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    गुरुग्राम में पूर्व सहकर्मी से मिलने गया दिल्ली का युवक लापता, नाले से मिला शव; महिला समेत दो गिरफ्तार

    57 minutes ago

     

    Yugcharan News / 18-09-2026

    नई दिल्ली: दिल्ली के 31 वर्षीय युवक युवराज सिंह मनचंदा की गुरुग्राम में कथित हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार, युवराज एक पूर्व महिला सहकर्मी से मिलने के लिए गुरुग्राम गया था, जिसके बाद वह वापस घर नहीं लौटा। कुछ दिनों बाद उसका शव गुरुग्राम में एक नाले से बरामद किया गया। इस मामले में पुलिस ने युवराज की पूर्व सहकर्मी और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। दोनों को अदालत ने पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।

    युवराज की अगले महीने शादी होने वाली थी। परिवार के अनुसार, वह अपने घर का मुख्य कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता लकवाग्रस्त हैं, जबकि उसकी मां हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। परिवार के लिए युवराज की मौत के साथ-साथ उसके शव की पहचान और सूचना मिलने में हुई देरी भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

    शादी के लिए शेरवानी खरीदने निकला था युवराज

    जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर को युवराज अपनी बहनों के साथ दिल्ली के लाजपत नगर बाजार गया था। परिवार शादी की तैयारियों के लिए उसकी शेरवानी खरीदने निकला था। खरीदारी के बाद सभी लोग शाम करीब 4:15 बजे लाजपत नगर स्थित गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट पहुंचे।

    कुछ समय बाद युवराज ने अपनी बहनों से कहा कि उसे गुरुग्राम में अपनी पूर्व सहकर्मी से जरूरी मुलाकात करनी है। इसके बाद वह रेस्टोरेंट से अकेला निकल गया। उसकी बहनें कैब से अपने घर वापस लौट गईं।

    परिवार के मुताबिक, उसी शाम करीब 7 बजे युवराज की फोन पर उनसे बातचीत हुई थी। उसने परिवार को बताया था कि वह रात करीब 10 बजे तक घर लौट आएगा। लेकिन रात होने के बाद भी जब युवराज वापस नहीं आया तो परिवार ने उससे संपर्क करने की कोशिश की। इसके बाद उसका फोन उपलब्ध नहीं हो सका।

    8 सितंबर को मिला आखिरी व्हाट्सऐप संदेश

    परिवार के मुताबिक, युवराज की ओर से 8 सितंबर को शाम करीब 4:16 बजे आखिरी व्हाट्सऐप संदेश प्राप्त हुआ। इसके बाद उसका फोन फिर बंद हो गया। लगातार संपर्क नहीं होने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई।

    11 सितंबर को युवराज के परिवार ने दिल्ली के लाजपत नगर थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने युवराज की आखिरी गतिविधियों, फोन रिकॉर्ड और उसके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि युवराज ने गुरुग्राम जाने से पहले अपनी पूर्व सहकर्मी से संपर्क किया था। उस महिला का फोन भी बंद पाया गया। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया और युवराज तथा संदिग्ध महिला के कार्यस्थलों से जुड़े लोगों से पूछताछ की।

    पूर्व सहकर्मी जांच के दायरे में आई

    जांच आगे बढ़ने पर पूर्व सहकर्मी पुलिस की प्रमुख संदिग्धों में शामिल हो गई। पुलिस ने उसके बारे में जानकारी जुटाई और बाद में पता लगाया कि वह एक नए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही थी।

    पुलिस ने तकनीकी जानकारी के आधार पर उसकी तलाश की और उसे उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने उसके साथी को भी गिरफ्तार किया।

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर युवराज की हत्या करने और उसके शव को गुरुग्राम में उनके घर के पास एक नाले में फेंकने की बात स्वीकार की। हालांकि, मामले में हत्या के वास्तविक कारण और घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है।

    आर्थिक विवाद को माना जा रहा संभावित कारण

    पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे आर्थिक विवाद होने का संदेह जताया गया है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर घटना की पूरी वजह और हत्या के तरीके के बारे में जानकारी जुटा रही है।

