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    वेनेजुएला घटनाक्रम के बाद क्यूबा को लेकर अमेरिका का सख्त रुख, डील करने की चेतावनी

    1 day ago

    वेनेजुएला से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद अमेरिका और क्यूबा के संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि क्यूबा ने समय रहते अमेरिका के साथ समझौता नहीं किया, तो उसे आर्थिक और ऊर्जा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। राष्ट्रपति के इस बयान को पश्चिमी गोलार्ध की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर अपने संदेश में कहा कि क्यूबा को अब वेनेजुएला से मिलने वाले तेल और आर्थिक सहयोग पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसी किसी भी व्यवस्था को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, जब तक कि क्यूबा अमेरिका के साथ बातचीत और समझौते के लिए आगे नहीं आता। ट्रंप ने यह भी कहा कि क्यूबा को समय रहते अपने विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, बीते वर्षों में क्यूबा की अर्थव्यवस्था को वेनेजुएला से मिलने वाले संसाधनों से काफी सहारा मिला। उनका दावा है कि बदले में क्यूबा ने वेनेजुएला को आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं प्रदान की थीं। हालांकि, अब हालात बदल चुके हैं और अमेरिका क्षेत्र में अपनी भूमिका को पहले से अधिक सक्रिय रूप में देख रहा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वेनेजुएला की सुरक्षा को लेकर अमेरिका की भूमिका अहम हो गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। इस बयान को अमेरिका की नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें लैटिन अमेरिकी देशों के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश की जा रही है।

    क्यूबा की प्रतिक्रिया

    अमेरिकी बयान के कुछ ही समय बाद क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज़-कैनेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि क्यूबा एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और वह किसी बाहरी दबाव में अपने फैसले नहीं लेता। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है, जिसका एक बड़ा कारण बाहरी प्रतिबंध और दबाव रहे हैं।

    क्यूबा के राष्ट्रपति ने अपने संदेश में यह स्पष्ट किया कि देश की नीतियां राष्ट्रीय हितों और जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा टकराव की बजाय संवाद और आपसी सम्मान के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विश्वास रखता है।

    क्षेत्रीय राजनीति पर असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और क्यूबा के बीच बढ़ता यह तनाव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वेनेजुएला, क्यूबा और अमेरिका के बीच समीकरण लंबे समय से जटिल रहे हैं और हालिया बयानबाज़ी से इन संबंधों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका का यह रुख घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय रणनीति दोनों से जुड़ा हो सकता है। वहीं, क्यूबा के लिए यह स्थिति आर्थिक मोर्चे पर नई चुनौतियां ला सकती है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के संदर्भ में।

    आगे की राह

     

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि क्यूबा अमेरिका के प्रस्तावित संवाद या समझौते को लेकर क्या रुख अपनाएगा। दोनों देशों के बीच संबंधों का इतिहास लंबा और जटिल रहा है, जिसमें सहयोग और तनाव के कई दौर देखने को मिले हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोई नई पहल होती है या फिर बयानबाज़ी का यह दौर और आगे बढ़ता है।

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