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    ऋषि परंपरा भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल आधारशिला प्रो. मदन मोहन झा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत

    1 hour ago

    विश्वविद्यालय में सामूहिक ऋषि-पूजन एवं उपाकर्म संस्कार सम्पन्न, आठ विद्वानों का हुआ ऋषि सम्मान

    जयपुर। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के तत्वावधान में मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को राजस्थान मन्त्र-प्रतिष्ठान में सामूहिक ऋषि-पूजन एवं उपाकर्म संस्कार का आयोजन वैदिक विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा, अनुसंधान केन्द्र के निदेशक प्रो. राजधर मिश्र तथा राजस्थान मन्त्र-प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह पालावत उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम के संयोजक प्रो. मोहन लाल शर्मा, पीठाध्यक्ष, पद्मभूषण पट्टाभिरामशास्त्री मीमांसा धर्मपीठ, ज.रा.रा.सं वि. ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9 बजे हुआ। इस अवसर पर जलाशय-कर्म, पंचगव्य-प्राशन, पवित्रीकरण, भस्म-स्नान, गणपति-स्मरण, हेमाद्री-संकल्प, वरुण-पूजन, दशविधि-स्नान, तथा देवर्षि-मनुष्य -पितृ तर्पण सहित विभिन्न वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न किए गए।

    दोपहर में गणपत्यादि-पूजन, गायत्री पूजा , यज्ञोपवीत प्राण-प्रतिष्ठा एवं नूतन यज्ञोपवीत-धारण, आरती एवं पुष्पांजलि आदि कार्यक्रम सम्पन्न हुए। इसके पश्चात अपराह्न 3 बजे सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

    ऋषि परंपरा के संरक्षण का संकल्प है उपाकर्म कुलगुरु

    कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने कहा कि ऋषि परंपरा भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल आधारशिला है। उपाकर्म संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे ऋषियों, आचार्यों और ज्ञान परंपरा के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि वेद, शास्त्र, संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को अक्षुण्ण रखते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। मंत्र प्रतिष्ठान सभी के लिये हैं ऐसे आयोजन समाज और युवा पीढ़ी को हमारी गौरवशाली परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां जल्दी मंत्रो पर शोध कार्य शुरू होंगा

    कार्यक्रम संयोजक प्रो. मोहन लाल शर्मा ने कहा कि उपाकर्म संस्कार वैदिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह ऋषि-स्मरण, वेदाध्ययन तथा गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति समर्पण और संकल्प को दृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि गुरु-परंपरा में ऋषियों का स्थान सर्वोच्च है तथा उनके द्वारा स्थापित ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

    आठ विद्वानों को ‘ऋषि सम्मान’ से किया सम्मानित

     

    कार्यक्रम के अंत में संस्कृत, शास्त्र एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आठ विद्वानों को ‘ऋषि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्वानों में प्रो. श्रीकृष्ण शर्मा, प्रो. विनोद कुमार शर्मा, डॉ. नारायण होसमने, डॉ. मधुबाला शर्मा, मुकुंद शरण उपाध्याय,डॉ. विनोद कुमार शर्मा, मालपुरा डॉ. नरेन्द्र कुमार दोतोलिया, डॉ. जितेन्द्र कुमार जोशी शामिल रहे। सभी सम्मानित विद्वानों को प्रशस्ति-पत्र, दुपट्टा एवं माला सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा, डॉ. संदीप जोशी, डॉ. स्नेहलता शर्मा, डॉ. रामेश्वर नाथ द्विवेदी, राधेश्याम शर्मा, अश्विनी कुमार, रामप्रसाद शर्मा कैलाश शर्मा मुकुंदपुरा, रमेश पटेल कन्हैयालाल शर्मा सहित अनेक विद्वान, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

     

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