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    ब्रिक्स नेताओं के नाम पर वायरल ‘ग्रुप सेल्फी’ निकली AI से बनी, तस्वीर में दिखाए गए कई नेता सम्मेलन में थे ही नहीं

    3 hours ago

     

    Yugcharan News / 16-09-2026

    नई दिल्ली में आयोजित 18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुई विश्व नेताओं की एक कथित ‘ग्रुप सेल्फी’ अब फर्जी साबित हुई है। तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा, ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन जैसे नेता एक साथ दिखाई दे रहे थे। सोशल मीडिया पर इसे ब्रिक्स सम्मेलन की वास्तविक तस्वीर बताकर तेजी से साझा किया गया। हालांकि, तथ्य-जांच में सामने आया कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से तैयार की गई थी।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया जब 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में 18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक आयोजित की गई। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, भू-राजनीतिक तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुपक्षीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। 12 सितंबर को ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा भी जारी की, जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताते हुए अधिकतम संयम और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

    सोशल मीडिया पर कैसे वायरल हुई तस्वीर?

    वायरल तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर ने इस दावे के साथ साझा किया कि यह केवल एक सामान्य तस्वीर नहीं बल्कि एक बड़े संदेश का संकेत है। इसके बाद अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इसी तस्वीर को ब्रिक्स देशों के नेताओं की वास्तविक ग्रुप सेल्फी बताकर शेयर करना शुरू कर दिया।

    तस्वीर देखने में बेहद वास्तविक प्रतीत हो रही थी। इसमें अलग-अलग देशों के शीर्ष नेताओं को एक ही फ्रेम में मुस्कुराते हुए और कैमरे की ओर देखते हुए दिखाया गया था। यही वजह रही कि तस्वीर ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    लेकिन किसी भी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटना से जुड़ी तस्वीर को केवल उसकी दृश्य विश्वसनीयता के आधार पर वास्तविक मान लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है। AI तकनीक में तेजी से हुए विकास के कारण अब ऐसी तस्वीरें तैयार करना संभव है जिनमें वास्तविक व्यक्तियों के चेहरे, कपड़े, पृष्ठभूमि और प्रकाश व्यवस्था काफी स्वाभाविक दिखाई दे सकती है।

    तस्वीर में इब्राहिम रायसी की मौजूदगी ने उठाए सवाल

    तथ्य-जांच के दौरान तस्वीर की वास्तविकता पर सबसे बड़ा सवाल ईरान के प्रतिनिधित्व को लेकर उठा। वायरल तस्वीर में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी दिखाई दे रहे थे।

    इब्राहिम रायसी का मई 2024 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो चुका है। वहीं, 2026 के नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने किया था। सम्मेलन में पेजेशकियन की मौजूदगी की पुष्टि विभिन्न रिपोर्टों से होती है।

    इसलिए किसी मौजूदा 2026 ब्रिक्स सम्मेलन की तस्वीर में इब्राहिम रायसी का दिखाई देना अपने आप में इस दावे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

    तथ्य-जांच रिपोर्ट के अनुसार, यही विसंगति जांच की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत बनी। इसके बाद वायरल तस्वीर को सम्मेलन से संबंधित वास्तविक तस्वीरों और उपलब्ध रिपोर्टों के साथ मिलाकर देखा गया।

    ब्राजील के राष्ट्रपति भी तस्वीर में गलत तरीके से दिखाए गए

    तस्वीर की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। वायरल फोटो में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को अन्य नेताओं के साथ खड़ा दिखाया गया था।

    लेकिन 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन में ब्राजील का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति लूला ने नहीं किया था। ब्राजील की ओर से विदेश मंत्री मौरो विएरा प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद थे। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में भी ब्राजील के प्रतिनिधित्व को लेकर यही जानकारी सामने आई।

    इस तरह वायरल तस्वीर में कम से कम दो ऐसे प्रमुख चेहरे दिखाई दे रहे थे, जो उस सम्मेलन में संबंधित भूमिका में मौजूद नहीं थे। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि तस्वीर वास्तविक कार्यक्रम की तस्वीर नहीं हो सकती।

    AI डिटेक्शन टूल से भी सामने आया फर्जीवाड़ा

    तथ्य-जांच के दौरान वायरल तस्वीर को AI कंटेंट डिटेक्शन टूल्स की मदद से भी जांचा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, HIVE Moderation नामक AI कंटेंट डिटेक्शन टूल ने तस्वीर के AI द्वारा तैयार किए जाने की संभावना 99.9 प्रतिशत बताई।

