पहुंचा, लेकिन बाद में 91.83 तक गिरावट दर्ज की गई।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर सूचकांक में नरमी और भारत तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा दिया। इस समझौते के तहत भारत के वस्त्र, रसायन और जूते जैसे कई घरेलू क्षेत्र 27 राष्ट्रों वाले यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश पाएंगे, जबकि ईयू को भारतीय बाजार में कार और वाइन जैसे उत्पादों पर छूट दरों का लाभ मिलेगा। इस समझौते को "मदर ऑफ ऑल डील्स" कहा जा रहा है, क्योंकि यह लगभग दो अरब लोगों के बाजार का निर्माण करेगा।

    विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मंगलवार को ₹3,068.49 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने खरीदारी के जरिए बाज़ार में संतुलन बनाए रखा।

    सेंसेक्स ने बुधवार को 487.20 अंकों की तेजी के साथ 82,344.68 पर और निफ्टी 50 ने 167.35 अंकों की बढ़त के साथ 25,342.75 पर बंद किया।

    तेल और अन्य कमोडिटी बाजार में भी हल्की गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 67.28 डॉलर प्रति बैरल पर था। अमेरिकी डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.07 प्रतिशत गिरकर 96.14 पर ट्रेड कर रहा था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रुपया भले ही भारत-ईयू FTA के बाद शुरुआत में मजबूती दिखा रहा हो, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां रुपये पर दबाव बनाए रख सकती हैं। मंगलवार को रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर से 22 पैसे की तेजी के साथ 91.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

    इस बीच, शेयर बाजार में ऑटो और टेक्नोलॉजी सेक्टर प्रमुख रहे। ओएनजीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कंपनियों के शेयरों में तेजी रही, जबकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने दिन भर बाजार को उतार-चढ़ाव में रखा।

     

    रुपया और शेयर बाजार की यह स्थिति संकेत देती है कि विदेशी निवेशक अभी भी वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों को लेकर सतर्क हैं, और व्यापार एवं निवेश के निर्णयों में सतर्कता बरत रहे हैं।

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