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    PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन में तकनीकी गड़बड़ी, तीसरे चरण के अंत में आई समस्या: ISRO

    1 week ago

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के भरोसेमंद प्रक्षेपण यान PSLV को लेकर सोमवार को एक अहम अपडेट सामने आया है। PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन के दौरान तीसरे चरण (PS3) के अंत में तकनीकी गड़बड़ी (anomaly) दर्ज की गई, जिसके बाद मिशन के डेटा का विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया गया है। यह जानकारी स्वयं ISRO प्रमुख ने साझा की है।

    सोमवार सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 ने उड़ान भरी थी। यह प्रक्षेपण 22.5 घंटे की लंबी काउंटडाउन प्रक्रिया के बाद किया गया था। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 के साथ-साथ 15 सह-यात्री (co-passenger) उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाना था, जिन्हें भारत और विदेशों की स्टार्टअप कंपनियों व शैक्षणिक संस्थानों ने विकसित किया है।

    तीसरे चरण के अंत में दिखी गड़बड़ी

    ISRO के अनुसार, रॉकेट के पहले और दूसरे चरण का प्रदर्शन पूरी तरह अपेक्षा के अनुरूप रहा। तीसरे चरण के अंतिम हिस्से में वाहन के रोल रेट में अपेक्षा से अधिक अस्थिरता देखी गई, जिसके बाद उड़ान पथ में विचलन दर्ज किया गया। इसी बिंदु पर मिशन में तकनीकी अनियमितता सामने आई।

    ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि प्रक्षेपण यान का प्रदर्शन तीसरे चरण के अंत तक सामान्य था, लेकिन अंतिम क्षणों में कुछ असामान्य हलचल देखने को मिली। उन्होंने बताया कि इस विचलन के कारणों को समझने के लिए सभी टेलीमेट्री और उड़ान से जुड़े डेटा का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। संगठन जल्द ही इस पर विस्तृत जानकारी साझा करेगा।

    PSLV की विश्वसनीयता और तकनीकी चुनौती

    PSLV को ISRO का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल माना जाता है, जिसने दशकों में सैकड़ों सफल मिशन पूरे किए हैं। यह चार-चरणीय प्रक्षेपण यान है, जिसमें दो ठोस (solid) और दो द्रव (liquid) चरण होते हैं। इसी कारण इस मिशन में आई तकनीकी समस्या को अंतरिक्ष विशेषज्ञ गंभीरता से देख रहे हैं, हालांकि इसे एक सीख और सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा भी माना जा रहा है।

    अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी जटिल अंतरिक्ष मिशन में इस तरह की तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ISRO का मजबूत रिकॉर्ड और डेटा-आधारित विश्लेषण प्रणाली भविष्य के अभियानों को और सुरक्षित बनाने में सहायक होती है।

    EOS-N1 और सह-यात्री उपग्रहों का महत्व

    EOS-N1 एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसका उपयोग कृषि, शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किया जाना था। इसके साथ भेजे गए 15 अन्य उपग्रह भारत के उभरते अंतरिक्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम और शैक्षणिक संस्थानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    इन उपग्रहों का उद्देश्य तकनीकी प्रयोग, संचार, पृथ्वी अवलोकन और अनुसंधान को बढ़ावा देना था। मिशन में आई समस्या के कारण इन उपग्रहों की कक्षा स्थापना को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।

    आगे की राह

    ISRO ने स्पष्ट किया है कि मिशन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। आने वाले दिनों में संगठन की ओर से तकनीकी जांच रिपोर्ट और आगे की रणनीति साझा किए जाने की उम्मीद है।

     

    कुल मिलाकर, PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन में आई यह तकनीकी चुनौती ISRO के लिए एक अहम सीख मानी जा रही है। अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि इस विश्लेषण से भविष्य के मिशनों को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाया जाएगा।

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