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    संस्कृत शिक्षा विभाग में 500 में से लगभग 300 प्रधानाचार्य पद खाली

    6 hours ago

    संस्कृत शिक्षा में प्रधानाचार्य पद पर लंबित पदोन्नति की मांग को लेकर राजस्थान संस्कृत विकास समिति ने सीएमओ में पुनः दिया स्मरण ज्ञापन

    जुलाई 2025 से संस्कृत शिक्षा के व्याख्याताओं की वरिष्ठता निर्धारण पत्रावली सचिवालय में लंबित

    राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभाग में 01.04.25 से प्राध्यापक संवर्ग से प्रधानाचार्य वरिष्ठ उपाध्याय के पद पर दो सत्रों से बकाया पदोन्नति कराने के लिए सचिवालय में जुलाई 2025 से लंबित प्राध्यापकों की वरिष्ठता निर्धारण संबंधी पत्रावली के शीघ्र निस्तारण की मांग को लेकर राजस्थान संस्कृत विकास समिति की ओर से मुख्यमंत्री के नाम पुनः स्मरण ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ), मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव एवं शिक्षा सचिव एवं आयुक्त संस्कृत शिक्षा को प्रस्तुत किया गया है।

    समिति की ओर से बताया गया कि इस संबंध में पूर्व में भी मुख्यमंत्री कार्यालय, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी एवं संस्कृत शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन जुलाई 2025 से पत्रावली विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन रहने के बावजूद अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। समिति के अनुसार कार्मिक विभाग से प्राप्त जानकारी में पत्रावली को सीएमओ में सर्कुलर अप्रूवल के लिए भेजे जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद लंबे समय से निर्णय लंबित रहने से संस्कृत शिक्षा विभाग में पदोन्नति की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो रही है। समिति लगातार लिखित एवं मौखिक रूप से अभ्यावेदन प्रस्तुत कर रही है लेकिन प्रकरण को अनावश्यक लंबा खींचा जा रहा है।

    अप्रेल 2025 से संस्कृत शिक्षा के प्राध्यापक संवर्ग से प्रधानाचार्य वरिष्ठ उपाध्याय पद की पदोन्नति बकाया

    समिति ने बताया कि निदेशालय संस्कृत शिक्षा से उपलब्ध लोक सूचना के अनुसार 01 अप्रैल 2025 की स्थिति में रिक्तियों के आधार पर प्राध्यापक संवर्ग से वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालयों के प्रधानाचार्य पदों पर 80 प्रतिशत पदोन्नति कोटे से लगभग 220 पद रिक्त बताए गए हैं। ज्ञापन में इन पदों को समयबद्ध रूप से पदोन्नति द्वारा भरने की मांग की गई है।इसी तरह संस्कृत विद्यालयों में कुल लगभग 500 में से 300 वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालयों के प्रधानाचार्य के पद अलग-अलग सत्र के रिक्त हैं जो नियमानुसार शत प्रतिशत पदोन्नति से ही भरे जाने हैं।

    प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति लंबित रहने से संस्कृत शिक्षा के प्राध्यापकों एवं वरिष्ठ अध्यापकों के पद पर भी अटकी पदोन्नति

    समिति का कहना है कि वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालयों में प्रधानाचार्य पदों के रिक्त रहने का प्रभाव केवल एक पद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नीचे के स्तर पर होने वाली पदोन्नतियां भी प्रभावित हो रही हैं। प्रधानाचार्य पदों पर समय पर पदोन्नति होने से प्राध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक सहित अन्य संवर्गों में पदोन्नति का मार्ग भी खुल सकता है।

    जोधपुर सहित कई संभागों में संस्कृत विद्यालयों में 65% पद रिक्त, संस्कृत विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित

    समिति ने संस्कृत शिक्षा विभाग की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अनेक संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। इसके कारण विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा विद्यार्थियों को पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव नामांकन पर भी पड़ रहा है।

    मुख्य सचिव ने संस्कृत को बढ़ावा देने की बात करते हुए प्रधानाचार्यों से संवाद की इच्छा जताई जबकि 60% संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य ही नहीं

    विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि हाल ही में संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव द्वारा संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से संवाद करने की बात कही गई। समिति ने इस संदर्भ में कहा कि जब बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य पद ही रिक्त हैं, तब विद्यालयों की वास्तविक समस्याओं और जमीनी स्थिति की समुचित जानकारी शासन के उच्च स्तर तक पहुंचाने के लिए पदों को शीघ्र भरना भी आवश्यक है।विभाग स्तर से सचिवालय को वास्तविक स्थिति से अवगत कराना चाहिए ताकि भविष्य में संस्कृत शिक्षा के विद्यार्थियों के साथ न्याय हो सके।

    समिति ने कहा कि एक ओर सरकार संस्कृत को शिक्षा, संस्कृति एवं रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर संस्कृत विद्यालयों में बड़ी संख्या में पद रिक्त रहना गंभीर प्रशासनिक एवं शैक्षणिक चुनौती है। इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ रहा है।

    विभाग ने समाप्त केडर की पदोन्नति कर दी उसी वर्ष की प्राध्यापकों की पदोन्नति डेढ़ साल से लंबित

    समिति ने मुख्यमंत्री एवं संबंधित विभागों से मांग की कि वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालयों के प्रधानाचार्य पदों पर प्राध्यापक संवर्ग की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया का शीघ्र निस्तारण कर समयबद्ध पदोन्नति आदेश जारी किए जाएं। इससे एक ओर विद्यालयों में प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी, वहीं दूसरी ओर प्राध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक संवर्ग की पदोन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

    राजस्थान संस्कृत विकास समिति ने इसे संस्कृत शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अत्यंत आवश्यक कदम बताते हुए कहा कि लंबित पदोन्नतियों का समयबद्ध निस्तारण संस्कृत विद्यालयों के लिए संजीवनी के समान साबित हो सकता है। समिति ने सरकार से प्रकरण को और लंबित न रखते हुए शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की।

     

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