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    आज के बदलते दौर में डिग्री के साथ स्किल्स, एंटरप्रेन्योरशिप और स्टार्टअप जरूरी: डॉ. किरण बेदी

    ऊर्जा 2026’ का जोशपूर्ण आगाज बियानी में नए विद्यार्थियों ने शुरू किया नया सफर जयपुर। बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस की ओर से नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए पांच दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम ‘ऊर्जा 2026’ का आगाज नए अंदाज के साथ किया गया। इस अवसर पर ‘ऊर्जा’ के लाल रंग के स्वरूप को समझने के लिए सभी विद्यार्थियों ने लाल रंग के वस्त्र पहन कार्यक्रम में जोश और उत्साह का एहसास जगाया। इस वर्ष ‘द नेक्स्ट यू’ थीम के तहत कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सकारात्मक सोच एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करना रहा। कार्यक्रम की शुरूआत चैयरमेन डॉ. राजीव बियानी, प्रसिद्ध मोटिवेशनल गुरु डॉ. संजय बियानी ,अस्सिटेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी , अस्सिटेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी , डीन व प्रिंसिपल डॉ.ध्यान सिंह गोठवाल ने दीप प्रज्जवलित कर की। इस अवसर पर ‘शक्ति : सौम्यता से प्रचंडता तक’ विषय पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम में बियानी गर्ल्स कॉलेज की 20 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा एवं ‘ऊर्जा 2026-27’ की झलक प्रस्तुत कर नवागंतुक विद्यार्थियों को उपलब्धियों से परिचित कराया गया। इस अवसर पर संस्था के निदेशक एवं मोटिवेशनल गुरु डॉ. संजय बियानी ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायी विचारों के साथ संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न एटीट्यूड के महत्व को समझाते हुए विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, करुणा, प्रेम, साहस एवं उत्साह को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ‘मन के हारे हार, मन के जीते जीत’ का संदेश देते हुए विद्यार्थियों के साथ टू-वे इंटरेक्शन किया और नए सफर में निरंतर सीखने, सकारात्मक दृष्टिकोण रखने तथा अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पालीवाल ने ‘अपने महाविद्यालय को जानें एवं प्रबंधन खेल’ गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को महाविद्यालय की कार्यप्रणाली से परिचित कराया। साथ ही कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत की प्रथम महिला सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी , सामाजिक कार्यकर्ता एवं पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते समय में केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी विशेष स्किल्स विकसित कर आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने अनिश्चित परिस्थितियों के लिए तैयार रहने के साथ निर्णय क्षमता, बुद्धिमत्ता एवं कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन जैसी क्षमताओं के विकास पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास की दुनिया के प्रति सजग रहने, नियमित रूप से समाचार-पत्र पढ़ने, रेडियो सुनने तथा किताबों से ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर गुमराह होने से बचना चाहिए तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को बैंक खाता खोलने और धन के महत्व को समझने के लिए भी प्रेरित किया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने आत्मनिर्भरता को अपनी प्राथमिकता बनाया, ताकि स्वयं के साथ अपने परिवार और माता-पिता को भी सम्मानजनक जीवन दे सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किताबों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उसमें प्राप्त ज्ञान को अपना ज्ञान बनाएं और निरंतर सीखते हुए स्वयं, परिवार एवं समाज के लिए सफल और उपयोगी बनें। वहीं, असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. राधिका बियानी डागा और डॉ. स्मृति तिवाड़ी द्वारा ‘गुलाबी इंडिया-जापान कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम’ के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर डॉ. किरण बेदी ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे भारत-जापान के बीच संवाद एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कल ऊर्जा के दूसरे दिन कॉलेज के विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा छात्राओं के लिए कई महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें यूपीएससी/आरपीएससी की तैयारी, जापान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी, तथा साकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम के अनुभव उजैसे विषयों पर विशेष सत्र शामिल होंगे। इन सत्रों का उद्देश्य छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, वैश्विक अवसरों, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभवों से परिचित कराना है।  

    शास्त्र भी, जीवन भी और जीविका भी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में दीक्षारम्भ नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला संस्कार और संकल्प का मंत्र, विद्या के साथ संस्कार और जीवन का लक्ष्य जरूरी प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी

