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    शोध के नए आयामों से रूबरू हुई छात्राएं — कानोड़िया कॉलेज में “रिसर्च मेथाडोलॉजी” पर एकदिवसीय व्याख्यान आयोजित

    3 months ago

    जयपुर। कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग और सेंटर फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट के संयुक्त तत्वावधान में “रिसर्च मेथाडोलॉजी” विषय पर एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर राजुल भार्गव, पूर्व विभागाध्यक्ष (अंग्रेजी), राजस्थान विश्वविद्यालय रहीं।
    शोध प्रक्रिया को समझने पर रहा मुख्य फोकस
    अपने प्रेरक वक्तव्य में प्रोफेसर राजुल भार्गव ने शोध की मूल अवधारणा, उसके उद्देश्य और उसकी प्रक्रिया के विभिन्न आयामों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि शोध केवल तथ्यों की खोज नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, दृष्टिकोण और संवेदना का समन्वय है। वर्ड्सवर्थ, एमिली डिकिंसन और कूलरिज जैसे कवियों की रचनाओं के उदाहरण देते हुए उन्होंने रिसर्च टॉपिक के चयन, रिव्यू ऑफ लिटरेचर, डेटा कलेक्शन और विश्लेषण की विधियों को सरल भाषा में समझाया।
    शोध के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास
    महाविद्यालय की निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में यह आयोजन छात्राओं में शोध के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया। प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि यह व्याख्यान छात्राओं को अकादमिक शोध की दिशा में प्रेरित करने वाला रहा। उन्होंने कहा कि शोध किसी भी विषय में गहराई से सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करता है, जो आज के प्रतिस्पर्धी युग में अत्यंत आवश्यक है।
    संवाद और सहभागिता से समृद्ध हुआ सत्र
    कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर मुख्य वक्ता ने विस्तार से दिया। इस संवादात्मक सत्र ने छात्राओं की समझ को और गहरा किया तथा उन्हें शोध के प्रति अधिक सजग और प्रेरित किया। लगभग 75 छात्राओं ने इस व्याख्यान में सक्रिय भागीदारी निभाई।
    आयोजन का संचालन और सहयोग
    कार्यक्रम में मुख्य वक्ता का स्वागत अंग्रेजी विभागाध्यक्ष (यूजी) डॉ. प्रीति शर्मा ने किया। सेंटर की संयोजक डॉ. रितु जैन, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष (पीजी) डॉ. स्वाती धनवानी तथा विभाग की अन्य प्राध्यापिकाएं भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। सत्र का संचालन छात्राओं श्रेया शर्मा और नताशा चांदवानी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्राध्यापिका ऋषिता शर्मा ने प्रस्तुत किया।
    इस एकदिवसीय व्याख्यान ने छात्राओं को शोध की गहराई, उसकी प्रक्रिया और शैक्षणिक अनुशासन के महत्व से अवगत कराया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि “ज्ञान का सबसे सुंदर रूप वही है, जो प्रश्न पूछने और उत्तर खोजने की प्रक्रिया में विकसित होता है।”

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