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    बीकानेर में भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट के बीसवें सामूहिक विवाह सम्मेलन में 61 जोड़े बंधे दाम्पत्य सूत्र में

    केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्रस्ट के प्रयासों को बताया पुण्य कार्य—  केन्द्र और राज्य सरकार इन बहिनों का जीवन संवारने में नहीं आने देगी कोई कमीः शिवराज सिंह चौहान —यह पुनीत कार्य समाज में नए उत्साह का संचार करने वाला और सामाजिक जीवन को सशक्त बनाने वालाः केन्द्रीय परिवहन राज्यमंत्री अजय टम्टा —बीस वर्षों से सामाजिक सरोकारों के काम कर रहा ट्रस्ट, अब तक छह सौ बेटियों को बांधा दाम्पत्य सूत्र मेंः केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल   जयपुर। केन्द्रीय कृषि, कृषक कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा दो दशकों से कन्या विवाह का पुण्य कार्य किया जा रहा है। यह कार्य हम सभी के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार महिला कल्याण के महायज्ञ को लेकर संकल्पित भाव से कार्य कर रही है।   केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को पाॅलिटेक्निक काॅलेज मैदान में भावना मेघवाल मेमोेरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित बीसवें सामूहिक विवाह एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।   केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल द्वारा अपनी दिवंगत बेटी की स्मृति को अक्षुण्ण रखते हुए सैकड़ों बेटियों के जीवन में ज्योति प्रकाशित की है। उन्होंने बीकानेर को शौर्य और धैर्य की भूमि बताया तथा कहा कि यहां के लोग विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प पूरा करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां के लोग दुनिया भर में अपनी कर्मण्यता से प्रेरणा दे रहे हैं।   केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि समाज में बेटे और बेटी के बीच कोई भेद नहीं हो। बेटी को बोझ नहीं समझें और उसके जन्म पर भी खुशियां बरसें। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा भी पहली बार विधायक बनने के साथ वर्ष 1991 में ही बेटियों के विवाह की व्यवस्था शुरू की, जो अब तक चल रही है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने केे बाद राज्य सरकार ने लाखों बेटियों का विवाह करवाया।   केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ 55 लाख बेटियों को मिला और लाडली बहिना योजना ‘आधी आबादी को पूरा न्याय’ के ध्येय के साथ चलाई गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केन्द्र सरकार, महिला कल्याण का महायज्ञ कर रही है। वर्तमान में देश में 3 करोड़ दीदियां लखपति बनी हैं। उन्होंने भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा बेटी की स्मृति में बेटियों के विवाह और बेटियों को सम्मानित करने के कार्य को महत्वपूर्ण बताया।   केन्द्रीय कृषि मंत्री ने विवाह के बंधन में बंधने वाली बेटियों का आह्वान किया कि वे अपने विवाह की वर्षगांठ पर पौधे लगाएं और इनकी देखभाल करें। उन्होंने कहा कि केन्द्र और राजस्थान की सरकार द्वारा विवाहित बहनों का जीवन संवारने में कोई कसर नहीं आने दी जाएगी। इन बेटियों को लखपति दीदी बनाकर इन्हें आत्मनिर्भर करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नए सर्वे में पात्र पाए जाने वाले प्रत्येक परिवार को पक्का घर केन्द्र सरकार की ओर से उपलब्ध करवाया जाएगा।   केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बीकानेर के अलावा श्रीगंगानगर, चूरू और हनुमानगढ़ कृषि प्रधान जिले हैं। इन जिलों में खेती के विकास की सभी संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि छोटी जोत पर फायदे की खेती हो, इसके लिए प्रयास किए जाएं। उन्होंने कृषि के साथ पशुपालन, मछली पालन, भेड़ पालन, मधुमक्खी पालन आदि के लिए अभियान चलाए जाने की बात कही। चौहान ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता और जीवन दाता है। केन्द्र सरकार द्वारा इनके कल्याण के लिए संकल्पबद्धता के साथ कार्य किए जा रहे हैं।   केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री अजय टम्टा ने कहा कि केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के नेतृत्व में भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा यह पुनीत कार्य समाज में नए उत्साह का संचार करने वाला तथा सामाजिक जीवन को सशक्त बनाने वाला है। ट्रस्ट द्वारा दिवंगत भावना मेघवाल की स्मृति बेटियों को आगे बढ़ाने के इस कार्य को हमेशा याद रखा जाएगा।    