    जयपुर.  केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में सोमवार को नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। विश्वविद्यालय मुख्यालय के साथ देशभर के जयपुर सहित विभिन्न परिसरों से नवप्रवेशित विद्यार्थी आभासीय माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. डी. दयानाथ के वैदिक मंगलाचरण से हुई। छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए नवप्रवेशित विद्यार्थियों को बधाई दी तथा विश्वविद्यालय की विभिन्न छात्र कल्याण गतिविधियों, सुविधाओ एवं अवसरो की जानकारी दी। विद्या ही मनुष्य का द्वितीय जन्म कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि माता के गर्भ से जन्म लेने पर मनुष्य को शरीर प्राप्त होता है, जबकि विद्या और संस्कार से उसका द्वितीय जन्म होता है। विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी निर्मल एवं जिज्ञासु मन से शिशुवत भाव लेकर ज्ञान की साधना करें। उन्होंने कहा कि विद्या केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धा, श्रवण, मनन, अनुशीलन और निरंतर प्रयास से अर्जित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जिस प्रकार माता-पिता के प्रति श्रद्धा होती है, उसी प्रकार अपने आचार्यों और गुरुओं के प्रति भी श्रद्धा एवं सम्मान का भाव रखना चाहिए। संस्कृत माध्यम से अध्ययन करते हुए विद्यार्थी ज्ञान के साथ संस्कार भी प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणों को अपनाते हुए अवगुणों और दोषों का त्याग करना चाहिए तथा सही-गलत का विवेक करते हुए सदैव उचित मार्ग को स्वीकार करना चाहिए। पहले दिन से तय करें जीवन का लक्ष्य कुलपति प्रो.वरखेड़ी ने कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन का लक्ष्य पहले दिन से निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए संकल्पबद्ध होकर आगे बढ़ें। नियमित अध्ययन, पुस्तकों की तैयारी, अनुशासन और निरंतर अभ्यास विद्यार्थी जीवन की सफलता का आधार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल शास्त्रों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन और जीविका के लिए भी सक्षम बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वयं को एक श्रेष्ठ शिल्प की तरह तैयार करें। ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और चरित्र के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि नए विद्यार्थी अब विश्वविद्यालय के व्यापक परिवार का हिस्सा हैं और यहां उन्हें नए परिवेश, नए मित्रों तथा नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कुलपति ने विद्यार्थियों को सफलता का सूत्र देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य “छात्र भी, शास्त्र भी, जीवन भी और जीविका भी” के समन्वय के साथ आगे बढ़ना होना चाहिए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी तथा प्रो. कुलदीप शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परम्परा, अनुशासन एवं अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर परियोजना अधिकारी डॉ. विजय दाधीच, उपनिदेशक शैक्षणिक डॉ. देवानंद शुक्ल, डॉ. योगेन्द्र दीक्षित सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. प्रमोद कुमार बुटोलिया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. नारायण आरएल सिम्हा ने किया।  

    व्यापारियों के लिए medeation सहायक...जस्टिस शुक्ला

    आज के बदलते दौर में व्यापार उद्योगों में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ आवश्यक है यदि हम अपने कॉन्ट्रैक्ट में इसे डालेंगे तो न्यायिक प्रक्रिया में होने वाले विलंब को टाल कर जल्द समाधान पा सकते है विवादों का तो उत्पन्न होना पीढ़ियों का किस्सा है जो सैकड़ों साल से चलता आ रहा है तब पंचायते निपटारा त्वरित करती थीं आज ज्यूडिशियरी पर बहुत भार होने के कारण समय ज्यादा लगता हैं l उपरोक्त विचार जस्टिस शुक्ला ने अप्सरा होटल मे GOCAL द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये l अध्यक्ष सर्च कौल ने स्वागत भाषण दिया ब कहा कि राम राज्य से विवादों का निपटारा मिडिएशन से होता आया है आज हम व्यापारियों को यह सुविधा उपलब्ध करने हेतु अग्रसर हैं आज हम तीन MOU साइन किए हैं जिनमें CAIT FMCG aur मावा विक्रेता संघ हैं। केट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश गुप्ता ने कहा कि व्यापारी जगत लिटिगेशन में कोर्ट में समय और धन की बर्बादी करता है फैसले आने में वर्षों लगते हैं आर्बिट्रेशन क्लॉज़ कॉन्ट्रैक्ट में डालने से समय और पैसे के अलावा मानसिक संत्रास से बचा जा सकता है कार्यक्रम में शहर के ईश्वर बाहेती गौतम कोठारी संजय पटवर्धन धर्मेंद्र खंडेलवाल प्रमोद खंडेलवाल आदि उपस्थित थी सचिव रेनू गुप्ता ने मोमेंटो भेट किया और आभार माना  

