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    शिक्षा मंत्री की जिद भारी.......पदौनत व्याख्याता इंतजार करते रह गये

    7 hours ago

    शिक्षा विभाग में बिना तर्कों के नियम बनाए जाते हैं , इन तर्क हीन नियमों की पैरवी शिक्षा मंत्री अपनी जिद से पूरी करते रहे हैं ।

    इन स्थानांतरण में जहां तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण ही नहीं हुए हैं वहां एक वर्ग ऐसा भी है जिनके स्थानांतरण तो खोले गए लेकिन उनके स्थानांतरण नहीं किए गए ।

    शिक्षा विभाग में पिछले कुछ माह से कई वर्गों की डीपीसी की गई जिनमें व्याख्याता एवं मंत्रालयिक वर्ग की काफ़ी संख्या में डीपीसी हुई इन दोनों वर्गों की ही बात करे तो शिक्षा मंत्री के अनुसार जिनकी डीपीसी अभी हुई उनका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा कहा गया लेकिन जब धरातल पर इस को उतारा गया तो अपनी कही बात से मुकरते हुए मंत्रालयिक वर्ग का स्थानातंरण तो कर दिया लेकिन डीपीसी से व्याख्याता बने वर्ग का स्थानातंरण रोक लिया । एक ही विभाग में डीपीसी पर दो तरह का नियम लगा दिया। अब ये भेदभाव क्यों किया गया विचारणीय है?

    मंत्रालयिक वर्ग को पदौनत पर पदास्थापन बिना काउंसलिंग के दिया गया और अब स्थानांतरण भी किया गया उनकी डीपीसी तो व्याख्याताओ के बाद हुई थी तो वो स्थानांतरण के दायरे में कैसे आ गए ?

     

    शिक्षा विभाग ने गत 3 वर्षों की डीपीसी कर व्याख्याताओं को मई माह में पदस्थापन दे दिया गया जिसमें 12000 व्याख्याता ने कार्यग्रहण किया और शिक्षा विभाग द्वारा काउंसलिंग अपने नियमों के विपरीत जाकर 120% काउंसलिंग में पद नहीं दर्शाकर केवल जितने अभ्यर्थी थे उतने ही पद दर्शाया गए ऐसे में विभाग में वर्षों से सेवा कर रहे शिक्षकों को काउंसलिंग पदास्थापन में दूर स्थान पर जाना पड़ा और इन डीपीसी काउंसलिंग के पदस्थापन के बाद सरकार द्वारा नए आरपीएससी से चयनित व्याख्याता को पदस्थापन दिया जिन्हें शहर के नजदीक तथा शहरी स्थान भी खोले गए ।

    ऐसे में पदौनत शिक्षकों के साथ सरकार द्वारा जानबूझकर कुठाराघात किया गया ।

    शिक्षा मंत्री की जिद के कारण 12000 व्याख्याताओ के तबादले भी नहीं किये गए उन्हें तबादलों से बाहर कर दिया गया

    ऐसे में इन 12000 शिक्षकों में से किसी का भी स्थानांतरण नहीं किया गया ऐसे में स्थानांतरण खोलकर स्थानांतरण नहीं करना मंत्री की जिद को दर्शाता है और इससे वर्षों से विभाग में सेवा दे रहे शिक्षक अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

     

    सरकार को सभी वर्गों के स्थानांतरण खोलने चाहिए,इन में भी भेद नहीं करना चाहिए था, शिक्षा मंत्री को पुनः विचार करना चाहिए --

    विपिन प्रकाश शर्मा

    प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ

     

     

     

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