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    भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी

    10 hours ago

    भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को लेकर निवेशकों में बढ़े भरोसे के बीच प्रमुख सूचकांकों ने दिन का अंत बढ़त के साथ किया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने बाजार की धारणा को और सहारा दिया।

    बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 487.20 अंकों की बढ़त के साथ 82,344.68 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय 646.49 अंक चढ़कर 82,503.97 के स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 167.35 अंक बढ़कर 25,342.75 पर बंद हुआ।

    प्रमुख शेयरों में तेजी

    सेंसेक्स की कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद इसके शेयरों में करीब 9 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों ने भी बाजार को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई।

    विश्लेषकों का कहना है कि रक्षा, बुनियादी ढांचा और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में खरीदारी का रुझान विशेष रूप से मजबूत रहा, जिससे व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल बना।

    कुछ शेयरों में दबाव

    हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। एशियन पेंट्स के शेयरों में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने दिसंबर तिमाही में अपने समेकित शुद्ध लाभ में गिरावट की जानकारी दी थी, जिसका असर उसके शेयर मूल्य पर पड़ा। इसके अलावा मारुति सुजुकी, सन फार्मा, इंफोसिस और भारती एयरटेल जैसे शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखी गई।

    भारत-ईयू समझौते से निवेशकों में उत्साह

    बाजार में तेजी का सबसे बड़ा कारण भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ व्यापक मुक्त व्यापार समझौता माना जा रहा है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निर्यात-आयात को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। अधिकारियों के अनुसार, इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है, जबकि घरेलू उद्योगों के लिए नई प्रतिस्पर्धी चुनौतियां भी सामने आएंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दीर्घकाल में भारत की आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे सकता है और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मददगार साबित हो सकता है।

    विदेशी और घरेलू निवेश का रुझान

    एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप से शेयरों की बिकवाली की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में मजबूत खरीदारी की। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया।

    वैश्विक बाजारों का संकेत

    एशियाई बाजारों में भी बुधवार को सकारात्मक रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और हांगकांग के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, यूरोपीय बाजारों में कारोबार के दौरान हल्की कमजोरी देखी गई। अमेरिका के शेयर बाजारों में पिछला सत्र मिलाजुला लेकिन कुल मिलाकर सकारात्मक रहा।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में नरमी दर्ज की गई, जिससे आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    आगे की राह

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों के रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। साथ ही, भारत-यूरोपीय संघ समझौते से जुड़े अगले कदम और इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा कारोबारी सत्र में बाजार की मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशक मध्यम से लंबी अवधि के दृष्टिकोण से सकारात्मक बने हुए हैं, हालांकि चुनिंदा क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना अब भी जरूरी माना जा रहा है।

     
     
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