    साण्डेराव में खुलेगा देश का इकलौता 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म'

    60 करोड़ की लागत से सुधरेगी पशुओं की नस्ल -पशुपालन विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने किया भूमिपूजन एवं शिलान्यास जयपुर। पशुओं में नस्ल सुधार और उनके संरक्षण की दिशा में राजस्थान ने रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के एकमात्र एवं प्रथम 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म' के प्रशासनिक भवन के निर्माण कार्य का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। यह शिलान्यास पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत द्वारा पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गांव साण्डेराव में स्थापित हो रहे इस सेंटर के प्रशासनिक भवन का भूमि पूजन एवं शिलान्यास वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। संभंतया यह देश का भी पहला एवं एकमात्र एक्सीलेंस इंडीजिनस सेंटर है, जहां एक साथ गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व घोड़े की 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार एवं संवर्धन का कार्य होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए राजस्थान सरकार की बजट घोषणा (2025-26) की क्रियान्विति के तहत काम शुरू कर दिया गया है। इस पूरे सेंटर के निर्माण और विकास पर करीब 60 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह अत्याधुनिक सेंटर करीब 200 बीघा की विशाल भूमि पर स्थापित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान की पारंपरिक और विशिष्ट पशु प्रजातियों का संरक्षण करना है। पशुओं की 30 प्रजातियों के पशुओं की नस्लों का होगा सुधार और संवर्धन  पशुपालन, मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि करीब दो वर्ष में यह सेंटर पूर्ण रूप से अपना मूर्त रूप ले लगा। यह देश का एकमात्र ऐसा सेंटर होगा, जहां एक साथ गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व घोड़े की 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार व संवर्धन पर रिसर्च होंगे। उन्होंने बताया कि खासकर उन प्रजातियों पर अधिक फोकस होगा, जो कि राजस्थान की हैं। कुमावत ने बताया कि गाय में गिर, कॉकरेंच, राठी, थारपारकर, साहिवाल, नागौरी, मालवी व हरियाणा नस्ल का सैक्स सोर्टेड सीमन, कृत्रिम गर्भाधान व उन्नत नस्ल के सांड से सुधार व संवर्धन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि खासकर दुनिया की सबसे छोटी गाय की पुंगनूर प्रजाति के नस्ल सुधार को लेकर भी संरक्षण व संवर्धन के लिए रिसर्च किया जाएगा। मूल रूप् से आंध्रप्रदेश की इस पुंगनूर नस्ल की गाय के पालन को लेकर पशुपालकों में खासा उत्साह है। इसके अलावा भैंस की स्वदेशी प्रजाति- मुर्रा, सूरती, जाफराबादी, मेहसाना, भेड़ की मगरा, मारवाड़ी, नाली, चोकला, पूगल, जैसलमेरी, मालपुरा व सोनाड़ी, बकरी की राजस्थान की प्रजाति- बारबरी, सिरोही, जमनापारी, जखराना, सोजत, मारवाड़ी, ऊंट की प्रजाति- जैसलमेरी व बीकानेरी तथा घोड़े की एकमात्र राजस्थान की प्रजाति मारवाड़ी के नस्ल का संरक्षण व संवर्धन किया जाएगा। पशुपालकों को मिलेगा प्रशिक्षण और उन्नत नस्ल के पशु यह सेंटर सिर्फ एक अनुसंधान केंद्र नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बनेगा। पशुपालन मंत्री कुमावत ने बताया कि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन के क्षेत्र में नए स्टार्टअप और उद्यमिता को विकसित किया जाएगा। इसके साथ-साथ पशुपालकों को आधुनिक और नवीन वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। वहीं, समय-समय पर पशुपालकों के लिए ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे। यहाँ से पशुपालकों को सीधे उन्नत नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले पशु भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रशासनिक ढांचा और नए पदों का सृजन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार के वित्त विभाग ने प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत पशुपालन विभाग के लिए कुल 15 पदों का सृजन किया गया है, जिनमें 07 स्थायी पद शामिल हैं। वहीं, 8 पद संविदाकर्मियों के लिए सृजित किए गए हैं। इको-फ्रेंडली और ग्रीन टेक्नोलॉजी से लैस होगा सेंटर आधुनिकता के साथ-साथ इस सेंटर को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है। इस फार्म की दो सबसे बड़ी तकनीकी खास बातें होंगी। पहला, पूरे परिसर की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा जैसे पर्यावरण-अनुकूल स्रोतों का बेहतरीन उपयोग किया जाएगा। साथ ही पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए उन्नत वर्षा जल संचयन प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे भूजल स्तर सुधरेगा और फार्म आत्मनिर्भर बनेगा। वहीं, इस सेंटर का पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है। इस शिलान्यास समारोह के दौरान सरस डेयरी, पाली के अध्यक्ष प्रताप सिंह बिठिया, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह नेतरा, सुमेरपुर एसडीएम कालूराम कुम्हार, विकास अधिकारी शैलेंद्र जोशी, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट, साण्डेराव के अध्यक्ष जगत सिंह राणावत, साण्डेराव की प्रशासक दाकू देवी, साण्डेराव मण्डल के अध्यक्ष जोराराम देवासी, समाजसेवी गणपत सिंह देवतरा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के प्रगतिशील पशुपालक व ग्रामीण मौजूद रहे।  

