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    दिल्ली में पटाखामुक्त दिवाली के लिए विराट कोहली की मदद ले सकता है प्रशासन, सुप्रीम कोर्ट ने दिया सेलिब्रिटी जागरूकता अभियान का सुझाव

    Yugcharan News / 30-10-2026 देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले नुकसान को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। अदालत ने कहा है कि लोगों को पटाखामुक्त दिवाली मनाने के लिए जागरूक करने के अभियान में विराट कोहली जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों और अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों की मदद ली जा सकती है। अदालत का मानना है कि खेल जगत और सार्वजनिक जीवन में लोकप्रियता रखने वाली हस्तियां आम लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रभावी तरीके से दे सकती हैं। यह सुझाव पटाखों के इस्तेमाल, उनके निर्माण और बिक्री पर नियंत्रण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि हर साल पटाखों और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहता है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब बार-बार प्रतिबंध और दिशानिर्देश लागू करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो क्या जनजागरूकता के लिए कोई अलग और प्रभावी तरीका नहीं अपनाया जा सकता। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ कर रही थी। पीठ ने विशेष रूप से दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए लोकप्रिय हस्तियों को जागरूकता अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया। विराट कोहली जैसे क्रिकेटरों से मदद लेने का सुझाव सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले ने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां ऐसे लोकप्रिय व्यक्तित्वों की सेवाएं क्यों नहीं ले सकतीं, जिन्हें समाज के विभिन्न वर्गों में सम्मान प्राप्त है। उन्होंने सुझाव दिया कि अच्छे खिलाड़ियों और सार्वजनिक जीवन की प्रतिष्ठित हस्तियों को लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए आगे लाया जा सकता है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने विशेष रूप से विराट कोहली जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में लोगों को पटाखामुक्त दिवाली मनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से ऐसे खिलाड़ियों से अनुरोध किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय क्रिकेटर इस तरह का संदेश देने में मदद कर सकते हैं कि दिवाली रोशनी का त्योहार है और इसे खुशियों तथा उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। अदालत की टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य यह था कि लोगों को केवल प्रतिबंधों और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से नियंत्रित करने के बजाय उन्हें स्वयं प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित किया जाए। हालांकि, अदालत ने विराट कोहली को कोई औपचारिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी है और न ही उनके अभियान में शामिल होने की पुष्टि हुई है। यह सुझाव सरकार और संबंधित अधिकारियों के लिए एक संभावित जनजागरूकता रणनीति के रूप में सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध के असर पर उठाए सवाल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि हर साल पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए आदेश दिए जाने के बावजूद प्रदूषण की समस्या क्यों बनी रहती है। अदालत का मानना था कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। यदि लोग नियमों का पालन नहीं करते हैं और बाजार में प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री जारी रहती है, तो ऐसे आदेशों का वास्तविक प्रभाव सीमित रह जाता है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिवाली के आसपास वायु गुणवत्ता अक्सर खराब हो जाती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण पहले से प्रदूषित हवा को और अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में अदालत ने जनभागीदारी और जागरूकता को प्रदूषण नियंत्रण के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखने का संकेत दिया। दिवाली में पटाखों की परंपरा पर भी अदालत की टिप्पणी सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने दिवाली के साथ पटाखों के जुड़ने के ऐतिहासिक संदर्भ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मूल रूप से दिवाली में पटाखे जलाने की परंपरा नहीं थी। समय के साथ बारूद और आतिशबाजी के इस्तेमाल के बाद यह गतिविधि त्योहार का हिस्सा बन गई। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि बारूद के इस्तेमाल का चलन लगभग 14वीं और 15वीं शताब्दी के दौरान बढ़ा और बाद में आतिशबाजी त्योहारों के उत्सव से जुड़ गई। अदालत की इस टिप्पणी का उद्देश्य यह रेखांकित करना था कि दिवाली की मूल भावना रोशनी और उत्सव से जुड़ी है, न कि अनिवार्य रूप से पटाखे जलाने से। इस दृष्टिकोण के आधार पर अदालत ने लोगों को पारंपरिक उत्सव की भावना बनाए रखते हुए पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पटाखों में बेरियम की मात्रा पर भी विचार कर रहा है सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट केवल पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध तक सीमित नहीं है, बल्कि आतिशबाजी में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों और उनकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रहा है। अदालत पटाखों में बेरियम की स्वीकार्य मात्रा से संबंधित मुद्दे पर भी विचार कर रही है। बेरियम कुछ प्रकार की आतिशबाजी में रंग और प्रभाव पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस रसायन की मात्रा और उसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर अदालत के सामने सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि बेरियम की स्वीकार्य मात्रा से जुड़े मुद्दे पर दिवाली के बाद सुनवाई की जाएगी। इससे स्पष्ट है कि अदालत पटाखों के नियमन को केवल बिक्री और इस्तेमाल के प्रतिबंध के रूप में नहीं, बल्कि उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और पर्यावरणीय प्रभावों के व्यापक संदर्भ में भी देख रही है। याचिकाकर्ताओं ने पटाखों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के सामने पटाखों के निर्माण और बिक्री से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार नियामकीय प्रक्रिया और संबंधित पक्षों से परामर्श पूरा करने के लिए दो सप्ताह का समय मांग रही है, जबकि इस दौरान बाजार में पटाखों की बिक्री और परिवहन जारी है। याचिकाकर्ता ने पटाखों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका तर्क था कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण लोगों के जीवन के अधिकार के लिए खतरा पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पटाखा उद्योग में बाल श्रम और भंडारण से जुड़े नियमों के उल्लंघन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, केवल