Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    राजस्थान विश्वविद्यालय 2013 नियुक्ति विवाद: सारस्वत समिति की निष्पक्षता पर सवाल, एन.सी. गौतम समिति पर अधिनियम उल्लंघन का आरोप — डॉ. संजय कुमार (पूर्व अध्यक्ष, RUTA)

    1 hour ago

    राजस्थान विश्वविद्यालय में वर्ष 2013 में शिक्षकों की नियुक्तियों के संबंध में वर्तमान कुलगुरु द्वारा गठित एन.सी. गौतम समिति राजस्थान विश्वविद्यालय अधिनियम, 1946 का खुला उल्लंघन है। डॉ. संजय कुमार, पूर्व अध्यक्ष RUTA ने कहा कि अधिनियम की धारा 10(7) के प्रावधानों की अवहेलना करते हुए इस प्रकार की समिति का गठन पूर्णतः अनुचित है। वहीं, राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा अधिनियम की धारा 10(5) के अंतर्गत प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत के संयोजन में विधिवत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, जिसकी अनुशंसा पर राजभवन द्वारा 27 मई 2026 को कार्यवाही की गई। उन्होंने कहा कि जांच समिति द्वारा लगाए गए आरोप विशेषकर अध्यादेश 141 के अपेंडिक्स-III, टेबल-II (A) के तहत अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग को मनमाना बताना पूरी तरह तथ्यहीन एवं निराधार हैं। इस प्रावधान को वर्ष 2014 में माननीय उच्च न्यायालय, राजस्थान में चुनौती दी गई थी (D.B. Civil Writ Petition No. 20344/2013, Dr. Rashmi Nair & Others vs State of Rajasthan & Another), जिसे डबल बेंच ने खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय द्वारा अपनाया गया फार्मूला यूजीसी नियमों एवं विश्वविद्यालय के अध्यादेशों के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार की कोई अन्यायपूर्ण प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। डॉ. कुमार ने कहा कि जब उक्त प्रावधान को न्यायालय द्वारा विधिसम्मत घोषित किया जा चुका है, तब 13 वर्ष बाद उसी आधार पर समिति द्वारा निर्णय देना न्यायिक मर्यादाओं एवं अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण है। यह कार्यवाही भारतीय संविधान एवं न्यायपालिका की स्थापित व्यवस्था के विपरीत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित समिति ने जांच के दौरान तत्कालीन कुलपति, कुलसचिव, वित्त अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों का पक्ष सुने बिना ही रिपोर्ट तैयार की, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है। वर्ष 2013 में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के शिक्षकों की बैकलॉग भर्ती पूर्णतः नियमानुसार की गई थी। वर्तमान में इन शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया जारी है, जिसे अनावश्यक रूप से बाधित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की समितियों के माध्यम से विवाद खड़ा किया जा रहा है। यह आरक्षित वर्ग के शिक्षकों के अधिकारों के साथ अन्याय है और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को भी प्रभावित करता है। डॉ. संजय कुमार ने मांग की कि—वर्तमान कुलगुरु द्वारा गठित एन.सी. गौतम समिति को तत्काल निरस्त किया जाए। 2013 की वैध नियुक्तियों एवं वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक हस्तक्षेप रोका जाए। अंत में उन्होंने कहा कि इस विषय में औपचारिक विरोध दर्ज कराया जाएगा तथा माननीय कुलाधिपति से शीघ्र न्यायोचित कार्यवाही की अपेक्षा की जाती है।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    महिला नेतृत्व साइक्लोथाॅन ने रचा इतिहास : विश्व साइकिल दिवस पर सैकड़ों साइकिल चालकों ने दिया स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश, गर्ल्स ने लिया बढ़चढ़कर भाग
    Next Article
    पुलिस से झड़प के बाद 4 सूत्रीय मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से बनी सहमति

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment