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    EPFO वेतन सीमा बढ़ाकर ₹25,000 हुई, 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को मिलेगा अनिवार्य कवरेज

    4 hours ago

    Yugcharan News / 16-09-2026

    केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य निधि से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को EPFO की अनिवार्य सदस्यता के लिए मौजूदा वेतन सीमा को ₹15,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

    सरकार के इस फैसले की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दी। सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वेतन सीमा में इस बढ़ोतरी से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के अनिवार्य कवरेज के दायरे में आ जाएंगे। फैसले को संगठित क्षेत्र के उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनका मासिक वेतन मौजूदा सीमा से अधिक होने के कारण अब तक अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में नहीं आता था।

    EPFO देश में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख संस्थाओं में से एक है। इसके माध्यम से कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि यानी Provident Fund की व्यवस्था की जाती है। नौकरी के दौरान कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से निर्धारित योगदान कर्मचारी के भविष्य के लिए जमा होता है। सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने में भविष्य निधि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 हुई वेतन सीमा

    अब तक EPFO के अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह थी। नई व्यवस्था में इसे बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग अब अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आएगा।

    सरकार के अनुसार, इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा। सरकार का अनुमान है कि इससे औपचारिक रोजगार व्यवस्था में शामिल कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा का दायरा भी विस्तृत होगा।

    वेतन सीमा में बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब देश में संगठित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अधिक कर्मचारियों को EPFO के दायरे में लाने से भविष्य निधि के साथ-साथ कर्मचारी पेंशन से जुड़ी व्यवस्था में भी व्यापक भागीदारी हो सकती है।

    EPS में भी बढ़ सकता है योगदान

    नई वेतन सीमा का असर केवल कर्मचारी भविष्य निधि तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई वेतन सीमा के अनुसार कर्मचारी पेंशन योजना यानी Employees’ Pension Scheme (EPS) में कर्मचारियों और नियोक्ताओं का योगदान भी बढ़ेगा।

    EPFO व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता निर्धारित नियमों के अनुसार योगदान करते हैं। इस योगदान का एक हिस्सा कर्मचारी भविष्य निधि में जाता है, जबकि निर्धारित प्रावधानों के तहत एक हिस्सा पेंशन से संबंधित व्यवस्था में भी जाता है। इसलिए वेतन सीमा में बढ़ोतरी का प्रभाव सामाजिक सुरक्षा के दोनों महत्वपूर्ण पहलुओं पर पड़ सकता है।

    नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पात्र कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि खाते में जमा होने वाली राशि और पेंशन से संबंधित योगदान की गणना नई सीमा के आधार पर की जाएगी। हालांकि वास्तविक योगदान कर्मचारी के वेतन ढांचे और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

    लाखों नए कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

    सरकार द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को EPFO के अनिवार्य कवरेज में शामिल किया जा सकता है। यह संख्या बताती है कि वेतन सीमा में बदलाव का प्रभाव रोजगार के बड़े हिस्से पर पड़ने की संभावना है।

    अब तक ₹15,000 से अधिक मासिक वेतन पाने वाले कई कर्मचारी EPFO के अनिवार्य कवरेज के दायरे से बाहर रह सकते थे, हालांकि कुछ परिस्थितियों में कर्मचारी या नियोक्ता की ओर से अलग प्रावधान लागू हो सकते थे। नई सीमा बढ़ने के बाद ₹25,000 तक मासिक वेतन वाले अधिक कर्मचारियों के लिए EPFO कवरेज अनिवार्य हो सकता है।

    इस बदलाव का उद्देश्य औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। EPFO खाते के माध्यम से कर्मचारियों के लिए जमा होने वाली बचत नौकरी की अवधि के दौरान एक दीर्घकालिक वित्तीय आधार तैयार करती है। नौकरी बदलने या सेवानिवृत्ति के समय यह व्यवस्था कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    भविष्य निधि व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य कर्मचारियों को भविष्य के लिए बचत की सुविधा उपलब्ध कराना है। नियमित रूप से जमा होने वाली राशि लंबे समय में एक बड़ी निधि का रूप ले सकती है। इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।

