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    जेडीएस 8.0: कर्नल मानवेंद्र सिंह ने भारत को बताया 'नेचुरल एयरक्राफ्ट कैरियर', भविष्य के डिप्लोमैट्स ने गढ़े पॉलिसी फ्रेमवर्क्स

    3 months ago

    -बदलते जियो-पॉलिटिकल सिनेरियो में भारत की 'मल्टीपोलर' धाक, 'डिजिटल पावर' को बताया नया वैश्विक हथियार

     

    -एआई और 5G के आधुनिक युग में "ह्यूमन स्किल्स और ह्यूमन कैपिटल" दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रैटेजिक एसेट- जेडीएस 8.0

     

     

     

    जयपुर,

     

    डिप्लोमैटिक प्रिसिज़न्स और इंटेलेक्चुअल डिस्कोर्स के साथ आगे बढ़ते हुए, जेईसीआरसी डिप्लोमैसी समिट (जेडीएस) 8.0 के दूसरे दिन देशभर से आए 600 से अधिक डेलीगेट्स ने सभी 10 कमेटीज़ में राष्ट्रीय और वैश्विक मुद्दों पर निर्णायक चर्चाएँ कीं। बदलते जियो-पॉलिटिकल और इकोनॉमिक लैंडस्केप के बीच सोशल मीडिया रेगुलेशन, एआई वर्सेस जॉब्स, फ़िल्म सेंसरशिप जैसे एजेंडाज़ पर डेलीगेट्स ने पॉलिसी आइडियाज़, फ्रेमवर्क्स और व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत किए, जिससे जेडीएस एक ऐसे अकादमिक मंच के रूप में उभरा जो देश के भावी डिप्लोमैट्स को आकार देता है।

     

    पहले दिन औपचारिक वेश में डिबेट और शाम की सोशल नाइट में आपसी संवाद के बाद, दूसरे दिन डेलीगेट्स ट्रेडिशनल ड्रेसेज़ में अपने-अपने पात्रों और इडियोलॉजिकल संदर्भों के अनुरूप दिखाई दिए। इससे समिट की चर्चाएँ केवल नीतियों तक सीमित न रहकर पहचान, संस्कृति और रिप्रज़ेंटेशन तक विस्तृत होती नज़र आईं—जो डिप्लोमेसी को एक मानवीय और हॉलिस्टिक विज़न देता हैं।

     

     

    समिट में डेलीगेट्स को संबोधित करते हुए फॉर्मर मैंबर ऑफ लोक सभा कर्नल मानवेंद्र सिंह ने भारत की स्ट्रैटेजिक पोज़िशन को भविष्य के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत को केवल ज्योग्राफिकल बाउंड्रीज तक सीमित नहीं, बल्कि इंडियन ओशन में एक ‘नेचुरल एयरक्राफ्ट कैरियर' बताया।

    उनके अनुसार भारत के पास एक ‘अनरेस्ट्रिक्टेड होराइज़न' है, जो उसे ग्लोबल पावर स्ट्रक्चर में बढ़त देता है। कर्नल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शक्ति इकोनॉमिक स्टेबिलिटी, सामाजिक एकता और सैन्य तत्परता के संतुलन से बनती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य क्षमता प्रभावी डिप्लोमेसी की स्ट्रेटेजिक बैकिंग होती है जो राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे तौर पर ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ता है। साथ ही, भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक आउटरीच उसकी वैश्विक पहचान को सस्टेन करती है। डेलीगेट्स को स्ट्रैटेजिक सोच गहराने के लिए उन्होंने मेजर ग्लोबल डॉक्युमेंट्स के पठन की सलाह दी।

     

    फॉर्मर हाई कमिश्नर ऑफ़ इंडिया व ऑथर एम्बेसडर डॉ. गौरी शंकर गुप्ता ने प्रेजेंट ग्लोबल व्यू रखते हुए बताया कि वर्ल्ड पॉलिटिक्स में कानून से ज़्यादा ताकत निर्णायक बनती दिख रही है, जहाँ आर्थिक शक्ति, टेक्नोलॉजी और टैरिफ नए हथियार हैं। ट्रंप के दौर में अमेरिका ने टैरिफ और डिजिटल ताकत के ज़रिये ग्लोबल अनसर्टेनिटी बढ़ाई, वहीं इससे आत्मनिर्भरता और डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज़ को मज़बूती भी मिली। इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ‘एलआईऑफई’ जैसे अभियानों के माध्यम से भारत दुनिया को एक नैतिक और सस्टेनेबल दिशा दे रहा है। भविष्य की दुनिया में डिजिटल पावर, स्मार्ट ट्रेड और ज़िम्मेदार संसाधन उपयोग ही असली ग्लोबल लीडरशिप तय करेंगे।

     

    प्रदीप एस. मेहता (सेक्रेट्री जनरल, कट्स इंटरनैशनल) ने बताया कि आज जब यूनाइटेड नेशंस और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन जैसी वैश्विक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं, भारत अपनी मॉरल लीडरशिप और सस्टेनेबल लाइफ जैसे अभियानों से दुनिया को नई राह दिखा रहा है। उन्होंने डिप्लोमैट्स और सिविल सर्वेंट्स को अग्रसर भारत की पहचान बताते हुए डेलीगेट्स को प्रोत्साहित किया कि वे केवल चीजों को वैसे ही न स्वीकार करें जैसे वे हैं, बल्कि समाज में एक 'वॉचडॉग' की तरह सक्रिय रहकर सवाल पूछें।

     

     

    पैनलिस्ट डॉ. मंजरी सिंग (असोसिएट प्रोफ़ेसर व मिडल ईस्टर्न स्कॉलर) के अनुसार भारत वेस्टर्न हेजिमनी को चुनौती देने के बजाय स्ट्रेटेजिक ‘डाइवर्सिफिकेशन’ के ज़रिये अपने ग्लोबल पार्टनर बढ़ा रहा है। ग्लोबल पावर का केंद्र पश्चिम से पूर्व की ओर शिफ्ट हो रहा है, जहाँ खाड़ी देशों के साथ भारत का सहयोग अब रक्षा और सप्लाई चेन तक विस्तृत है।

    विकास-केंद्रित और नॉन-इंटरवेंशन डिप्लोमेसी आज भारत की सबसे बड़ी स्ट्रैटेजिक ताकत बन चुकी है।

     

    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (डिजिटल स्ट्रैटेजीज़) धीमंत अग्रवाल ने जेडीएस को एक दो-दिवसीय इवेंट नहीं, बल्कि एक विज़न-ड्रिवन और पेशेंटली बिल्ड किया गया ट्रेडिशन बताया। उनके अनुसार इसकी असली लेगेसी संख्या में नहीं, बल्कि उस डिसिप्लिन और रिसर्च स्टैंडर्ड्स में है, जो यह मंच सेट करता है। एआई और 5G के युग में वे ह्यूमन स्किल और ह्यूमन कैपिटल को सबसे बड़ा स्ट्रैटेजिक एसेट मानते हैं। उनका फोकस JDS को एक फ्यूचर-रेडी, क्रेडिबल अकादमिक प्लेटफॉर्म बनाना है।

    जो रियल-टाइम ग्लोबल इश्यूज़ पर अपनी रेलिवेंस और इम्पैक्ट लगातार बढ़ाता रहे।

     

     

    इन विचारों और चर्चाओं के साथ, जेईसीआरसी डिप्लोमैसी समिट 8.0 ने खुद को एक ऐसे राष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित किया है, जहाँ देश के भविष्य के डिप्लोमैट्स न केवल नीतियों पर बहस करते हैं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए तैयार होते हैं।

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