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रणनीतिक भूमिका" विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर स्थित ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर में भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), विकास एवं सुविधा कार्यालय, जयपुर के सहयोग से आयोजित "डिजिटल युग में एमएसएमई का विस्तार : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रणनीतिक भूमिका" विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन समारोह की मुख्य अतिथि श्रीमती अनिला चौरड़िया, सहायक निदेशक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), जयपुर रहीं। कार्यक्रम में अन्य मेंटर्स एवं डॉ. सुनील छींपा, मेंटरशिप इंचार्ज, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर तथा दीपक कुमार शर्मा, टेक्निकल ऑफिसर, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सुमिता कच्छवाहा, समन्वयक, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर ने की। समापन सत्र के दौरान कार्यक्रम में चयनित 25 प्रतिभागियों को तीन समूहों में विभाजित कर उनके द्वारा तैयार की गई पावर पॉइंट प्रस्तुतियाँ (PPT Presentations) करवाई गईं। प्रतिभागियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित व्यावसायिक नवाचार, डिजिटल मार्केटिंग, उत्पादकता वृद्धि, व्यवसाय विस्तार, ग्राहक प्रबंधन, डेटा विश्लेषण तथा एमएसएमई क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रभाव जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों के उपरांत विशेषज्ञों के साथ एक पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा एमएसएमई क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग, डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप विकास, बाजार विस्तार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने संबंधी अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्हें आधुनिक डिजिटल तकनीकों को अपनाने तथा व्यवसाय में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती अनिला चौरड़िया ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी तकनीक बन चुकी है। यदि उद्यमी डिजिटल तकनीकों और एआई आधारित समाधानों को अपनाते हैं तो वे अपनी उत्पादकता, गुणवत्ता, विपणन क्षमता तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्राप्त ज्ञान को अपने उद्यमों एवं संस्थानों में व्यवहारिक रूप से लागू करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुमिता कच्छवाहा ने कहा कि ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता तथा तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यक्रम का फीडबैक प्राप्त किया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक बताया। प्रतिभागियों ने भविष्य में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल उद्यमिता, स्टार्टअप, नवाचार एवं व्यवसाय विकास जैसे विषयों पर इसी प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का अनुरोध किया। इस अवसर पर डॉ. सुनील छींपा ने कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी एवं प्रायोगिक सत्रों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य एमएसएमई उद्यमियों, शोधार्थियों एवं युवाओं को नवीनतम डिजिटल तकनीकों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों से जोड़ना था, जिससे वे भविष्य की व्यावसायिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें। कार्यक्रम के अंत में चयनित सभी 25 प्रतिभागियों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन पर भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा जारी प्रमाण-पत्र मुख्य अतिथि श्रीमती अनिला चौरड़िया, प्रो. सुमिता कच्छवाहा, डॉ. सुनील छींपा तथा अन्य अतिथियों द्वारा वितरित किए गए। समारोह का समापन प्रतिभागियों, अतिथियों एवं आयोजन दल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर की टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।  

