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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में ‘मानसिक क्रूरता तलाक का आधार है’ विषय पर इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता आयोजित

    1 hour ago

    जयपुर: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर के विधि विभाग की ओर से मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को “Mental Cruelty as a Ground for Divorce” (मानसिक क्रूरता तलाक का आधार है) विषय पर इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, School of Law के विद्यार्थियों के लिए इस शैक्षणिक गतिविधि का आयोजन 15 सितंबर 2026 को किया गया। कार्यक्रम प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक आयोजित हुआ, जिसमें विधि विभाग के विद्यार्थियों ने उत्साह, अनुशासन एवं सक्रिय सहभागिता के साथ भाग लिया।

    कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विधिक ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग, न्यायालयीन प्रक्रिया, कानूनी शोध, तर्क-वितर्क तथा प्रभावी मौखिक वकालत का अनुभव प्रदान करना रहा। मूट कोर्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक न्यायालयीन वातावरण के अनुरूप अपने पक्ष को प्रस्तुत करने तथा विधिक मुद्दों का तार्किक एवं विश्लेषणात्मक ढंग से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त हुआ।

    कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अभिलाषा वैष्णव द्वारा अतिथियों, निर्णायक, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों के स्वागत के साथ हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए मूट कोर्ट प्रतियोगिता के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधि विद्यार्थियों के लिए ऐसी गतिविधियाँ उनके ज्ञान को व्यवहार से जोड़ने तथा न्यायालयीन कार्यप्रणाली को समझने का प्रभावी माध्यम हैं।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मूट कोर्ट जैसी गतिविधियाँ विधि विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि विधि का अध्ययन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को न्यायालयीन प्रक्रिया, कानूनी शोध, विधिक तर्क और प्रभावी वकालत का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने विधिक ज्ञान, तार्किक क्षमता तथा संप्रेषण कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

    विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने प्रतियोगिता के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अनुभवात्मक एवं व्यावहारिक शिक्षा विधि शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को केवल कानून की धाराओं का ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें कानूनी शोध, तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता, आत्मविश्वास और प्रभावी मौखिक प्रस्तुतीकरण जैसे आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य में एक जिम्मेदार, कुशल एवं संवेदनशील विधि पेशेवर बनने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम को सफल बनाने वाले संकाय सदस्यों को शुभकामनाएँ दीं।

    मूट कोर्ट प्रतियोगिता का निर्णयन डॉ. कमल किशोर जांगिड़, परीक्षा नियंत्रक द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रदर्शन का विभिन्न महत्वपूर्ण मापदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया। इनमें कानूनी शोध, विधिक प्रावधानों की समझ, न्यायिक दृष्टांतों का प्रयोग, विधिक व्याख्या, तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण, प्रत्युत्तर देने की क्षमता, संप्रेषण कौशल तथा न्यायालयीन शिष्टाचार प्रमुख रहे।

    प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अपने-अपने पक्ष में प्रभावशाली एवं तर्कपूर्ण विधिक दलीलें प्रस्तुत कीं। प्रतिभागियों ने मानसिक क्रूरता की अवधारणा, वैवाहिक विवादों में इसके प्रभाव तथा तलाक के आधार के रूप में इसकी विधिक प्रासंगिकता का विस्तार से विश्लेषण किया। विद्यार्थियों ने अपने तर्कों को विधिक प्रावधानों एवं प्रासंगिक न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर प्रस्तुत करते हुए अपनी शोध एवं वकालत क्षमता का प्रदर्शन किया।

    मूट कोर्ट में विद्यार्थियों ने न्यायालय की कार्यवाही के अनुरूप अपने पक्षकारों की ओर से मौखिक बहस, तथ्य प्रस्तुतीकरण, विधिक तर्क, न्यायिक प्रश्नों के उत्तर तथा प्रत्युत्तर प्रस्तुत किए। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में न्यायालयीन वातावरण के प्रति आत्मविश्वास विकसित किया तथा उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किसी विधिक विवाद का अध्ययन केवल कानून की धाराओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि तथ्यों, न्यायिक दृष्टांतों और तार्किक व्याख्या का भी उसमें महत्वपूर्ण योगदान होता है।

