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    भारत की रक्षा क्षमता को बड़ी मजबूती: फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे पर रक्षा मंत्रालय की अहम बैठक

    3 days ago

    भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय इस सप्ताह फ्रांस के साथ लगभग ₹3.25 लाख करोड़ के बड़े रक्षा सौदे पर उच्चस्तरीय चर्चा करने जा रहा है। इस प्रस्ताव के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

    यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जाएगा, जिससे देश की वायु शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    भारत में होगा निर्माण, स्वदेशी हिस्सेदारी भी शामिल

    सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव के अंतर्गत राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    हालांकि आमतौर पर मेक इन इंडिया परियोजनाओं में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी 50 से 60 प्रतिशत तक होती है, लेकिन तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए इस परियोजना में प्रारंभिक स्तर पर 30 प्रतिशत स्वदेशीकरण प्रस्तावित किया गया है।

    कुछ विमान सीधे उड़ान योग्य स्थिति में मिलेंगे

    प्रस्ताव के अनुसार, 12 से 18 राफेल विमान भारतीय वायुसेना को सीधे फ्लाई-अवे कंडीशन में सौंपे जा सकते हैं, ताकि तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके। शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिससे समय के साथ स्थानीय उत्पादन क्षमता विकसित हो सके।

    भारतीय हथियार प्रणालियों के एकीकरण पर जोर

    भारत ने फ्रांस के समक्ष यह अनुरोध भी रखा है कि राफेल विमानों में भारतीय हथियारों और स्वदेशी प्रणालियों को एकीकृत करने में सहयोग किया जाए। यह व्यवस्था सरकार-से-सरकार समझौते के तहत की जाएगी।

    हालांकि, इस सौदे में विमान के सोर्स कोड फ्रांस के पास ही रहेंगे, जिससे तकनीकी सुरक्षा और बौद्धिक संपदा से जुड़े मुद्दों का संतुलन बना रहेगा।

    अन्य देशों के प्रस्तावों के बावजूद फ्रांस पर भरोसा

    गौरतलब है कि अमेरिका और रूस दोनों ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान—F-35 और Su-57—की पेशकश की है। इसके बावजूद भारत का फ्रांस के साथ राफेल सौदे को आगे बढ़ाना, दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

    राफेल विमानों का प्रदर्शन, विश्वसनीयता और बहु-भूमिका क्षमता भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप मानी जाती है।

    राफेल बेड़े में बड़ी बढ़ोतरी

    यदि यह प्रस्ताव मंजूरी पाता है, तो भारतीय सैन्य बलों में राफेल विमानों की संख्या 176 तक पहुँच जाएगी। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल विमान पहले से मौजूद हैं, जबकि भारतीय नौसेना ने हाल ही में 26 राफेल-एम विमानों का ऑर्डर दिया है।

    यह विस्तार वायुसेना की परिचालन क्षमता को और अधिक सशक्त करेगा।

    अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया

    भारतीय वायुसेना द्वारा इस परियोजना से संबंधित स्टेटमेंट ऑफ केस (SoC) कुछ समय पहले रक्षा मंत्रालय को सौंपा जा चुका है। रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास अंतिम स्वीकृति के लिए जाएगा।

    इस पूरी प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि समयबद्ध तरीके से वायुसेना की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

    रखरखाव और इंजन सुविधा भारत में

    फ्रांस की योजना के अनुसार, भारत में M-88 इंजन के लिए एक अत्याधुनिक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित की जाएगी। यह सुविधा हैदराबाद में प्रस्तावित है और इससे दीर्घकालीन रखरखाव में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

    इसके अलावा, फ्रांसीसी कंपनी पहले ही फ्रांस-निर्मित लड़ाकू विमानों के रखरखाव के लिए एक अलग इकाई बना चुकी है। भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों, विशेषकर टाटा समूह, की भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण भागीदारी होने की संभावना है।

    क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की जरूरतें

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत के लिए लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। भारतीय वायुसेना की भविष्य की ताकत मुख्य रूप से Su-30 MKI, राफेल और स्वदेशी लड़ाकू परियोजनाओं पर आधारित होगी।

    भारत पहले ही 180 एलसीए तेजस मार्क-1A विमानों का ऑर्डर दे चुका है और 2035 के बाद स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी बड़ी संख्या में शामिल करने की योजना है।

    आत्मनिर्भर रक्षा की दिशा में बड़ा कदम

     

    114 राफेल विमानों का यह प्रस्ताव न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करेगा। तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय उत्पादन और रखरखाव सुविधाओं के माध्यम से यह सौदा भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर और आगे ले जाएगा।

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