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    बेटे का सपना पूरा करने के लिए कोटा में रहकर फिर से पढ़ी मां

      नयूमोथोरेक्स के चलते परीक्षा से ठीक पहले तीन माह क्लास नहीं ले पाया था गुंजन तो मां ने आॅनलाइन क्लास से बनाए नोट्स   - जेईई 2021 टाॅपर एलन के मृदुल अग्रवाल से प्रेरित होकर बिहार से कोटा आया था गुंजन   कोटा. कोटा में रहकर सफलता की कहानियां लिखने वाले स्टूडेंट्स के पीछे कई प्रयास छिपे होते हैं। माता-पिता का त्याग और शिक्षकों का मार्गदर्शन इसमें महत्वपूर्ण होता है। कोटा में रहकर जेईई-एडवांस्ड क्रेक करने वाले स्टूडेंट की सफलता में इस बार मां का योगदान एक सहपाठी के रूप में सामने आया है। यहां अपने बेटे को सफलता दिलाने के लिए मां ने आॅनलाइन क्लास से नोट्स बनाए, जिन्हें पढ़कर बेटा सफल हुआ और अब आईआईटी में प्रवेश लेगा।   कहानी बिहार सीतामढ़ी के निवासी गुंजन कुमार और मां गुंजा की है। दो साल कोटा में रहकर एलन से जेईई की तैयारी करने वाला गुंजन कुमार परीक्षा से ठीक पहले बीमार हो गया। न्यूमोथोरेक्स (फेफड़ा कोलेप्स होना) के चलते गुंजन तीन माह तक पलंग पर रहा, क्लास तक अटेंड नहीं कर सका। इस दौरान मां गुंजा सक्रिय र्हुइं। पढ़ाई में नुकसान नहीं हो इसके लिए गुंजन को आॅनलाइन वीडियो दिखाए और खुद ने भी देखते हुए इन क्लासेज के नोट्स बनाए। गुंजा गृहिणी हैं, उन्होंने बीएड किया हुआ है, वो खुद कोटा साथ रही और गुंजन के लिए बरसों बाद फिर से पढ़ाई शुरू की। गुंजन की आंखें कमजोर हैं और 70 प्रतिशत से अधिक आई-साइट वीक होने के कारण 9.5 नम्बर का चश्मा लगा हुआ है। जेईई मेन में 91.8 पर्सेन्टाइल स्कोर किया। जेईई एडवांस्ड में पीडब्ल्यूडी ओबीसी कैटेगरी रैंक 50 और काॅमन रैंक पीडब्ल्यूडी 120 है। अब आईआईटी दिल्ली सीएस ब्रांच में एडमिशन लेकर अपने आईआईटीयन बनने के सपने को साकार करने जा रहा है। पिता राजनारायण प्रसाद बाॅर्डर रोड आॅर्गेनाइजेशन में इंजीनियर हैं। उसका छोटा भाई भी वर्तमान में कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा है।   रिजल्ट के बाद गुंजन ने कहा कि परिस्थितियां हमेशा हमारे सपोर्ट में नहीं रहती। परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की ही नहीं हौसले की भी होती है। मैंने तय किया हुआ था कि एलन कोटा में पढ़कर आईआईटी-जेईई क्रेक करनी है और इसके लिए पूरी कोशिश की। बीमार हुआ तो मां ने जो सपोर्ट किया वो परीक्षा से पहले बहुत काम आया। फैकल्टीज ने गाइड किया तो मैं सफल हो सका। इसलिए सकारात्मक हौसला बनाए हुए स्टूडेंट्स को हमेशा आगे की सोचनी चाहिए।   गुंजन की मां गुंजा का कहना है कि बेटे का सपना ही मेरा सपना है। जब गुंजन बीमार हुआ तो मैं भी थोड़ा चिंतित हुई, इसके बाद हम दोनों ने एक साथ वीडियोज देखे और मैंने नोट्स बनाए। बाद में मेरे बनाए नोट्स जब काम आए तो मुझे बड़ी खुशी हुई।   एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि कोटा स्टूडेंट्स ही नहीं पेरेन्ट्स के लिए भी रियल मोटिवेशन है। यह शहर सिर्फ परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए पढ़ाई नहीं करवाता, वरन आत्मविश्वास बढ़ाता है। चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। गुंजन की कहानी विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों के लिए प्रेरणा है। इसलिए कोटा आना तय किया आंखों की रोशनी कमजोर होने के बावजूद गुंजन के सपने बड़े थे। उसने एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा से जेईई की तैयारी की। गुंजन आईआईटी में पढ़ना चाहता था। उसने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। 10वीं कक्षा 82.5 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 70 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। स्वयं ने कोटा आने से पहले सर्च किया कि जेईई की तैयारी के लिए बेस्ट कोचिंग कौनसी है, तभी उसे साल 2021 में जेईई मेन एवं एडवांस्ड के ऑल इंडिया टॉपर एवं एलन के स्टूडेंट मृदुल अग्रवाल का वीडियो देखा। उसकी सफलता से प्रभावित होकर गुंजन ने भी कोटा जाने का फैसला किया। उसने अपने माता-पिता से कोटा भेजने की जिद की। बेटे की लगन देखकर परिवार ने भी पूरा साथ दिया और वर्ष 2023 में उसे कोटा भेजा, जहां उसने एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में प्रवेश लेकर अपने सपनों को आकार देना शुरू किया। जनवरी में परीक्षा, अक्टूबर में न्यूमोथोरेक्स कोटा आने के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले जिंदगी ने उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। यहां 5 अक्टूबर 2025 को उसने इंस्टीट्यूट में रूटीन टेस्ट दिया और अगले दिन उसे सीने में दर्द होने लग गया। डाॅक्टर को दिखाया तो सामने आया कि अत्याधिक भारी सामान उठाने की वजह से बाएं फेफड़े पर दबाव पड़ा और वो कौलेप्स हो गया। न्यूमोथौरेक्स के बाद करीब तीन महीने तक वो बेड रेस्ट पर रहा।  