    इसके अलावा कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से पात्र कर्मचारियों को पेंशन संबंधी लाभ भी मिलते हैं। ऐसे में EPFO की कवरेज सीमा बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।

    हालांकि किसी कर्मचारी को मिलने वाला अंतिम लाभ उसके वेतन, सेवा अवधि, योगदान और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल वेतन सीमा बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि सभी कर्मचारियों को समान राशि का भविष्य निधि या पेंशन लाभ मिलेगा।

    संगठित रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम

    केंद्र सरकार लंबे समय से औपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने पर जोर देती रही है। EPFO देश में औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है। वेतन सीमा बढ़ाने से अधिक कर्मचारियों को इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार कर्मचारियों को भविष्य के लिए बचत करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही नियोक्ताओं के लिए भी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े योगदान की जिम्मेदारी बढ़ सकती है।

    नई सीमा से उन कर्मचारियों को विशेष रूप से लाभ मिलने की संभावना है जो ₹15,000 से अधिक लेकिन ₹25,000 तक मासिक वेतन प्राप्त करते हैं। पहले जहां वेतन सीमा के कारण वे अनिवार्य कवरेज के दायरे से बाहर हो सकते थे, अब नई व्यवस्था के बाद उनका कवरेज बढ़ सकता है।

    नियोक्ताओं पर भी पड़ेगा प्रभाव

    EPFO की नई वेतन सीमा का असर कर्मचारियों के साथ-साथ नियोक्ताओं पर भी पड़ेगा। चूंकि EPFO में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है, इसलिए कवरेज बढ़ने के साथ नियोक्ताओं की ओर से सामाजिक सुरक्षा के लिए किया जाने वाला योगदान भी बढ़ सकता है।

    सरकार ने यह भी बताया है कि EPS में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान नई वेतन सीमा के अनुरूप बढ़ेगा। इससे कंपनियों के पेरोल और सामाजिक सुरक्षा संबंधी दायित्वों में बदलाव आएगा।

    हालांकि नियोक्ताओं पर वास्तविक वित्तीय प्रभाव अलग-अलग संस्थानों और कर्मचारियों के वेतन ढांचे के आधार पर अलग हो सकता है। विशेष रूप से उन कंपनियों में इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी नई वेतन सीमा के दायरे में आते हैं।

    EPFO कवरेज विस्तार का व्यापक असर

    EPFO कवरेज में विस्तार का असर केवल भविष्य निधि खातों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े औपचारिक रोजगार का आधार भी विस्तृत हो सकता है। नियमित योगदान के कारण कर्मचारियों में दीर्घकालिक बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल सकता है।

    इसके अलावा EPFO के माध्यम से कर्मचारियों के योगदान का रिकॉर्ड तैयार होता है, जिससे उनके रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित वित्तीय व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित तरीके से बनाए रखने में मदद मिलती है।

    सरकार के अनुसार 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों का अनिवार्य कवरेज में आना इस निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव होगा। इससे देश में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सरकारी व्यवस्था की पहुंच एक बड़े कर्मचारी वर्ग तक बढ़ सकती है।

    आगे क्या होगा

    कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस बदलाव को लागू करने से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। नई वेतन सीमा के प्रभावी होने के बाद पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को संशोधित सीमा के अनुसार EPFO और EPS से जुड़े योगदान तथा अनुपालन की प्रक्रिया अपनानी होगी।

    सरकार के इस फैसले से आने वाले समय में EPFO के सदस्यों की संख्या बढ़ने की संभावना है। नई सीमा के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए यह बदलाव भविष्य निधि और पेंशन व्यवस्था से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा को मजबूत कर सकता है।

     

    कुल मिलाकर, ₹15,000 से ₹25,000 तक EPFO की अनिवार्य वेतन सीमा बढ़ाने का निर्णय लाखों कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रशासनिक और श्रम क्षेत्र का बदलाव है। सरकार के अनुमान के मुताबिक 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को इसका दायरा मिलेगा। अब इस फैसले के वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि नई व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है और नए पात्र कर्मचारियों तथा उनके नियोक्ताओं के योगदान की प्रक्रिया कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ती है।

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