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    भारत के जवाबी शुल्क से अमेरिका में हलचल, दाल व्यापार को लेकर बातचीत की मांग तेज

    1 day ago

    भारत द्वारा अमेरिकी मूल की पीली मटर (येलो पीज) पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने के बाद अमेरिका के कृषि क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले से प्रभावित अमेरिकी राज्यों के प्रतिनिधियों ने अब व्हाइट हाउस से हस्तक्षेप की मांग की है। उत्तर डकोटा और मोंटाना से जुड़े अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारत के साथ बातचीत कर इस मुद्दे का समाधान निकालने का अनुरोध किया है।

    सीनेटरों का कहना है कि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और अमेरिकी किसान लंबे समय से भारतीय बाजार पर निर्भर रहे हैं। नए शुल्क के कारण अमेरिकी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर हो गई है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है।

    दाल व्यापार में भारत की अहम भूमिका

    वैश्विक दाल बाजार में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। विश्व स्तर पर खपत होने वाली कुल दालों का एक बड़ा हिस्सा भारत में उपयोग होता है। इसी कारण अमेरिका सहित कई देश भारतीय बाजार को रणनीतिक रूप से अहम मानते हैं।

    अमेरिकी सीनेटरों के अनुसार, उत्तर डकोटा और मोंटाना अमेरिका में दाल उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। इन राज्यों के किसानों को उम्मीद थी कि भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत बने रहेंगे, लेकिन नए आयात शुल्क से उनकी निर्यात संभावनाओं पर असर पड़ा है।

    जवाबी नीति के तहत लिया गया फैसला

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा लगाया गया यह शुल्क एक व्यापक व्यापारिक रणनीति का हिस्सा है। बीते वर्ष अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। भारत का यह कदम उसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां देश अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए नीतिगत फैसले ले रहा है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत का उद्देश्य किसी एक देश को निशाना बनाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष और संतुलित व्यापार व्यवस्था को बनाए रखना है। भारत पहले भी कई मौकों पर वैश्विक व्यापार नियमों के तहत अपने हितों की रक्षा करता रहा है।

    अमेरिका में किसानों की चिंता

    अमेरिका में किसान संगठनों का कहना है कि शुल्क बढ़ने से उनकी आय प्रभावित हो सकती है। भारतीय बाजार में दालों की मांग अधिक होने के कारण वहां निर्यात अमेरिकी किसानों के लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत रहा है। अब इस रास्ते में बाधा आने से वैकल्पिक बाजारों की तलाश करनी पड़ सकती है।

    सीनेटरों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि भारत के साथ होने वाले किसी भी संभावित व्यापार समझौते में दाल उत्पादकों के हितों को प्राथमिकता दी जाए। उनका मानना है कि बातचीत के जरिए शुल्क से जुड़ी बाधाओं को कम किया जा सकता है।

    भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की स्थिति

    हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार में सालाना आधार पर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, कुछ क्षेत्रों में मतभेद सामने आते रहे हैं, जिनमें कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि दोनों देश अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टि से दोनों पक्ष व्यापारिक सहयोग को बनाए रखने के इच्छुक हैं।

    आगे क्या?

    आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत और अमेरिका इस मुद्दे पर किस तरह आगे बढ़ते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च स्तर पर बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे।

    भारत ने संकेत दिया है कि वह समानता और पारस्परिक सम्मान के आधार पर व्यापारिक चर्चाओं के लिए खुला है। वहीं, अमेरिका भी अपने कृषि क्षेत्र की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए राजनयिक प्रयास तेज कर सकता है।

     

    कुल मिलाकर, यह मामला वैश्विक व्यापार में बदलते संतुलन और देशों की आत्मनिर्भर आर्थिक नीतियों की झलक देता है, जहां हर राष्ट्र अपने हितों की रक्षा के साथ-साथ सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहा है।

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