    प्रो. मंजू ठाकुर लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किया

    मनोविज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर की विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी को भारत में स्कूल मनोविज्ञान सेवाओं के क्षेत्र में उनके सराहनीय और उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘प्रो. मंजू ठाकुर लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। प्रो. पुरी का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का प्रमाण है, बल्कि यह देश में मानसिक स्वास्थ्य, विशेष शिक्षा और बाल मनोविज्ञान के क्षेत्र में एक मजबूत आधारशिला रखने की उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। ​यह पुरस्कार उन्हें हाल ही में चेन्नई के प्रतिष्ठित एन.के.टी. नेशनल कॉलेज ऑफ एजुकेशन फॉर वीमेन में आयोजित 16वें InSPA (इंडियन स्कूल साइकोलॉजी एसोसिएशन) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया। इस तीन दिवसीय (5 से 7 अगस्त 2026) सम्मेलन का मुख्य विषय “न्यूरोडाइवर्सिटी को सशक्त बनाना: विविधताओं का उत्सव, क्षमताओं को उजागर करना और समावेशन का निर्माण” था। इस प्रतिष्ठित आयोजन में विभिन्न देशों फ़िलिस्तीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया से कुल 300 प्रतिनिधियों (डेलिगेट्स) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। ​सम्मेलन के दौरान InSPA के अध्यक्ष प्रो. पंचरामालिंगम ने इस आयोजन के उद्देश्यों और वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस प्रकार के सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य "भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर स्कूल मनोवैज्ञानिकों और परामर्शदाताओं का एक जीवंत वैश्विक समुदाय तैयार करना है, जो आपसी साझा सीख और सहयोग को बढ़ावा दे सके।"  

    राजस्थान में बढ़ेगा उन्नत नस्ल की बकरियों का दुग्ध उत्पादन

    रामसर में स्थापित होगी देश की सबसे बड़ी व अत्याधुनिक 'गोट सीमन लैब'  जयपुर। प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने और उन्नत नस्ल के छोटे जुगाली करने वाले पशुओं (विशेषकर बकरियों) की उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की राजस्थान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय प्रवर्तित योजना-नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (एनएलएम) के तहत अजमेर के रामसर स्थित राजकीय पशु प्रजनन फार्म में संभंवत देश की सबसे बड़ी एवं अत्याधुनिक 'गोट सीमन उत्पादन प्रयोगशाला' की स्थापना की जाएगी। यह भारत की सबसे बड़ी लैब होगी, जिसमें सालाना दो लाख डोजेज तैयार की जाएंगी। इस आधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। इस पर ₹875 लाख रुपए खर्च होंगे, जिसमें 60 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र व 40 फीसदी हिस्सेदारी राजस्थान सरकार की है। इस लैब का मुख्य उद्देश्य उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले बकरों के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान (एआई) को बढ़ावा देना है। यूपी की 'डीयूवीएएसयू' यूनिवर्सिटी से मिलाया हाथ प्रयोगशाला को विश्वस्तरीय तकनीकी और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संचालित करने के लिए राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की है। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत को एमओयू की प्रति सौंपी गई है। यह तकनीकी सहयोग उत्तर प्रदेश सरकार के 'उप्र. पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान 'डीयूवीएएसयू', मथुरा' के साथ किया गया है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा, "यह समझौता राजस्थान के पशुपालन क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। मथुरा विश्वविद्यालय की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर हम रामसर (अजमेर) फार्म को देश के बेहतरीन गोट सीमन सेंटर्स में से एक के रूप में विकसित करेंगे। उन्होंने बताया कि राजस्थान में करीब दो करोड़ बकरियां हैं, जो पूरे भारत का 16 फीसदी है। बकरियों की संख्या के आधार पर राजस्थान देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य भी है। राज्य की पारंपरिक और प्रसिद्ध बकरी नस्लों जैसे- सिरोही, मारवाड़ी व जखराना प्रजाति के आनुवंशिक सुधार में मदद मिलेगी। दो लाख डोजेज की मदद से राज्यभर के सुदूर गांवों में पशुपालकों के द्वार तक बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा पहुंचेगी। वैज्ञानिक पद्धति से तैयार सीमन के इस्तेमाल से बकरियों में फैलने वाली कई संक्रामक और आनुवंशिक बीमारियों पर लगाम लगेगी। अजमेर का यह राजकीय फार्म अब एक नेशनल हब के रूप में उभरेगा। इस परियोजना के शुरू होने से न केवल राजस्थान, बल्कि पड़ोसी राज्यों के पशुपालक भी लाभान्वित हो सकेंगे। सरकार का लक्ष्य इस लैब को दिसंबर-2026 तक पूरी तरह क्रियाशील करने का है। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार मीना, राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के प्रबंधक डॉ. प्रीतपाल सिंह कालरा, 'उप्र. पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा, मथुरा लैब गोट सीमन लैब के प्रभारी डॉ. मुकुल आनंद की मौजूदगी में एमओयू किया गया।  

    अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा ने किया आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर विद्यालय का निरीक्षण

    - शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं की होगी नियमित मॉनिटरिंग, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा राजेश यादव ने गुरुवार को त्रिमूर्ति सर्किल स्थित आनंदीलाल पोद्दार राजकीय मूक-बधिर विद्यालय का औचक निरीक्षण कर संस्थान की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का गहन मूल्यांकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालय के समग्र संचालन की बारीकी से समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान यादव ने छात्र एवं छात्राओं के छात्रावासों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कक्षा कक्षों, शौचालय, स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं की स्थिति का निरीक्षण करते हुए विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं के स्तर पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों, वार्डनों एवं विद्यालय प्रबंधन से संवाद कर शिक्षण पद्धति, विद्यार्थियों की प्रगति, अनुशासन, नियमित उपस्थिति तथा खेल एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित, स्वच्छ एवं प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराना प्रत्येक शिक्षण संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है।  यादव ने विद्यालय में उपलब्ध खेल सुविधाओं, शिक्षण संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए संचालित गतिविधियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के साथ सभी व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण अथवा समीक्षा के दौरान अनियमितता या कार्य संपादन में उदासीनता पाए जाने पर संबंधित कार्मिकों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी कर्मचारियों को पूर्ण जिम्मेदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ कार्य करने के निर्देश दिए । प्रति माह बदलेगी वार्डन की ड्यूटी निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव ने छोटे बच्चों के साथ आने वाले अभिभावकों के लिए परिसर में बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने अभिभावकों के लिए सांकेतिक भाषा सीखने हेतु स्क्रीन स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि वे बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकें। इसके अलावा, छात्रावासों में वार्डनों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर प्रत्येक माह बदलने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता एवं भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच की जिम्मेदारी संबंधित वार्डन की होगी, और किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  

    अग्रवाल कॉलेज जयपुर में "Campus Clickathon-2025" का सफल आयोजन

    जयपुर. अग्रवाल कॉलेज जयपुर के फोटोग्राफी क्लब द्वारा "Campus Clickathon-2026" का भव्य आयोजन कॉलेज परिसर में किया गया। फोटोग्राफी क्लब द्वारा कॉलेज में विद्यार्थियों ने विभिन्न श्रेणियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विभिन्न तरह की फोटोज खींची एवं वीडियो बनाकर अपने टैलेंट का प्रदर्शन किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवंदा ने की। इस अवसर पर कार्यक्रम फोटोग्राफी क्लब से कॉर्डिनेटर डॉ. सोनू गुप्ता, श्रीमती स्वाति मित्तल, के.एम. चतुर्वेदी, एवं डॉ. उमेश सिंह आदि उपस्थित रहे। प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवंदा ने कहा कि "इस प्रकार के आयोजन छात्रों में सृजनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। फोटोग्राफी क्लब द्वारा किया गया यह प्रयास सराहनीय है।"

    आस्था और पर्यावरण की बड़ी जीत: भैराणा धाम में प्रस्तावित रीको इंडस्ट्रियल एरिया का आवंटन निरस्त

