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    दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड नियमों में किया बड़ा बदलाव, आय सीमा बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये की; 11 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

    1 day ago

    दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देते हुए राशन कार्ड से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। सरकार ने प्राथमिकता श्रेणी के राशन कार्ड के लिए वार्षिक पारिवारिक आय सीमा को बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये कर दिया है। पहले यह सीमा 1 लाख रुपये निर्धारित थी। इस फैसले से राजधानी में लंबे समय से लंबित लाखों आवेदनों के निपटारे का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस संशोधित व्यवस्था से करीब 11,65,965 लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी, यथार्थवादी और जरूरतमंद परिवारों तक केंद्रित बनाना है।

    “खाद्य सुरक्षा दान नहीं, अधिकार है”

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा किसी तरह की सहायता या दया नहीं, बल्कि नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र परिवार केवल प्रशासनिक कमियों या अस्पष्ट नियमों के कारण भोजन से वंचित न रहे, यह सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई आय सीमा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की गई है, ताकि वास्तव में जरूरतमंद परिवारों को सब्सिडी वाला राशन मिल सके।

    नई पात्रता शर्तें क्या होंगी

    संशोधित नियमों के अनुसार, जिन परिवारों की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये तक है, वे प्राथमिकता श्रेणी के राशन कार्ड के लिए पात्र होंगे। हालांकि, सरकार ने कुछ अपवर्जन मानदंड भी स्पष्ट किए हैं ताकि योजना का लाभ केवल योग्य लोगों तक ही सीमित रहे।

    इन नियमों के तहत वे परिवार पात्र नहीं होंगे:

    • जिनके पास ए से ई श्रेणी की कॉलोनियों में आवासीय संपत्ति है

    • जो आयकर का भुगतान करते हैं

    • जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है

    • जिनके पास 2 किलोवाट से अधिक का घरेलू बिजली कनेक्शन है

    • जिनके पास चार पहिया वाहन है (व्यावसायिक उपयोग में आने वाले वाहन को छोड़कर)

    सरकार ने यह भी तय किया है कि अब आय प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा, जिसे राजस्व विभाग द्वारा जारी किया जाएगा। इससे पहले लागू स्व-घोषणा प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है, ताकि अपात्र लोग गलत जानकारी देकर योजना का लाभ न उठा सकें।

    11 लाख से अधिक लंबित मामलों को मिलेगी राहत

    दिल्ली में राशन कार्ड से जुड़े मामलों की संख्या लंबे समय से बढ़ती जा रही थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3.9 लाख आवेदन स्पष्ट नियमों के अभाव में अटके हुए थे। इसके अलावा, 11.65 लाख से अधिक लोग ऐसे थे, जो खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

    नई आय सीमा और स्पष्ट पात्रता मानदंडों के लागू होने के बाद इन सभी आवेदनों की दोबारा जांच की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को समय पर राशन कार्ड जारी किए जा सकेंगे।

    ‘पहले आओ, पहले पाओ’ व्यवस्था खत्म

    सरकार ने राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में एक और अहम बदलाव करते हुए ‘पहले आओ, पहले पाओ’ प्रणाली को समाप्त कर दिया है। अब आवेदनों का मूल्यांकन जिला स्तर पर गठित समितियों द्वारा किया जाएगा।

    इन समितियों की अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट या अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट करेंगे। समिति में स्थानीय विधायक और संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि सबसे अधिक जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ मिले, न कि केवल आवेदन की तारीख के आधार पर।

    पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

    दिल्ली सरकार का मानना है कि नए नियमों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी या अपात्र लाभार्थियों की पहचान आसान होगी। आय प्रमाण पत्र की अनिवार्यता और स्पष्ट अपवर्जन मानदंडों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो।

    अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तरीय समितियां नियमित अंतराल पर आवेदनों की समीक्षा करेंगी और जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर सत्यापन भी किया जाएगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि किसी पात्र परिवार को अनावश्यक रूप से योजना से बाहर न रखा जाए।

    जरूरतमंद परिवारों के लिए अहम कदम

    विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए आय सीमा में यह वृद्धि समयानुकूल है। कई ऐसे परिवार जो पहले मामूली रूप से आय सीमा से बाहर हो जाते थे, अब खाद्य सुरक्षा के दायरे में आ सकेंगे।

     

    दिल्ली सरकार का यह फैसला राजधानी में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों की संख्या पर सभी की नजर रहेगी।

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