प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीमित प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पटाखों के निर्माण और उनकी आपूर्ति व्यवस्था पर भी प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जब तक प्रभावी नियामकीय व्यवस्था तैयार नहीं होती, तब तक पटाखों पर प्रतिबंध जारी रखा जाना चाहिए। एमिकस क्यूरी ने बताया पटाखों के धुएं से स्वास्थ्य को खतरा सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहीं एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं और सूक्ष्म कणों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि आतिशबाजी से कई प्रकार की हानिकारक गैसें और सूक्ष्म कण निकलते हैं। इनमें पीएम 2.5 जैसे प्रदूषक भी शामिल हैं, जो सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। पीएम 2.5 बेहद छोटे आकार के प्रदूषणकारी कण होते हैं। इनके फेफड़ों तक पहुंचने और शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने की आशंका रहती है। अपराजिता सिंह ने डॉक्टरों के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसका असर बच्चों और धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बाजार में कई पटाखों को ग्रीन क्रैकर्स बताकर बेचा जा रहा है, जबकि उनकी वास्तविक पहचान और प्रमाणिकता की जांच के लिए भरोसेमंद व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, ग्रीन क्रैकर्स भी पूरी तरह प्रदूषणमुक्त नहीं होते। वे पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन इससे उनका पर्यावरणीय प्रभाव समाप्त नहीं हो जाता। एमिकस क्यूरी ने अदालत से आग्रह किया कि जब तक प्रभावी निगरानी और नियमन की व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक प्रतिबंध जारी रखा जाए। पटाखा निर्माताओं ने पूर्ण प्रतिबंध का किया विरोध दूसरी ओर, पटाखा निर्माताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता जे. साई दीपक ने पूर्ण प्रतिबंध की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से समस्या समाप्त नहीं होती, बल्कि इससे अवैध बाजार को बढ़ावा मिल सकता है। उनका कहना था कि प्रतिबंध के कारण चीनी पटाखों की तस्करी और बिना लाइसेंस वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे उत्पाद निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन किए बिना बाजार में पहुंच सकते हैं। साई दीपक ने कहा कि पटाखा उद्योग पहले से ही विस्फोटक अधिनियम के तहत नियमन के दायरे में आता है। इसलिए नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से क्यूआर कोड संबंधी नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया और कहा कि जिन निर्माताओं द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जाता, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। निर्माताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि कुछ क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर में कमी आई है, लेकिन नियमों का पालन करने वाले निर्माताओं को भी उन लोगों की गलतियों के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है जो नियमों का उल्लंघन करते हैं। उनका कहना था कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय मौजूदा नियामकीय व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना अधिक उपयोगी होगा। दिल्ली सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और तैयारियों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि दिल्ली में मौजूद 39 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से केवल नौ ही चालू क्यों थे। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। अदालत ने अधिकारियों से निरीक्षण व्यवस्था, प्रवर्तन टीमों की संख्या और अवैध रूप से पटाखे बेचने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण मांगा। इस दौरान दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि वायु प्रदूषण दिल्ली के सामने हर साल आने वाली गंभीर समस्या है और इससे निपटने के लिए कई उपाय लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर तैयारी के साथ प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास कर रही है। 1 नवंबर से दिल्ली में लागू होगी नई वाहन व्यवस्था ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से एक नई योजना शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी के बाहर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए बीएस-6 उत्सर्जन मानकों का पालन करना आवश्यक होगा। इस कदम का उद्देश्य राजधानी में बाहर से आने वाले वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है। सरकार ने यातायात का दबाव कम करने के लिए सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया है। इसके अलावा निर्माण स्थलों के आसपास एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं। अदालत को बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न योजनाएं, नियंत्रण केंद्र और एयर वार्डन भी तैनात किए गए हैं। दिल्ली सरकार के अनुसार, राजधानी में कुल 608 एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं। इनका इस्तेमाल निर्माण गतिविधियों और धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत किया जा रहा है। ऐश्वर्या भाटी ने यह भी स्वीकार किया कि जिन दिनों पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति रही है, उन दिनों वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर अधिक दर्ज किया गया। दिवाली से पहले प्रदूषण नियंत्रण बना बड़ी चुनौती दिल्ली में दिवाली के आसपास वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए हर साल एक बड़ी चुनौती बन जाता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसमी परिस्थितियां पहले से ही वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में पटाखों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण की स्थिति को और गंभीर बना सकता है। सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई से यह स्पष्ट है कि अदालत केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दे रही है। विराट कोहली जैसे लोकप्रिय खिलाड़ियों को जागरूकता अभियान से जोड़ने का सुझाव इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा सकता है। लोकप्रिय हस्तियों की पहुंच समाज के बड़े वर्ग तक होती है और उनके संदेश का प्रभाव विशेष रूप से युवाओं पर पड़ सकता है। हालांकि, प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान केवल जनजागरूकता से संभव नहीं है। इसके लिए सरकारी निगरानी, नियमों का सख्त पालन, अवैध पटाखों की बिक्री पर रोक और नागरिकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट पटाखों के नियमन, ग्रीन क्रैकर्स की प्रमाणिकता, बेरियम की मात्रा और दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण तैयारियों जैसे मुद्दों पर विचार कर रहा है। दिवाली के बाद होने वाली अगली सुनवाई में इन विषयों पर आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास दुर्घटनाग्रस्त, पायलट समेत 6 लोग लापता, बचाव अभियान जारी