    डॉ.भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी सुपरवाइज़र के आवेदन आमंत्रित

    विधि शिक्षा में उत्कृष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति के साथ, अम्बेडकर विवि शोधोन्मुख शिक्षकों को प्रदान कर रहा है स्वर्णिम अवसर : प्रो निष्ठा जसवाल, कुलगुरु जयपुर, डॉ.भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 2022 के तहत पीएचडी रिसर्च सुपरवाइज़र के आवेदन आमंत्रित किए गए है। जनसम्पर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि कुलसचिव श्री वीरेंद्र वर्मा (आरएएस) द्वारा एक आदेश जारी कर अम्बेडकर विवि से संबद्ध समस्त विधि महाविद्यालयों के प्राचार्यो के माध्यम से अंतिम दिनांक 24 जुलाई 2026 से पूर्व पीएचडी रिसर्च सुपरवाइज़र के आवेदन आमंत्रित किए गए है। विवि द्वारा निर्देशित किया गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (पीएचडी डिग्री प्रदान करने के लिए न्यूनतम मानक और प्रक्रिया) अधिनियम 2022 में निहित प्रावधानों के अनुरूप अम्बेडकर विवि से संबद्ध समस्त विधि महाविद्यालयों में कार्यरत योग्य संकाय सदस्यों का एक पैनल तैयार किया जाना है, तदनुसार पात्र अभ्यर्थी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकता है। आवेदन से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश एवं पात्रता संबंधी जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।   कुलगुरु प्रो निष्ठा जसवाल ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय ने शोध की गुणवत्ता को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से योग्य शिक्षकों से पीएचडी सुपरवाइज़र के रूप में आवेदन आमंत्रित किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि अनुभवी एवं शोधोन्मुख शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से शोध कार्यों को नई दिशा और गुणवत्ता मिलेगी। विश्वविद्यालय का लक्ष्य उत्कृष्ट शोध संस्कृति का विकास करना है। पीएचडी सुपरवाइजर के रूप में योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों की भागीदारी से शोधार्थियों को उच्च स्तर का शैक्षणिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा तथा गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहन मिलेगा। विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।    

    वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की मजबूत रणनीति, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में हुआ इंडस्ट्री-एकेडेमिया मंथन

