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    रसायनशास्त्र को शोध की राह दिखाने वाली राजस्थान की प्रोफ़ेसर को BARC में राष्ट्रीय सम्मान

    1 month ago

    राजस्थान के विश्वविद्यालयों में अक्सर रसायनशास्त्र विषय केवल परीक्षा तक सीमित रह जाता है, लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर ने इसे शोध और संभावनाओं का क्षेत्र बना दिया है। उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों छात्र-छात्राएँ अब स्वयं को भविष्य के शोधकर्ता के रूप में देख रहे हैं। चुपचाप चलती रही इस यात्रा को इस सप्ताह मुंबई में राष्ट्रीय मंच पर मान्यता मिली, जब राजस्थान विश्वविद्यालय के रसायन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता को BARC मुंबई में आयोजित 7th National Workshop on Materials Chemistry (NWMC-2025) के दौरान SMC-Mentors Award 2025 से सम्मानित किया गया। किसी भी विश्वविद्यालय से इस सम्मान को पाने वाली पहली प्रतिनिधि है; इससे पहले यह पुरस्कार मुख्यतः राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों के हवाले रहा है। पिछले 40 वर्षों से प्रोफेसर गुप्ता ने कॉलेज के लेक्चर हॉल तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न मंच से छात्रों को लगातार यही संदेश दिया है, कि “स्नातक तथा स्नातकोत्तर डिग्री पर न रुको, आगे बढ़ो और उच्च स्तर के शोधकर्ता बनो।” उन्होंने देश-विदेश में लगभग 75 आमंत्रित व्याख्यान दिए और जयपुर में अनेक 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया, जिनकी संगोष्ठियों और कार्यशालाओं से हज़ारों विद्यार्थियों को अत्याधुनिक रसायन और फ़ार्मा शोध से रूबरू होने का मौक़ा मिला। इनमें एक बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों की उन छात्राओं की है, जो पहले खुद को केवल ‘ग्रेजुएट’ मानती थीं और अब शोध और अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रयोगशालाओं में रिसर्च करियर की कल्पना कर रही हैं।

    पुरस्कार समिति और SMC के अध्यक्ष प्रोफेसर ए. के. त्यागी ने कहा कि यह सम्मान प्रोफेसर गुप्ता की “प्रभावशाली वैज्ञानिक मेंटरशिप और चार दशकों से अधिक समय तक अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों को संवारने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता” का प्रतीक है।” राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर अल्पना कटेजा ने भी इसे विभाग तथा विश्वविद्यालय में शोध-संस्कृति स्थापित करने की उनकी दीर्घ साधना की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करना बताया। 

    प्रोफेसर गुप्ता ने इसे “राजस्थान विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के प्रमुख संस्थानों तथा वैज्ञानिकों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े होने का सम्मान” बताया और कहा कि यह मुझे और अधिक छात्रों को शोध और नवाचार की राह दिखाने के लिए प्रेरित करता है।”

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