टम्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांव-गांव में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनएच 11 पर बीकानेर-फलौदी के बीच 848 करोड़ रुपए की लागत से होने वाला 160 किलोमीटर सड़क का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। इसी प्रकार रायसिंहनगर-पूगल के बीच का 162 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य भी पूर्णता की ओर है। इससे क्षेत्र के लोगों को भरपूर लाभ मिलेगा।   केन्द्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री ने बीकानेर-सीकर के बीच फोर लेन सड़क के लिए डीपीआर बनवाने की बात कही और कहा कि इसकी संभावनाओं पर प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा। उन्होंने बीकानेर-कोटपुतली सड़क के लिए भी विस्तृत कार्य योजना बनाने का कार्य जल्दी लिए जाने का विश्वास दिलाया।   केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा वर्ष 1999 से सामाजिक सरोकारों की विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। वर्ष 2007 से अब तक 599 बेटियों को सामूहिक विवाह समारोहों के दौरान विवाह बंधन में बांधा गया है। उन्होंने ट्रस्ट की अन्य गतिवधियों के बारे में बताया। उन्होंने लोकगीतों और कहावतों के माध्यम से बेटियों के सुखद जीवन की कामना की और उन्हें आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया।   गुरु रविदास विश्व महापीठ के राष्ट्रीय महामंत्री तथा भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट से जुड़े रवि शेखर मेघवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने ट्रस्ट द्वारा अब तक आयोजित गतिविधियों के बारे में बताया और कहा कि इस वर्ष 61 जोड़ों को दाम्पत्य सूत्र में बांधने के साथ लगभग 350 प्रतिभावान बेटियों को सम्मानित किया गया है।   ‘बेटियों को दिया आशीर्वाद, कहा-मामा की 61 भांजियां बंध रही दाम्पत्य सूत्र में’   इस दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दाम्पत्य सूत्र में बंध रही बेटियों को आशीर्वाद दिया और कहा कि आज अर्जुन राम मेघवाल के प्रयासों से उनकी 61 भांजियां दाम्पत्य सूत्र में बंधी हैं। उन्होंने सम्मानित होने वाली मेघावी बालिकाओं को आगे बढ़ने की सीख देते हुए समाज एवं देश के लिए सकारात्मकता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। तीनों केन्द्रीय मंत्रीगणों ने नवविवाहित वर-वधुओं के बीच पहुंचकर उन्हें आशीर्वाद दिया। केन्द्रीय मंत्री ने विवाह मंडप का अवलोकन किया तथा समारेाह में आए हजारों लोगों को पंक्तिबद्ध तरीके से भोजन करवाने की व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयोजन के दौरान संस्कारों और परम्परागत व्यवस्था का ध्यान रखा जाना, अनुकरणीय है।   भावना दिग्दर्शिका का किया विमोचन—   समारोह के प्रारम्भ में केन्द्रीय मंत्रीगणों ने बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर तथा सुश्री भावना मेघवाल के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की। अतिथियों ने ‘भावना दिग्दर्शिका’ का विमोचन किया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों द्वारा केन्द्रीय मंत्रीगणों का अभिनंदन किया गया।   अतिथियों ने इस वर्ष के 51 हजार रुपए के भावना अवार्ड-2026 चार बालिकाओं को दिए। कक्षा दसवीं में प्रदेश में पहले स्थान पर आने वाली भरतपुर की चंचल जाटव, बारहवीं में जिले में पहला स्थान प्राप्त करने वाली बीकानेर की लता, दसवीं में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली ललिता तथा बीए तृतीय वर्ष में जयपुर के कनोडिया काॅलेज में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली तमन्ना को इस वर्ष का भावना अवार्ड दिया गया।   इसी प्रकार साक्षी प्रजापत, प्रतिज्ञा टाक, महक सोनी, हर्षिता दैया, कनक सुथार, मोनिका गहलोत, राधा तथा भारती रांकावत को इक्यावन सौ रुपए के सावित्री बाई फुले अवार्ड दिए गए। नोखा की मोनिका को संत गुरु रविदास अवार्ड, भूमि को महर्षि नवल अवार्ड, प्रांजल को बाबा लाधूनाथ अवार्ड, आयुषी बारिया को बाबा गाडगे अवार्ड, देविका आसेरी को संत बगदाराम अवार्ड तथा सुमन पुत्री शिशपाल को रमा बाई अवार्ड प्रदान किया गया। सभी प्रतिभावान बालिकाओं को इक्यावन सौ-इक्यावन सौ रुपए की नकद राशि पुरस्कार स्वरूप दी गई। समारोह में विभिन्न श्रेणियों में 350 से अधिक विद्यार्थियों का सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन श्री ज्योति प्रकाश रंगा और श्री अशोक ने किया।   इस दौरान भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट की प्रधान ट्रस्टी श्रीमती पाना देवी मेघवाल, ट्रस्टी श्रीमती सुशीला वर्मा, पूर्व महापौर श्रीमती सुशीला कंवर राजपुरोहित, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक अजय कुमार आर्य, श्रीमती रचना, नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष महावीर रांका, श्याम पंचारिया, श्रीमती सुमन छाजेड़, चम्पालाल गेदर, महावीर रोड़ा, विक्रम सिंह राजपुरोहित, मोहन सुराणा सहित अन्य मौजीज लोग मौजूद रहे।  

