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    भगवान बिरसा मुण्डा प्रेरणा के पुंज है - प्रो. रमा शंकर दूबे

    1 month ago

    गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय की जनजातीय गौरव दिवस समिति द्वारा भगवान बिरसा मुण्डा की जन्म जयंती को जनजातीय गौरव दिवस 2025 के रूप में समाज विज्ञान संकाय के सभागार में मनाया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरू प्रो. रमाशंकर दूबे ने की और अपने उद्बोधन में कहा कि आज पूरे देश में जनजातीय गौरव दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है और हमें धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है । प्रो. दूबे ने कहा कि बिरसा मुण्डा ने जिस अदम्य साहस और त्याग के साथ राष्ट्र के लिए कार्य किए वे प्रशंसनीय हैं । हमें भारतीय इतिहास से विलुप्त जनजातीय समाज के कार्यों को शोध और साहित्य के माध्यम से सबके समक्ष लाने की आवश्यकता है । उन्होंने बताया कि जनजाति समुदाय के अनेक वीर योद्वाओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभ होने से पहले ही सत्रहवीं सदी में ही संघर्ष और आंदोलन का बिगुल बजा दिया था ।  मुख्य वक्ता प्रो. तापस कुमार दलपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें जनजातियों से संबधित मुद्दों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है और हमें अपने समाज के इतिहास और सच्चाई को स्वयं आगे आकर प्रस्तुत करना होगा । हमें आज के दिन संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम अपनी संस्कृति पर गर्व करे और यथा संभव उसका अनुसरण भी करें तभी बिरसा मुण्डा जयंती मनाने की प्रासंगिकता होगी । जनजातीय गौरव समिति के अध्यक्ष प्रो. जनक सिंह मीना ने सभी अतिथियों का शब्द सुमनों से स्वागत किया और भगवान बिरसा मुण्डा के योगदान एवं कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि  यह दिवस न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति को सम्मान देता है, बल्कि भारत की जनजातीय परंपराओं, संस्कृतियों और आदर्शों का राष्ट्रीय उत्सव भी है । बिरसा ने इस शोषण के विरुद्ध संघर्ष का बीड़ा उठाया। उन्होंने अपने समुदाय को संगठित किया, उन्हें आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया, और ‘बिरसाइत धर्म’ की स्थापना की, जो एकेश्वरवाद, श्रम, नैतिकता और समानता पर आधारित था। उनका स्पष्ट संदेश था —“अपने भगवान को पहचानो, मेहनत करो, एक रहो, और अपने धर्म को मत छोड़ो।” उनके उपदेशों ने आदिवासी समाज में नई चेतना भर दी। उन्होंने आदिवासियों को बताया कि अपनी पहचान और संस्कृति को बचाना ही सबसे बड़ा प्रतिरोध है। प्रो. जनक सिंह बताया कि इस कार्यक्रम से पूर्व निबंध प्रतियोगिता, गायन प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिताए कविता प्रतियोगिता एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने बढ चढ कर सहभागिता की । इस अवसर पर कोमल मीणा, रेखा मीणा,निकिता गामित,राहुल डामोर, सोनिया गुप्ता, नयन डामोर,नलिनी, गुनमौनी,रितुरानी,तेंजिन ने लोक गीत, कविता एवं बिरसा मुण्डा के विचारों की प्रस्तुति दी ।  कार्यक्रम का संचालन डॉ. इवा लोरेंग ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मिनेश डामोर ने किया । इस अवसर पर प्रो. राजेश मकवाना, प्रो. बिपुल कुमार, प्रो. सुभाष कुमार, डॉ. धनंजय कुमार राय, डॉ. मनोज कुमार वनरा, डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. खैखोलेन हाकिप, डॉ. स्मृति रंजन ढाल, पीआरओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा सहित बडी संख्या में शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

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