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    सफलता के लिए पेशन होना जरूरी है: पंशुल

    6 hours ago

    पंशुल बंसल, फरीदाबाद (हरियाणा)

    नीटः आॅल इंडिया रैंक-2

    माक्र्सः 720 में से 715

    संजीव कुमार बंसल (व्यापारी)

    मोनिका बंसल (सीएस, इंडियन एक्सप्रेस)

    जन्मतिथिः 23 मार्च 2008

     

    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के क्लासरुम स्टूडेंट पंशुल बंसल ने आॅल इंडिया रैंक-2 हासिल की है। हरियाणा में फरीदाबाद निवासी पंशुल ने नीट में 720 में से 715 माक्र्स हासिल किए हैं। पंशुल का शुरुआत से लक्ष्य निर्धारित था कि नीट क्रेक कर डाॅक्टर बनना है। उसने 10वीं एवं 12वी कक्षा दोनों में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। इसके अलावा वो जेईई मेन 2026 में भी शामिल हुआ था। जिसमें उसने 99.5 परसेन्टाइल स्कोर किए थे। अंशुल के पिता ने नेवल इंजीनियरिंग की हुई है लेकिन फिलहाल बिजनेसमैन हैं। जबकि मां मोनिका कंपनी सैकेट्री है। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में दो साल से रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट पंशुल ने बताया कि मैंने यहां तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की है। मेरे पेरेन्ट्स ने कॅरियर के मामले में मुझे कभी प्रेशराइज नहीं किया। कक्षा 10वीं के बाद मेरे सामने कई सारे आॅप्शंस थे। यहां तक कि यदि मैं आॅर्ट्स भी ले सकता था लेकिन, मुझे शुरुआत से बाॅयोलाॅजी में रुचि थी और मैंने कक्षा 7वीं में आते-आते डिसीजन ले लिया था कि मुझे साइंस लेनी है और डाॅक्टर बनना है। छोटी कक्षा में लाइफ का गोल सेट करना मेरे लिए काफी फायदेमंद सबित हुआ। क्योंकि मेरा माइंड सेट वैसा बन चुका था और इससे मुझे मेरे टारगेट को हसिल करने में काफी मदद मिली। इससे आपकी फाउंडेशन और कंसेप्ट्स दोनों मजबूत होते हैं। मैं स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगा कि आपमें आपके कॅरियर के प्रति पैशन है तो ही उसमें आगे बढ़ो। नीट की तैयारी के लिए एलन में एडमिशन लिया तो पता चला कि कम्पीटिशन क्या होता है। क्योंकि देशभर से टैलेंटेड स्टूडेंट्स अपने सपनों को साकार करने एलन में आते है और ऐसे स्टूडेंट्स को देखकर ही आप मोटिवेट होते हो। यही मोटिवेशन आपको बेस्ट बनाता चला जाता है। फैकल्टीज का सपोर्ट काफी मिलता था। हमें एडवांस् लेवल पर पढ़ाया जाता था ताकि नीट जैसे एग्जाम के लेवल का हम आसानी से सामना कर सकें। मैं ज्यादा टाइम पढ़ाई नही करता था लेकिन जितना भी पढ़ता था वो क्वालिटी स्टडी होती थी। सामान्यतया स्टूडेंट्स थ्योरी पर ज्यादा फोकस करते हैं लेकिन मैं थ्यारी पर उतना ज्यादा फोकस नहीं करता था। मैं क्वेंश्चंस की प्रेक्टिस पर ज्यादा ध्यान देता था। रीक्रिएशन के लिए म्यूजिक सुनता हूं। मैंने पियानो बजाने की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की हैं। राॅक स्कूल में ग्रेड 4 और ट्रिनिटी काॅलेज आॅफ लंदन में ग्रेड 2 का सर्टिफिकेट हासिल कियार हुआ है।

     

     

     

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    डेली रिवीजन और मॉक टेस्ट मेरा की-ऑफ-सक्सेस- आयुष

    आयुष भालोटिया, नवादा (बिहार)

    नीटः एआईआर 4

    पिताः सुनील कुमार भोलोटिया (व्यापारी)

    मांः किरण देवी

    जन्मतिथिः 11 मई 2008

    मोबाइलः 9304863259

    बिहार के नवादा जिले में वरीसालीगंज निवासी आयुष भालोटिया ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 में 710 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल की है। दो साल से एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट का रेगुलर क्लासरुम स्टूडेंट आयुष अपने परिवार ही नहीं बल्कि अपने गांव का भी पहला डॉक्टर बनने जा रहा है। आयुष ने 10वीं में 96.2 एवं 12वीं कक्षा में 93.8 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। आयुष की उपलब्धि से उनके परिवार सहिज पूरे वरीसालीगंज में खुशी का माहौल है।

    आयुष ने बताया कि बचपन से ही मेरा सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने की था और इस सपने को साकार करने में एलन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। एलन में नियमित पढ़ाई, नीट की गहन तैयारी, लगातार रिवीजन और नियमित टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहे। मेरा मानना है कि हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करना और उन्हें सुधारना बेहद जरूरी है। मेरे बड़े भाई अर्पित भालोटिया की गाइडेंस भी काफी काम आई। वे आईआईटी दिल्ली से पास आउट हैं और फिलहाल यूएसए से पीएचडी कर रहे हैं।

    नीट की तैयारी के दौरान कई बार मेंटल प्रेशर भी महसूस हुआ, लेकिन परिवार और एलन की फैकल्टीज के सपोर्ट ने हमेशा मुझे पॉजिटिव बनाए रखा। क्लासरुम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। रीक्रिएशन के लिए चैस खेलता था। पिता सुनील कुमार सीमेंट और स्टील व्यवसायी हैं और उन्होंने मेरी पढ़ाई के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई, जबकि मेरी मां किरण देवी ने हर परिस्थिति में मेरा हौसला बढ़ाया। यह सफलता जितनी मेरी है, उतनी ही मेरी फैमिली और फैकल्टीज की भी है। मैं चाहता हूं कि मेरी सफलता से गांव और छोटे शहरों के अन्य स्टूडेंट्स भी मोटिवेट हों और बड़े टारगेट तय करने का साहस जुटाएं। मैं नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगा कि स्टूडेंट्स को एनसीईआरटी पर मजबूत पकड़ बनानी चाहिए, नियमित रिवीजन करना चाहिए और मॉक टेस्ट को सीरियसली देना चाहिए। धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत ही किसी भी बड़े एग्जाम की की-ऑफ-सक्सेस हैं।

     

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    सिर्फ वो किया जो फैकल्टीज ने कहा: गौरव

     

    गौरव सिंह, अलवर (राजस्थान)

    इंस्टीट्यूट - एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट

    नीट एआईआर: 09

    पिता: राजेश कुमार (भारतीय सेना, पश्चिम बंगाल)

    मां: सीमा देवी

    जन्मतिथि: 1 अक्टूबर 2008

     

    राजस्थान में अलवर जिले की मुंडावर तहसील स्थित गाडुवास गांव निवासी राजेश कुमार के घर एवं गांव में इन दिनों उल्लास छाया हुआ है। राजेश कुमार की बेटी अनुजा के बाद उनका बेटा गौरव भी डाॅक्टर बनने जा रहा है। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के रेगुलर क्लासरुम स्टूडेंट गौरव ने नीट 2026 में 720 में से 705 अंक हासिल कर आॅल इंडिया रैंक 09 हासिल की है। गौरव ने 10वीं कक्षा 92 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। गौरव ने कहा कि मैं पिछले सात वर्षों से एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट, कोटा का रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट रहा हूं। मुझसे पहले मेरी बड़ी बहन अनुजा ने भी एलन कोटा से 2022-23 में नीट की तैयारी की थी। आज वह ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, अलवर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। उनके हार्डवर्क, कंसिस्टेंसी, डिसिप्लिन और सक्सेस को देखकर मुझे हमेशा मोटिवेशन मिला और मैंने भी डॉक्टर बनने का सपना देखा। मेरी सफलता में मेरे परिवार का भी सबसे बड़ा योगदान रहा है। मेरी मां सीमा देवी मेरे और मेरी बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं। उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया। नीट की तैयारी के दौरान मैंने डेली क्लास अटेंड की, एनसीईआरटी को कई बार पढ़ा। कंटीन्यू रिवीजन किया और टेस्ट को पूरी गंभीरता से दिया। स्मार्ट फोन यूज करता था लेकिन उसका मिसयूज नहीं करता था। क्लासरूम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। रीक्रिएशन के लिए क्रिकेट खेलता था। मेरा मानना है कि हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का एनालिसिस करना और उन्हें सुधारना ही की-आॅफ-सक्सेस है।

     

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