Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    कांचीपुरम के देवरा‍जस्वामी मंदिर में परंपरागत पूजा-पाठ से जुड़े मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट की पहल, सेवानिवृत्त न्यायाधीश को मध्यस्थ नियुक्त

    9 hours ago

    सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित प्रसिद्ध देवरा‍जस्वामी (वरदराज पेरुमल) मंदिर में परंपरागत पूजा-पद्धतियों को लेकर चले आ रहे मतभेद के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय किशन कौल को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त करते हुए दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास करने का निर्देश दिया।

    यह मामला मंदिर में विशेष अवसरों पर पारंपरिक स्तुतियों और पाठों के क्रम को लेकर अलग-अलग परंपराओं का पालन करने वाले समूहों के बीच मतभेद से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि यह विषय धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से संबंधित है, इसलिए इसे संवाद और समझ के माध्यम से सुलझाया जाना अधिक उपयुक्त होगा।

    आपसी समझ पर जोर

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ईश्वर के समक्ष सभी समान होते हैं और ऐसे मामलों में सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। अदालत ने उम्मीद जताई कि नियुक्त मध्यस्थ की सहायता से दोनों पक्ष आपसी सम्मान और परंपराओं की भावना को ध्यान में रखते हुए किसी साझा निष्कर्ष पर पहुंच सकेंगे।

    न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायमूर्ति कौल आवश्यक होने पर तमिलनाडु की धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई परंपराओं की जानकारी रखने वाले दो विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं, ताकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

    विवाद की पृष्ठभूमि

    यह मामला मद्रास उच्च न्यायालय के नवंबर 2025 के एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें मंदिर में कुछ विशेष स्तुतियों के पाठ के क्रम को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए कांचीपुरम निवासी एस. नारायणन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायालय ने एक परंपरा को मान्यता देते हुए दूसरी परंपरा के कुछ धार्मिक अभ्यासों पर रोक लगा दी, जिससे समानता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों पर असर पड़ा।

    याचिकाकर्ता का तर्क था कि मंदिर की ऐतिहासिक और परंपरागत पहचान से जुड़े पहलुओं को पूरी तरह ध्यान में नहीं रखा गया। उनका कहना था कि मंदिर परिसर में एक प्रमुख संत से जुड़ा एक अलग पवित्र स्थल भी स्थित है, और उससे जुड़ी स्तुतियों का पाठ रोकना संबंधित अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करता है।

    संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

    याचिका में यह भी कहा गया कि उच्च न्यायालय ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या करते समय संतुलन नहीं रखा। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि धार्मिक समुदायों को अपने आंतरिक धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और इसे सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

    इसके साथ ही यह भी दलील दी गई कि प्रशासनिक अधिकारियों को केवल प्रबंधन और संपत्ति से जुड़े मामलों तक सीमित रहना चाहिए, न कि धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों में हस्तक्षेप करना चाहिए।

    वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौजूदगी

    इस मामले की सुनवाई के दौरान कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व किया। सभी पक्षों ने अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क रखे, जिसके बाद पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंची कि विवाद का न्यायिक समाधान निकालने के बजाय मध्यस्थता के माध्यम से सहमति बनाना अधिक उपयुक्त होगा।

    सांस्कृतिक विरासत पर टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी विरासत को बनाए रखने के लिए आपसी सम्मान और संवाद बेहद आवश्यक है।

    अगली सुनवाई मार्च में

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मार्च महीने में तय की है। तब तक मध्यस्थ से यह अपेक्षा की गई है कि वे दोनों पक्षों के साथ बातचीत कर किसी साझा समाधान की संभावना तलाशेंगे।

    अदालत के इस कदम को धार्मिक परंपराओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को शांतिपूर्ण और संतुलित तरीके से सुलझाने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल संबंधित पक्षों को राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के समाधान के लिए एक सकारात्मक उदाहरण भी स्थापित हो सकता है।

     
     
    Click here to Read More
    Previous Article
    नागरकोइल–मंगलूरु अमृत भारत एक्सप्रेस के लंबे यात्रा समय पर यात्रियों की आपत्ति, गोवा तक विस्तार की मांग
    Next Article
    रुपया शुरुआती मजबूती खोकर 91.79 पर बंद, भारत-ईयू व्यापार समझौते के बाद उतार-चढ़ाव जारी

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment