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    भाषा हमारे अनुभवों से बनती और बदलती है प्रेमचन्द गांधी केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में ‘भाषा, साहित्य और सिनेमा’ पर विशिष्ट व्याख्यान

    1 hour ago

    जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार 1 से 30 सितम्बर तक आयोजित ‘हिन्दी माह-2026’ के अंतर्गत भारतीय भाषा केन्द्र के तत्वावधान में ‘भाषा, साहित्य और सिनेमा’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ कवि, कहानीकार एवं नाटककार प्रेमचन्द गांधी रहे। प्रभारी निदेशक प्रो श्रीधर मिश्र सह निदेशक शैक्षणिक प्रो विष्णुकांत पाण्डेय, सह निदेशक प्र. प्रो शीशराम उपस्थित रहें।

    मुख्य वक्ता प्रेमचन्द गांधी ने कहा कि “भाषा हमारे अनुभवों से बनती और बदलती है।” भाषा मनुष्य की समझ का विस्तार करती है। हिन्दी ने अपना व्यापक संसार निर्मित किया है और इसके विकास में भारत की विभिन्न बोलियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि भाषा को धार्मिक खाँचों से अलग रखकर समझना चाहिए। उर्दू के विकास में विभिन्न समुदायों के लोगों का योगदान रहा है। उन्होंने भाषा के निर्माण में पशु-पक्षियों से जुड़े अनुभवों, मुहावरों और लोकोक्तियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

    साहित्य और सिनेमा के संबंध पर उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा की शुरुआत मूक फिल्मों से हुई और आगे चलकर अनेक भारतीय भाषाओं के लेखकों ने सिनेमा के लिए लेखन किया। विद्यार्थियों को भारतीय सिनेमा के साथ विश्व सिनेमा से भी परिचित होना चाहिए। उन्होंने संस्कृत विद्यार्थियों से संस्कृत के साथ हिन्दी एवं रूसी साहित्य का अध्ययन करने और लेखन का निरंतर अभ्यास करने का आह्वान किया। उन्होंने अपनी कविताएँ ‘सपनों में घर’ तथा ‘अज्ञात लिपि में लिखी कविताएँ’ भी सुनाईं।

    प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी सिनेमा और गीतों ने हिन्दी भाषा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रो. शीशराम ने कहा कि भाषा को किसी परिधि में बांधने से उसका विस्तार सीमित हो जाता है। कार्यक्रम संयोजक प्रो. रेखा पाण्डेय ने स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन करते हुए हिन्दी की समृद्धि में भारतीय बोलियों और साहित्यिक परंपरा के योगदान को रेखांकित किया।

    अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. श्रीधर मिश्र ने कहा कि भाषा और समाज एक-दूसरे को निरंतर प्रभावित करते हैं। कार्यक्रम में प्रो कृष्णा शर्मा, सचिदानंद स्नेही, सीमा अग्रवाल, हरिओम शर्मा, वीनी शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, प्रीति शर्मा नरेश सिंह ज्योत्स्ना वर्मा दीक्षिता अजवानी सहित विश्वविद्यालय के कर्मचारी छात्र छात्राये उपस्थित थे कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत एवं कुलगीत से हुआ। छात्रा दीपाली ने मीराबाई के पद प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुभाष चन्द्र धायल ने किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

     

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