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    सिंगापुर की राजनीति में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने विपक्ष के नेता पद से हटाए प्रीतम सिंह

    3 days ago

    सिंगापुर की राजनीतिक व्यवस्था में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण मोड़ देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भारतीय मूल के वरिष्ठ नेता और वर्कर्स पार्टी (WP) के प्रमुख प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष (लीडर ऑफ द ऑपोज़िशन) के पद से हटा दिया। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दल से आग्रह किया है कि वह जल्द ही किसी अन्य सांसद को इस पद के लिए नामित करे, ताकि संसद में विपक्ष की भूमिका सुचारु रूप से जारी रह सके।

    प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने इस संबंध में जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रीतम सिंह से जुड़ी कानूनी स्थिति और संसद द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम कानून के शासन, संसद की गरिमा और संस्थागत मूल्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक था। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

    संसद और कानून की गरिमा पर जोर

    प्रधानमंत्री वोंग ने कहा कि संसद केवल नीतियों और कानूनों पर चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिक मानकों का प्रतीक भी है। ऐसे में किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से उच्च स्तर की जवाबदेही और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद और न्यायिक प्रक्रिया द्वारा दिए गए निर्णयों का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है।

    इस निर्णय के साथ ही प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष के पद से जुड़ी सभी विशेष सुविधाएं समाप्त हो गई हैं। इनमें संसद में बहस के दौरान पहले जवाब देने का अधिकार, अधिक समय तक भाषण देने की अनुमति और एक निर्वाचित सांसद की तुलना में अधिक भत्ता शामिल था।

    क्या है पूरा मामला

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रीतम सिंह को फरवरी 2025 में एक संसदीय समिति के समक्ष गलत जानकारी देने के मामले में दोषी ठहराया गया था। यह मामला वर्ष 2021 में पूर्व वर्कर्स पार्टी सांसद रईसाह खान से जुड़े एक प्रकरण से संबंधित था। इस मामले में एक जिला अदालत ने प्रीतम सिंह को दो आरोपों में दोषी माना और उन पर जुर्माना लगाया गया।

    हालांकि प्रीतम सिंह ने अदालत के फैसले को स्वीकार करने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने निर्णय के निष्कर्षों से असहमति भी जताई थी और अपनी स्थिति को सही बताया था। इसके बावजूद, उनकी अपील को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिससे निचली अदालत का फैसला अंतिम माना गया।

    संसद की राय भी बनी आधार

    प्रधानमंत्री वोंग का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही संसद में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। यह प्रस्ताव सदन की नेता इंद्राणी राजा द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसमें कहा गया था कि प्रीतम सिंह का आचरण और अदालत द्वारा दिया गया फैसला नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद की अपेक्षित कसौटी पर खरा नहीं उतरता।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अदालत का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी है तथा ऐसे फैसलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि व्यक्तिगत राय अलग हो सकती है, लेकिन दोष या निर्दोषता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जाता है।

    विपक्ष से नए नाम की उम्मीद

    प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने वर्कर्स पार्टी से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द नए नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मजबूत और सक्रिय भूमिका किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है और यह पद लंबे समय तक खाली नहीं रहना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सिंगापुर की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक स्पष्ट संदेश देता है। साथ ही, यह भी दर्शाता है कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के लिए नैतिक और कानूनी मानक समान रूप से लागू होते हैं।

    आगे की राजनीति पर असर

    प्रीतम सिंह की पद से विदाई के बाद वर्कर्स पार्टी के सामने नई रणनीति बनाने की चुनौती होगी। पार्टी को न केवल नए नेता प्रतिपक्ष का चयन करना होगा, बल्कि जनता के बीच अपनी साख और भूमिका को भी मजबूती से प्रस्तुत करना होगा।

     

    वहीं, सरकार की ओर से यह संकेत भी गया है कि कानून और संस्थागत मूल्यों से समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे मामला किसी भी बड़े राजनीतिक नेता से जुड़ा क्यों न हो।

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