    Yugcharan News / 30-10-2026 उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार दोपहर एक बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा हुआ है। बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा एक हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर में पायलट समेत कुल छह लोग सवार थे। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने दुर्घटना की पुष्टि की है। हादसे के बाद प्रशासन और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। फिलहाल हेलीकॉप्टर में सवार छह लोगों की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है और यह पता नहीं चल पाया है कि इस दुर्घटना में कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की जान गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर ने शुक्रवार दोपहर बद्रीनाथ से देहरादून के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान जोशीमठ घाटी के आसपास हेलीकॉप्टर का संपर्क टूट गया था। इसके बाद विमानन और प्रशासनिक एजेंसियों ने उसकी तलाश शुरू की। कुछ समय बाद हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना सामने आई। खराब मौसम और क्षेत्र में बर्फबारी को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। हेलीकॉप्टर में पांच यात्री और एक पायलट थे सवार मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर में कुल छह लोग मौजूद थे। इनमें पांच यात्री और एक पायलट शामिल थे। हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड की ओर जा रहा था। इससे पहले उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने जानकारी दी थी कि ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर, जिसका कॉल साइन VT-HCX था, दोपहर लगभग 1 बजकर 14 मिनट पर बद्रीनाथ से रवाना हुआ था। हेलीकॉप्टर के जोशीमठ घाटी के ऊपर पहुंचने के दौरान उससे संचार संपर्क टूट गया। इसके साथ ही ट्रैकिंग सिस्टम ने भी उसकी लोकेशन दिखाना बंद कर दिया था। शुरुआत में प्रशासन के पास हेलीकॉप्टर की सटीक स्थिति की जानकारी नहीं थी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। दुर्घटनास्थल पर पहुंचीं प्रशासन की टीमें चमोली जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बचाव दल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। राहत एवं बचाव अभियान के तहत हेलीकॉप्टर में सवार लोगों की तलाश और उनकी स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इस अभियान में जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और भारतीय सेना की टीमें शामिल हैं। पहाड़ी क्षेत्र में दुर्घटना होने के कारण बचाव कार्य में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता दुर्घटनास्थल तक पहुंचकर हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोगों का पता लगाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। खराब मौसम को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा जोशीमठ और बद्रीनाथ के आसपास का इलाका ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम घाटियों से घिरा हुआ है। यहां मौसम तेजी से बदलता है और कई बार अचानक बर्फबारी, बादल तथा कम दृश्यता के कारण हवाई संचालन प्रभावित हो सकता है। शुक्रवार को भी क्षेत्र में बर्फबारी की सूचना सामने आई थी। ऐसे में खराब मौसम को हेलीकॉप्टर दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक किसी जांच एजेंसी ने मौसम को हादसे का निश्चित कारण घोषित नहीं किया है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टर की तकनीकी स्थिति, उड़ान के दौरान दर्ज किए गए आंकड़ों, संचार संपर्क और मौसम संबंधी परिस्थितियों की जांच आवश्यक होगी। ट्रांस भारत एविएशन के पूरे बेड़े को किया गया ग्राउंड हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने एहतियाती कदम उठाते हुए ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को ग्राउंड करने की जानकारी दी थी। इस निर्णय के तहत कंपनी के अन्य हेलीकॉप्टरों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। विमानन सुरक्षा के लिहाज से इस तरह का कदम दुर्घटना के बाद संभावित तकनीकी या परिचालन संबंधी जोखिमों का आकलन करने के लिए उठाया जाता है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर में कोई तकनीकी खराबी थी या नहीं और क्या उड़ान के समय मौसम की परिस्थितियां सुरक्षित संचालन के अनुकूल थीं। उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा फिर चर्चा में उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर सेवाएं पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से चारधाम यात्रा और केदारनाथ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हवाई सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां हेलीकॉप्टर संचालन में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का अचानक बदलना, तेज हवाएं और सीमित दृश्यता विमानन सेवाओं के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं। पिछले वर्षों में भी उत्तराखंड में कई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं सामने आई हैं। जून 2025 में केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहा एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने भी पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। शुक्रवार को जोशीमठ के पास हुई दुर्घटना ने एक बार फिर इस विषय को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल छह लोगों की स्थिति को लेकर इंतजार फिलहाल इस हादसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल हेलीकॉप्टर में सवार छह लोगों की स्थिति को लेकर है। प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य कर रही हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक हताहतों की संख्या और यात्रियों की स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दुर्घटना के कारणों और नुकसान का आकलन बचाव अभियान पूरा होने तथा संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। उत्तराखंड प्रशासन की ओर से आगे मिलने वाली जानकारी के आधार पर इस घटना से जुड़े नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें बचाव अभियान और हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की सुरक्षित स्थिति की जानकारी पर टिकी हुई हैं।

    इजरायल चुनाव में किसी भी गठबंधन को नहीं मिला स्पष्ट बहुमत, नेतन्याहू और विपक्ष के बीच सत्ता की लड़ाई तेज

    Yugcharan News / 30-10-2026 इजरायल के आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन और विपक्षी दलों में से कोई भी संसद में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में सफल नहीं हुआ है। मंगलवार को हुए चुनाव के बाद गुरुवार तक सामने आए मतगणना के आंकड़ों के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर आगे रहा है। वहीं, अरब राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से 19 सीटें हासिल की हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। इस चुनाव परिणाम ने इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ बातचीत शुरू कर दी है। उनका उद्देश्य मौजूदा सरकार को बदलने के लिए एक नया राजनीतिक गठबंधन तैयार करना है। हालांकि, विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती अरब दलों के साथ समर्थन और संभावित गठबंधन को लेकर बनी असहमति है। यह चुनाव इजरायल के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा था। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए इजरायली सैन्य अभियान के बाद यह पहला आम चुनाव था। ऐसे में इस चुनाव को प्रधानमंत्री नेतन्याहू के नेतृत्व, उनकी सरकार की नीतियों और युद्ध के बाद देश की राजनीतिक दिशा पर जनता के फैसले के रूप में देखा जा रहा था। नेतन्याहू के गठबंधन को मिली 53 सीटें इजरायल के प्रमुख मीडिया संस्थान हारेत्ज की रिपोर्ट के अनुसार, 99 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले राजनीतिक गठबंधन को 53 सीटें मिलीं। दूसरी ओर, गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें प्राप्त हुईं। अरब दलों की संयुक्त सूची को 19 सीटें मिली हैं। इस तरह 120 सदस्यीय नेसेट में किसी भी राजनीतिक समूह के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत नहीं है। इजरायल की संसद में बहुमत का आंकड़ा 61 है। इसलिए नई सरकार के गठन के लिए राजनीतिक दलों को दूसरे दलों का समर्थन हासिल करना होगा। चुनाव परिणामों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार बनाने की प्रक्रिया केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले दलों के बीच समझौते भी महत्वपूर्ण होंगे। नेतन्याहू के लिए यह परिणाम राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उनका गठबंधन बहुमत से आठ सीटें पीछे है। वहीं विपक्ष भी अकेले सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम 13 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। विपक्षी नेताओं ने सरकार बनाने के लिए शुरू की बातचीत चुनाव परिणाम सामने आने के बाद विपक्षी खेमे में सरकार बनाने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट से मुलाकात की। बेनेट वर्तमान में टुगेदर पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि आइजेनकोट याशर पार्टी के प्रमुख हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का उद्देश्य जल्द से जल्द नई सरकार के गठन की संभावनाओं पर विचार करना था। इजरायली मीडिया आउटलेट येनेट न्यूज के अनुसार, दोनों नेताओं ने राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित गठबंधन के विकल्पों पर चर्चा की। विपक्षी खेमे का प्रयास है कि अलग-अलग दलों को एक मंच पर लाकर नेतन्याहू की सरकार को सत्ता से बाहर करने का रास्ता तैयार किया जाए। आइजेनकोट ने विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं से भी बातचीत की है। उन्होंने डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष यायर गोलान से मुलाकात की। गोलान विपक्षी गठबंधन के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अरब नागरिकों के नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना का समर्थन किया है। हालांकि, विपक्षी गठबंधन के अन्य कई राजनीतिक समूह इस तरह के गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं। यही मतभेद नई सरकार के गठन की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बन सकता है। अरब दलों का समर्थन बन सकता है निर्णायक इस चुनाव में अरब राजनीतिक दलों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। संयुक्त रूप से 19 सीटें हासिल करने के बाद ये दल सरकार गठन की प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष यायर गोलान ने यूनाइटेड अरब लिस्ट यानी राआम के नेता मंसूर अब्बास से भी मुलाकात की। रिपोर्ट के अनुसार, अरब दलों की 19 सीटों में से आठ सीटें राआम को मिलने का अनुमान है। गोलान ने मंसूर अब्बास से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह कार्रवाई करने का समय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बदलाव और इजरायल के उद्धार के अवसर को गंवाना नहीं चाहिए। उनका यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विपक्ष के कुछ नेता सरकार बनाने के लिए अरब राजनीतिक दलों के समर्थन को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। हालांकि, इस दिशा में विपक्ष के भीतर एक बड़ा विरोधाभास भी मौजूद है। गादी आइजेनकोट पहले ही फिलिस्तीनी मूल के इजरायली नागरिकों के नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ गठबंधन या साझेदारी नहीं करने की बात कह चुके हैं। अल जजीरा की संवाददाता नूर ओदेह के अनुसार, आइजेनकोट के सामने सरकार बनाने की राह आसान नहीं होगी। उन्होंने बताया कि विपक्षी नेता की राजनीतिक स्थिति ऐसी है कि उन्हें बहुमत हासिल करने के लिए अरब दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन उनके अपने सार्वजनिक रुख के कारण यह विकल्प जटिल हो गया है। ऐसे में विपक्ष के सामने यह चुनौती है कि वह अपने राजनीतिक मतभेदों को किस तरह दूर करता है और सरकार गठन के लिए किस प्रकार का समझौता तैयार करता है। नेतन्याहू की पार्टी ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए चुनाव परिणामों के बाद इजरायल की राजनीति में विवाद भी बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की ओर से अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों पर चुनाव में कथित गड़बड़ी और विदेशी सहायता से चुनाव परिणाम प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें संबंधित पक्षों ने खारिज किया है। इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोहलबर्ग ने बताया कि उन्हें विदेशी हस्तक्षेप से जुड़ी गंभीर आशंकाओं के बारे में एक पत्र मिला था। उन्होंने इस मामले को इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के सामने उठाया और जांच करने का अनुरोध किया। सोहलबर्ग के अनुसार, वह इन आरोपों की स्वयं पुष्टि नहीं कर सकते थे। हालांकि, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने संबंधित सुरक्षा एजेंसी से मामले की जांच करने को कहा। इस घटनाक्रम ने चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। जहां नेतन्याहू की पार्टी की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री अपनी राजनीतिक स्थिति बचाने के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। आइजेनकोट ने नेतन्याहू पर साधा निशाना विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने चुनाव परिणामों को लेकर नेतन्याहू की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चुनाव के नतीजों को कमजोर दिखाने और उन पर सवाल खड़े करने का प्रयास कर रहे हैं। एक्स पर जारी वीडियो संदेश में आइजेनकोट ने कहा कि नेतन्याहू द्वारा अपने व्यक्तिगत हितों के लिए सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल करने का दौर समाप्त होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी या प्रचार से चुनाव में मतदाताओं के फैसले को बदला नहीं जा सकता। आइजेनकोट के इस बयान को चुनाव परिणामों के बाद दोनों राजनीतिक खेमों के बीच बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक जेवियर अबू ईद ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि नेतन्याहू चुनाव परिणामों से संतुष्ट नहीं दिखाई दे रहे हैं, भले ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से जीत का दावा किया हो। अबू ईद के अनुसार, विपक्ष के लिए अरब दलों के साथ अपने मतभेदों को दूर करना आसान नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने एक अन्य राजनीतिक संभावना की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका मानना है कि विपक्षी दल नेसेट के मौजूदा स्पीकर को बदलने के लिए भी आपसी समझ बना सकते हैं। मौजूदा स्पीकर को नेतन्याहू का करीबी माना जाता है। यदि विपक्ष इस पद पर बदलाव कराने में सफल रहता है, तो नेतन्याहू अपना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सहयोगी खो सकते हैं। इससे विपक्ष को संसद में विधायी गतिविधियों और राजनीतिक फैसलों को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। 7 अक्टूबर 2023 के बाद पहला बड़ा चुनाव इजरायल का यह चुनाव वर्ष 2023 के बाद देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इजरायल के दक्षिणी हिस्से में हमला किया गया था। इस हमले के बाद इजरायल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। इस संघर्ष ने इजरायल की घरेलू राजनीति, सुरक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित किया है। गाजा में लंबे समय तक चले सैन्य अभियान और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर नेतन्याहू सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी माहौल में हुए चुनाव को नेतन्याहू के नेतृत्व की लोकप्रियता और उनकी सरकार के प्रति जनता के रुख का महत्वपूर्ण परीक्षण माना गया। हालांकि, चुनाव परिणामों से किसी एक राजनीतिक खेमे को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला है। इससे यह संकेत मिलता है कि इजरायल की राजनीति में अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक समूहों के बीच संतुलन बनाना आने वाले दिनों में बेहद महत्वपूर्ण होगा। अब क्या होगा? नई सरकार के गठन पर टिकी निगाहें इजरायल में अंतिम चुनाव परिणामों को प्रमाणित करने और आधिकारिक रूप से घोषित करने की प्रक्रिया केंद्रीय चुनाव समिति के माध्यम से पूरी की जानी है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम परिणामों की घोषणा बुधवार तक किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित थी। तब तक सामने आए आंकड़ों को बदलने की संभावना बनी हुई थी। इसके बाद राजनीतिक दलों के बीच सरकार बनाने के लिए औपचारिक बातचीत आगे बढ़ेगी। किसी भी गठबंधन को बहुमत साबित करने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों के साथ अभी भी सरकार बनाने की संभावनाओं में बना हुआ है। दूसरी ओर, आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन भी दूसरे दलों के सहयोग से बहुमत हासिल करने का प्रयास कर सकता है। अरब दलों के 19 सांसदों की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, उनके साथ संभावित राजनीतिक समझौते को लेकर विपक्षी दलों के भीतर मतभेद बने हुए हैं। फिलहाल इजरायल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नेतन्याहू एक बार फिर अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाकर सरकार बनाने में सफल होंगे या विपक्ष अपने मतभेद दूर करके नई सरकार का गठन कर पाएगा। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल में सत्ता की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक बातचीत, गठबंधन संबंधी समझौते और संसद में समर्थन का गणित ही देश की अगली सरकार की दिशा तय करेगा।

