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    अब गांव-गांव तक पहुंचेगी करियर की सही राह, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी और मोइनी फाउंडेशन के बीच एमओयू

    1 hour ago

    -मनोविज्ञान और तकनीक की जुगलबंदी से बनेगा देशभर के छात्रों के लिए डिजिटल गाइडेंस प्लेटफॉर्म

    -आठवीं-नौवीं कक्षा से ही एप्टीट्यूड टेस्ट पर जोर, समय रहते पहचानी जाएगी बच्चों की असली क्षमता

    -ग्रामीण और वंचित तबके के छात्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी, स्कूली स्तर पर होगी करियर काउंसलिंग

    जयपुर,

    करियर के चुनाव में भटकाव आज भी लाखों स्टूडेंट्स और उनकी फैमिली की सबसे बड़ी चिंता है, और इसी भटकाव को कम करने के मकसद से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी की करियर डेवलपमेंट एंड गाइडेंस सेल (सीडीजीसी) और मोइनी फाउंडेशन के बीच एक एमओयू साइन किया गया, जिसके तहत रूरल और गवर्नमेंट स्कूलों के स्टूडेंट्स को साइंटिफिक करियर गाइडेंस दी जाएगी। इस पार्टनरशिप में यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजिकल एक्सपर्टीज़ और फाउंडेशन की टेक्निकल स्ट्रेंथ मिलकर एक नया मॉडल तैयार करेंगी।

    मोइनी फाउंडेशन पिछले कुछ वर्षों से करियर अवेयरनेस और डिजिटल एजुकेशन के फील्ड में काम कर रहा है। सीडीजीसी के साथ यह कोलैबोरेशन इसी काम को एक बड़ा प्लेटफॉर्म देने की कोशिश है। यह कदम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 की उस सोच से भी मेल खाता है, जिसमें हर बच्चे की अपनी क्षमता और रुचि को समझकर उसे एक से ज़्यादा विषयों में आगे बढ़ने का मौका देने पर जोर दिया गया है।

    मोइनी फाउंडेशन के फाउंडर और चीफ मेंटर अरविंद थानवी का कहना है कि ज्यादातर बच्चे बड़ी क्लासेस में आकर जल्दबाजी में करियर डिसीजन ले लेते हैं, इसलिए अवेयरनेस अर्ली स्टेज से ही जरूरी है और करियर को लेकर बातचीत स्कूल के शुरुआती सालों से ही शुरू हो जानी चाहिए। उनकी टीम ऐसे टेक टूल्स डेवलप कर रही है जिनकी मदद से लिमिटेड मैनपावर के बावजूद यह कैंपेन सैकड़ों स्कूलों तक बड़े स्केल पर पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने यूनिवर्सिटी के यंगस्टर्स को भी इस प्रोजेक्ट से जुड़कर अपने स्किल्स शार्पन करने के लिए प्रेरित किया।

    आज के कॉम्पिटिटिव दौर में सही करियर चुनना बच्चों और पैरेंट्स, दोनों के लिए एक बड़ी चैलेंज बताते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रोफ. विक्टर गंभीर ने कहा कि 11वीं में सब्जेक्ट चुनने से पहले, यानी 8वीं-9वीं क्लास में ही एप्टीट्यूड टेस्ट हो जाना चाहिए, ताकि बच्चे अपनी रियल पोटेंशियल को टाइम रहते पहचान सकें। उन्होंने मोइनी फाउंडेशन के नेटवर्क को रूरल और अंडरप्रिविलेज्ड स्टूडेंट्स तक पहुंच बनाने में एक अहम कड़ी बताया, साथ ही जेईसीआरसी के प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग मॉड्यूल को स्टूडेंट्स के लिए बेहद यूज़फुल इनिशिएटिव बताया।

    सीडीजीसी की हेड डॉ. कृति काला जैन ने बताया कि यह सेल 2023 से अब तक 5000 से अधिक साइकोमेट्रिक असेसमेंट कर चुकी है। इस एमओयू के बाद दोनों संस्थाएं मिलकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करेंगी, जिससे देशभर के स्कूलों तक करियर काउंसलिंग और असेसमेंट की सुविधा डायरेक्ट पहुंच सकेगी।

    इस पार्टनरशिप का गोल एक ऐसा स्ट्रॉन्ग और स्केलेबल इकोसिस्टम खड़ा करना है, जो सोसाइटी के हर तबके के स्टूडेंट्स तक पहुंच सके। टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक करियर गाइडेंस के इस मेल से आने वाली जनरेशन अपने फ्यूचर से जुड़े डिसीजन अब ज्यादा समझदारी और कॉन्फिडेंस के साथ ले सकेगी।

     

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