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    जेईसीआरसी में बेटियों को मिला 'फाइनेंशियल फ्रीडम' का मंत्र: अब घर की लक्ष्मी खुद संभालेगी देश की इकोनॉमी

    12 hours ago

    -जेएसबी और एनएसई अकैडमी का मिशन: छात्राओं को 'जॉब सीकर' से 'स्मार्ट इन्वेस्टर' में बदलना

     

    -थ्री-स्टेप फॉर्मूला: पहले इंश्योरेंस की ढाल, फिर इन्वेस्टमेंट की तलवार और अंत में वेल्थ का विस्तार

     

    -डिग्री के साथ 'डिजिटल वेल्थ' का विज़न; अब अपने फाइनेंशियल डिसीजन खुद लेंगी फीमेल जेईसीआरसीयंस

     

    जयपुर,

     

    आज की आत्मनिर्भर बेटी न केवल घर और करियर की कमान संभाल रही है, बल्कि वह मॉडर्न इंडिया की आर्थिक शक्ति भी बन रही है। इसी सोच को एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ाते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के जयपुर स्कूल आफ़ बिज़नेस (जेएसबी) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) अकैडमी के साथ मिलकर एक विशेष "विमेन एक्सक्लूज़िव फ़ाइनेंशियल वैलनेस सैशन" का आयोजन किया। नेशनल गर्ल चाइल्ड डे के थॉट से प्रेरित इस पहल का मुख्य गोल फीमेल जेईसीआरसीयंस को भविष्य की इकोनॉमिक चैलेंजेस के लिए तैयार करना और उन्हें अपने फाइनेंशियल डिसीजन का लीडर बनाना रहा।

     

    कीनोट स्पीकर, इकोनॉमिक एडमिनिस्ट्रेशन और रिटायरमेंट प्लानिंग के सीज़न एक्सपर्ट अक्षत कुमार शर्मा रहे। उन्होंने मनी मैनेजमेंट को एक आर्ट की तरह पेश करते हुए समझाया कि फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस ही सामाजिक समानता और सुरक्षा की दिशा में सबसे मज़बूत कदम है। उन्होंने एक सक्सेसफुल फाइनेंशियल जर्नी के लिए 'थ्री-स्टेप फॉर्मूला' साझा किया: सबसे पहले टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस के माध्यम से एक सुरक्षित कवच तैयार करना, फिर इन्फ्लेशन को मात देने के लिए सही समय पर निवेश की शुरुआत करना, और अंत में 'कंपाउंडिंग' के जादू से मनी मल्टीप्लिकेशन करना।

     

    डिजिटल युग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए अक्षत ने बताया कि निवेश के लिए अब बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं है; मात्र 10 रुपये की 'माइक्रो-एसआईपी' भी एक बड़े फ़्यूचर की बुनियाद रखी जा सकती है। उन्होंने 'रूल ऑफ 72' और मार्केट फ़्लक्च्युएशंस को 'कॉस्ट एवरेजिंग' के ज़रिए अवसर में बदलने के गुर सिखाए। इसके साथ ही 'स्वीप-इन एफडी' और 'लिक्विड फंड्स' जैसे स्मार्ट टूल्स पर विस्तार से प्रकाश डाला गया, जो इमरजेंसी के दौरान तुरंत लिक्विडिटी और बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करते हैं।

     

    इवेंट ऑर्गनाइज़र रोमा चेलानी ने स्टूडेंट्स का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि इस सैशन का असली गोल सिर्फ़ इंफ़ॉर्मेशन शेयर करना ही नहीं, बल्कि उनके मन से इन्वेस्टमेंट को लेकर बैठी हिचकिचाहट को दूर करना है। उन्होंने समझाया कि फाइनेंशियल अवेयरनेस ही वो सुपरपावर है, जिससे वे अपनी पहली सैलरी के साथ, अपने सपनों की ओर आत्मनिर्भरता से कदम बढ़ा सकेंगी।

     

    विमेन-सेंट्रिक यह पहल खास तौर पर कैंपस की छात्राओं को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देने के लिए थी, जहाँ वे बिना किसी हेज़िटेशन के अपनी वेल्थ क्रिएशन की जर्नी शुरू कर सकें। जेईसीआरसी की यह कोशिश उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है जो केवल डिग्री तक सीमित न रहकर, अपने जीवन के हर क्रूशियल डिसीज़न में अपनी सॉलिड हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहती हैं।

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