    युवराज के परिवार ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तार महिला हत्या के वास्तविक कारण के बारे में पूरी जानकारी नहीं दे रही है। परिवार ने मामले की गहन जांच की मांग की है।

    पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवराज और आरोपियों के बीच आर्थिक विवाद किस प्रकार का था, विवाद कब शुरू हुआ और क्या हत्या पहले से योजनाबद्ध थी या किसी विवाद के बाद घटना हुई।

    शव मिलने के बाद परिवार को देर से मिली जानकारी

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू युवराज के शव की पहचान और परिवार को सूचना देने में हुई कथित देरी भी है।

    युवराज के परिवार का आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस को उसका शव 10 सितंबर को ही मिल गया था, लेकिन परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि अज्ञात शव की पहचान के लिए जरूरी जानकारी समय पर जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क यानी ZIPNET पर उपलब्ध नहीं कराई गई।

    परिवार के अनुसार, पुलिस ने 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। इसके दो दिन बाद, यानी 16 सितंबर को परिवार को युवराज की मौत की जानकारी मिली।

    इस घटनाक्रम ने परिवार के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार ने शव से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग की है ताकि आगे की जांच में उनका इस्तेमाल किया जा सके।

    परिवार ने दस्तावेज और डीएनए नमूने सुरक्षित रखने की मांग की

    युवराज के परिवार ने मांग की है कि मामले से जुड़े पोस्टमार्टम रिकॉर्ड, जांच संबंधी दस्तावेज, शव की तस्वीरें, डीएनए नमूने और युवराज की निजी वस्तुओं को सुरक्षित रखा जाए और परिवार को उपलब्ध कराया जाए।

    परिवार का कहना है कि शव की पहचान और अंतिम संस्कार की परिस्थितियों को लेकर उन्हें पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। साथ ही वे हत्या के कारण और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।

    कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, जब किसी शव की पहचान निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं हो पाती और आवश्यक अवधि तक उसकी पहचान नहीं हो पाती, तो संबंधित अधिकारी नियमों के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें समय रहते जानकारी नहीं दी गई और पहचान से जुड़ी प्रक्रिया में गंभीर देरी हुई।

    पुलिस ने तकनीकी जांच और सीसीटीवी से जुटाए सुराग

    युवराज की गुमशुदगी के बाद जांचकर्ताओं ने उसके मोबाइल फोन से जुड़े तकनीकी डेटा, आखिरी संपर्क और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया। पुलिस ने युवराज और संदिग्ध महिला के संपर्क तथा उनके कार्यस्थलों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई।

    जांच में युवराज और पूर्व सहकर्मी के बीच आखिरी बातचीत महत्वपूर्ण कड़ी बनी। महिला का मोबाइल फोन बंद मिलने और बाद में नए नंबर के इस्तेमाल की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों की तलाश शुरू की।

    इसके बाद उसे उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। उसके साथी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस अब दोनों आरोपियों से घटना के क्रम, हत्या के कथित कारण और शव को नाले तक ले जाने से संबंधित जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रही है।

    दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में

    गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। पुलिस इस अवधि के दौरान हत्या से जुड़े अन्य संभावित सुरागों की जांच करेगी।

    जांचकर्ताओं के सामने अब कई सवाल हैं—युवराज को गुरुग्राम बुलाने का वास्तविक कारण क्या था, उसके बाद उसके साथ क्या हुआ, हत्या में किस तरह की भूमिका किस आरोपी की थी और शव को नाले में फेंकने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

    इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस घटना में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। युवराज और आरोपियों के बीच कथित आर्थिक विवाद की प्रकृति भी जांच का अहम हिस्सा है।

    फिलहाल पुलिस ने हत्या के संभावित कारण के रूप में वित्तीय विवाद का संदेह जताया है, लेकिन मामले की अंतिम तस्वीर विस्तृत जांच, तकनीकी साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले में उपलब्ध डिजिटल तथा भौतिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

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