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    मेडिकल काॅलेज एवं संबद्ध अस्पतालों पर रहेगी कड़ी नजर

    1 month ago

    चिकित्सा मंत्री ने की चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा
    प्रधानाचार्यों एवं अधीक्षकों की परफोरमेंस का होगा नियमित आकलन
    —खामी मिलने पर जिम्मेदारी तय होगी
    जयपुर। प्रदेश के सभी मेडिकल काॅलेजों से संबद्ध अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर अब कड़ी नजर रहेगी। सभी मेडिकल काॅलेजों के प्रधानाचार्य एवं संबद्ध अस्पतालों के अधीक्षकों के कामकाज का नियमित रूप से आकलन किया जाएगा। मानकों में खरा नहीं उतरने तथा स्वास्स्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की खामी सामने आने पर सीधे तौर उन्हें उत्तरदायी माना जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरूवार को स्वास्थ्य भवन में चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य आमजन के जीवन से जुड़ा सबसे संवेदनशील विषय है, इसमें किसी भी स्तर पर कोताही की कोई गुंजाइश नहीं है। सभी चिकित्सा अधिकारी अपना कार्य पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ करें, अन्यथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मानव संसाधन की कमी हो तो तुरंत बताएं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं हो—
    चिकित्सा मंत्री ने कहा कि किसी भी अस्पताल में चिकित्सक, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण कोई भी स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है, तो तत्काल प्रभाव से इस संबंध में अवगत कराएं, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए कि मानव संसाधन के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं बंद रहें। उन्होंने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तुरंत किए जाने के निर्देश दिए।

    रख-रखाव एवं प्रबंधन के मानकों से नहीं हो कोई समझौता—
    खींवसर ने कहा कि अस्पतालों में पार्किंग, सुरक्षा और साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई उच्च स्तरीय हो, इसके लिए नई सोच के साथ काम किया जाए। साथ ही, अस्पतालों में सुरक्षा पर विशेष फोकस रहे। इसके लिए आवश्यकतानुसार सुरक्षा एजेंसियों से सहयोग एवं सेवाएं ली जाएं।  उन्होंने कहा कि अस्पताल के रख-रखाव एवं प्रबंधन के मानकों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं हो।

    रोगियों एवं परिजनों के लिए खान-पान एवं ठहरने की हो समुचित व्यवस्था—
    चिकित्सा मंत्री ने कहा कि बडे़ अस्पतालों में स्थानीय निवासियों के साथ ही प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों से रोगी आते हैं। ऐसे में उनके खान-पान, ठहरने आदि की समुचित व्यवस्था होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ही रोगियों एवं उनके परिजनों को वाजिब दरों पर क्वालिटी फूड मिले, इसके लिए फूड कोर्ट की स्थापना आवश्यक रूप से की जाए। सभी अस्पतालों में जल्द ही इसके लिए स्थान चिन्हित कर जल्द प्रक्रिया शुरू की जाए।

    जल्द ही मिशन मोड में होंगे निरीक्षण—
    चिकित्सा मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए समय-समय पर निरीक्षण किए जाते हैं। आने वाले समय में मिशन मोड में अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन कर स्वास्थ्य सेवाओं में राजस्थान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।

    बडे़ अस्पतालों में अनावश्यक रेफरल नहीं हो—
    चिकित्सा शिक्षा सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि मेडिकल काॅलेज से संबद्ध अस्पताल यह सुनिश्चित करें कि अनावश्यक रूप से रेफरल नहीं हो। कई बार देखा जाता है कि कई अस्पताल सामान्य बीमारियों या जटिलता नहीं होने के बावजूद रोगियों को एसएमएस अस्पताल, जेके लोन, महिला अस्पताल या अन्य बडे़ अस्पतालों में रेफर कर देते हैं, इससे कुछ अस्पतालों पर मरीज भार बढ़ता है और कुछ अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं को पूरा उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग हो।

    उपचार के साथ-साथ शोध एवं अनुसंधान पर भी दें ध्यान—
    श्रीमती राठौड़ ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञ सिर्फ उपचार तक ही सीमित नहीं रहें, बल्कि शोध एवं अनुसंधान पर भी काम कर राजस्थान का गौरव बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आने वाले रोगियों के साथ संवेदनशील व्यवहार हो। अपना परिवार समझकर रोगियों का ख्याल रखें। उन्होंने हाउसकीपिंग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इसके लिए अच्छी एजेसिंयों का चयन कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाए।

    लक्ष्य निर्धारित कर प्रतिबद्धता से करें काम—
    चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने कहा कि सभी अधिकारी विकसित राजस्थान की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। वर्ष 2030 एवं वर्ष 2047 के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार एवं विस्तार के लक्ष्य निर्धारित कर प्रतिबद्धता के साथ उनको पूरा करें।

    बैठक में चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त शासन सचिव ललित कुमार, सभी मेडिकल काॅलेजों के प्रधानाचार्य, अधीक्षक, वित्तीय सलाहकार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 

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