Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    2011 से पूर्व नियुक्त अध्यापकों के लिए TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए

    4 hours ago

    राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की है।

    गौरतलब है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देश में 2011 से पूर्व नियुक्त होकर वर्तमान में कार्यरत अध्यापकों के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का आदेश सितंबर 2025 में दिया गया है। शिक्षा का अधिकार एक्ट 2009 बनने और इसके तहत टैट अनिवार्य होने के बाद राज्य सरकारों द्वारा नियम बनाए गए।

    राजस्थान सरकार द्वारा 2010 में शिक्षा का अधिकार कानून बनाया गया।

    राजस्थान राज्य में अध्यापक पात्रता परीक्षा आयोजन 2011 एवं 2013 में RTET तथा 2015, 2017, 2021, 2022 में REET नाम से हुआ। राजस्थान राज्य में 2012 से अध्यापक पदों पर नव नियुक्ति के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया।

    राजस्थान राज्य में 2012 से पूर्व अलग-अलग वर्षों में नियुक्त लगभग 80000 अध्यापक वर्तमान में भी कार्यरत हैं तथा वे अध्यापक पात्रता परीक्षा (RTET/REET) उत्तीर्ण नहीं है। क्योंकि राजस्थान में अध्यापक पात्रता परीक्षा का आयोजन ही 2011 से प्रारंभ किया गया एवं यह बताया जाता रहा कि अध्यापक पदों पर नव नियुक्ति के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा, पूर्व से कार्यरत अध्यापकों के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्णिता अनिवार्य रहेगी ऐसा कोई समाचार, कोई आदेश, कोई प्रावधान नहीं रखा गया।

    अध्यापक पात्रता परीक्षा में प्रविष्ट होने के लिए 12वीं तथा स्नातक स्तर पर 50% अंक होना अनिवार्य रखा गया था। जबकि राजस्थान राज्य में ऐसे अध्यापक भी कार्यरत हैं जिनके 12वीं अथवा स्नातक में 50% अंक नहीं है। ये हजारों हजार उस समय पंचायत समिति, जिला परिषद, प्रारंभिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा के नियमों से चयनित होकर अध्यापक पदों पर नियुक्त हुए थे। ये अध्यापक पात्रता परीक्षा में प्रविष्ट होने के पात्र नहीं हैं।

    राजस्थान में अनेक कैटेगरी को अध्यापक पात्रता परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णता 60% प्रतिशत में छूट दी गई है। लेकिन इस छूट में सेवारत अध्यापकों का कोई प्रावधान नहीं है, इससे परिलक्षित होता है कि अध्यापक पात्रता अनिवार्यता शिक्षा का अधिकार कानून बनने से पूर्व नियुक्त अध्यापकों पर लागू नहीं है।

    कमोबेश राजस्थान जैसी ही स्थिति देश के सभी राज्यों की है। देश भर के 20 लाख शिक्षक प्रभावित हैं।

    राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर पर पूरे भारतवर्ष से लाखों अध्यापक 4 अप्रैल 2026 को शिक्षा का अधिकार एक्ट लागू होने से पूर्व के अध्यापकों पर अध्यापक पात्रता अनिवार्य करने के विरोध में रामलीला मैदान में एकत्रित होकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी सदस्य तथा हजारों की संख्या में शिक्षकों ने 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में

    माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देश में कार्यरत सभी अध्यापकों के लिए अध्यापक पात्रता उत्तीर्ण होना आवश्यक किन परिस्थितियों में किया गया यह परीक्षण का विषय है।

    संगठन के प्रदेश मुख्य महामंत्री महेंद्र पाण्डे ने बताया कि इस ज्ञापन के अनुसार परीक्षण करवाकर अध्यादेश/विधेयक/कानून से 2011 से पूर्व नियुक्त अध्यापकों को TET से मुक्त करवाया जाना चाहिए।

    आगामी रणनीति हेतु टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय बैठक 5 अक्टूबर को लखनऊ में बुलाई गई है जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर संपर्क साहित्य संस्थान का भव्य आयोजन-

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment