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    एलओसी के पास ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, तलाशी अभियान तेज

    1 week ago

    जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास हाल के दिनों में ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शनिवार शाम को जम्मू-कश्मीर के कुछ सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध ड्रोन देखे गए, जिन पर सुरक्षाबलों ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। घटनाओं के बाद संबंधित क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया है।

    सूत्रों के मुताबिक, राजौरी, पुंछ और सांबा जिलों के कुछ हिस्सों में अलग-अलग समय पर उड़ते हुए ड्रोन जैसे ऑब्जेक्ट देखे गए। इनमें से एक घटना नौशेरा सेक्टर के पास दर्ज की गई, जहां सुरक्षाबलों ने मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई की। इसके अलावा, राजौरी जिले के कालाकोट और पुंछ के मंकोट सेक्टर के आसपास भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। कुछ स्थानों पर ड्रोन कुछ देर तक मंडराते हुए दिखाई दिए, जिसके बाद वे सीमा की दिशा में लौटते नजर आए।

    सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई

    सुरक्षा बलों ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि इन ड्रोन गतिविधियों का उद्देश्य क्या था। अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री या संदिग्ध वस्तु जमीन पर न गिरी हो।

    एक अधिकारी ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन की गतिविधियां नई चुनौती बनकर उभरी हैं, जिसे देखते हुए तकनीकी निगरानी और जमीनी सतर्कता दोनों को मजबूत किया जा रहा है। ड्रोन-रोधी प्रणालियों और रडार आधारित निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    पिछली घटनाओं से तुलना

    सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष एक बड़े सुरक्षा अभियान के बाद ड्रोन से जुड़ी घटनाओं में कमी देखी गई थी। हालांकि, हाल के दिनों में एक ही दिन में कई स्थानों पर ड्रोन देखे जाने की घटनाओं ने एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल निगरानी या अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, इसलिए हर घटना का सूक्ष्म विश्लेषण जरूरी है।

    स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की भूमिका

    स्थानीय प्रशासन ने भी नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील की है। सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे अनजान वस्तुओं को न छुएं और ऐसी किसी भी चीज़ की जानकारी तुरंत प्रशासन या सुरक्षा बलों को दें।

    ग्रामीणों का कहना है कि शाम के समय आसमान में असामान्य रोशनी या आवाजें दिखाई देना चिंता का विषय होता है, लेकिन सुरक्षाबलों की त्वरित मौजूदगी से उन्हें भरोसा भी मिलता है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अफवाहों से बचना जरूरी है और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।

    तकनीकी निगरानी पर जोर

    ड्रोन गतिविधियों से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही हैं। ड्रोन-रोधी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग उपकरण और रियल-टाइम सर्विलांस को मजबूत किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन की पहचान और उसे निष्क्रिय करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति अपनाना समय की मांग है।

    इसके साथ ही, मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भी निगरानी की योजना बनाई जा रही है, क्योंकि पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में ड्रोन की पहचान चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    स्थिति नियंत्रण में, जांच जारी

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। सभी घटनाओं की जांच जारी है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सुरक्षा कदम उठाए जाएंगे। आने वाले दिनों में ड्रोन गतिविधियों के पैटर्न और उद्देश्यों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की संभावना है।

     

    कुल मिलाकर, एलओसी के पास ड्रोन से जुड़ी हालिया घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। हालांकि, त्वरित प्रतिक्रिया, तकनीकी निगरानी और स्थानीय सहयोग के चलते हालात पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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