    संतों और ग्रामीणों के लंबे संघर्ष का हुआ सुखद अंत दूदू (जयपुर)। दादू पंथ की लगभग 500 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक एवं पवित्र तपोस्थली भैराणा धाम (बिचून) में प्रस्तावित रीको (RIICO) औद्योगिक क्षेत्र की परियोजना को आखिरकार निरस्त कर दिया गया है। राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा 21 खसरों की लगभग 206.98 हेक्टेयर (करीब 800 बीघा) जमीन के आवंटन को निरस्त किए जाने के बाद संत समाज, श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है।  क्या था पूरा मामला जयपुर ग्रामीण के बिचून/दूदू क्षेत्र स्थित संत दादू दयाल जी की तपोस्थली भैराणा धाम की 800 बीघा जमीन पर राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) द्वारा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना के विरोध में संत समाज, स्थानीय ग्रामीण और 'भैराणा धाम बचाओ संघर्ष समिति' पिछले कई महीनों से अनिश्चितकालीन आंदोलनरत थे। संतों और ग्रामीणों का कहना था कि औद्योगिक क्षेत्र बनने से धाम की आध्यात्मिक पवित्रता, हजारों पेड़-पौधों से समृद्ध प्राकृतिक ग्रीन बेत और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचता। संतों का 'अग्नि-तप' और जयपुर कूच का अल्टीमेटम आंदोलन के दौरान विरोध प्रदर्शन बेहद तीखा हो गया था: • संतों का तप: कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के बीच साधु-संतों ने धूणियों के पास बैठकर 'अग्नि-तप' किया और धरना दिया। • जनसमर्थन व सियासत: आंदोलन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल एवं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों का खुलकर समर्थन मिला। • जयपुर कूच का अल्टीमेटम: 27 मई को आयोजित विशाल महापंचायत के दौरान सरकार को अल्टीमेटम देते हुए जयपुर कूच का ऐलान किया गया था, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। • प्रशासनिक वार्ता और ऐतिहासिक फैसला आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए प्रशासन ने वार्ता का दौर शुरू किया। जयपुर रेंज आईजी और जयपुर जिला कलेक्टर ने संघर्ष समिति तथा जन-प्रतिनिधियों के साथ लंबी दौर की वार्ताएँ कीं। जाँच और समीक्षा के बाद अंततः सरकार ने जनभावनाओं, धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय संतुलन को सर्वोपरि मानते हुए 800 बीघा जमीन पर प्रस्तावित रीको औद्योगिक क्षेत्र के आवंटन को पूरी तरह निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया।  फैसले के मायने और खुशी का माहौल • ग्रीन बेल्ट और तपोस्थली सुरक्षित: आवंटन रद्द होने से अब इस क्षेत्र में किसी भी तरह की फैक्ट्रियां या औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित नहीं होंगी, जिससे भैराणा धाम का आध्यात्मिक वातावरण और ग्रीन एरिया पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। • संतों और जनता में उत्सव: निर्णय की जानकारी मिलते ही भैराणा धाम परिसर में संतों और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इसे सत्य, धर्म व पर्यावरण की ऐतिहासिक जीत बताया।

    गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, मुकेश भाकर व अन्य वरिष्ठ नेताओं की समझाइश के बाद अनशनकारी छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने तोड़ा अनशन

    जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की बहाली और राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की मांग को लेकर 15 दिन से एसएमएस अस्पताल में अनशनरत छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया है। आज शाम पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, विधायक मुकेश भाकर व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर शुभम रेवाड़ से मुलाकात की और समझाइश कर जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। मुलाकात के दौरान नेताओं ने शुभम के गिरते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र हितों की लड़ाई के लिए उनका स्वस्थ रहना बेहद आवश्यक है और इस मुद्दे को उठाने के कई अन्य लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं। वरिष्ठ नेताओं के आग्रह को स्वीकार करते हुए शुभम रेवाड़ ने अनशन समाप्त किया, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि छात्रसंघ चुनाव कराने और अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि इस 15 दिवसीय भूख हड़ताल और आंदोलन का सरकार पर भारी दबाव देखने को मिला। सरकार, जिसने शुरुआत में राजस्थानी भाषा विभाग खोलने को लेकर अड़ियल रुख अपनाया हुआ था, उसे छात्र शक्ति के आगे झुकना पड़ा और विश्वविद्यालय में 'राजस्थानी भाषा विभाग' स्थापित करने की मंजूरी देनी पड़ी। इसके साथ ही छात्रसंघ चुनावों की बहाली को लेकर भी प्रशासन द्वारा जल्द ही एक कमेटी का गठन कर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।  

    नामांकन वृद्धि और शैक्षणिक सुधार के लिए शिक्षा विभाग तैयार कर रहा एक्शन प्लान, जारी किए निर्देश

