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    CSPOC 2026 में पीएम मोदी का संबोधन: समावेशी लोकतंत्र और ग्लोबल साउथ की मजबूत पैरवी

    3 days ago

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद भवन में आयोजित 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स सम्मेलन (CSPOC) 2026 को संबोधित करते हुए भारत की समावेशी लोकतांत्रिक परंपरा और विकासशील देशों के हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत का विकास मॉडल समानता, नवाचार और सहयोग पर आधारित है, जिसमें “कोई भी पीछे न छूटे” की भावना केंद्र में है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत केवल अपने नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों के लिए भी साझा प्रगति की दिशा में काम कर रहा है।

    ग्लोबल साउथ के हितों की मजबूत आवाज

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ग्लोबल साउथ के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है। उन्होंने भारत की G20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा गया।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत द्वारा विकसित की जा रही तकनीकी प्रणालियाँ केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें साझेदार देशों के लिए भी सुलभ बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है, ताकि ग्लोबल साउथ के देश भी भारत जैसे तकनीकी समाधान विकसित कर सकें।

    यह पहल वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने और समान विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    आर्थिक प्रगति और डिजिटल नेतृत्व

    प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने डिजिटल भुगतान, विनिर्माण और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया।

    यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणालियों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसने वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। इसके अलावा, भारत आज वैश्विक स्तर पर वैक्सीन उत्पादन में अग्रणी देशों में है और इस्पात उत्पादन में भी शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है।

    “कोई भी पीछे न छूटे”: भारतीय लोकतंत्र की पहचान

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की समावेशी प्रकृति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में शासन का आधार जनकल्याण है और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    उनके अनुसार, इसी सोच के कारण हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में लोग आर्थिक कठिनाइयों से बाहर निकल पाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रभावी नीति क्रियान्वयन और सामाजिक न्याय का माध्यम भी है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक के कल्याण के लिए कार्य कर रहा है, जिससे लोकतंत्र वास्तविक रूप में परिणाम देने वाला तंत्र बन गया है।

    भारत की लोकतांत्रिक परंपरा

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने लोकतंत्र को एक विशाल वृक्ष की संज्ञा दी, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी हैं।

    उन्होंने प्राचीन ग्रंथों और ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में संवाद, विमर्श और सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा लंबे समय से रही है। सभाओं और चर्चाओं के माध्यम से निर्णय लेने की यह संस्कृति भारतीय लोकतंत्र की मजबूत नींव को दर्शाती है।

    2024 के आम चुनावों का उल्लेख

    प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 के आम चुनावों को मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास बताया। उन्होंने कहा कि इसमें लगभग एक अरब मतदाता पंजीकृत थे, हजारों उम्मीदवार मैदान में थे और सैकड़ों राजनीतिक दलों ने भाग लिया।

    उन्होंने महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं की उपस्थिति को भारत के लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया।

    लोकतंत्र और विकास पर उठने वाले सवाल

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्सर यह सवाल उठाया जाता है कि क्या लोकतंत्र तेज विकास को संभव बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने यह सिद्ध किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ स्थिरता, गति और व्यापक विकास तीनों को एक साथ आगे बढ़ा सकती हैं।

    उनके अनुसार, लोकतंत्र ने भारत को न केवल मजबूत संस्थागत ढांचा दिया है, बल्कि विकास को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    संविधान सदन का महत्व

    प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के केंद्रीय कक्ष, जिसे अब संविधान सदन (सम्विधान सदन) कहा जाता है, के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह भवन स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक संसद के रूप में कार्य करता रहा और देश के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय यहीं लिए गए।

    इसका नामकरण संविधान सदन के रूप में किया जाना भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    CSPOC 2026 के बारे में

    14 से 16 जनवरी तक आयोजित CSPOC 2026 सम्मेलन की मेजबानी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में की जा रही है। इसमें कॉमनवेल्थ के 40 से अधिक देशों के संसद अध्यक्ष और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

     

    सम्मेलन में संसदीय कार्यों में तकनीक की भूमिका, नागरिक सहभागिता बढ़ाने के उपाय, विधायी संस्थाओं की सुरक्षा और आधुनिक लोकतंत्र से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है।

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