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    कर्मचारी महासंघ ने आर जी एच एस(RGHS) सम्बन्धी सुझाव सरकार को भेजें

    54 minutes ago

    अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा शिक्षा) की बैठक मेंअपने सुझाव पत्र में कहा कि एक माह से राज्य में RGHS सेवाएं स्थगित चल रही है जिससे 12 लाख से अधिक कार्यरत एवम सेवानिवृत्ति कर्मचारि पारिवारो को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि उनके अंशदान की मासिक कटौती सुचारू रूप से चल रही है। ऐसे में भुगतान प्राप्त करने के बाद भी सेवाएं नहीं देना विधिक रूप से सेवा दोष की श्रेणी में आता है।

     

     महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राणा ने कहा कि कर्मचारी महासंघ एकीकृत जो राज्य के लाखो कर्मचारी / पेंशनर्स परिवारों का सबसे पुराना महासंघ है द्वारा विगत माह सहित ,बार-बार माननीय मुख्यमंत्री एवम मुख्य सचिव महोदय को rghs सेवाओं को CGHS की तरह सुचारू करने हेतु निवेदन किया जाता रहा हैl वर्तमान में RGHS सेवाओं को सुचारू रूप से रखने के लिए सरकार द्वारा कर्मचारी महासंघों से सुझाव आमंत्रित कर प्रयास किया जा रहे हैंl 

     

    *महासंघ के प्रदेश महामंत्री विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों की आरजीएचएस सेवा को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु निम्न लिखित सुझाव प्रेषित किए* --

     

    1. पति तथा पत्नी दोनों राज्य सेवा में है तो उनके परिवार सदस्यों के मद में दोनो के वेतन से मासिक कटौतियां की जा कर एक ही सेवा के लिए दोहरी वसूली की जा रही है, जो नीतिगत नहीं है, अतः एक परिवार के लिए एक ही कर्मचारी के वेतन से कटौती की जाए। 

     

    2. सरकारी डिस्पेंसरीज द्वारा बीपी ,शुगर ,डायबिटीज आदि की दवाई लिखने पर पाबंदी लगाई गई है, ऐसे में डिस्पेंसरी में कर्मचारी इलाज ना कराकर निजी अस्पतालों में डॉक्टरो से वह दवाई लिखवा रहे है ऐसे में डॉक्टर की ₹350/- फीस का भार सरकार पर अनावश्यक रूप से ही पड़ रहा है ऐसे में उन सभी चिकित्सकों को ऐसी बीमारियों की दवाई लिखने के लिए अधिकृत किया जाए तो सरकार पर फीस का भार नहीं पड़ेगा तथा कर्मचारियों का निजी अस्पतालो की ओर पलायन रुकेगा, तथा सरकार पर भी अधिभार कम होगा। 

     

    3. राज्य में RGHS में गड़बड़ी तथा मनमानी करने वाले मेडिकल स्टोर तथा निजी चिकित्सालयो को चिन्हित कर पूर्णतया प्रतिबंधित किया जाए तथा उनकी मान्यताओं को रद्द किया जाए। जिससे प्रभावी लगाम लग सके ।

    (4) RGHS सेवाए प्रदान करने वाले निजी चिकित्सालयो एवम दवा स्टोर की त्रैमासिक सेवा समीक्षा एवम उनका भुगतान सुनस्चित किया जाए।  

    (5) Rghs सेवाओं में भ्रष्टाचार की रोक थाम हेतु 24/7 कस्टमर केयर सेंटर ,विशेषज्ञ निरीक्षण दलो का गठन ,इत्यादि प्रभावी सिस्टम डबलअप किया जाए। 

    (6) निजी चिकित्सालय RGHS में एक दिन में एक से अधिक बीमारी के विषेषज्ञ चिकित्सक को दिखाने की सुविधा नहीं दे रहे हैं ,जिससे मरीज कार्मिक को बार बार चिकित्सालयो के चक्कर लगाने पड़ते हैं, अतः सरकारी चिकित्सालयो की तरह निजी चिकित्सालयो को भी निर्देशित किया जाए।  

     

    (7) RGHS सेवाओं को निजी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं सौंपा जाए।

     (8) सरकारी चिकित्सालयो की ओपीडी में वरिष्ठ चिकित्सको द्वारा निर्धारित ओपीडी समय दोपहर 2 बजे तक मरीजों को देखना सुनश किया जाए, वरिष्ठ डॉक्टर आचार्य /सह आचार्य दोपहर 12 बजे बाद ओपीडी में मिलते ही नही हैं यदि बैठे भी हो तब भी उनके रेजिडेंट ही मरीज देखते हैं,जिससे मरीजों की विषेज्ञ इलाज की कामना पूरी नहीं होती, और मरीज निजी चिकित्सालयो में उन्ही को दिखाने एवम इलाज कराने को पलायन करते हैं। 

    (9) Rghs में विटामिन और कैल्शियम जैसी आधार भूत दवाइयों को पूर्ववत शामिल किया जाए, 50 वर्ष के बाद अधिकतम उक्त तत्वों के अभाव से ग्रसित होते हैं। जिन्हे खरीदने में भरी व्यय का भार अधिकतम को भुगतना पड़ रहा है। 

     

     *उपरोक्त सुझावों पर विचार कर शीघ्रता शीघ्र राज्य में rghs सेवाओं को बहाल करवाईं जाएं। 

     

     

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