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    ‘डिजिटल युग में भारत’ राष्ट्रीय सम्मेलन में भाषा, संस्कृति, विरासत एवं कल्याण पर सार्थक विमर्श

    34 minutes ago

    जयपुर। भारत की समृद्ध भाषायी एवं सांस्कृतिक परंपरा को डिजिटल युग की नवीन संभावनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से ‘डिजिटल युग में भारत : भाषा, संस्कृति, विरासत एवं कल्याण’ विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन जयपुर में किया जा रहा है। सम्मेलन का आयोजन 17 से 19 सितंबर 2026 तक महात्मा गाँधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज में किया जा रहा है। इसमें संस्थान के विशेष अधिकारी डॉ हरबीर सिंह डागुर ने बताया कि इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षाविद्, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।

    सम्मेलन का शुभारंभ महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज (MGIGSS), जेएलएन मार्ग, जयपुर के सभागार में गरिमामय वातावरण में हुआ। उद्घाटन समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगान एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर विकसित भारत@2047 के निर्माण में अपनी-अपनी भूमिका निभाने का संकल्प भी लिया गया।

    अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के पश्चात प्राचार्य प्रो. हेमंत पारीक ने सम्मेलन की रूपरेखा, उद्देश्य एवं विषय-वस्तु पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय भाषाओं, संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

    उद्घाटन अवसर पर समारोह के अध्यक्ष श्री कुलदीप रांका, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार ने डिजिटल युग में तकनीक एवं डिजिटल उपकरणों की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। इनके अतिरिक्त मुख्य अतिथि पंडित डॉ. केदार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु, तथा प्रो. मदन सिंह राठौड़, कुलगुरु, महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। विशिष्ट अतिथि श्री जयंत पटवर्धन ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

    सम्मेलन के अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अशोक कुमार, अध्यक्ष, आईएसएलएस ने ज्ञान, संस्कृति एवं तकनीकी परिवर्तन के बीच सामंजस्य की आवश्यकता को रेखांकित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री विनय दीक्षित ने लोक, संस्कृति एवं आधुनिकता के अंतर्संबंधों पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए दिसंबर माह में आयोज्य लोक मंथन कार्यक्रम के बारे में प्रतिभागियों को अवगत करवाया।

    इस अवसर पर सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका (एब्स्ट्रैक्ट बुक) का लोकार्पण भी किया गया। विभिन्न तकनीकी सत्रों में भाषा, साहित्य, संस्कृति, डिजिटल माध्यमों, भारतीय विरासत तथा समकालीन समाज पर तकनीकी परिवर्तन के प्रभाव सहित विविध विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं शोधपरक प्रस्तुतियाँ हुईं।

    सम्मेलन के प्रथम तकनीकी सत्र का विषय ‘डिजिटल युग में भाषा एवं साहित्य’ रहा। इस सत्र में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विषय विशेषज्ञों ने भाषा एवं साहित्य के डिजिटल रूपांतरण से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए। प्रो. अजय शुक्ला, डीडीयू गोरखपुर; प्रो. दीपक श्रीवास्तव, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, जयसिंहपुरा खोर; प्रो. राजेन्द्र प्रसाद, पूर्व कुलपति, इलाहाबाद स्टेट विश्वविद्यालय, प्रयागराज; प्रो. संजय अरोड़ा, अंग्रेजी विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान; तथा डॉ. शीतल प्रसाद, हिंदी विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से विषय के विभिन्न पक्षों को सामने रखा।

    तकनीकी सत्रों में शोधपत्र प्रस्तुतियों के साथ-साथ विद्वानों के बीच अकादमिक संवाद को भी विशेष महत्व दिया गया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर शोधार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा अपने शोधकार्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति एवं विरासत को डिजिटल परिवेश में संरक्षित, संवर्धित एवं व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श हो रहा है।

    आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारतीय भाषाओं, साहित्य, सांस्कृतिक विरासत एवं जीवन-मूल्यों को डिजिटल युग की नवीन तकनीकों से जोड़ते हुए ज्ञान के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना है। सम्मेलन में हो रहा बहुआयामी अकादमिक संवाद भारतीय ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा को आधुनिक तकनीकी परिवेश में नई दिशा देने की संभावनाओं को सामने ला रहा है।

    यह राष्ट्रीय सम्मेलन एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय कन्या महाविद्यालय, गंगापोल, जयपुर तथा सहयोगी संस्था आईएसएलएस (इंटरनेशनल साइंस एंड लाइफ साइंसेज) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों सहित कुल 352 प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता इसे व्यापक अकादमिक स्वरूप प्रदान कर रही है।

    सम्मेलन के आगामी सत्रों में भी भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति, विरासत, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं समकालीन सामाजिक परिवर्तनों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, शोधपत्र प्रस्तुतियाँ एवं अकादमिक परिचर्चाएँ आयोजित की जाएंगी।

     

     

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