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    SIR कार्य में बढ़ते दबाव से कर्मचारी जगत में उबाल

    2 months ago

     — BLO की आत्महत्या के बाद महासंघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
    अधिकारियों द्वारा 12–18 घंटे कार्य कराने, निलंबन के भय और अनावश्यक टारगेट का आरोप; मृतक परिवार को 50 लाख मुआवजा व नौकरी की मांग
    जयपुर।
    राज्य में चल रहे विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के दौरान BLO और सुपरवाइजर कार्मिकों पर बढ़ते दबाव, लंबी ड्यूटी और प्रशासनिक दमन को लेकर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने आज मुख्यमंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इसमें जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र में एक BLO मुकेश जांगिड़ द्वारा दबाव में आत्महत्या किए जाने को शासन-प्रशासन की गंभीर विफलता बताते हुए तत्काल कार्यवाही की मांग की गई है।
    “अधिकारियों का टारगेट अव्यावहारिक, कार्मिक बेहोश हो रहे” — महासंघ
    महासंघ के प्रदेश महामंत्री विपिन प्रकाश शर्मा ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि SIR कार्य में लगे शिक्षक और कर्मिक लगातार अत्यधिक दबाव में काम कर रहे हैं। जिला स्तर के अधिकारी वास्तविक क्षमता से अधिक टारगेट थोप रहे हैं, जिसके कारण कर्मचारी 12 से 18 घंटे तक कार्य करने को विवश हैं। कई स्थानों से कार्मिकों के बेहोश होने, मानसिक तनाव और अवसाद जैसी शिकायतें महासंघ तक पहुंच चुकी हैं।
    जयपुर में BLO की आत्महत्या से गुस्सा चरम पर
    जयपुर में BLO मुकेश जांगिड़ द्वारा आत्महत्या की घटना ने पूरे कार्मिक वर्ग में आक्रोश पैदा कर दिया है। ज्ञापन में कहा गया कि मृतक के सुसाइड नोट में जिन अधिकारियों के नाम आए हैं, उन्हें तुरंत निलंबित कर न्यायिक कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। महासंघ ने इसे “प्रशासनिक उत्पीड़न” का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।
    महासंघ की चार प्रमुख मांगें
    महासंघ ने मुख्यमंत्री से त्वरित प्रभाव से निम्न निर्णय लेने की मांग की है—
    1. मृतक मुकेश जांगिड़ के प्रकरण में दोषी प्रशासनिक अधिकारियों का निलंबन और कठोर न्यायिक कार्यवाही।
    2. SIR कार्य में लगे कार्मिकों के लिए दबावमुक्त वातावरण, सौम्य व्यवहार, व्यावहारिक लक्ष्य और समय-सीमा में शिथिलता।
    3. मृतक आश्रित परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
    4. मृतक परिवार को तुरंत सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
    “कार्मिकों पर दमन नहीं, सम्मानजनक कार्य-परिस्थिति आवश्यक” — महासंघ
    महासंघ ने कहा कि SIR एक संवेदनशील व श्रमसाध्य प्रक्रिया है, जिसके लिए जिम्मेदारी और समन्वय आवश्यक है, परंतु अधिकारियों द्वारा भय, दमन और निलंबन की चेतावनी देकर कार्य कराना अमानवीय है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर के कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
    सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा
    महासंघ ने मुख्यमंत्री से इस गंभीर प्रकरण में शीघ्र और ठोस कदम उठाने की अपील की है, ताकि मृतक परिवार को राहत मिल सके और कार्मिक जगत में व्याप्त भय व असंतोष समाप्त हो।

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