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    लिगेसी और फ्यूचर का फ्यूजन: जापान के साथ एजुकेशन और करियर की नई शुरुआत

    5 months ago

    -जापान की कंपनियों तक पहुंचेगा जेईसीआरसी का स्टूडेंट नेटवर्क: जापान की इंडस्ट्री को भारतीय प्रतिभाओं की तलाश

    -डिकोडिंग द जैपनीज़ ड्रीम: जेईसीआरसी और जेट्रो ने साथ मिलकर एक्सप्लोर किए करियर, कल्चर और इनोवेशन के नए चैप्टर्स

    जयपुर,

    ग्लोबल इकॉनमी में 'क्रॉस-बॉर्डर सिनर्जीज़' की बढ़ती डिमांड को पहचानते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने ग्लोबल एजुकेशन के क्षेत्र में एक मेजर माइलस्टोन हासिल किया है। यूनिवर्सिटी के 'सेंटर फ़ॉर फ़ॉरेन लैंग्वेजेज़' ने जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (जेट्रो) के साथ मिलकर एक एक्सक्लूसिव कोलैबोरेशन किया है, जिसका मकसद इंडियन स्टूडेंट्स को जापान के 'हाई-टेक' और 'डिसिप्लैंड' कॉर्पोरेट वर्ल्ड के लिए तैयार करना है।

    जेईसीआरसी द्वारा आयोजित इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य सिर्फ एकेडमिक एक्सचेंज तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारत की युवा ऊर्जा और जापान की 'प्रेसिज़न-ड्रिवन' इंडस्ट्री के बीच एक ब्रिज बनाने की पहल है । इवेंट के नरेटिव को सेट करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि कैसे जेईसीआरसी की 25 वर्षों की लेगेसी ऑफ़ इनोवेशन और जैपनीज़ कल्चर की हम्बलनेस जब एक साथ मिलते हैं, तो ग्लोबल करियर के मायने बदल जाते हैं।

    इवेंट की शुरुआत एक विज़नरी नोट पर हुई, जहाँ यूनिवर्सिटी के मनीष जैन (डायरेक्टर कोलबोरेशंस) और पी शिवानी सिंग (हेड आईपीआर सेल) ने इस पार्टनरशिप को 'विज़न एंड पर्पस' का संगम बताया। उन्होंने हाईलाइट किया कि जेईसीआरसी का फोकस अब क्लासरूम टीचिंग से आगे बढ़कर इंडस्ट्री पार्टनरशिप्स और इंटरनेशनल एक्सपोज़र पर शिफ्ट हो चुका है, ताकि स्टूडेंट्स को ग्लोबल चैलेंजेस के लिए तैयार किया जा सके।

    जेट्रो के सीनियर डायरेक्टर, ताकानौरी हिगुचि ने की-नोट एड्रेस में एक बहुत ही कैंडिड और फ्रेश पर्सपेक्टिव रखते हुए जापान की डेमोग्राफिक रियलिटी पर बात की। उन्होंने बताया कि जापान में 'एजिंग पॉपुलेशन' की वजह से वर्कफोर्स की क्रिटिकल शॉर्टेज है। जिसके लिए उन्हें ऐसे टैलेंटेड लीडर्स चाहिए जो इंडियन मार्केट की समझ रखते हों और वहां की टीम्स को एफिशिएंटली मैनेज कर सकें। उन्होंने यह भी मेंशन किया कि ट्वेंटीज़ की उम्र वाले प्रोफेशनल्स के लिए जापान में 'वेज ग्रोथ' काफी प्रोमिसिंग है।

    सेशन में जेट्रो की जेनिका कालरा ने जापान को 'फ़्यूचरिस्टिक करियर हब' बताते हुए इंडिया में 1400 से अधिक जापानी कंपनियों की मौजूदगी हाईलाइट की। उन्होंने 'हायर एंड फ़ायर' के बजाय 'जॉब सिक्योरिटी' और 'लाइफ़टाइम इम्प्लॉयमेंट' पर ज़ोर दिया, साथ ही रोबोटिक्स और एआई जैसे इनोवेशन को वहां की डेली लाइफ का हिस्सा बताया।

    स्टूडेंट्स के साथ हुए क्वेश्चन आनस्वेरिंग सेशन में जापान के 'कॉरपोरेट एटिकेट' और करियर रोडमैप पर फोकस किया गया। यह क्लेरिफाई किया गया कि टेक्निकल प्रोफाइल्स के लिए जेएलपीटी (जैपनीज़ लैंग्वेज प्रोफ़िशिएंसी टेस्ट) एन3/एन4 काफी है, लेकिन मैनेजमेंट या ट्रांसलेशन रोल्स के लिए एन1/एन2 लेवल जरूरी है। वर्क कल्चर पर बात करते हुए बताया गया कि जापान में 'इंडिविज़ुअल हीरोइज़्म' के बजाय 'टीमवर्क' और पंचुअलिटी को प्रायोरिटी दी जाती है। साथ ही, इंडियन फाउंडर्स को जापानी इकोसिस्टम से जोड़ने वाले 'जे-ब्रिज' प्रोग्राम की भी जानकारी दी गई।

    इवेंट के अंत में प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर मुदित शर्मा ने 'रिक्शॉ' (जापानी शब्द 'ज़िनरिकिश' से डिराइवड) और 'वाबी-साबी' (अपूर्णता में सुंदरता) जैसे उदाहरणों के ज़रिए दोनों देशों के गहरे कल्चरल कनेक्शन को हाईलाइट किया। यह कोलैबोरेशन जेईसीआरसी के उस विज़न को दर्शाता है जहाँ एजुकेशन का मतलब सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे एडवांस्ड नेशन्स के साथ कदम मिलाकर चलना है।

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