    प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को कानूनी शोध, केस लॉ का अध्ययन, विधिक लेखन एवं ड्राफ्टिंग, मौखिक वकालत, तार्किक एवं विश्लेषणात्मक चिंतन, प्रभावी संप्रेषण, समय प्रबंधन तथा न्यायालयीन प्रस्तुतीकरण जैसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक कौशल विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस प्रकार की गतिविधियाँ विधि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    कार्यक्रम के सफल आयोजन में विधि विभाग के संकाय सदस्यों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। डॉ. अभिलाषा वैष्णव ने विद्यार्थियों को प्रतियोगिता के उद्देश्य एवं प्रक्रिया से अवगत कराते हुए उनका मार्गदर्शन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

    डॉ. ज्योति चौहान ने विद्यार्थियों को विधिक विषय के गहन अध्ययन, कानूनी शोध एवं तर्कों को व्यवस्थित एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने प्रतिभागियों को विषय की गंभीरता को समझने तथा तार्किक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

     लतीफ मेहर ने विद्यार्थियों को मूट कोर्ट की प्रक्रिया, न्यायालयीन व्यवहार तथा प्रभावी मौखिक प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलुओं के संबंध में मार्गदर्शन दिया। उनके सहयोग से विद्यार्थियों को न्यायालयीन कार्यप्रणाली को समझने में सहायता मिली।

     राजनारायण शर्मा ने विद्यार्थियों को संबंधित विधिक प्रावधानों एवं न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर अपने तर्कों को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिभागियों के विधिक शोध एवं विश्लेषणात्मक क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

     वीरेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को विधिक शोध, मौखिक वकालत एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया तथा प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

    विधि विभाग द्वारा आयोजित इस इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक विधिक ज्ञान को व्यावहारिक न्यायालयीन परिवेश में लागू करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने कानून की व्याख्या करने, तथ्यों का विश्लेषण करने, न्यायिक दृष्टांतों का उपयोग करने तथा न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से अपने तर्क प्रस्तुत करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

    इस अवसर पर विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया। विद्यार्थियों ने न केवल प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि एक-दूसरे के तर्कों एवं प्रस्तुतीकरण से सीखने का अवसर भी प्राप्त किया। इस प्रकार प्रतियोगिता ने सह-अधिगम, प्रतिस्पर्धात्मक भावना और व्यावसायिक कौशल विकास को प्रोत्साहित किया।

    मूट कोर्ट प्रतियोगिता ने विश्वविद्यालय के व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक विधि शिक्षा के प्रति समर्पण को भी प्रदर्शित किया। विश्वविद्यालय में इस प्रकार की अकादमिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके विषय के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराने तथा भविष्य की व्यावसायिक चुनौतियों के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

    कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में कानून के प्रति रुचि, विधिक शोध के प्रति गंभीरता तथा न्यायालयीन वकालत के प्रति आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया। साथ ही, विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि एक सफल विधि पेशेवर बनने के लिए विषयगत ज्ञान के साथ-साथ तार्किक सोच, प्रभावी संप्रेषण, आत्मविश्वास, शोध क्षमता और नैतिक न्यायालयीन आचरण भी आवश्यक है।

    इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी विद्यार्थियों, निर्णायक डॉ. कमल किशोर जांगिड़, विश्वविद्यालय प्रशासन तथा विधि विभाग के सभी संकाय सदस्यों के प्रयासों एवं सहयोग की सराहना की गई।

    यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं व्यावहारिक अनुभव सिद्ध हुआ। प्रतियोगिता ने न केवल विद्यार्थियों की विधिक समझ को मजबूत किया, बल्कि उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया एवं वकालत की वास्तविक चुनौतियों से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर का विधि विभाग भविष्य में भी ऐसी व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण एवं व्यावसायिक विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।

     

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