    इसके अलावा तस्वीर को OpenAI के सत्यापन टूल के माध्यम से भी जांचा गया। इस जांच में भी संकेत मिला कि तस्वीर OpenAI के टूल्स का इस्तेमाल करके तैयार की गई हो सकती है। हालांकि, किसी एक AI डिटेक्शन टूल के परिणाम को अकेले अंतिम प्रमाण मानना उचित नहीं होता। ऐसे मामलों में तस्वीर के संदर्भ, उसमें मौजूद व्यक्तियों, कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी और अन्य स्वतंत्र स्रोतों को साथ में देखना जरूरी होता है।

    इस मामले में अलग-अलग संकेत एक ही निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं—वायरल तस्वीर वास्तविक ब्रिक्स सम्मेलन की ग्रुप सेल्फी नहीं है।

    AI तस्वीरों से बढ़ रहा गलत सूचना का खतरा

    यह घटना केवल एक वायरल फोटो की तथ्य-जांच तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक घटनाओं से जुड़ी AI-जनरेटेड तस्वीरों का प्रसार सूचना की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

    जब किसी तस्वीर में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या अन्य बड़े नेता दिखाई देते हैं, तो सोशल मीडिया उपयोगकर्ता अक्सर उसे वास्तविक घटना का प्रत्यक्ष प्रमाण मान लेते हैं। लेकिन AI की मदद से अब ऐसी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं जिनमें ऐसे लोग, स्थान और घटनाएं एक साथ दिखाई जाएं जो वास्तव में कभी हुई ही नहीं।

    खासकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान ऐसी तस्वीरों का प्रभाव अधिक हो सकता है, क्योंकि आम लोगों के पास हर नेता की मौजूदगी और कार्यक्रम की आधिकारिक तस्वीरों की तत्काल जानकारी नहीं होती।

    2026 के ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भी कई गलत और AI-जनरेटेड दृश्य सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की रिपोर्टें सामने आई हैं। Newschecker ने भी ब्रिक्स सम्मेलन से जुड़ी एक अलग AI-जनरेटेड तस्वीर के प्रसार की तथ्य-जांच प्रकाशित की है।

    तस्वीर साझा करने से पहले सत्यापन जरूरी

    विशेषज्ञों और फैक्ट-चेक संगठनों की ओर से लगातार यह सलाह दी जाती है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों को तुरंत सच मानकर आगे साझा नहीं करना चाहिए। खासकर जब तस्वीर किसी बड़े राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी हो, तब उसके स्रोत और संदर्भ की जांच करना जरूरी है।

    किसी वायरल तस्वीर की पड़ताल के लिए सबसे पहले यह देखा जा सकता है कि संबंधित कार्यक्रम की आधिकारिक तस्वीरों में वही दृश्य मौजूद है या नहीं। इसके अलावा विश्वसनीय समाचार संस्थानों की रिपोर्ट, नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और कार्यक्रम से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से भी जानकारी मिलाई जा सकती है।

    AI डिटेक्टर उपयोगी संकेत दे सकते हैं, लेकिन उन्हें अंतिम और अकेला प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। तस्वीर में दिखाई देने वाले लोगों, तारीख, स्थान और घटना की परिस्थितियों को स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित करना अधिक विश्वसनीय तरीका है।

    निष्कर्ष

    नई दिल्ली में आयोजित 18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक के दौरान वायरल हुई नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं की कथित ग्रुप सेल्फी वास्तविक तस्वीर नहीं है। तथ्य-जांच में पाया गया कि यह AI की मदद से बनाई गई तस्वीर है। इसमें ईरान के दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा जैसे ऐसे नेताओं को भी दिखाया गया, जिनका सम्मेलन में संबंधित रूप से प्रतिनिधित्व नहीं था। ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और ब्राजील की ओर से विदेश मंत्री मौरो विएरा प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

    इसलिए सोशल मीडिया पर इस तस्वीर के साथ किया जा रहा ब्रिक्स नेताओं की वास्तविक ‘ग्रुप सेल्फी’ का दावा गलत है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि AI तकनीक के दौर में किसी तस्वीर का वास्तविक जैसा दिखाई देना उसके वास्तविक होने की गारंटी नहीं है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ी सामग्री को साझा करने से पहले तथ्य-जांच और विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

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