    उत्तराखंड में बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा: बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पायलट समेत 6 लोग सवार

    Yugcharan News / 30-10-2026 उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को एक बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा सामने आया है। बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा एक हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हेलीकॉप्टर में पायलट समेत कुल छह लोग सवार थे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि चायें गांव के नजदीक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली है। घटना के बाद जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर ने शुक्रवार दोपहर बद्रीनाथ से उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान क्षेत्र में बर्फबारी हो रही थी। हेलीकॉप्टर कुछ समय बाद जोशीमठ घाटी के ऊपर हाथी पर्वत क्षेत्र के आसपास पहुंचा, जहां उसका संपर्क नियंत्रण व्यवस्था से टूट गया। इसके बाद हेलीकॉप्टर का लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम भी उसकी स्थिति का पता लगाने में असमर्थ रहा। शुरुआती सूचना में इसे लापता बताया गया था, लेकिन बाद में दुर्घटना की पुष्टि सामने आई। बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा था हेलीकॉप्टर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) की ओर से जारी बयान के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर, जिसका कॉल साइन VT-HCX था, बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा के लिए रवाना हुआ था। प्राधिकरण के अनुसार, हेलीकॉप्टर ने लगभग दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान जब हेलीकॉप्टर जोशीमठ घाटी के ऊपर से गुजर रहा था, तभी उससे संचार संपर्क टूट गया। इसके साथ ही ट्रैकिंग सिस्टम ने भी हेलीकॉप्टर की स्थिति दिखाना बंद कर दिया। प्राधिकरण ने बताया कि शुरुआती स्तर पर हेलीकॉप्टर की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पा रहा था। हालांकि, बाद में चमोली जिला प्रशासन की ओर से दुर्घटना की जानकारी सामने आई। हादसे के बाद संबंधित विमानन कंपनी के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को एहतियातन ग्राउंड कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि कंपनी के अन्य हेलीकॉप्टरों का संचालन फिलहाल रोक दिया गया है, ताकि घटना के संभावित कारणों और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की जांच की जा सके। हेलीकॉप्टर में पांच यात्री और एक पायलट सवार प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर में कुल छह पुरुष सवार थे। इनमें पांच यात्री और एक पायलट शामिल थे। सवार लोगों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं: प्रतापा अरुण शंकर गौड़ा सुधीर के. एचएस नटराज कैप्टन हिमांशु (पायलट) फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इन सभी लोगों की स्थिति और उन्हें लगी चोटों के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री ने गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों तक तत्काल पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुख, बचाव अभियान की निगरानी कर रहे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जोशीमठ के निकट चायें गांव के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने की दुर्भाग्यपूर्ण सूचना मिली है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं पूरी घटना पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल मिलता है, तो उसे बिना देरी किए बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र पहुंचाया जाए। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षित वापसी की कामना करते हुए कहा कि इस घटना को लेकर प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से जारी जानकारी के बाद राज्य सरकार और प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हो गया है। दुर्घटनास्थल तक पहुंचने और वहां की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। चायें गांव के आसपास दिखाई दिया धुआं हेलीकॉप्टर के लापता होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी खोज अभियान शुरू किया गया। चमोली जिला प्रशासन के अनुसार, जोशीमठ के चायें गांव के आसपास धुआं उठता दिखाई दिया था। इसके बाद प्रशासन की टीमों ने संबंधित क्षेत्र में तलाशी अभियान तेज कर दिया। प्रारंभिक जानकारी में धुएं को हेलीकॉप्टर के संभावित दुर्घटनास्थल से जोड़कर देखा गया। हालांकि, घटनास्थल की पूरी स्थिति और दुर्घटना के बाद हुए नुकसान का विस्तृत आकलन संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। स्थानीय प्रशासन की टीमों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचने में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में बर्फबारी के कारण दृश्यता और आवाजाही प्रभावित होने की आशंका भी है। सेना, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें बचाव अभियान में तैनात दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद राज्य की बचाव एजेंसियों के साथ भारतीय सेना को भी अभियान में लगाया गया है। जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटनास्थल की ओर रवाना की गई हैं। जोशीमठ के उपजिलाधिकारी (SDM) चंद्रशेखर वशिष्ठ ने भी हेलीकॉप्टर दुर्घटना की आशंका की पुष्टि करते हुए बताया कि सेना, एसडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटनास्थल की ओर पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें दुर्घटना की जानकारी मिली है और संबंधित टीमें मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेंगी। उपजिलाधिकारी ने यह भी बताया कि वह स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना हो रहे हैं। बचाव अभियान का प्राथमिक उद्देश्य हेलीकॉप्टर में सवार लोगों तक पहुंचना, उनकी स्थिति का पता लगाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के दौरान राहत अभियान काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऊंचाई, दुर्गम रास्ते, बदलता मौसम और सीमित दृश्यता बचाव कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सेना और स्थानीय आपदा प्रबंधन एजेंसियों की संयुक्त भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर हादसों का पुराना रिकॉर्ड उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं और आपातकालीन लैंडिंग की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां, ऊंचे पहाड़, संकरे घाटी क्षेत्र और तेजी से बदलता मौसम विमानन संचालन को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में उत्तराखंड में कम से कम 12 अलग-अलग हेलीकॉप्टर संबंधी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें पांच बड़ी घातक दुर्घटनाएं और सात गैर-घातक घटनाएं शामिल बताई गई हैं। गैर-घातक घटनाओं में आपातकालीन लैंडिंग, तकनीकी कारणों से उड़ान रोकना और कुछ ऐसी घटनाएं शामिल हैं जिनमें चोटें या जमीन पर सुरक्षा संबंधी नुकसान हुआ। राज्य में केदारनाथ यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा बद्रीनाथ और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी हवाई सेवाएं पर्यटन तथा परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन के दौरान मौसम की स्थिति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। अचानक बर्फबारी, तेज हवाएं, बादल और कम दृश्यता उड़ान की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। पिछले वर्ष केदारनाथ के पास भी हुआ था बड़ा हादसा उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं को लेकर पिछले वर्ष जून में भी एक गंभीर घटना सामने आई थी। उस दौरान केदारनाथ मंदिर से गुप्तकाशी जा रहा एक हेलीकॉप्टर जंगल के क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। यह घटना राज्य में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ान संचालन से जुड़े जोखिमों को लेकर चर्चा का विषय बनी थी। केदारनाथ यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं का इस्तेमाल विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है, जो कठिन पर्वतीय रास्तों से पैदल यात्रा करने के बजाय हवाई परिवहन का विकल्प चुनते हैं। ऐसे में मौसम की निगरानी, हेलीकॉप्टरों की तकनीकी स्थिति और उड़ान से पहले सुरक्षा जांच का महत्व और बढ़ जाता है। दुर्घटना के कारणों का पता जांच के बाद चलेगा फिलहाल जोशीमठ के पास हुए इस हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जानकारी में बर्फबारी, संचार संपर्क टूटने और ट्रैकिंग सिस्टम से हेलीकॉप्टर का गायब होना सामने आया है। हालांकि, केवल इन परिस्थितियों के आधार पर दुर्घटना का कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। यह पता लगाने के लिए जांच आवश्यक होगी कि हेलीकॉप्टर में कोई तकनीकी खराबी आई थी या नहीं, मौसम की परिस्थितियों ने उड़ान को प्रभावित किया था या किसी अन्य कारण से दुर्घटना हुई। ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के पूरे बेड़े को एहतियातन ग्राउंड करने का निर्णय भी विमानन सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। संबंधित अधिकारियों की जांच और तकनीकी आकलन के बाद ही इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जोशीमठ के पास हुई इस दुर्घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की नजरें बचाव अभियान, यात्रियों की स्थिति और प्रशासन की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक जानकारी पर टिकी हैं।

    जिलाध्यक्ष को पीएचडी की उपाधि मिलने पर किया सम्मानित

    विराज फाउंडेशन के प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी एवं पदाधिकारियों ने अभिनंदन पत्र भेंट कर किया सम्मानित चौमूं। विराज फाउंडेशन की महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष डॉ. उमा शर्मा ने शिक्षा विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि पर विराज फाउंडेशन की ओर से प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी एवं पदाधिकारियों ने अभिनंदन पत्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. उमा शर्मा के दादाजी एवं पूर्व सरपंच श्री जगदीश प्रसाद तिवाड़ी तथा माता-पिता का भी सम्मान किया गया। डॉ. उमा शर्मा ने “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित होने वाले शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रति उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की अभिवृत्ति का अध्ययन” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया है। उनका शोध कार्य प्रोफेसर कल्पना सेंगर के निर्देशन में संपन्न हुआ। इस शोध के माध्यम से उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रति अभिवृत्ति का अध्ययन किया गया। शोध में इन कार्यक्रमों के प्रति विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर विराज फाउंडेशन के प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी ने डॉ. उमा शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की उपलब्धियां समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। उनकी सफलता अन्य महिलाओं एवं युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता में परिवार का सहयोग, मार्गदर्शन और आशीर्वाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सम्मान समारोह के दौरान विराज फाउंडेशन के प्रदेश महासचिव बनवारी लाल शर्मा, प्रदेश मंत्री ओमप्रकाश रीडर, प्रदेश प्रचार-प्रसार मंत्री चंद्र प्रकाश शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, शिवकुमार शर्मा, सियाराम शर्मा, पुष्पा देवी, गिरिजा शर्मा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।  

    ध्रुवपद -धरोहर "- जयपुर घराना -विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला" - 300 वर्ष पूर्णता की ओर अग्रसर जयपुर -

