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    मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, अनिल अंबानी का ₹3,716 करोड़ का मुंबई स्थित बंगला जब्त

    1 month ago

    नई दिल्ली | 26 फरवरी 2026

    देश के सबसे चर्चित कॉरपोरेट मामलों में से एक में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आलीशान आवास को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह 17 मंजिला इमारत ‘अबोड’ (Abode) मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल में स्थित है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹3,716.83 करोड़ बताई जा रही है।

    यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में की गई है, जिसका संबंध अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) से बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक जब्त या अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग ₹15,700 करोड़ तक पहुंच गया है।

    दिल्ली में दोबारा पूछताछ के लिए बुलाए जा सकते हैं अनिल अंबानी

    सूत्रों के मुताबिक, 66 वर्षीय अनिल अंबानी को जल्द ही दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष दूसरी बार पूछताछ के लिए पेश होना पड़ सकता है। इससे पहले अगस्त 2025 में उनसे पूछताछ की गई थी, जहां उनका बयान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया गया था।

    आरकॉम से जुड़े कथित बैंक घोटाले की जांच तेज

    ईडी की यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन मामले की व्यापक जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसी इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ रही है, जिनमें धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं।

    जांच के दौरान ईडी ने मुंबई और दिल्ली में 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में 50 से ज्यादा कंपनियां और लगभग 25 से अधिक अधिकारी व अन्य संबंधित लोग जांच के दायरे में आए हैं।

    ₹3,000 करोड़ के लोन डायवर्जन का आरोप

    प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से लिए गए लगभग ₹3,000 करोड़ के ऋण को कथित तौर पर शेल कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन फंड्स को राउंड-ट्रिपिंग के जरिए दोबारा समूह से जुड़ी इकाइयों तक पहुंचाया गया।

    इसके अलावा, लोन मंजूरी से पहले और बाद की प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। इनमें बिना उचित जांच के लोन स्वीकृति, बैकडेटेड दस्तावेज और औपचारिक मंजूरी से पहले ही धनराशि जारी किए जाने जैसे बिंदु शामिल हैं।

    आरकॉम पर एसबीआई का ‘फ्रॉड’ टैग, दिवालियापन की प्रक्रिया जारी

    इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसके प्रमोटर अनिल अंबानी को ‘फ्रॉड’ घोषित किया जाना भी शामिल है। बैंक का कुल जोखिम ₹3,000 करोड़ से अधिक का बताया गया है, जिसमें फंड-आधारित लोन और बैंक गारंटी दोनों शामिल हैं।

    वर्तमान में आरकॉम नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवालियापन प्रक्रिया से गुजर रही है, जबकि एसबीआई ने अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही भी शुरू कर दी है।

    जांच के नए चरण में प्रवेश

     

    ‘अबोड’ संपत्ति के अटैचमेंट के साथ यह मामला अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है, जिससे देश के कॉरपोरेट और बैंकिंग सेक्टर पर इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

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