    राज्यपाल बागडे से कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत की शिष्टाचार भेंट

    जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से बुधवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने लोकभवन पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। राज्यपाल से उनकी यह शिष्टाचार भेंट थी।    

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में पश्चिम क्षेत्रीय रूपक महोत्सव 2026 का भव्य शुभारम्भ

    11 विश्वविद्यालयों के 200 से अधिक छात्र-छात्राएँ ले रहे हैं भाग जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में पश्चिम क्षेत्रीय रूपक महोत्सव–2026 का भव्य शुभारम्भ दिनांक 28 जनवरी 2026 को प्रातः 10:30 बजे हुआ। समारोह के मुख्यातिथि पियाल भट्टाचार्य, चिदाकाश कलालय, दिव्य कला केन्द्र, कोलकाता रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीशदेव पुजारी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, संस्कृत भारती उपस्थित रहे। सारस्वत अतिथि प्रो. हरेकृष्ण शतपथी, पूर्व कुलपति, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरूपति रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर परिसर के निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र ने की। कार्यक्रम के संयोजक एवं सह-निदेशक (शैक्षणिक) प्रो. बोधकुमार झा ने रूपक महोत्सव का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि पश्चिम क्षेत्रीय रूपक महोत्सव में 11 विश्वविद्यालयों एवं संस्कृत महाविद्यालयों के 200 से अधिक छात्र-छात्राएँ भाग ले रहे हैं। इस महोत्सव में भोपाल, लखनऊ, नासिक, जयपुर, रामटेक, मैनपुरी, वृन्दावन, दिल्ली, पलवल (बघौला), भीलवाड़ा सहित अनेक संस्थानों की सहभागिता रही है। सारस्वत अतिथि प्रो. हरेकृष्ण शतपथी ने अपने उद्बोधन में कहा कि नाट्य-रागादि स्वस्थ परम्पराओं की पुनर्स्थापना करते हैं तथा समाज के सर्वांगीण मंगल की कामना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के प्रति आभार भी प्रकट किया। जयपुर परिसर के निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र ने अतिथियों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि संस्कृत नाट्य-प्रस्तुतियाँ हमारी सांस्कृतिक चेतना की संवाहक हैं तथा विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और अनुशासन का विकास करती हैं। विशिष्ट अतिथि श्रीशदेव पुजारी ने संस्कृत के विविध उन्नयन कार्यों की जानकारी देते हुए भारत के विश्वगुरुत्व में संस्कृत के गहन योगदान को रेखांकित किया। मुख्यातिथि पियाल भट्टाचार्य ने भरतमुनि के नाट्यशास्त्र के सिद्धान्तों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया। इस अवसर पर चिदाकाश कलालय द्वारा प्रस्तुत पूर्वरंग की भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जो उनके मार्गदर्शन में अत्यन्त प्रभावशाली रही। *पहले दिन इन नाटकों की हुई प्रस्तुति* “दृष्टि” – कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक नागपुर द्वारा मानव जीवन में विवेक, संवेदना एवं आत्मबोध के महत्व को सशक्त संवादों और भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। “विवाहविजय” श्री एकरसानन्द आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, मैनपुरी नाटक में विवाह संस्कार की पवित्रता एवं सामाजिक मूल्यों का सजीव चित्रण किया गया। “संक्षिप्त मुद्राराक्षस” – केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर राजनीतिक कूटनीति और राष्ट्रहित पर आधारित इस रूपक में आचार्य चाणक्य के रणनीतिक कौशल का प्रभावी मंचन किया गया। “माघगाथा” श्रीमती लाडदेवी पंचोली संस्कृत महाविद्यालय, बरून्दनी, जिला–भीलवाड़ा ने कवि माघ की काव्य-परम्परा और संस्कृत साहित्य की गरिमा को ललित भावाभिनय माध्यम से प्रस्तुत किया । “सा विद्या या विमुक्तये” – हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, बघौला, जिला–पलवल ने इस नाटक में शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य—ज्ञान द्वारा मुक्ति को दार्शनिक भावभूमि के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिपादित किया । “नलदमयन्तीयम्” – केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नासिक परिसर की प्रस्तुति में महाभारत की नल-दमयन्ती कथा पर आधारित रूपक में प्रेम, त्याग, धैर्य एवं धर्म का मार्मिक चित्रण किया गया। उद्घाटन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन सह-निदेशक (प्रशासन) प्रो. शीशराम ने किया। इस अवसर पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय, पूर्व निदेशक प्रो. वाई. एस. रमेश, प्रो. शिवानी वी., प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय, प्रो. श्रीधर मिश्र, प्रो. कृष्णा शर्मा, डॉ. कैलाश सैनी, रूपक महोत्सव सह संयोजक डॉ राकेश जैन डॉ. नमिता मित्तल, डॉ. विनोद कुमार, दीपक भारद्वाज मनोज मिश्रा,डॉ.रेखा शर्मा,नरेश सिंह ,सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन शिवनारायण महर्षि एवं संस्कृति चतुर्वेदी ने किया।

    तीन दिवसीय चतुर्थ कुलगुरु चल वैजयन्ती का भव्य आग़ाज़

    जयपुर। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय कि अधीनस्थ इकाई राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा परिसर में तीन दिवसीय चतुर्थ कुलगुरु चल वैजयन्ती का भव्य शुभारंभ कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह चौहान द्वारा किया गया। कुलगुरु चल वैजयन्ती में श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत कार्यरत समस्त अनुसंधान केन्द्रों, महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों में सेवित अशैक्षणिक कर्मचारी प्रतिभागी के रूप में भाग ले रहे हैं। आयोजन के अंतर्गत कर्मचारियों हेतु विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य प्रतिभागियों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करना है। कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. चौहान ने कहा कि खेल जीवन का अभिन्न अंग हैं। खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं टीम भावना जैसे गुणों का भी विकास करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लेने तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं आपसी सहयोग की भावना बनाए रखने का आह्वान किया।   इस अवसर पर कुल सचिव नवीन यादव ने कहा कि खेलों के माध्यम से अनुशासन, समय प्रबंधन एवं टीमवर्क जैसे गुण सुदृढ़ होते हैं, जो कार्यस्थल पर भी प्रभावी रूप से परिलक्षित होते हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. हरफूल सिंह ने कहा कि इस प्रकार की खेल प्रतियोगिताएँ कर्मचारियों को दैनिक कार्यालयीन कार्यों से इतर नवीन ऊर्जा एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं, जिससे वे भविष्य में और अधिक उत्साह एवं समर्पण के साथ विश्वविद्यालय के विकास में योगदान दे सकते हैं। कुलगुरु चल वैजयन्ती प्रतियोगिता के संयोजक एवं अनुसंधान केन्द्र के अशैक्षणिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद परंपराओं को सुदृढ़ करना है।

    टी20 में भारत नंबर-1, लेकिन टेस्ट में चिंता क्यों बढ़ रही है?

      टी20 में भारत नंबर-1, लेकिन टेस्ट में चिंता क्यों बढ़ रही है? आईसीसी पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भारत इस समय शीर्ष पर है और घरेलू धरती पर होने वाले टी20 विश्व कप से ठीक पहले टीम ज़बरदस्त लय में दिख रही है। गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद भारत ने इस प्रारूप में अब तक कोई श्रृंखला नहीं हारी है जो टीम की गहराई और आत्मविश्वास दोनों को दर्शाता है। लेकिन दूसरी तरफ़, टेस्ट क्रिकेट में तस्वीर उतनी उत्साहजनक नहीं है। भारत का घरेलू किला पिछले एक साल में न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ्रीका ने भेद दिया है। गैम्बीर के कार्यकाल में किसी शीर्ष राष्ट्र के ख़िलाफ़ भारत अभी तक टेस्ट श्रृंखला नहीं जीत पाया है इकलौती जीत वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ रही।    राहुल द्रविड़ की अहम चेतावनी पूर्व कोच राहुल द्रविड़ ने बेंगलुरु में एक पुस्तक विमोचन के दौरान बड़ी बात कही। उनका कहना है कि तीनों प्रारूप खेलने वाले बल्लेबाज़ों के लिए तैयारी का समय सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।कई बार खिलाड़ी टेस्ट से ठीक तीन-चार दिन पहले जुड़ते हैं, जबकि उन्होंने चार-पाँच महीनों से लाल गेंद देखी तक नहीं होती। टर्निंग और सीमिंग पिचों पर घंटों बल्लेबाज़ी करना सिर्फ़ प्रतिभा नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास मांगता है और यही आज के व्यस्त कैलेंडर में सबसे मुश्किल हो गया है। जब लाल गेंद से दूरी टेस्ट क्रिकेट पर भारी पड़ने लगी टी20 में भारत की बादशाहत बताती है कि टीम आधुनिक क्रिकेट में कितनी आगे है। लेकिन टेस्ट में गिरावट यह सवाल खड़ा करती है क्या हम सबसे कठिन प्रारूप को समय देना भूलते जा रहे हैं?अगर भारत को तीनों प्रारूपों में संतुलन बनाए रखना है, तो टेस्ट क्रिकेट को सिर्फ़ परंपरा नहीं, बल्कि प्राथमिकता भी बनानी होगी।

