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    दिसंबर में खुदरा महंगाई तीन महीने के उच्च स्तर पर, महंगाई में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत

    1 week ago

    देश की खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2025 में बढ़कर 1.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो नवंबर में 0.7 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा बीते तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और यह संकेत देता है कि लंबे समय से जारी बेहद कम महंगाई का दौर अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट की रफ्तार थमने लगी है, जिसका असर कुल खुदरा महंगाई पर साफ दिखाई दे रहा है।

    पिछले कुछ महीनों से खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के दायरे के निचले स्तर से भी नीचे बनी हुई थी। हालांकि, दिसंबर के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि महंगाई अब धीरे-धीरे केंद्रीय बैंक के मध्यम अवधि के लक्ष्य 4 प्रतिशत की ओर बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते वर्ष के ऊंचे आधार प्रभाव का असर अब कमजोर पड़ने लगा है, जिसके चलते आने वाले महीनों में महंगाई में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    खाद्य महंगाई, जिसका उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में लगभग 40 प्रतिशत का वजन है, दिसंबर में भी नकारात्मक दायरे में रही। हालांकि, इसमें गिरावट की गति कम होकर -2.7 प्रतिशत पर आ गई, जबकि नवंबर में यह -3.9 प्रतिशत थी। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, महीने-दर-महीने के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी हो रही है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जून 2025 से जारी खाद्य मूल्य में गिरावट का दौर अब अपने अंतिम चरण में है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अनुकूल आपूर्ति स्थिति और बीते वर्ष की तुलना में ऊंचे आधार के कारण खाद्य कीमतों में लंबे समय तक गिरावट बनी रही। लेकिन अब मौसम, मांग में सुधार और आधार प्रभाव के कमजोर होने से कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है। इसका सीधा असर आने वाले महीनों की खुदरा महंगाई पर पड़ने की संभावना है।

    दिसंबर के आंकड़ों के आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में औसत खुदरा महंगाई 0.8 प्रतिशत रही, जो केंद्रीय बैंक के अनुमान 0.6 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। हालांकि यह स्तर अब भी लक्ष्य से काफी नीचे है, लेकिन बढ़ती प्रवृत्ति नीति निर्धारकों के लिए सतर्कता का संकेत जरूर देती है।

    भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले वर्ष फरवरी से अब तक कुल 125 आधार अंकों की कटौती की है। यह कदम मुख्य रूप से कम महंगाई और कीमतों पर सीमित दबाव को देखते हुए उठाया गया था। लेकिन मौजूदा रुझानों को देखते हुए माना जा रहा है कि आगे की मौद्रिक नीति में केंद्रीय बैंक अधिक सतर्क रुख अपना सकता है।

    आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच प्रस्तावित है, जो आम बजट के तुरंत बाद होगी। ऐसे में बजट से मिलने वाले राजकोषीय संकेत, महंगाई के ताजा आंकड़े और आर्थिक विकास की स्थिति — तीनों ही नीति निर्णयों में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई इसी तरह धीरे-धीरे बढ़ती रही, तो ब्याज दरों में और कटौती की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं।

     

    कुल मिलाकर, दिसंबर के खुदरा महंगाई आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था कम महंगाई के असाधारण दौर से बाहर निकल रही है। हालांकि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है, लेकिन आने वाले महीनों में कीमतों की चाल पर नज़र रखना नीति निर्माताओं और आम उपभोक्ताओं — दोनों के लिए अहम होगा।

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