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    राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता एवं आपूर्ति निरंतर जारी- राजन विशाल

    2 months ago

     -प्रदेश में वर्तमान में 2 लाख 42 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 70 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 70 हजार मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 72 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध

    जयपुर। राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा उर्वरकों की दैनिक उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कम उपलब्धता और अधिक खपत वाले जिलों व ब्लॉकों को चिन्हित कर प्रदेश भर में प्राथमिकता के साथ पूर्ण पारदर्शिता से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। उर्वरकों की कालाबाजारी व जमाखोरी रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश भर में पूर्ण सतर्कता से कार्य कर रहे हैं।

    भारत सरकार द्वारा देश में तिलहन एवं दलहन को बढावा देने के दृष्टिगत राज्य में गत वर्ष की अपेक्षा तिलहनी एवं दलहनी फसलों के बुवाई क्षेत्रफल वृद्धि प्रस्तावित की गई है एवं खाद्यान्न फसलों के क्षेत्रफल में कमी प्रस्तावित की गई है। रबी 2024-25 में 35.03 लाख हैक्टेयर में तिलहनी फसलों, 16.93 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में दलहनी फसलों एवं 41.66 लाख हैक्टेयर में खाद्यान्न फसलों की बुवाई हुई थी। जिसके विरूद्ध रबी 2025-26 हेतु क्रमशः 38.45 लाख हैक्टेयर में तिलहनी, 21.90 लाख हैक्टेयर में दलहनी एवं 39.80 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में खाद्यान्न फसलों की बुवाई प्रस्तावित की गई है।

    शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी राजन विशाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर प्रदेश की मांग के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ती करवाई जा रही है। राज्य के किसानां को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु रबी 2025 में अक्टूबर व नवम्बर में भारत सरकार द्वारा आवंटित 7 लाख 55 हजार मैट्रिक टन यूरिया के विरुद्ध 01 अक्टूबर 2025 को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 7 लाख 35 हजार मैट्रिक टन की उपलब्धता की जा चुकी है एवं 25 हजार मैट्रिक टन यूरिया परिवहन में है। नवम्बर माह की शेष अवधि में 2 लाख 84 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति राज्य में संभावित है।

    उन्होंने बताया कि रबी 2025 में अक्टूबर व नवम्बर में भारत सरकार द्वारा आवंटित 2 लाख 69 हजार मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध 01 अक्टूबर 2025 को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 3 लाख 6 हजार मैट्रिक टन की उपलब्धता की जा चुकी है एवं 10 हजार मैट्रिक टन डीएपी परिवहन में है। नवम्बर माह की शेष अवधि में 44 हजार मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति राज्य में संभावित है।

    शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 2 लाख 42 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 70 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 70 हजार मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 72 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। वर्तमान में गत वर्ष की तुलना में फॉस्फेटिक उर्वरकों का स्टॉक 78 हजार मैट्रिक टन अधिक है।

    केंद्र सरकार की ओर से यूरिया, डीएपी एव अन्य उर्वरकों का राज्यों को माहवार व कम्पनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन एवं जिलों की मांग के अनुसार जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर प्रदेश में उर्वरकों का वितरण पारदर्शिता से कराया जाता है।
    उन्होंने बताया कि कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिशानुसार ही उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रेरित करने, उर्वरकों का समान रूप से पारदर्शिता के साथ वितरण कराने और उर्वरक वितरण में अनियमित्ता बरतने वाले विक्रेताओं, जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हेतु समस्त जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

    आयुक्त कृषि एवं उद्यानिकी चिन्मयी गोपाल ने बताया कि विभाग द्वारा राज्य में प्रत्येक उर्वरक विक्रेता के विक्रय परिसर पर उर्वरकों का वितरण व प्रभावी मोनेटरिंग किये जाने हेतु विभागीय अधिकारियों, कार्मिकों की नामजद ड्यूटी लगायी गई है, किसी विक्रेता के यहां कृषकों की संख्या अधिक होने पर कृषकों को पंक्तिबद्ध किया जाकर उनकी देख-रेख में उर्वरकों का वितरण करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के सीमावर्ती जिलों से उर्वरकों का अन्य राज्यों में परिगमन रोकने हेतु विभागीय कार्मिक एवं आवश्यकतानुसार पुलिस के सहयोग से 61 चैक पोस्ट स्थापित किये गये हैं, जिनके द्वारा नियमित निगरानी जारी है।

    उन्होंने  बताया कि समय-समय पर विशेष अभियान चला कर उर्वरक वितरण में जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया डायवर्जन सहित अन्य अनियमितता बरतने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की गई है। अब तक उर्वरक सहित अन्य आदानों में विक्रेताओं एवं विनिर्माताओं द्वारा नियमों का उल्लघंन किये जाने पर 81 एफ.आई.आर. पुलिस थानों में दोषियों के विरूद्ध दर्ज करवायी गई है साथ ही 97 लाईसेंस निलम्बित व निरस्त किये गये हैं। विभाग द्वारा सभी जिलों में कन्ट्रोल रूम स्थापित कर सतत् निगरानी की जा रही है। 

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