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    राजस्थान में शिक्षा जगत को नई दिशा — “प्राइवेट स्कूल्स फेडरेशन” का हुआ ऐतिहासिक गठन

    2 months ago

    12 राज्य स्तरीय निजी शिक्षण संगठन एकजुट — संसद से सड़क तक शिक्षा हितों की निर्णायक आवाज़ बनने को तैयार

    जयपुर।
    राजस्थान के शिक्षा इतिहास में शनिवार का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया, जब प्रदेश के 12 प्रमुख निजी शिक्षण संगठन पहली बार एक मंच पर एकजुट हुए और “प्राइवेट स्कूल्स फेडरेशन (PSF)” का औपचारिक गठन किया। यह संगठन स्वच्छ शिक्षा क्रांति मिशन के तहत गठित हुआ है, जो कानूनी, सामाजिक और नीतिगत स्तर पर निजी विद्यालयों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगा।


    ✳️ शिक्षा हित की नई आवाज़ — “फेडरेशन” का उद्देश्य

    फेडरेशन ने घोषणा की है कि वह “संसद से लेकर सड़क तक” शिक्षा हितों की रक्षा करेगा। संगठन अदालतों, नीतिनिर्माण मंचों और जनआंदोलनों—तीनों स्तरों पर सक्रिय रहकर स्कूलों और शिक्षा समुदाय की समस्याओं को मुखरता से उठाएगा।
    जहाँ अन्याय होगा, वहाँ यह फेडरेशन कानून और जनशक्ति, दोनों के माध्यम से जवाब देगा।


    ⚖️ कानूनी एवं रणनीतिक ढांचा

    फेडरेशन एक सशक्त कानूनी प्रकोष्ठ (Legal Cell) बनाएगा, जो नीतिगत अन्याय, प्रशासनिक विसंगतियों और वित्तीय असमानताओं के विरुद्ध न्यायालयीन कार्रवाई और जनहित याचिकाओं के माध्यम से कार्य करेगा। इसका लक्ष्य शिक्षा जगत के लिए नीतिगत पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है।


    👥 संगठन की संरचना

    फेडरेशन की कार्यकारिणी का गठन इस प्रकार किया गया—

    अध्यक्ष: हेमलता शर्मा (जयपुर)
    सचिव: गिरिराज खैरीवाल (बीकानेर)
    कोषाध्यक्ष: हरभान सिंह कुंत्तल (भरतपुर)

    वरिष्ठ उपाध्यक्ष: दिलीप पोखरना (चित्तौड़गढ़), भूपराम शर्मा (जयपुर), अमित सोगानी (जयपुर), अनिल धानुका (सूरतगढ़)
    उपाध्यक्ष: भरत कुमार भाटी (ब्यावर), के. एन. भाटी (जालौर), मदनलाल वर्मा (झालावाड़), शिवहरि शर्मा (नाथद्वारा)
    सह सचिव: जयशंकर त्रिवेदी (पाली), लोकेश जैन (देवली), आनन्द थोरी (बाड़मेर), लोकेश कुमार मोदी (बीकानेर)

    संगठन में 10 सदस्यीय कार्यकारिणी समिति भी गठित की गई है, जिसमें विभिन्न जिलों से प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
    साथ ही एल. सी. भारतीय, कैलाश शर्मा, महेन्द्र कर्णावट, एडवोकेट संजय शर्मा, महेश गुप्ता, मुकेश माण्डन और दिलीप मोदी को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया गया है, जबकि सात सदस्यीय एडवाइजरी बोर्ड मार्गदर्शन देगा।


    🛡️ पाँच प्रमुख संघर्ष बिंदु

    फेडरेशन ने अपनी प्राथमिकताओं में पाँच मुद्दों को प्रमुख रूप से रखा है—

    1. नो ड्यूज़ सर्टिफिकेशन का कानूनी प्रावधान:
      ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) तभी जारी हो जब छात्र का समस्त शुल्क जमा हो।

    2. यूनिट कॉस्ट में पारदर्शिता:
      सरकारी गणना पद्धति में सुधार कर वास्तविक यूनिट कॉस्ट लागू की जाए।

    3. RTE भुगतान प्रणाली में सुधार:
      RTE राशि का जनवरी और अप्रैल में समयबद्ध भुगतान हो; देरी पर ब्याज सहित राशि दी जाए।

    4. प्रशासनिक हस्तक्षेप पर नियंत्रण:
      विद्यालयों के दैनिक संचालन में अनावश्यक सरकारी दखल समाप्त किया जाए।

    5. फीस एक्ट में संशोधन एवं डमी स्कूलों पर रोक:
      फीस एक्ट की विसंगतियों को दूर कर फर्जी स्कूलों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।


    💬 पदाधिकारियों के विचार

    हेमलता शर्मा (अध्यक्ष):
    “यह फेडरेशन शिक्षा जगत की नई महाशक्ति है — जो निजी स्कूलों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा कानूनी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर करेगा।”

    गिरिराज खैरीवाल (सचिव):
    “हम हर जिले में संगठनात्मक एकता का विस्तार करेंगे। जहाँ अन्याय होगा, वहाँ फेडरेशन पूरी शक्ति से खड़ा रहेगा।”

    हरभान सिंह कुंत्तल (कोषाध्यक्ष):
    “यह संगठन केवल आवाज़ नहीं उठाएगा, बल्कि परिणाम देगा। हम अदालत में भी लड़ेंगे और सड़कों पर भी उतरेंगे।”

    दिलीप पोखरना (वरिष्ठ उपाध्यक्ष):
    “शिक्षा अब किसी संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की आवाज़ है। हम नीति, न्याय और नीयत — तीनों स्तरों पर पारदर्शिता के लिए संघर्ष करेंगे।”


    🌐 आगे की दिशा

    फेडरेशन शीघ्र ही सभी जिलों के नेताओं के साथ बैठक आयोजित करेगा, ताकि जिला इकाइयों का गठन किया जा सके और प्रदेशभर के निजी शिक्षण संगठनों को इस साझा मंच से जोड़ा जा सके।

    फेडरेशन ने खुला आमंत्रण दिया है — जो भी संगठन इस शिक्षा आंदोलन का हिस्सा बनना चाहता है, उसका स्वागत है। उद्देश्य है — राजस्थान में निजी शिक्षा को संगठित, सशक्त और न्यायसंगत दिशा देना।


     

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