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    विचार से नवाचार तक: राजस्थान विश्वविद्यालय में हैकाथॉन-2026 का आयोजन*

    1 week ago

    देशभर की 45 टीमों ने लिया भाग, 12 नवाचारी विचार पुरस्कृत; शोध को समाज से जोड़ने पर जोर*

     

    जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में गुरुवार को *“इनोवेशन आइडिया हैकाथॉन-2026”* के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआईसी-आरयू) तथा सोसाइटी फॉर मटेरियल केमिस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में नेशनल इनिशिएटिव फॉर डिजाइन इनोवेशन (NIDI) के अंतर्गत आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत *संयोजक प्रो. नीलिमा गुप्ता* के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि डिजाइन इनोवेशन सेंटर का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों में रचनात्मकता, बहुविषयक सोच, डिजाइन थिंकिंग और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि केंद्र नवाचार आधारित शिक्षा, प्रोटोटाइप विकास, स्टार्टअप समर्थन तथा उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। 

     

    मुख्य अतिथि *प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. सौरव पाल ने ‘रिसर्च टू इनोवेशन इन एन एकेडमिक सेटिंग’* विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि अनुसंधान की सार्थकता तभी है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर समाज की आवश्यकताओं से जुड़ सके। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से नवाचारी सोच अपनाने, व्यावहारिक समाधान विकसित करने तथा उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में स्टार्टअप को मार्गदर्शन देने के लिए इनोवेशन कॉम्प्लेक्स की आवश्यकता पर बल देते हुए देश के विशिष्ट संस्थानों में सफल इन्क्यूबेशन केंद्रों के उदाहरण प्रस्तुत किए, जहाँ नवाचारी स्टार्टअप्स को एक ही छत के नीचे विकसित कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विचारों को व्यावहारिक रूप में परिवर्तित किया जाता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा-“जीवन में जोखिम उठाइए; यदि आप जीतते हैं तो नेतृत्व करते हैं और यदि हारते हैं तो मार्गदर्शन करते हैं।” उन्होंने सफलता के लिए निडरता, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास को आवश्यक बताया।

     

    विशिष्ट अतिथि संभागीय आयुक्त वी. सरवाना कुमार ने नवाचार को प्रशासनिक एवं सामाजिक विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि सही तथा समाजोपयोगी समस्या का चयन करना ही सफल नवाचार की कुंजी है। उन्होंने पाठ्यक्रम में नवाचार को शामिल करने तथा शोध सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने राजस्थान सरकार द्वारा 50 विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में IPR एवं टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेल स्थापित किए जाने की घोषणा की जानकारी भी साझा की।

     

     विशेष अतिथि डॉ. पुर्नेंदु घोष ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संदर्भ में अकादमिक अनुसंधान को औद्योगिक आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया और अनुसंधान एवं उद्योग के बीच मजबूत समन्वय को समय की मांग बताया।

     

    अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय शोध, स्टार्टअप और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को सशक्त बनाकर नवाचार का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नवाचार संस्कृति को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं और विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार की पहल को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा।

     

    *प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता* ने बताया - हैकाथॉन में देशभर से 45 टीमों ने भाग लिया, जिनमें से 12 उत्कृष्ट नवाचारी विचारों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। अंत में प्रो. रेशमा बुलचंदानी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। दूसरे सत्र में, डिजाइन इनोवेशन सेंटर-BISR के सहयोग से बीआईएसआर, जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. सौरव पाल ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए एआई के युग में सफल होने के लिए बहुविषयक अध्ययन अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया और विद्यार्थियों को नए कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

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