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    निठारी हत्याकांड के सभी मामलों में बरी सुरेंद्र कोली हरिद्वार में मृत मिला, चाय की दुकान पर मिला शव

    1 hour ago

    Yugcharan News / 18-09-2026

    हरिद्वार: नोएडा के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करने वाले सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को उत्तराखंड के हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, उसका शव एक चाय की दुकान के भीतर मिला, जिसे वह कुछ दिन पहले ही चलाने लगा था। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। शुरुआती पुलिस जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि मौत के सही कारण और उससे जुड़ी परिस्थितियों की जांच जारी है।

    सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगरूखाल गांव का रहने वाला था। पुलिस के अनुसार, वह पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। चाय की दुकान शुरू करने से पहले उसने सुरक्षा गार्ड के रूप में भी काम किया था। हाल में उसने हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान शुरू की थी, जहां शुक्रवार को उसका शव मिला। पुलिस ने उसके परिवार को घटना की जानकारी दे दी है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। इसलिए अधिकारियों की ओर से मौत के कारण के संबंध में अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। फोरेंसिक और चिकित्सकीय जांच के साथ पुलिस घटनाक्रम की अन्य परिस्थितियों को भी देख रही है। कुछ रिपोर्टों में पुलिस की प्रारंभिक जांच के आधार पर आत्महत्या की आशंका का उल्लेख किया गया है, लेकिन आधिकारिक जांच पूरी होने तक मौत की परिस्थितियों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

    निठारी कांड से कैसे जुड़ा था सुरेंद्र कोली

    सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में सामने आए निठारी हत्याकांड के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। नोएडा के निठारी इलाके में एक कारोबारी के घर के पास नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद पुलिस जांच शुरू हुई थी। इस मामले में कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने तथा उनकी मौत से जुड़े आरोप सामने आए थे।

    कोली उस समय कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर पर घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। जांच के दौरान कोली और पंढेर के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने कोली पर गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप लगाए थे। हालांकि, इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया कई वर्षों तक चली और अलग-अलग मामलों में अदालतों के फैसले भी अलग-अलग रहे।

    निठारी मामले की जांच में बरामदगी, स्वीकारोक्ति और अन्य साक्ष्यों को अभियोजन की ओर से महत्वपूर्ण आधार बनाया गया था। बाद की न्यायिक कार्यवाही में इन साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे और कई मामलों में कोली को दोषमुक्त किया गया।

    सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में अंतिम मामले में भी किया था बरी

    सुरेंद्र कोली के खिलाफ निठारी हत्याकांड से जुड़े कुल 13 मामलों में मुकदमे चले थे। इनमें से 12 मामलों में पहले ही उसे बरी किया जा चुका था। अंतिम लंबित मामले में उसकी सजा को लेकर कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची।

    11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उस मामले में उसकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया और उसे आरोपों से बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस बात पर गौर किया कि समान तथ्यों और साक्ष्यों से जुड़े 12 अन्य मामलों में कोली को पहले ही राहत मिल चुकी थी। ऐसे में एक मामले में उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखने का आधार अदालत को उचित नहीं लगा।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद निठारी हत्याकांड से जुड़े सभी आपराधिक मामलों में सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि समाप्त हो गई थी। अदालत ने उसकी तत्काल रिहाई का निर्देश भी दिया था, बशर्ते वह किसी अन्य मामले या कार्यवाही में आवश्यक न हो।

    अदालत की कार्यवाही में यह भी सामने आया कि जिस साक्ष्य के आधार पर अंतिम मामले में उसकी दोषसिद्धि कायम थी, उसी तरह के साक्ष्यों को अन्य संबंधित मामलों में पहले ही अविश्वसनीय माना जा चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी असंगति को देखते हुए अंतिम दोषसिद्धि को भी कायम रखने से इनकार कर दिया।

    दो दशक पुराना मामला फिर चर्चा में

    निठारी हत्याकांड दिसंबर 2006 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद आसपास के इलाके में जांच तेज की गई। मामले की जांच में कई स्तरों पर पुलिस और बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो की भूमिका रही। लंबे समय तक चले मुकदमों में अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और जांच की प्रक्रिया पर अदालतों में बहस हुई।

    केंद्रीय जांच ब्यूरो ने जनवरी 2007 में जांच अपने हाथ में ली थी। कोली के कथित इकबालिया बयान और विभिन्न बरामदगियों को मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में इन साक्ष्यों की स्वीकार्यता और विश्वसनीयता पर सवाल उठे। अंततः अलग-अलग मामलों में कोली को राहत मिलती गई और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामला भी समाप्त हो गया।

    यह मामला भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में जांच की गुणवत्ता, साक्ष्यों की विश्वसनीयता और लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि, कोली की कानूनी स्थिति के बारे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद वह निठारी से जुड़े सभी मामलों में दोषमुक्त हो चुका था। इसलिए उसकी वर्तमान मृत्यु की खबर में उसे निठारी मामले का “दोषी” कहना कानूनी स्थिति के अनुरूप नहीं होगा।

    हरिद्वार में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश

    सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मामले में बरी होने के बाद कोली जेल से बाहर आया था। इसके बाद वह हरिद्वार में रहने लगा। पुलिस के मुताबिक, उसने पहले सुरक्षा गार्ड के रूप में काम किया और बाद में अपनी चाय की दुकान शुरू की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह हरिद्वार में पिछले कुछ महीनों से रह रहा था और घटना से कुछ दिन पहले ही उसने वह दुकान शुरू की थी।

    शुक्रवार को उसी चाय की दुकान में उसका शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। इसके बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पहचान की पुष्टि के बाद उसके परिवार को सूचित किया गया।

    पुलिस फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मौके से किसी सुसाइड नोट के नहीं मिलने के कारण अधिकारियों ने मौत के कारण के बारे में अंतिम निष्कर्ष देने से परहेज किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के अन्य निष्कर्षों के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    जांच के बाद सामने आएगी मौत की पूरी वजह

    सुरेंद्र कोली की मौत ऐसे समय हुई है जब निठारी हत्याकांड से जुड़ी उसकी लगभग दो दशक लंबी कानूनी कहानी नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के साथ समाप्त हो चुकी थी। अदालत ने अंतिम लंबित मामले में भी उसे बरी कर दिया था और इससे पहले 12 संबंधित मामलों में भी उसे दोषमुक्त किया जा चुका था।

    अब हरिद्वार पुलिस के सामने उसकी मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका व्यक्त की गई है, लेकिन किसी भी अंतिम निष्कर्ष के लिए पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल पुलिस ने उसके परिवार को सूचना दे दी है और मामले की जांच जारी है।

     

    निठारी कांड से जुड़े मामलों में लंबे समय तक आरोपी के रूप में चर्चा में रहे सुरेंद्र कोली की मौत ने एक बार फिर उस पुराने मामले को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उसकी मृत्यु की खबर के साथ उसकी कानूनी स्थिति को भी स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है—सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 के फैसले के बाद निठारी से जुड़े उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में भी दोषसिद्धि समाप्त हो चुकी थी। अब हरिद्वार में हुई उसकी मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता पुलिस जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट से ही चल सकेगा।

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