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    राजकीय महाविद्यालय जयपुर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ व्यास पूजन समारोह

    2 hours ago

    जयपुर. राजकीय महाविद्यालय जयपुर में भारतीय शिक्षण मंडल के तत्वावधान में गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीक व्यास पूजन समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रविकांत शर्मा ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विमल प्रसाद अग्रवाल उपस्थित रहे।

    दीप प्रज्वलन से शुभारंभ कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, महर्षि वेदव्यास और भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय श्लोक व ध्येय वाक्य का सामूहिक वाचन किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश पारीक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सनातन काल से सर्वोच्च रहा है बिना गुरु के ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र ईशान अवस्थी ने भारतीय शिक्षण मंडल का प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किया।

    सशक्त समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार है गुरु-शिष्य संबंध: डॉ. विमल प्रसाद अग्रवाल अपने प्रेरक उद्बोधन में मुख्य वक्ता डॉ. विमल प्रसाद अग्रवाल ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की कालजयी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु और शिष्य के मध्य आत्मीय संबंध ही सशक्त समाज एवं राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आज ऐसे गुरु और शिष्यों की आवश्यकता है जो भारत को पुनः 'विश्वगुरु' के गौरवपूर्ण स्थान पर प्रतिष्ठित करने का संकल्प लेकर कार्य करें। वर्तमान समय में सोशल मीडिया और सूचनाओं की अत्यधिक उपलब्धता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा गुरु वही है जो विद्यार्थियों को सही व सार्थक ज्ञान का विवेकपूर्ण चयन करना सिखाए तथा उनके चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास में मार्गदर्शक की भूमिका निभाए।

    गुरु जीवन का पथप्रदर्शक और प्रेरणास्रोत: प्रो. रविकांत शर्मा अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. रविकांत शर्मा ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान का प्रदाता ही नहीं बल्कि जीवन का पथप्रदर्शक और प्रेरणास्रोत भी होता है। गुरु-शिष्य का आत्मीय संबंध युवा पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराते हुए उन्हें सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

    गुरु मार्गदर्शन से होता है व्यक्तित्व का समग्र विकास महाविद्यालय के रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. रणजीत सिंह राठौड़ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से विद्यार्थी के व्यक्तित्व एवं चरित्र का समग्र विकास होता है। गुरु विपरीत परिस्थितियों, मानसिक तनाव और अवसाद से शिष्य को उबारकर उसे जीवन की मुख्यधारा से जोड़ते हुए सफलता एवं उन्नति के पथ पर अग्रसर करता है।

    धन्यवाद ज्ञापन और समापन भारतीय शिक्षण मंडल जयपुर प्रांत के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. जयदीप ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का मूल ध्येय शिक्षा में भारतीयता का समावेश एवं उसके मूल्यों का संवर्धन करना है। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन अंग्रेजी विभाग की सह-आचार्या डॉ. ललिता शर्मा ने किया।

    कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। इस अवसर पर भारतीय शिक्षण मंडल के करौली जिला संयोजक, जयपुर प्रांत के पदाधिकारी, महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य, मंत्रालयिक कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

     

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