    - मुख्यमंत्री शिक्षा राजस्थान अभियान को गति देने हेतु जिलों की समीक्षा बैठक जयपुर। मुख्यमंत्री शिक्षा राजस्थान अभियान के तहत प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार एवं प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने बुधवार को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों की वर्चुअल बैठक ली। बैठक में मिशन पढ़ो राजस्थान, नामांकन वृद्धि, ड्रॉपआउट नियंत्रण, विद्यालय सुधार, सुरक्षा एवं मासिक रैंकिंग सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अति. मुख्य सचिव ने मिशन पढ़ो राजस्थान के अंतर्गत संचालित रीडिंग प्रमोशन कैम्पेन की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अभियान के तहत आयोजित रीड-ए-थॉन में लगभग 68 लाख लोगों की भागीदारी पर सभी जिलों एवं विद्यालयों को बधाई देते हुए प्रत्येक विद्यालय को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि मिशन पढ़ो राजस्थान अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 29 जुलाई को भरतपुर से किया था। एक शिक्षक-एक बच्चा' से मजबूत होगा नामांकन अभियान  यादव ने रेड स्कूलों के लिए शिक्षा सेतु अभियान (स्कूल इम्प्रूवमेंट प्लान) को प्रभावी रूप से लागू करने पर बल देते हुए 'एक शिक्षक-एक बच्चा' अवधारणा को अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रधानाचार्य प्रत्येक शिक्षक को एक बच्चे की जिम्मेदारी सौंपे, शिक्षक उसके परिवार से संपर्क कर नामांकन सुनिश्चित करे तथा इसकी जानकारी शाला दर्पण पर अपलोड की जाए। जिला स्तर पर प्रगति की समीक्षा जिला कलेक्टर द्वारा की जाएगी तथा प्रत्येक नामांकन की निगरानी डैशबोर्ड के माध्यम से होगी। उन्होंने प्रारंभिक स्तर पर नामांकन एवं बच्चों के विद्यालय में ठहराव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए असुरक्षित एवं जर्जर घोषित विद्यालय भवनों को तत्काल ध्वस्त कराने तथा सभी संबलन टिकटों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। श्रेष्ठ शिक्षकों और विद्यालयों का होगा सम्मान बैठक में बताया गया कि अभियान के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों एवं विद्यालयों को चरणबद्ध रूप से सम्मानित किया जाएगा। प्रथम चरण में 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) तथा द्वितीय चरण में 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर राज्य स्तर के शीर्ष-5, जिला स्तर के शीर्ष-3 तथा ब्लॉक एवं जिला स्तर के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक माह इनोवेटिव क्लासरूम वीडियो एवं सीबीए आधारित टॉप परफॉर्मिंग विद्यालयों के आधार पर 50 शिक्षकों को स्टार टीचर स्पॉटलाइट तथा 20 शिक्षकों को लीडरशिप डायलॉग के लिए चयनित किया जाएगा। साथ ही एक नई पहल के तहत विशेष अवसरों पर सभी शिक्षकों को आभार संदेश भी प्रेषित किए जाएंगे। ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोर बैठक में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 73 लाख नामांकन होने पर सभी विद्यालयों एवं शिक्षा अधिकारियों को बधाई देते हुए यादव ने कहा कि यह पिछले सत्र की तुलना में 50 हजार से अधिक की वृद्धि है। उन्होंने नामांकन वृद्धि में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बांसवाड़ा, उदयपुर, जालोर, बाड़मेर और सिरोही जिलों की सराहना की तथा सभी जिलों को ड्रॉपआउट कम करने, शिक्षा से वंचित प्रत्येक बच्चे को मुख्यधारा से जोड़ने और आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आगामी दो से तीन दिनों में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण कर उसकी प्रविष्टि शिक्षक संबलन ऐप पर दर्ज करने के निर्देश भी दिए। हर माह जारी होगी जिलों की रैंकिंग अति. मुख्य सचिव ने बताया कि अगस्त माह से प्रत्येक माह 6 मापदंडों के आधार पर जिलों की रैंकिंग जारी की जाएगी, जिसे प्रत्येक माह की 5 तारीख को शाला दर्पण पर लाइव किया जाएगा। कुल 100 अंकों की इस रैंकिंग में शैक्षणिक गुणवत्ता के 45 अंक, गवर्नेंस के 45 अंक तथा आधारभूत संरचना के 10 अंक निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक माह जिला कलेक्टर इसकी समीक्षा करेंगे, जिससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से शैक्षणिक परिणामों में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।