    शोहरत से संन्यास तक: अरिजीत सिंह का चौंकाने वाला फैसला और उसके पीछे की खामोश लड़ाई

      पार्श्वगायन की दुनिया से अरिजीत सिंह का अचानक संन्यास लेना सिर्फ़ प्रशंसकों के लिए नहीं, बल्कि पूरे फ़िल्म उद्योग के लिए झटका है। जिस आवाज़ ने एक पूरी पीढ़ी की भावनाओं को शब्द दिए, वही आवाज़ अब ख़ामोशी चुन रही है और वजह है भारतीय शास्त्रीय संगीत की ओर लौटना। यह फैसला जितना चौंकाने वाला है, उतना ही भीतर से उपजा हुआ भी। बीते वर्षों में अरिजीत कई बार इशारों में बता चुके थे कि शोहरत ने उन्हें उनके ही अस्तित्व से दूर कर दिया है। एक बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया था कि उनका नाम ही उन्हें चिढ़ाने लगा था क्योंकि वह अब व्यक्ति नहीं, बल्कि छवि बन चुका था। जब घर में भी अपने गाने सुनना बंद हो गए अरिजीत ने बताया कि एक दौर ऐसा भी आया जब उन्हें अपने ही गाने सुनना असहनीय लगने लगा। हालात इतने सख़्त थे कि घर में कोई उनका गाना नहीं बजाता था। यह कोई नख़रा नहीं, बल्कि उस मानसिक थकान का संकेत था, जो लगातार भीड़, तालियों और अपेक्षाओं से पैदा होती है।  “उद्योग कलाकारों को मार रहा है” उन्होंने संगीत उद्योग में असमान मेहनताना और दबाव की संस्कृति पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह धीरे-धीरे कलाकार को ख़त्म कर देती है। यह बयान अकेले अरिजीत का नहीं लगता, बल्कि कई अनसुनी आवाज़ों की गूंज है। अरिजीत सिंह का यह कदम पलायन नहीं, बल्कि आत्मरक्षा जैसा लगता है। जब कोई कलाकार अपने सबसे ऊँचे शिखर पर खड़े होकर रुकने का फैसला करता है, तो शायद वह सफलता से नहीं, बल्कि शोर से दूर जाना चाहता है। शास्त्रीय संगीत की ओर लौटना यह याद दिलाता है कि कभी-कभी सबसे बड़ा साहस मंच छोड़ने में होता है। कम बोलना, कम दिखनाऔर ज़्यादा खुद होना शायद यही अरिजीत की असली जीत है।

    चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल; MCX पर मार्च वायदा 7% तक बढ़ा, सिल्वर ETFs में तेजी

    बुधवार को भारतीय शेयर और कमोडिटी बाजारों में चांदी ने रिकॉर्ड रैली दर्ज की, जिससे सिल्वर आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange (MCX) पर चांदी के वायदा अनुबंधों ने 7% से अधिक की इंट्राडे बढ़त दर्ज की, जो निवेशकों और बाजार विश्लेषकों दोनों के लिए आश्चर्यजनक रहा। MCX पर मार्च वायदा के लिए चांदी की कीमत 7.52% की वृद्धि के साथ ₹3,83,100 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इसी तरह मई वायदा ₹3,95,753 प्रति किलोग्राम और जुलाई वायदा ₹4,14,446 प्रति किलोग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंचा। यह आंकड़े चांदी के बाजार में पिछले रिकॉर्ड को पार करने का संकेत देते हैं और निवेशकों के बीच मजबूत खरीदारी की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। सिल्वर ETFs में तेजीसिल्वर ETFs ने भी चांदी की तेजी के अनुरूप शानदार प्रदर्शन किया। Mirae Asset Silver ETF, Axis Silver ETF, Motilal Oswal Silver ETF, Zerodha Silver ETF, Aditya Birla Silver ETF और Nippon India Silver ETF ने सत्र के दौरान 6% से अधिक की बढ़त दर्ज की। वहीं, 360 ONE Silver ETF, Groww Silver ETF, SBI Silver ETF, HDFC Silver ETF, DSP Silver ETF समेत कई अन्य ETFs ने 5% से अधिक की तेजी दिखाई। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान केवल कमोडिटी बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ETFs में भी मजबूत निवेश प्रवाह देखा गया। विशेषज्ञों का विश्लेषणIndusInd Securities के वरिष्ठ विश्लेषक, जिगर त्रिवेदी ने बताया कि सिल्वर ETFs की कीमतें निकट भविष्य में अस्थिर रह सकती हैं और यदि लेवरेज या सेंटिमेंट-ड्रिवन प्रवाह में तेजी आती है तो स्पॉट चांदी की तुलना में ETFs अधिक उतार-चढ़ाव दिखा सकते हैं। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि चांदी की आपूर्ति संरचनात्मक रूप से सीमित है क्योंकि यह मुख्य रूप से अन्य धातुओं का उप-उत्पाद है और इसे तेजी से बढ़ाया नहीं जा सकता। इसके अलावा, सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीकी मांग के कारण औद्योगिक खपत बढ़ी है, जो कीमतों का समर्थन करती है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितता और कम या नकारात्मक वास्तविक ब्याज दरों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग भी सिल्वर की कीमतों को बनाए रखने में सहायक है। ETFs और निवेश प्रवाहसिल्वर ETFs निवेशकों को भौतिक चांदी के बजाय स्टॉक एक्सचेंज पर निवेश करने का विकल्प प्रदान करते हैं। ये फंड सुरक्षित वॉल्ट में रखी गई भौतिक चांदी के जरिए समर्थित होते हैं और स्टॉक्स की तरह कारोबार किए जाते हैं। 2025 में सिल्वर ETFs में ₹234.7 अरब का निवेश प्रवाह दर्ज किया गया, जो पिछले साल ₹85.69 अरब के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है। यह प्रवाह दर्शाता है कि निवेशक अब चांदी को केवल औद्योगिक उपयोग के लिए नहीं बल्कि निवेश उपकरण के रूप में भी देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चांदी की कीमतों में यह रैली जारी रहती है तो आने वाले महीनों में निवेश आधारित आयात में और वृद्धि हो सकती है। सिल्वर बनाम गोल्डहाल के महीनों में चांदी की कीमतों ने सोने की तुलना में अधिक तेजी दिखाई है। जबकि पहले चांदी की मांग मुख्य रूप से औद्योगिक खपत से प्रेरित थी, अब निवेशक और सुरक्षित-हैवन प्रवाह इसके मुख्य चालक बन गए हैं। यह बदलाव विशेष रूप से ETFs में निवेश की प्रवृत्ति से स्पष्ट होता है। बाजार पर व्यापक प्रभावचांदी की इस रैली का असर कमोडिटी बाजारों और निवेशकों के समग्र विश्वास पर भी पड़ा है। MCX पर उच्च मूल्य स्तर ने निवेशकों में तेजी की भावना बढ़ाई और ETFs में आकर्षक रिटर्न की संभावना ने उन्हें उत्साहित किया। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मौजूदा समय में चांदी की मांग में वैश्विक स्तर पर भी वृद्धि देखी जा रही है। तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहन और सोलर पैनल उत्पादन में चांदी की खपत बढ़ी है। इस वजह से मौजूदा रैली का आधार सिर्फ निवेश प्रवाह नहीं बल्कि वास्तविक उद्योग की मांग भी है। निवेशकों के लिए सुझावविश्लेषकों ने निवेशकों को चेताया है कि चांदी और ETFs में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशक उच्च उतार-चढ़ाव और भावी जोखिम को समझकर ही निवेश करें। इसके लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना और भावनाओं के आधार पर जल्दबाजी में खरीद-बिक्री से बचना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, निवेशकों को विशेषज्ञ सलाह के आधार पर ही ETFs में निवेश करने और पोर्टफोलियो का संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जाती है। सरकार और नीति निर्माताओं की भूमिकाहालांकि चांदी की कीमतों में रैली मुख्य रूप से बाजार की ताकत और वैश्विक मांग से प्रभावित है, लेकिन नीतिगत स्थिरता और आयात-निर्यात नियमों का भी इसमें योगदान है। यदि आयात शुल्क या व्यापार नीतियाँ अचानक बदलती हैं तो कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है। निष्कर्षबुधवार की तेजी से यह स्पष्ट हुआ कि चांदी और सिल्वर ETFs निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। MCX पर वायदा अनुबंधों के रिकॉर्ड स्तर और ETFs में मजबूत निवेश प्रवाह ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में सिल्वर का दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को अस्थिरता और बाजार जोखिम का ध्यान रखना आवश्यक है।   यह रैली यह भी दर्शाती है कि चांदी अब केवल औद्योगिक उपयोग की धातु नहीं रही बल्कि निवेशकों के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन चुकी है।

    दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार, न्यूनतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री अधिक 12.6°C

    दिल्ली में बुधवार को वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से लगभग 4 डिग्री अधिक 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा। यह बदलाव राजधानी के निवासियों के लिए कुछ राहत लेकर आया है, खासकर उन लोगों के लिए जो श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। मौसम विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि हालिया वायु गुणवत्ता सुधार और तापमान में वृद्धि का सीधा संबंध मौसमी बदलाव और वायुमंडलीय परिस्थितियों से है। वायु गुणवत्ता में सुधारराजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अब “संतोषजनक” श्रेणी में पहुंच गया है। पिछले कुछ हफ्तों में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता रहा था, जिसमें पीएम2.5 और पीएम10 पार्टिकुलेट्स का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुँच गया था। हालांकि, बुधवार को सुबह-सुबह रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, AQI लगभग 175 रहा, जो मध्यम और संतोषजनक सीमा के बीच आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की दिशा और वायु प्रवाह में बदलाव ने प्रदूषण को फैलने और वायुमंडल में मिश्रित होने में मदद की है। दिल्ली वायु गुणवत्ता प्रबंधन बोर्ड (DPCC) ने भी नोट किया कि पिछले दो दिनों से पवन की गति में वृद्धि हुई है, जिससे वायुमंडल में प्रदूषण के कणों का फैलाव हुआ और सतही स्तर पर प्रदूषण कम हुआ। इस दौरान औद्योगिक क्षेत्रों और निर्माण स्थलों में भी नियमित मॉनिटरिंग और नियंत्रण उपायों का पालन किया गया। तापमान में वृद्धि और मौसमी बदलावमौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली का न्यूनतम तापमान बुधवार को 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 4 डिग्री अधिक है। दिन का तापमान भी सामान्य से कुछ अधिक रहा। इस असामान्य तापमान वृद्धि का मुख्य कारण उच्च दबाव प्रणाली और सूर्य की किरणों का अपेक्षाकृत तेज होना बताया गया है। शीतकालीन मौसम में सामान्यतः न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, लेकिन इस बार तापमान में यह वृद्धि लोगों को अपेक्षाकृत गर्म दिन और रात प्रदान कर रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी के मध्य तक दिल्ली में हल्की ठंड के साथ दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। जनता पर प्रभाववायु गुणवत्ता में सुधार से दिल्ली के नागरिकों को राहत मिली है। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब AQI संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में हो, तो बाहर की गतिविधियाँ अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं, लेकिन लगातार लंबी अवधि तक बाहर रहने वाले लोग मास्क का इस्तेमाल जारी रखें। इस बीच, कई स्कूलों और कार्यालयों ने भी AQI की स्थिति पर नजर रखी और गतिविधियों को उसी अनुसार निर्धारित किया। इसके अलावा, योग और हल्की कसरत जैसी बाहरी गतिविधियाँ भी अब सुरक्षित मानी जा रही हैं। मौसम विशेषज्ञों की रायमौसम विशेषज्ञों ने बताया कि दिल्ली में शीतकालीन वायु गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव सामान्य है। हवा की दिशा, पवन की गति, औद्योगिक गतिविधियाँ, वाहनों से निकलने वाला धुआँ और ठंड के कारण वायुमंडल में तापमान परतें (temperature inversion) इस समय प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि जब तापमान अचानक बढ़ता है और पवन की गति भी बढ़ जाती है, तो प्रदूषण के कण फैल जाते हैं और AQI में सुधार देखा जाता है। विशेषज्ञों ने यह भी चेताया कि फरवरी के मध्य में यदि ठंड वापस लौटती है और वायुमंडलीय स्थिरता बढ़ती है, तो प्रदूषण स्तर फिर से बढ़ सकता है। इस कारण नागरिकों को सतर्क रहने और हवा की गुणवत्ता की नियमित जांच करने की सलाह दी जाती है। सरकारी उपाय और नियंत्रणदिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने हाल के हफ्तों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय, सड़कों पर पानी छिड़काव, औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण और वाहनों की सघन जांच जैसी योजनाएँ लागू की गई हैं। इन उपायों का सीधा असर वायु गुणवत्ता में सुधार के रूप में देखा गया है। सड़कों पर धूल नियंत्रण और हरी बेल्ट क्षेत्रों के रखरखाव ने भी AQI को बेहतर बनाए रखने में मदद की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लगातार प्रयास आने वाले हफ्तों में स्थिर वायु गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होंगे। भविष्य का पूर्वानुमानमौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए हल्की ठंड और कोहरे की संभावना जताई है। दिन का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहने का अनुमान है, जबकि रात के तापमान में हल्की गिरावट हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वायु प्रवाह लगातार बना रहता है, तो AQI में सुधार जारी रह सकता है। शहरी क्षेत्रों में वाहनों की संख्या, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक उत्सर्जन के आधार पर प्रदूषण के स्तर पर निगरानी बनाए रखना आवश्यक है। मौसम और प्रदूषण विशेषज्ञ लगातार डेटा का विश्लेषण कर नागरिकों को समय पर सूचित कर रहे हैं। निष्कर्षइस समय दिल्ली के निवासियों के लिए यह राहत भरा समाचार है कि वायु गुणवत्ता में सुधार और तापमान में असामान्य वृद्धि ने जीवन को थोड़ी सहजता प्रदान की है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि शीतकालीन महीनों में वायु गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव सामान्य है और नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।   वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि सरकारी उपाय और मौसम की अनुकूल परिस्थितियाँ मिलकर प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दिल्लीवासियों के लिए यह समय बाहरी गतिविधियों को संतुलित रूप से करने का है और प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग देने का है।

    रुपया शुरुआती मजबूती खोकर 91.79 पर बंद, भारत-ईयू व्यापार समझौते के बाद उतार-चढ़ाव जारी

    भारतीय रुपये ने बुधवार को शुरुआती मजबूती दिखाई, लेकिन विदेशी निवेशकों के बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के दबाव में दिन का कारोबार 11 पैसे की गिरावट के साथ 91.79 प्रति डॉलर पर समाप्त हुआ। इंटरबैंक विदेशी विनिमय बाजार में रुपया सुबह 91.60 पर खुला और दिन के शुरुआती उच्च स्तर 91.50 तक पहुंचा, लेकिन बाद में 91.83 तक गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर सूचकांक में नरमी और भारत तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा दिया। इस समझौते के तहत भारत के वस्त्र, रसायन और जूते जैसे कई घरेलू क्षेत्र 27 राष्ट्रों वाले यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश पाएंगे, जबकि ईयू को भारतीय बाजार में कार और वाइन जैसे उत्पादों पर छूट दरों का लाभ मिलेगा। इस समझौते को "मदर ऑफ ऑल डील्स" कहा जा रहा है, क्योंकि यह लगभग दो अरब लोगों के बाजार का निर्माण करेगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मंगलवार को ₹3,068.49 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने खरीदारी के जरिए बाज़ार में संतुलन बनाए रखा। सेंसेक्स ने बुधवार को 487.20 अंकों की तेजी के साथ 82,344.68 पर और निफ्टी 50 ने 167.35 अंकों की बढ़त के साथ 25,342.75 पर बंद किया। तेल और अन्य कमोडिटी बाजार में भी हल्की गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 67.28 डॉलर प्रति बैरल पर था। अमेरिकी डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.07 प्रतिशत गिरकर 96.14 पर ट्रेड कर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपया भले ही भारत-ईयू FTA के बाद शुरुआत में मजबूती दिखा रहा हो, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां रुपये पर दबाव बनाए रख सकती हैं। मंगलवार को रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर से 22 पैसे की तेजी के साथ 91.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस बीच, शेयर बाजार में ऑटो और टेक्नोलॉजी सेक्टर प्रमुख रहे। ओएनजीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कंपनियों के शेयरों में तेजी रही, जबकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने दिन भर बाजार को उतार-चढ़ाव में रखा।   रुपया और शेयर बाजार की यह स्थिति संकेत देती है कि विदेशी निवेशक अभी भी वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों को लेकर सतर्क हैं, और व्यापार एवं निवेश के निर्णयों में सतर्कता बरत रहे हैं।

    कांचीपुरम के देवरा‍जस्वामी मंदिर में परंपरागत पूजा-पाठ से जुड़े मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट की पहल, सेवानिवृत्त न्यायाधीश को मध्यस्थ नियुक्त

      सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित प्रसिद्ध देवरा‍जस्वामी (वरदराज पेरुमल) मंदिर में परंपरागत पूजा-पद्धतियों को लेकर चले आ रहे मतभेद के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय किशन कौल को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त करते हुए दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास करने का निर्देश दिया। यह मामला मंदिर में विशेष अवसरों पर पारंपरिक स्तुतियों और पाठों के क्रम को लेकर अलग-अलग परंपराओं का पालन करने वाले समूहों के बीच मतभेद से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि यह विषय धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से संबंधित है, इसलिए इसे संवाद और समझ के माध्यम से सुलझाया जाना अधिक उपयुक्त होगा। आपसी समझ पर जोर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ईश्वर के समक्ष सभी समान होते हैं और ऐसे मामलों में सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। अदालत ने उम्मीद जताई कि नियुक्त मध्यस्थ की सहायता से दोनों पक्ष आपसी सम्मान और परंपराओं की भावना को ध्यान में रखते हुए किसी साझा निष्कर्ष पर पहुंच सकेंगे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायमूर्ति कौल आवश्यक होने पर तमिलनाडु की धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई परंपराओं की जानकारी रखने वाले दो विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं, ताकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को बेहतर ढंग से समझा जा सके। विवाद की पृष्ठभूमि यह मामला मद्रास उच्च न्यायालय के नवंबर 2025 के एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें मंदिर में कुछ विशेष स्तुतियों के पाठ के क्रम को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए कांचीपुरम निवासी एस. नारायणन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायालय ने एक परंपरा को मान्यता देते हुए दूसरी परंपरा के कुछ धार्मिक अभ्यासों पर रोक लगा दी, जिससे समानता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों पर असर पड़ा। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मंदिर की ऐतिहासिक और परंपरागत पहचान से जुड़े पहलुओं को पूरी तरह ध्यान में नहीं रखा गया। उनका कहना था कि मंदिर परिसर में एक प्रमुख संत से जुड़ा एक अलग पवित्र स्थल भी स्थित है, और उससे जुड़ी स्तुतियों का पाठ रोकना संबंधित अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करता है। संवैधानिक प्रावधानों का हवाला याचिका में यह भी कहा गया कि उच्च न्यायालय ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या करते समय संतुलन नहीं रखा। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि धार्मिक समुदायों को अपने आंतरिक धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और इसे सीमित नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी दलील दी गई कि प्रशासनिक अधिकारियों को केवल प्रबंधन और संपत्ति से जुड़े मामलों तक सीमित रहना चाहिए, न कि धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों में हस्तक्षेप करना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौजूदगी इस मामले की सुनवाई के दौरान कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व किया। सभी पक्षों ने अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क रखे, जिसके बाद पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंची कि विवाद का न्यायिक समाधान निकालने के बजाय मध्यस्थता के माध्यम से सहमति बनाना अधिक उपयुक्त होगा। सांस्कृतिक विरासत पर टिप्पणी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी विरासत को बनाए रखने के लिए आपसी सम्मान और संवाद बेहद आवश्यक है। अगली सुनवाई मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मार्च महीने में तय की है। तब तक मध्यस्थ से यह अपेक्षा की गई है कि वे दोनों पक्षों के साथ बातचीत कर किसी साझा समाधान की संभावना तलाशेंगे। अदालत के इस कदम को धार्मिक परंपराओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को शांतिपूर्ण और संतुलित तरीके से सुलझाने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल संबंधित पक्षों को राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के समाधान के लिए एक सकारात्मक उदाहरण भी स्थापित हो सकता है।    

    नागरकोइल–मंगलूरु अमृत भारत एक्सप्रेस के लंबे यात्रा समय पर यात्रियों की आपत्ति, गोवा तक विस्तार की मांग

