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    गणतंत्र दिवस तैयारियों के चलते 21 से 29 जनवरी तक आम जनता के लिए बंद रहेगा राष्ट्रपति भवन का मुख्य सर्किट

    1 day ago

    आगामी गणतंत्र दिवस समारोह और उससे जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों की तैयारियों के मद्देनज़र राष्ट्रपति भवन को आम जनता के लिए अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार, राष्ट्रपति भवन का सर्किट-1, जो मुख्य भवन के भ्रमण के लिए खोला जाता है, 21 जनवरी 2026 से 29 जनवरी 2026 तक आम नागरिकों के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा।

    यह फैसला राष्ट्रीय राजधानी में 26 जनवरी को आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड और 29 जनवरी को होने वाले ‘बीटिंग द रिट्रीट’ समारोह की तैयारियों को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए लिया गया है। इन कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति भवन और उसके आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गतिविधियां काफी बढ़ जाती हैं, जिसके चलते आम नागरिकों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगाई जाती है।

    सर्किट-1 क्यों रहेगा बंद

    राष्ट्रपति भवन का सर्किट-1 देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय भ्रमण मार्गों में से एक है। इस सर्किट के तहत आगंतुकों को राष्ट्रपति भवन के मुख्य भवन के अंदरूनी हिस्सों, ऐतिहासिक हॉल और वास्तुकला की झलक देखने का अवसर मिलता है। लेकिन गणतंत्र दिवस से पहले और बाद के दिनों में यही क्षेत्र परेड रिहर्सल, सुरक्षा अभ्यास और आधिकारिक तैयारियों का केंद्र बन जाता है।

    राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, इन गतिविधियों के कारण आम जनता के लिए भ्रमण जारी रखना संभव नहीं होता। इसी वजह से हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के आसपास कुछ दिनों के लिए राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है।

    गणतंत्र दिवस और बीटिंग द रिट्रीट का महत्व

    गणतंत्र दिवस परेड देश का सबसे महत्वपूर्ण औपचारिक आयोजन माना जाता है। यह परेड 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर आयोजित होती है, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, विभिन्न राज्यों की झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया जाता है। इस अवसर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेशी अतिथि और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहते हैं।

    वहीं, 29 जनवरी को आयोजित होने वाला ‘बीटिंग द रिट्रीट’ समारोह गणतंत्र दिवस समारोहों का औपचारिक समापन माना जाता है। यह आयोजन विजय चौक पर होता है, जो कर्तव्य पथ के पश्चिमी छोर पर राष्ट्रपति भवन के नजदीक स्थित है। इस समारोह में सशस्त्र बलों के बैंड पारंपरिक धुनों के साथ प्रस्तुति देते हैं और शाम को राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन होता है।

    पर्यटकों को क्या करना चाहिए

    प्रशासन ने दिल्ली आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा योजना बनाते समय इस अस्थायी बंदी को ध्यान में रखें। जो लोग 21 से 29 जनवरी के बीच राष्ट्रपति भवन के भ्रमण की योजना बना रहे थे, उन्हें सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा को आगे के लिए पुनर्निर्धारित करें।

    हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह बंद केवल राष्ट्रपति भवन के सर्किट-1 तक सीमित है। अन्य पर्यटन स्थलों और दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्थानों पर भ्रमण सामान्य रूप से जारी रहेगा, हालांकि गणतंत्र दिवस से जुड़े सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण कुछ क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था बदली जा सकती है।

    सुरक्षा और तैयारियां सर्वोपरि

    गणतंत्र दिवस के दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सबसे कड़ी मानी जाती है। राष्ट्रपति भवन, कर्तव्य पथ और आसपास के क्षेत्रों में कई स्तरों पर सुरक्षा जांच, निगरानी और नियंत्रण लागू किए जाते हैं। परेड रिहर्सल और आधिकारिक कार्यक्रमों के चलते इन क्षेत्रों में आम नागरिकों की आवाजाही सीमित करना आवश्यक हो जाता है।

    प्रशासन का कहना है कि इन अस्थायी प्रतिबंधों का उद्देश्य किसी भी प्रकार की असुविधा पैदा करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है।

    कब फिर खुलेगा राष्ट्रपति भवन

    राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, 29 जनवरी को बीटिंग द रिट्रीट समारोह के समापन के बाद आवश्यक औपचारिकताओं और सुरक्षा समीक्षा के उपरांत राष्ट्रपति भवन का सर्किट-1 आम जनता के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। इसके बाद पर्यटक सामान्य प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन या निर्धारित माध्यमों से टिकट बुक कर भ्रमण कर सकेंगे।

    हर वर्ष की तरह इस बार भी गणतंत्र दिवस से जुड़ी तैयारियों के कारण यह अस्थायी व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि समारोह समाप्त होते ही सभी भ्रमण गतिविधियां सामान्य रूप से बहाल कर दी जाएंगी।

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति भवन न केवल भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक परंपराओं, इतिहास और वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। इसलिए हर वर्ष लाखों लोग इसे देखने के लिए आते हैं। फिलहाल, राष्ट्रव्यापी उत्सव की तैयारियों को देखते हुए कुछ दिनों का यह विराम जरूरी माना जा रहा है।

     
     
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