    ध्रुवपद -धरोहर "- जयपुर घराना -विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला" - 300 वर्ष पूर्णता की ओर अग्रसर जयपुर   स्थापना के उत्सव का श्री गणेश शास्त्रीय संगीत के पितास्वरूप एवं जयपुर में पल्लवित - पुष्पित होने वाली सबसे पुरानी ध्रुवपद गायकी के कलाकारों द्वारा किया गया, जिसमें विश्व में जाना -माना गया जयपुर घराना पर विमर्श एवं उसकी समृद्ध धुवपद गायकी के प्रशिक्षण की कार्यशाला का आयोजन 'ध्रुवपद धरोहर ' नाम से दिनांक 29 अक्टूबर को भैरोसिंह शेखावत भवन, राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज में हुआ । उल्लेखनीय है कि जयपुर, राजस्थान में पल्लवित - पुष्पित हुई इस पुरातन गायकी को जयपुर सहित ग्वालियर से भी सीखने के इच्छुक आये 50 से भी अधिक युवा विद्यार्थियों ने गहरी रुचि एवं उत्साह के साथ भाग लिया ।जयपुर की स्थापना कच्छवाहा वंश के महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय द्वारा 18 नवम्बर 1725 में हई थी । उत्लेखनीय है कि स्थापना के समय से ही भारतीय साहित्य,संस्कृत, धर्म -दर्शन एवं संगीत आदि क्षेत्रों में भट्ट परिवार के साधक कलाकार पाँच पीढ़ियों से जयपुर में रहकर संस्कृत देववाणी एवं वेद वाणी कहे जाने वाले ध्रुवपद आधारित पुष्टि मार्गीय मंदिर -परम्परा हवेली संगीत के पद्य साहित्य सहित ध्रुवपद की घरानेदार शास्त्रीय संगीत की भी सेवा करते आ रहे हैं इसलिए जयपुर की ३०० वर्ष की लम्बी यात्रा को स्वयं के लिए भी विशेष गर्व एवं हर्ष का विषय समझते हुए इसे ध्रुवपद गायकी से श्री गणेश किया । नवीन पीढी को उसके समृद्ध इतिहास एवं गायन - परम्परा से जोड़ने और आगे बढ़ाने के ख़ास उद्देश्य से "भारतीय शास्त्रीय संगीत के "जयपुर - घराना पर विमर्श एवं उसकी प्रशिक्षण - कार्यशाला का आयोजन किया गया,इसे इन्टरनेशनल धुवपद धाम ट्रस्ट, जयपुर द्वारा राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज़, जयपुर एवं कला - संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया । उद्घाटन मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध उद्योगपति अध्यक्ष, राज . चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज डॉ. के एल जैन ने दीपप्रज्ज्वलन कर उद्बोधन दिया और इस अवसर पर संसाधनों के अभाव में भी बाहरी यात्राओं के साथ आजीवन जयपुर को ही समर्पित उल्लेखनीय सेवा करने वाले मुख्य प्रचारक ध्रुवपदाचार्य पद्मश्री पं ० लक्ष्मण भट्ट तैलंग और उनके परिवार की कठिन साधना एवं उसे संरक्षित -संवर्द्धित करने के उनके अथक प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया । पं० जी की पट्ट शिष्या एवं पुत्री जयपुर में ध्रुवपद गायकी की प्रबल - संवाहक विदुषी डॉ मधु भट्ट तैलंग के निर्देशन में लगातार 3 घंटे तक ध्रुवपद की स्वर - -सरिता बहती रही । विमर्श और ध्रुवपद -प्रशिक्षण के पहले चरण में डॉ० मधु ने ध्रुवपद की दो धाराओं के अन्तर्गत जयपुर में स्थापना के समय से ही जयपुर महाराजाओं द्वारा देश के कोने - कोने विशेषकर .दक्षिण से अश्वमेध यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान आदिके लिए बुलाये गये भट्ट घराने के वेल्लनाटीय पंडितों एवं संगीत -साधकों ,जिससे डॉ मधु के पूर्वजों और स्वयं का भी संबंध है,उनके मंदिरपरम्परागत धर्म,संस्कृत एवं मंदिर -परम्परा केअन्तर्गत हवेली संगीत -साधना एवं रुक्मणी मंगल आदि गायनपरम्परा पर प्रकाश डाला एवं महाराजाओं की शैव एवं कृष्णभक्ति और उनके सम्प्रदायों के अंतर्गत उनकी आस्था, दीक्षा एवं उनके संरक्षण पर प्रकाश डाला । मंदिर - परम्परा के पंडित एवं गायक महाराजा के धर्म - गुरू के रूप में रहे एवं प्रचार से दूर सिर्फ प्रभु - भक्ति में लीन रहे,दूसरी ओर जयपुर दरबार में महाराजाओं द्वारा स्थापित छतीस कारखानों में से एक गुणीजन खाने में महाराजाओं द्वारा देश के कोने -कोने से पंडित उस्ताद बुलाकर संरक्षण दिया गया एवं भारतीय शास्रीय संगीत के गुणग्राही राजाओं द्वारा उन्हें गुरू के रूप में सम्मान दिया । इस अवसर पर जयपुर में मूल .रूप से अंबैठा सहारनपुर में जन्में उस्ताद बहराम खां को जयपुर महाराजा रामसिंह जी द्वारा संरक्षण दिया गया एवं उन्होंने जयपुर में दरबारी संरक्षण के बाद डागर घराने की नींव डाली । डागर घराने के वंशज उस्तादों की उल्लेखनीय साधना और प्रचार -प्रसार,जिसने जयपुर के ध्रुवपद को वैश्विक पहचान दी,पर प्रकाश डाला और कहा कि यदि इस घराने को राजदरबार या सरकार का सतत् संरक्षण मिलता रहता या स्कूलों - कॉलेजों में संगीत की दक्षता को अकादमिक डिग्रियों से ज़्यादा महत्व दिया जाता तो ये हुनरमन्द घराने के उस्ताद कई वर्षों पूर्व जयपुर छोड़कर नहीं जाते । डॉ मधु ने गायन के अन्य मनरंग के ख्याल के जयपुर घराने,पखावज के रूपराम घराना, सितार का सोनिया एवं कत्थक के जयपुर घराने पर भी संक्षिप्त प्रकाश डाला । डॉ. मधु ने बताया कि 19 वीं शताब्दी तक लोग ध्रुवपद में पुराने हरिदास,तानसेन, अष्टछाप अदि कवियों की रचनाएं . ही ध्रुवपद में गाते आये ।जयपुर राजस्थान के मेरे पिता गुरू ने अपनी पीढ़ी में सर्व प्रथम ने इस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए धुवपद धमार बनाये और दो बार वाराणसी में रचनाओं के लिए तुलसी पुरस्कार भी मिला ।डॉ . मधु ने अपने को सौभाग्य शाली समझते हुए अपने पिता -गुरू द्वारा ध्रुवपद की मंदिर एवं डागर घराने और इन नवाचारों की प्राप्त शिक्षा को प्रसाद माना। मधु ने जयपुर के ध्रुवपद से संबद्ध बीनकार घराने एवं पखावज -परम्परा पर भी प्रकाश डाला। दूसरे चरण में डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने राग वृन्दावनी सारंग में डागर घराने की आलापचारी की विविध गायकी - विशेषणों के साथ कार्यशाला में विलंबित,जोड़ से लेकर झाले तक के आलापों का प्रशिक्षण एवं गायन कराया । डागर घराने के सूलताल में निबद्ध तानसेन रचित अकबर की प्रशंसा में रचित ध्रुवपद 'तुम रब तुम साहेब ' को चारों चरणों स्थाई, अन्तरा, संचारी एवं आभोग स्चनाकार की छाप सहित उसमें लयकारियों के विस्तार को भी सिखाया एवं इसी राग में चौताल में निबद्ध हवेली संगीत कीमंदिर परम्परा के छः सौ वर्ष पूर्व की महाप्रभु वल्लभाचार्य की चारों चरणों में ही कृष्ण -भक्ति परक अष्टयाम सेवा में राजभोग में गाई जाने वाली ध्रुवपद रचना " बैठे हरि राधा संग एवं उसकी गायकी का ताला त्मक स्वरूप भी बताया । डॉ मधु ने स्वरों को वैदिक पद्वति, थाट पद्धति, घरानों की जनक राजस्थान में ही पनपी चारों वाणियों और उसकाआधार भरतकालीन पंच गीतियों और ध्रुवपद साधने के अलंकारों, गमक, मींड, कण, श्रुति गायन -ढंग भी बताया ।मधु ने ख्याल के मनरंग द्वारा गायन के ख्याल घराने पर भी संक्षिप्त प्रकाश डाला।ध्रुवपद की तालों को भी हाथ से लगाने केखेल आदि भी बताये । कार्यशाला में परवावज पर आमेर जयपुर के रूपराम घराने के पखावज- वादक प्रतीश रावत संगत ने की। कार्यशाला का सहसंयोजन डॉ . प्रदीप टांक ने किया । जयपुर की ध्रुवपद की इस समृद्ध परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रशिक्षणार्थियों का पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रहा । समापन समारोह में अध्यक्षता कररहे विख्यात वैदिक चित्रकार रामूरामदेव ने इसे सीखने वालों के लिए उपयोगी बताते हुए जयपुर की ध्रुवपद -परम्परा के संरक्षण -संवर्द्धन में ट्रस्ट के सतत् प्रयासों की सराहना कर विद्यार्थियों को इसे भविष्य में साधने हेतु प्रेरित किया एवं प्रमाण पत्र द्वारा सम्मानित किया । मंच- संचालन योगाचार्य डॉ नरेन्द्र शर्मा ने किया ।

    विकसित भारत के लिए अनुसंधान’ विषयक ऑनलाइन एनईपी कार्यक्रम का समापन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के सहयोग से आयोजित आठ दिवसीय (22 से 29 अक्टूबर, 2026) ऑनलाइन एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का समापन आज दिनांक 29 अक्टूबर, 2026 को हुआ। ‘विकसित भारत के लिए अनुसंधान’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 277 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में अनुसंधान की महत्त्वपूर्ण भूमिका के प्रति शिक्षकों को जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विषय विशेषज्ञों ने अनुसंधान पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान नैतिकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नवाचार, सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे समसामयिक विषयों पर व्याख्यान दिए। विभिन्न सत्रों में अनुसंधान-आधारित शिक्षण, आलोचनात्मक चिंतन, अंतःविषयक सहयोग तथा पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विशेष बल दिया गया। समापन समारोह में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रंजना अग्रवाल ने आठ दिवसीय कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके पश्चात दो प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक प्रो. शिव प्रसाद ने समापन टिप्पणियाँ प्रस्तुत कीं। समारोह के मुख्य अतिथि मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के कुलपति प्रो. पी.के. डशोरा ने अपने संबोधन में अनुसंधान एवं ज्ञान सृजन के महत्त्व को रेखांकित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलपति प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने उच्च शिक्षा में अनुसंधान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। अंत में आयोजन समिति की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अनुसंधान की नवीन प्रविधियों, अकादमिक नवाचार एवं नैतिक शोध प्रक्रियाओं की उपयोगी जानकारी प्रदान की। साथ ही, शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समाजोपयोगी ज्ञान के सृजन और सतत विकास के लिए अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित किया। यह आयोजन ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की दिशा में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान की भूमिका को सशक्त बनाने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रयास हैं 

    बियानी कॉलेज में ‘नव्यायन-2026’ डांडिया नाइट का आयोजन

    लोक संस्कृति और संगीत के रंगों से सजी शाम जयपुर। बियानी कॉलेज ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट एवं लॉ कॉलेज में भव्य डांडिया नाइट ‘नव्यायन-2026’ का रंगारंग आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक गुजराती परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने गरबा और डांडिया की मनमोहक धुनों पर नृत्य कर उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे परिसर में संगीत, नृत्य और उल्लास का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी एवं बियानी परिवार के सदस्यों द्वारा मां दुर्गा की आरती के साथ किया गया। इस अवसर पर कॉलेज के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी तथा प्रिंसिपल एवं डीन डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल ने मुख्य अतिथि आईपीएस अधिकारी अरशद अली, लोक नृत्यांगना मीना सपेरा और कालवाड़ तहसीलदार रामचंद्र गुर्जर का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। कार्यक्रम में लोक नृत्यांगना मीना सपेरा ने अपनी लोक कला और नृत्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरती को प्रस्तुत किया। आईपीएस अधिकारी अरशद अली की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। विद्यार्थियों ने गरबा और डांडिया की आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से पारंपरिक संस्कृति के प्रति अपनी रुचि और उत्साह व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन बागोरिया एवं लॉ कॉलेज विभागाध्यक्ष डॉ. सोनम रतनू ने कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम के समापन पर लॉ विभाग के विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। अंत में असिस्टेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी और सीए साक्षी बियानी ने सभी अतिथियों, फैकल्टी सदस्यों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को बधाई दी। ‘नव्यायन-2026’ ने भारतीय लोक संस्कृति, परंपरा और युवा ऊर्जा का सुंदर संगम प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों के लिए एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया। कार्यक्रम के समापन पर बेस्ट परफॉर्मेंस, बेस्ट कॉस्ट्यूम और बेस्ट स्टाइल जैसी विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल और लॉ डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल डॉ राजेश कुमार वर्मा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर ‘पांडुलिपि से प्रकाशन तक’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं बुनियादी एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के चतुर्थ दिवस पर शोध-पत्र लेखन एवं प्रकाशन की प्रक्रिया पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को शोध-लेखन, गुणवत्तापूर्ण शोध-पत्र तैयार करने तथा प्रतिष्ठित शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशन की प्रक्रिया से अवगत कराना था। कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस के मुख्य अतिथि वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार सिंह रहे। उन्होंने पांडुलिपि से प्रकाशन तक (From Manuscript to Publication) विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रजनी माथुर, आइक्यूएसी समन्वयक एवं एफ़डीपी संयोजक के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के लिए शोध की गुणवत्ता, अकादमिक लेखन तथा शोध-प्रकाशन की प्रक्रियाओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। अपने व्याख्यान में डॉ. नीरज कुमार सिंह ने पांडुलिपि तैयार करने से लेकर शोध-पत्र के प्रकाशन तक के विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने शोध-पत्र की संरचना, उपयुक्त शोध-पत्रिका के चयन, संदर्भों के सही उपयोग, अकादमिक लेखन में मौलिकता, शोध नैतिकता तथा प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य के लिए व्यवस्थित लेखन, प्रामाणिक संदर्भ सामग्री तथा निर्धारित प्रकाशन मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित किया। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संदेश में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की गुणवत्ता और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को शोध एवं प्रकाशन के नवीन आयामों से परिचित कराते हैं तथा विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति के विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराणा ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने का महत्त्वपूर्ण माध्यम है। डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल, एफ़डीपी सह-संयोजक ने कहा कि संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों की शैक्षणिक, शोध एवं व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के साथ फीडबैक प्रपत्र पर चर्चा की गई, ताकि कार्यक्रम की उपयोगिता, विषय-वस्तु तथा भविष्य में आयोजित किए जाने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों में सुधार के लिए सुझाव प्राप्त किए जा सकें। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रोहित सारस्वत, शोध अधिष्ठाता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. नीरज कुमार सिंह के प्रति शोध-पत्र लेखन एवं प्रकाशन से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रतिभागी शिक्षकों का कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद किया। कार्यक्रम में शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए शोध-लेखन एवं प्रकाशन से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस प्रकार एफ़डीपी का चतुर्थ दिवस शोध कौशल के विकास, अकादमिक गुणवत्ता में वृद्धि तथा उच्च शिक्षा में शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में उपयोगी सिद्ध हुआ।  