      नागरकोइल जंक्शन और मंगलूरु जंक्शन के बीच हाल ही में शुरू की गई अमृत भारत एक्सप्रेस सेवा का यात्रियों ने स्वागत तो किया है, लेकिन इसके लंबे यात्रा समय को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। रेल यात्रियों और उपयोगकर्ता संगठनों का कहना है कि लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेन को 17 घंटे से अधिक का समय लगना इसके उद्देश्य और प्रीमियम सुविधाओं के अनुरूप नहीं है। यात्रियों के अनुसार, इस सेवा की औसत गति लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटा बैठती है, जो एक आधुनिक और विशेष श्रेणी की ट्रेन के लिए अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है। उनका मानना है कि यदि समय-सारिणी और संचालन में सुधार किया जाए, तो यह सेवा कहीं अधिक उपयोगी और आकर्षक बन सकती है। रात की यात्रा के लिए असुविधाजनक समय-सारिणी कन्याकुमारी जिला रेलवे उपयोगकर्ता संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस की समय-सारिणी रात की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सुविधाजनक नहीं है। ट्रेन का अधिकांश संचालन दिन के समय होता है, जिससे लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को अपेक्षित आराम नहीं मिल पाता। वर्तमान समय-सारिणी के अनुसार, ट्रेन नागरकोइल से पूर्वाह्न में प्रस्थान करती है और अगले दिन तड़के मंगलूरु पहुंचती है। इस दौरान कासरगोड और मंगलूरु के बीच का हिस्सा अपेक्षाकृत अधिक समय लेता है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह दूरी कहीं कम समय में तय की जा सकती है। यात्रियों का कहना है कि इस खंड में अनावश्यक ठहराव और ढीली समय-सारिणी के कारण कुल यात्रा समय बढ़ जाता है। कम ठहराव, फिर भी धीमी गति यात्रियों ने यह भी इंगित किया कि अमृत भारत एक्सप्रेस में ठहराव की संख्या अपेक्षाकृत कम है, फिर भी इसकी गति कुछ अन्य नियमित एक्सप्रेस ट्रेनों से कम है, जिनमें कहीं अधिक स्टेशन स्टॉप होते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि ट्रेन की योजना बनाते समय यात्रियों की वास्तविक जरूरतों और मौजूदा रेल नेटवर्क की क्षमता का समुचित आकलन किया गया या नहीं। सेवा विस्तार की मांग रेल यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने रेलवे मंत्रालय से इस ट्रेन के मार्ग विस्तार की भी मांग की है। यात्रियों का सुझाव है कि दक्षिण में इसे कन्याकुमारी तक और उत्तर में इसे गोवा के वास्को-दा-गामा या सुभ्रह्मण्य रोड तक बढ़ाया जाना चाहिए। इससे न केवल अधिक क्षेत्रों को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि पर्यटन, तीर्थ यात्रा और क्षेत्रीय आवागमन को भी बढ़ावा मिलेगा। कुछ यात्रियों का मानना है कि यदि ट्रेन कन्याकुमारी से शुरू होकर गोवा तक चले, तो यह देश के दक्षिण-पश्चिमी तटीय क्षेत्रों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण सेवा बन सकती है। इससे केरल, कर्नाटक और गोवा के बीच यात्रा करने वाले लोगों को एक बेहतर विकल्प मिलेगा। प्रीमियम सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं यात्री संगठनों का कहना है कि लंबे यात्रा समय के कारण अमृत भारत एक्सप्रेस में उपलब्ध विशेष सुविधाओं का पूरा लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। खासतौर पर दिन के समय चलने वाली स्लीपर कोच वाली सेवा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि ऐसे कोच आमतौर पर रात की यात्रा के लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं। उनका तर्क है कि यदि ट्रेन की समय-सारिणी को कसकर बनाया जाए और कुछ खंडों में गति बढ़ाई जाए, तो यह सेवा रेलवे और यात्रियों दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। तीर्थ और पर्यटन को जोड़ने का अवसर मंगलूरु और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े यात्रियों ने सुझाव दिया है कि इस सेवा को सुभ्रह्मण्य रोड तक बढ़ाकर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल कुक्के सुभ्रह्मण्य को दक्षिण के प्रमुख शहरों से जोड़ा जा सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा। रेलवे से अपेक्षाएं यात्रियों की मांग है कि रेलवे प्रशासन इस सेवा की समय-सारिणी और मार्ग की पुनः समीक्षा करे। उनका कहना है कि यदि यात्रियों की प्रतिक्रिया और जरूरतों को ध्यान में रखकर बदलाव किए जाएं, तो अमृत भारत एक्सप्रेस वास्तव में “आम आदमी की प्रीमियम ट्रेन” के अपने उद्देश्य को पूरा कर सकती है। फिलहाल, यात्रियों को उम्मीद है कि रेलवे मंत्रालय उनकी चिंताओं पर विचार करेगा और आने वाले समय में इस सेवा को अधिक तेज, सुविधाजनक और व्यापक बनाए जाने की दिशा में कदम उठाएगा।    

    भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी

      भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को लेकर निवेशकों में बढ़े भरोसे के बीच प्रमुख सूचकांकों ने दिन का अंत बढ़त के साथ किया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने बाजार की धारणा को और सहारा दिया। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 487.20 अंकों की बढ़त के साथ 82,344.68 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय 646.49 अंक चढ़कर 82,503.97 के स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 167.35 अंक बढ़कर 25,342.75 पर बंद हुआ। प्रमुख शेयरों में तेजी सेंसेक्स की कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद इसके शेयरों में करीब 9 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों ने भी बाजार को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। विश्लेषकों का कहना है कि रक्षा, बुनियादी ढांचा और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में खरीदारी का रुझान विशेष रूप से मजबूत रहा, जिससे व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल बना। कुछ शेयरों में दबाव हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। एशियन पेंट्स के शेयरों में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने दिसंबर तिमाही में अपने समेकित शुद्ध लाभ में गिरावट की जानकारी दी थी, जिसका असर उसके शेयर मूल्य पर पड़ा। इसके अलावा मारुति सुजुकी, सन फार्मा, इंफोसिस और भारती एयरटेल जैसे शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखी गई। भारत-ईयू समझौते से निवेशकों में उत्साह बाजार में तेजी का सबसे बड़ा कारण भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ व्यापक मुक्त व्यापार समझौता माना जा रहा है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निर्यात-आयात को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। अधिकारियों के अनुसार, इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है, जबकि घरेलू उद्योगों के लिए नई प्रतिस्पर्धी चुनौतियां भी सामने आएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दीर्घकाल में भारत की आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे सकता है और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मददगार साबित हो सकता है। विदेशी और घरेलू निवेश का रुझान एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप से शेयरों की बिकवाली की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में मजबूत खरीदारी की। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया। वैश्विक बाजारों का संकेत एशियाई बाजारों में भी बुधवार को सकारात्मक रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और हांगकांग के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, यूरोपीय बाजारों में कारोबार के दौरान हल्की कमजोरी देखी गई। अमेरिका के शेयर बाजारों में पिछला सत्र मिलाजुला लेकिन कुल मिलाकर सकारात्मक रहा। इस बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में नरमी दर्ज की गई, जिससे आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आगे की राह बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों के रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। साथ ही, भारत-यूरोपीय संघ समझौते से जुड़े अगले कदम और इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। कुल मिलाकर, मौजूदा कारोबारी सत्र में बाजार की मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशक मध्यम से लंबी अवधि के दृष्टिकोण से सकारात्मक बने हुए हैं, हालांकि चुनिंदा क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना अब भी जरूरी माना जा रहा है।