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    नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से तबाही, 16 लोगों की मौत; 105 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता

    1 hour ago

     

    Yugcharan News / 26-08-2026

    नेपाल के उत्तरी हिस्सों में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। तिब्बत की ओर से आए तेज बहाव वाले पानी ने भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों में गंभीर स्थिति पैदा कर दी। बाढ़ के कारण कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा बिजली से जुड़ा महत्वपूर्ण ढांचा भी नुकसान की चपेट में आया है। स्थानीय अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

    सबसे चिंताजनक बात यह है कि लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से कुल 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीयों के शामिल होने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। हालांकि, राहत एवं बचाव अभियान जारी होने के कारण इन आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है।

    तिब्बत की ओर से आया तेज पानी

    प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का बहाव काफी बढ़ गया। पानी तिब्बत की ओर से नेपाल में आया और इसके बाद नेपाल के उत्तरी जिलों में तेजी से फैल गया। तेज बहाव ने नदी किनारे बसे इलाकों को प्रभावित किया और कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    नेपाल पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में बाढ़ की भयावह स्थिति दिखाई दे रही है। इन दृश्यों में पहाड़ी घाटियों के बीच तेज रफ्तार से बहता गंदला पानी, क्षतिग्रस्त सड़कें और प्रभावित इलाकों में मलबे का जमाव देखा जा सकता है। बाढ़ की गति और पहाड़ी भूभाग के कारण राहत कार्यों में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

    नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबिनारायण काफ्ले के हवाले से बताया गया कि अधिकारियों को अभी नुकसान की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि बाढ़ का प्रभाव काफी व्यापक हो सकता है और कई बस्तियों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

    नुवाकोट और धादिंग में भारी नुकसान

    नेपाल के नुवाकोट और धादिंग जिलों में बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। नेपाल के केंद्रीय पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, इन जिलों से अब तक कई शव बरामद किए जा चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कम से कम आठ शवों को बरामद किया गया है, जबकि अन्य संभावित पीड़ितों और लापता लोगों की तलाश जारी है।

    पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ बेहद तेजी से अपना प्रभाव फैलाती है। ऐसे में स्थानीय लोगों को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। भोटेकोशी नदी और उससे जुड़े जलमार्गों के आसपास के इलाकों में भी यही स्थिति देखने को मिली। कई स्थानों पर पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण लोगों को अपने घर और सामान्य ठिकाने छोड़ने पड़े।

    प्रशासन की प्राथमिकता इस समय प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही बाढ़ से कटे हुए क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है।

    बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक लापता

    नेपाल में आई इस बाढ़ ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। नेपाल पर्यटन बोर्ड की जानकारी के अनुसार, लापता यात्रियों में 105 भारतीय नागरिक शामिल हैं। नेपाल भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यटन और धार्मिक गंतव्य है और बड़ी संख्या में भारतीय हर वर्ष नेपाल की यात्रा करते हैं।

    अधिकारियों द्वारा लापता लोगों की पहचान और स्थिति की पुष्टि करने का काम जारी है। ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी लापता यात्रियों की स्थिति क्या है। राहत दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को खोजने का प्रयास कर रहे हैं।

    नेपाल और भारत के बीच नियमित आवाजाही को देखते हुए इस घटना पर दोनों देशों की एजेंसियों की नजर बनी हुई है। प्रभावित भारतीय नागरिकों के संबंध में अधिक जानकारी मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    नेपाल पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान भी लापता

    बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राहत और सुरक्षा कार्यों में तैनात कुछ सुरक्षाकर्मी भी लापता बताए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, रसुवा जिले में नेपाल पुलिस के कम से कम 26 जवानों के लापता होने की सूचना है। इसके अलावा सशस्त्र पुलिस बल के सात जवानों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

    यह स्थिति राहत एवं बचाव एजेंसियों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर रही है। प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने और कई जगहों पर पानी तथा मलबे के जमा होने के कारण बचाव दलों की आवाजाही मुश्किल हो सकती है।

    नेपाल सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े कर्मियों को तैनात किया है। सेना की ओर से बताया गया कि नुकसान का विस्तृत आकलन करने का काम शुरू कर दिया गया है। हेलीकॉप्टरों की मदद से उन इलाकों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है जहां जमीन के रास्ते जाना कठिन हो गया है।

    जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान

    बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा ढांचे को भी प्रभावित किया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, कई प्रमुख जलविद्युत और ट्रांसमिशन सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित प्रतिष्ठानों में रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3ए, त्रिशूली-3बी हब 220 केवी सबस्टेशन, त्रिशूली हाइड्रोपावर स्टेशन और देविघाट हाइड्रोपावर स्टेशन शामिल बताए गए हैं।

    विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान होने के कारण कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। पहाड़ी इलाकों में बिजली व्यवस्था का बाधित होना स्थानीय आबादी के साथ-साथ राहत एवं बचाव अभियान के लिए भी मुश्किलें बढ़ा सकता है।

    बिजली के बुनियादी ढांचे के अलावा कई सड़क मार्ग भी बंद होने की सूचना है। सड़क संपर्क टूटने से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में समय लग सकता है।

    प्रधानमंत्री ने बुलाई आपात बैठक

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की आपात बैठक बुलाई है। बैठक में बाढ़ से हुए नुकसान, राहत एवं बचाव अभियान और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय के साथ काम शुरू किया गया है। चिकित्सा टीमों, स्काउट्स और रेड क्रॉस से जुड़े लोगों को भी राहत प्रयासों में शामिल किया जा रहा है।

    सरकार का प्रयास प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने, लापता लोगों की तलाश तेज करने और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

    नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की सलाह

    नेपाल पुलिस ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने लोगों से नदी किनारे के इलाकों से सुरक्षित स्थानों की ओर जाने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने को कहा है।

    बाढ़ के बाद केवल तत्काल जलस्तर ही चिंता का विषय नहीं होता, बल्कि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क धंसने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक रूप से प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है।

    राहत एजेंसियां फिलहाल उन स्थानों की पहचान करने में जुटी हैं जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस, सेना और अन्य आपदा प्रतिक्रिया दल आपसी समन्वय से काम कर रहे हैं।

    मानसून के दौरान बढ़ता प्राकृतिक आपदा का खतरा

    दक्षिण एशिया में जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं आम हैं। नेपाल का पहाड़ी भूगोल इसे अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के लिहाज से विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है। भारी बारिश के साथ यदि नदियों में अचानक पानी बढ़ता है तो नदी घाटियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जोखिम काफी बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञ लंबे समय से यह भी कहते रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, किसी विशेष बाढ़ की घटना के पीछे जलवायु परिवर्तन की भूमिका का आकलन विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही किया जा सकता है।

    फिलहाल नेपाल में सबसे बड़ी प्राथमिकता जान-माल की सुरक्षा और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाना है। 16 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर ने आपदा की गंभीरता को सामने ला दिया है। 105 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना भारत के लिए भी विशेष चिंता का विषय है।

    जैसे-जैसे बचाव दल प्रभावित इलाकों तक पहुंचेंगे और प्रशासन को अधिक जानकारी मिलेगी, मृतकों, लापता लोगों और नुकसान के आंकड़ों में बदलाव संभव है। नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान जारी है और आने वाले घंटों में स्थिति को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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