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राजस्थान विश्वविद्यालय इकाई ने राजस्थान विश्वविद्यालय की 1000 छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का भ्रमण करवाने का संकल्प

     10 दिवसीय कार्यक्रम में अब तक 500 महारानी महाविद्यालय कि छात्राओं ने किया भ्रमण जयपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राजस्थान विश्वविद्यालय इकाई द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय की 1000 छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का शैक्षणिक भ्रमण करवाने का संकल्प लिया गया है। इस संकल्प के अंतर्गत 27 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हुए 10 दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था, संसदीय कार्यप्रणाली तथा विधायी प्रक्रिया से परिचित करवाया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक लगभग 500 महारानी महाविद्यालय की छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का भ्रमण करवाया जा चुका है। इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने छात्राओं से संवाद किया। संवाद के दौरान छात्राओं को विधानसभा की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की भूमिका तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी के महत्व को समझने का अवसर मिला। इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से छात्राओं में संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं एवं राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री शुभेंद्र सिंह निर्वाण ने कहा कि, “विद्यार्थी परिषद का मानना है कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर भी मिलना चाहिए। राजस्थान विश्वविद्यालय की 1000 छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का भ्रमण करवाने का संकल्प इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राएं विधानसभा की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगी तथा लोकतंत्र में अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होंगी। विद्यार्थी परिषद भविष्य में भी विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास के लिए इस प्रकार के रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।” अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राजस्थान विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आगामी दिनों में भी इस कार्यक्रम को निरंतर जारी रखते हुए शेष छात्राओं को विधानसभा का भ्रमण करवाने का लक्ष्य रखा गया है। परिषद का उद्देश्य छात्राओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना तथा उनमें जागरूक, जिम्मेदार एवं सक्रिय नागरिक बनने की भावना विकसित करना है। इस मौके पर राजस्थान विश्वविद्यालय के इकाई अध्यक्ष विशाल उज्जैनिया इकाई मंत्री हर्षवर्धन खर्रा महारानी महाविद्यालय की इकाई अध्यक्ष संजू चौधरी और इकाई मंत्री चीना शर्मा आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

    लोकतंत्र को मजबूत करने बाजडोली गाँव पहुँचे यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र, रैली निकालकर दिया मतदान का संदेश

    जयपुर, आमजन को वोट की ताकत का अहसास कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर द्वारा चलाए जा रहे पाँचदिवसीय विशेष अभियान के तीसरे दिन विद्यार्थियों की टोली बाजडोली गाँव पहुँची। विश्वविद्यालय के मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब 2.0 के साझा बैनर तले विद्यार्थियों ने गाँव के चौपालों, गलियों और ढाणियों में जाकर जन-जागरण किया। अभियान के तहत छात्र-छात्राओं ने बाजडोली गाँव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए हर एक वोट कीमती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना किसी भेदभाव, भय या प्रलोभन के, पूरी सूझबूझ के साथ अपने वोट के अधिकार का प्रयोग करें। छात्रों ने ग्रामीणों को समझाया कि देश के विकास में एक सजग मतदाता की भूमिका सबसे अहम होती है। गाँव में निकाली गई इस रैली के दौरान विद्यार्थियों के हाथों में "Your Vote Matters" और "जागो, समझो, मतदान करो, अपने भविष्य को बेहतर बनाओ" जैसे प्रेरणादायक नारों की तख्तियाँ थीं, जिन्होंने ग्रामीणों का ध्यान खींचा। विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि ऐसे अभियानों का हिस्सा बनकर विद्यार्थी न सिर्फ सामाजिक बुराइयों और अवेयरनेस के प्रति गंभीर होते हैं, बल्कि उनमें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के संस्कार भी विकसित होते हैं। प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने इस जमीनी जुड़ाव को विद्यार्थियों के व्यावहारिक अनुभव और सर्वांगीण विकास के लिए मील का पत्थर बताया, वहीं, कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने उच्च शिक्षा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की बात कही। मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस तरह के ग्रामीण दौरे विद्यार्थियों को समाज के वास्तविक स्वरूप से रूबरू कराते हैं। इस पूरे कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. रजनी खंडेलवाल द्वारा किया गया, जबकि डॉ. अंशु श्रीवास्तव और खुशबू चौधरी ने विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग दिया। कार्यक्रम के समापन पर एनएसएस कोऑर्डिनेटर यश यादव ने बाजडोली के ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं को देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने सतर्कता के अनिवार्य रूप से मतदान करने की शपथ दिलाई। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की यह मुहिम लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति चेता रही है। बाजडोली गाँव में तीसरे दिन की यह गतिविधि ग्रामीणों में चुनावी साक्षरता और सामुदायिक चेतना जगाने में पूरी तरह सफल रही।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तृतीय दिवस पर पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण एवं शोध पत्र लेखन पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

        जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के तृतीय दिवस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण तथा शोध पत्र लेखन विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन 28 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के ब्लॉक ए स्थित सेमिनार हॉल-1 में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को पाठ्यक्रम परिणाम एवं कार्यक्रम परिणाम के निर्धारण, उनके पारस्परिक संबंध तथा गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने की प्रक्रिया से परिचित कराना था। कार्यक्रम का शुभारंभ आइक्यूएसी समन्वयक एवं संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रजनी माथुर द्वारा स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ताओं एवं उपस्थित संकाय सदस्यों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा शोध की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में डॉ. एस.वी.एच. नागेंद्र ने “पाठ्यक्रम परिणाम (COs) एवं कार्यक्रम परिणाम (POs) का निर्धारण एवं मानचित्रण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पाठ्यक्रम परिणाम और कार्यक्रम परिणाम की अवधारणा, उनके निर्धारण की प्रक्रिया तथा दोनों के बीच संबंध स्थापित करने की विधियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि परिणाम-आधारित शिक्षा के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, उद्देश्यपरक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है। द्वितीय सत्र में डॉ. कुलदीप शर्मा ने शोध पत्र लेखन विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध पत्र तैयार करने की विभिन्न प्रक्रियाओं, उपयुक्त शोध विषय के चयन, साहित्य समीक्षा, शोध समस्या के निर्धारण, शोध पद्धति, आँकड़ों के विश्लेषण तथा निष्कर्षों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध पत्र की संरचना, अकादमिक लेखन में मौलिकता, संदर्भों के उचित उल्लेख तथा शोध नैतिकता के पालन के महत्त्व को भी रेखांकित किया। इस सत्र का उद्देश्य संकाय सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने एवं शोध प्रकाशन की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में सहायता प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान मनीषा यादव ने प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए प्रतिक्रिया एवं विचार-विमर्श सत्र का संचालन किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञों के साथ अपने विचार साझा किए। संवादात्मक सत्र ने शिक्षकों को अपने शैक्षणिक एवं शोध संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शोध एवं अकादमिक लेखन उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक पद्धतियों, शोध कौशल तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने के लिए सक्षम बनाते हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन खुशबू चौधरी ने प्रभावी ढंग से किया। अंत में डॉ. जितेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का तृतीय दिवस शिक्षकों के शैक्षणिक कौशल, परिणाम-आधारित शिक्षण तथा शोध लेखन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में उपयोगी रहा। इस प्रकार का संकाय विकास कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति तथा उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण पहल है।