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    जहाँ बहा था खून, वहीं आज बचीं ज़िंदगियाँ:3132 यूनिट रक्तदान से शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि

    1 month ago

    –यंग इंडिया का यंग संकल्प: जेईसीआरसी ने दिए 1940 नए फर्स्ट-टाइम डोनर्स

     

    –जहाँ डर नहीं, हिम्मत है: 1012 फीमेल स्टूडेंट्स ने ब्लड डोनेट कर रचा इतिहास 

     

    -20,000 से अधिक ब्लड डोनेशन्स के सफर के बाद जेईसीआरसी का नया माइलस्टोन — 3132 यूनिट्स इन वन डे

     

     

    जयपुर,

     

    26/11 का दिन देश के इतिहास में एक गहरे ज़ख्म की तरह दर्ज है, लेकिन जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने इस दिन को सिर्फ़ याद करने के बजाय इसे मानवता की सेवा का दिन बनाने का संकल्प लिया। शहादत का सम्मान तभी सार्थक होता है जब हम उस बहादुरी से मिली प्रेरणा को किसी की ज़िंदगी बचाने में बदल दें। इसी महान भावना के साथ, डेंगू, कैंसर और थैलेसीमिया के मरीज़ों की मदद हेतु 20,594 ब्लड डोनेशन और 2,430 एसडीपी डोनेशन कर चुकी टीम ‘आशाएं’ ने कल एक भव्य ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किया- जहाँ देशभक्ति, करुणा और मानवता का असाधारण मेल देखने को मिला।

     

    सुबह 9 बजे से शुरू हुए इस महाकुंभ में देर शाम तक कुल 3132 यूनिट्स रक्त एकत्रित किया गया। इस कैंप की सबसे खूबसूरत तस्वीर वह थी जब बड़ी संख्या में फर्स्ट टाइम डोनर्स आगे आए। पहली बार रक्तदान करने वाले 1940 छात्रों के चेहरे पर डर की जगह गर्व साफ़ झलक रहा था। इस महादान में लड़कों के साथ-साथ लड़कियों की भागीदारी भी देखने लायक थी, जहाँ कुल डोनर्स में 1012 छात्राएं शामिल थीं।

     

    रक्तदान के पुनीत कार्य में युवाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए सेना और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य अतिथि के रूप में साउथ वेस्टर्न कमांड के चीफ़ सिग्नल ऑफ़िसर, मेजर जनरल अनिंद्य औडी के साथ सीआरपीएफ के जवानों ने विशेष रूप से शिरकत की। मेज़र जनरल औडी ने छात्रों के अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए संदेश दिया कि सच्ची देशभक्ति केवल वर्दी पहनने में नहीं बल्कि देशवासियों के काम आने में है और जेईसीआरसी के छात्रों का यह जज़्बा देश के सुरक्षित भविष्य का संकेत है।

     

     इस दौरान, साइबर क्राइम के डीआईजी विकास शर्मा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और युवाओं द्वारा दिखाई गई इस सामाजिक एकजुटता को राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक अहम कदम बताया।।

     

    इनके साथ ही समाज सेवा और ड्रग डिपार्टमेंट में पिछले 20 सालों से सक्रिय रेणु जिंदल ने स्टूडेंट्स को पढ़ाई के साथ-साथ ह्युमन वैल्यूज़ से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया और मेंटल हेल्थ व कम्युनिटी सर्विस के प्रति छात्रों की जागरूकता को एक सशक्त समाज की जरूरत बताया।

     

    इतने बड़े स्तर पर ब्लड कलेक्शन को ऑर्गेनाइज़्ड तरीके से मैनेज करने के लिए टीम आशाएं ने जयपुर के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ जोड़ दिया और शहर के प्रमुख अस्पतालों जैसे महात्मा गांधी हॉस्पिटल, नारायणा हॉस्पिटल, मिलिट्री हॉस्पिटल, एसएमएस हॉस्पिटल, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल (एसडीएमएच), फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ईएचसीसी और भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल ने इस मुहिम में सहयोग दिया।

     

    इस मौके पर जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर विक्टर घंभीर ने कहा कि 26/11 की याद में हमारे स्टूडेंट्स ने सेवा का जो रास्ता चुना है वह न केवल काबिले तारीफ है बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक मिसाल है। उन्होंने रेखांकित किया कि एजूकेशन का मत्लब सिर्फ़ ऐकडेमिक क्वालिफ़िकेशंस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका परम लक्ष्य समाज के प्रति ज़िम्मेदार और मानवीय मूल्यों से प्रभावित पर्सनैलिटी का निर्माण करना है। उन्होंने इन 3132 यूनिट्स को महज आंकड़े न मानकर 3132 जिंदगियों का जीवनदान बताया।

     

    वहीं, फ़ैकल्टी कोऑर्डिनेटर प्रो. जगदेव सिंह ने छात्रों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि शहीदों को याद करने का इससे सशक्त माध्यम कोई नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि हमारे छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह जागरूक हैं।

     

    असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शैव्य कुमार पांडेय ने ‘आशाएं’ को निस्वार्थ सेवा की विचारधारा बताया, वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर नेहा वर्मा ने फीमेल्स और नए डोनर्स के इन्वॉल्वमेंट को सामाजिक बदलाव की नींव कहा।

     

    यह पूरा आयोजन जेईसीआरसी के इनिशिएटिव आशाएं - द लाइफ सेवियर्स की उस कमिटमेंट का हिस्सा है जो 2003 से लगातार जारी है। यूनिवर्सिटी की शुरुआत (2017) के बाद, यह ग्रुप 24x7 जरूरतमंदों को ब्लड और एसडीपी उपलब्ध करवाने के लिए डेडिकेटेड है।

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