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    68 दिनों तक रोज़ ₹3 लाख का जुर्माना: उड़ानें रद्द और देरी के मामले में इंडिगो पर DGCA ने ₹22.2 करोड़ का भारी दंड लगाया

    1 day ago

    नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने और भारी अव्यवस्थाओं के मामले में देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो पर ₹22.2 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह अब तक किसी भी एयरलाइन पर उड़ान व्यवधान को लेकर लगाए गए सबसे बड़े दंडों में से एक माना जा रहा है।

    DGCA ने शनिवार को जारी बयान में बताया कि इंडिगो पर 5 दिसंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक कुल 68 दिनों के लिए प्रतिदिन ₹3 लाख का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, एकमुश्त ‘सिस्टमिक पेनल्टी’ के रूप में ₹1.80 करोड़ का अतिरिक्त दंड भी लगाया गया है। इस तरह कुल जुर्माने की राशि ₹22.2 करोड़ तक पहुंच गई है।

    दिसंबर में क्यों मचा था हवाई यातायात में हंगामा

    दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में अचानक बड़े स्तर पर रद्दीकरण और देरी शुरू हुई थी। शुरुआत में यह समस्या कुछ दिनों की मानी जा रही थी, लेकिन जल्द ही यह एक बड़े संकट में बदल गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान इंडिगो की कुल 2,507 उड़ानें रद्द की गईं, जबकि 1,852 उड़ानें देरी से संचालित हुईं।

    हवाई अड्डों पर यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में देखा गया कि कई यात्री घंटों तक एयरपोर्ट पर फंसे रहे, चेक-इन किया हुआ सामान फर्श पर बिखरा पड़ा था और यात्रियों को न तो स्पष्ट जानकारी मिल रही थी और न ही समय पर वैकल्पिक व्यवस्था।

    संसद तक पहुंचा मामला

    इंडिगो की उड़ानों में हुए इस व्यापक अव्यवस्था का मामला संसद तक भी पहुंचा। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने उच्च सदन में इस मुद्दे को उठाया और इसे विमानन क्षेत्र में कथित ‘एकाधिकार’ से जोड़ा। उनका आरोप था कि प्रतिस्पर्धा की कमी के कारण यात्रियों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    DGCA की जांच और समिति की भूमिका

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए DGCA ने दिसंबर 2025 में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति का नेतृत्व संयुक्त महानिदेशक संजय के. ब्राह्मणे को सौंपा गया था। समिति को यह जांच करने का जिम्मा दिया गया था कि आखिर किन परिस्थितियों और नीतिगत चूकों के कारण इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द और विलंबित हुईं।

    समिति ने 27 दिसंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट DGCA को सौंप दी। रिपोर्ट में उड़ान संचालन, क्रू मैनेजमेंट और शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम (विंटर शेड्यूल) की योजना में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया।

    DGCA की सख्त कार्रवाई: सिर्फ जुर्माना ही नहीं

    DGCA ने केवल आर्थिक दंड लगाकर ही मामला समाप्त नहीं किया, बल्कि इंडिगो प्रबंधन के खिलाफ कई प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कदम भी उठाए हैं।

    • DGCA ने इंडिगो को दीर्घकालिक प्रणालीगत सुधार सुनिश्चित करने के लिए ₹50 करोड़ का बैंक गारंटी जमा करने का निर्देश दिया है।

    • एयरलाइन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) और ‘अकाउंटेबल मैनेजर’ इसिद्रे पोर्केरास को विंटर शेड्यूल 2025 और संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के प्रभाव का सही आकलन न करने के लिए चेतावनी दी गई है।

    • DGCA ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को भी उड़ान संचालन और संकट प्रबंधन में समुचित निगरानी न रखने के लिए औपचारिक रूप से आगाह किया है।

    • इसके अलावा, ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर के प्रभारी सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को अस्थायी रूप से रोज़मर्रा की परिचालन जिम्मेदारियों से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

    • डिप्टी हेड (फ्लाइट ऑपरेशंस), एवीपी (क्रू रिसोर्स प्लानिंग) और डायरेक्टर (फ्लाइट ऑपरेशंस) को भी संचालन, सुपरविजन, मैनपावर प्लानिंग और रोस्टर प्रबंधन में चूक को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

    यात्रियों के हित में सख्त संदेश

    DGCA का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और समयबद्ध सेवा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियामक के अनुसार, एयरलाइनों को अपने परिचालन ढांचे, स्टाफिंग और शेड्यूलिंग में समय रहते सुधार करने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।

    विमानन क्षेत्र पर असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो पर लगाया गया यह जुर्माना पूरे विमानन उद्योग के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इससे अन्य एयरलाइनों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे अपनी परिचालन योजनाओं और संकट प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करें।

    फिलहाल, इंडिगो की ओर से इस कार्रवाई पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि एयरलाइन को अपने सिस्टम और प्रबंधन में बड़े बदलाव करने होंगे। यात्रियों को उम्मीद है कि इस सख्ती के बाद भविष्य में उड़ानें रद्द होने और देरी जैसी समस्याओं में कमी आएगी और हवाई यात्रा का अनुभव बेहतर होगा।

     
     
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