    -वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की मजबूत रणनीति, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में हुआ इंडस्ट्री-एकेडेमिया मंथन -एक्सपर्ट बोले- धीरे-धीरे बदलाव से बचेगी डोमेस्टिक इंडस्ट्री, मजबूत होगा एक्सपोर्ट -सस्टेनेबिलिटी विदेशी कॉन्सेप्ट नहीं, भारतीय संस्कृति का हिस्सा- डॉ. दिनेश गुप्ता -इंडस्ट्री-रेडी युवाओं और एजुकेशन-इंडस्ट्री तालमेल से 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य जयपुर, दुनिया भर में चल रही जियो-पॉलिटिकल उथल-पुथल के बीच भारत एक मजबूत ग्लोबल पावर बनकर कैसे उभर रहा है? इसी अहम मुद्दे पर जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के जयपुर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (जेएसई) ने एक इंडस्ट्री-एकेडेमिया राउंडटेबल का आयोजन किया। 'विखंडित वैश्विक व्यवस्था में चुनौतियां और अवसर' थीम पर हुए इस मंथन का फोकस सिर्फ समस्याओं पर बात करना नहीं था, बल्कि भारत के भविष्य की रणनीति तैयार करना था। इस मौके पर एक्सपर्ट्स ने कई अहम बातें रखीं। उनके अनुसार सरकार की पॉलिसीज़ काफी प्रैक्टिकल रही हैं। क्वॉलिटी सर्कल फ़ोरम ऑफ़ इंडिया (क्यूसीएफ़आई) के वाइस चेयरमैन डॉ. रमेश मित्तल ने क्रूड ऑयल और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) का उदाहरण देते हुए बताया कि अचानक कोई भी बड़ा बदलाव करने के बजाय धीरे-धीरे नीतियां लागू की जा रही हैं, ताकि हमारी अपनी डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज को कोई नुकसान न हो। इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए फ़ेडरेशन ऑफ़ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फ़ोर्टी) की सदस्य अदिति खंडेलवाल ने भारत की युवा आबादी और कॉर्पोरेट से लेकर छोटे बिजनेस में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देश की ग्रोथ का एक बड़ा कारण बताया। वहीं, पर्यावरण के मुद्दे पर 'बैगमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर डॉ. दिनेश गुप्ता ने क्लाइमेट चेंज पर चिंता जताते हुए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक छोड़ने की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि 'सस्टेनेबिलिटी' कोई विदेशी कांसेप्ट नहीं है, बल्कि यह हमेशा से हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। ग्लोबल ट्रेड के बदलते समीकरणों पर पीएचडीसीसीआई के रेसिडेंट डायरेक्टर आर.के. गुप्ता ने बताया कि अगर हमें एक्सपोर्ट बढ़ाना है, तो अपने लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को तुरंत मजबूत करने के साथ प्रोडक्ट्स की क्वालिटी को भी इंटरनेशनल मानकों के हिसाब से तैयार करना होगा। शिक्षा और इंडस्ट्री के बेहतर तालमेल पर बात करते हुए, यूनिवर्सिटी के शिक्षकों व एक्सपर्ट्स ने 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) रोकने और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर भी जोर दिया, जिसके लिए छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाना होगा। 'जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर' व 'जेयू मेकरस्पेस' जैसे इनोवेटिव सेल को इसी दिशा में उठाए गए कदम मानते हुए, जेएसई डिपार्टमेंट की हेड डॉ. रविंदर कौर और स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के डीन प्रो. सुनील कुमार मिश्रा ने मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भारत को लीडरशिप पोजीशन में लाने के लिए कई ठोस एवं प्रैक्टिकल रणनीतियों को विस्तार से बताया। चर्चा में यह बात उभर कर आई कि भारत के इस विज़न को साकार करने की असली कमान अब युवाओं के हाथ में है। उन्हें आगे आकर देश की ईको-फ्रेंडली सोच और 'लोकल नॉलेज' को ग्लोबल लेवल पर प्रमोट करना होगा, क्योंकि दुनिया में चाहे जितनी भी उथल-पुथल हो, भारत के पास ग्लोबल लीडर बनने का एक सुनहरा अवसर है। 2047 तक 'विकसित देश' बनने का सिर्फ एक ही मंत्र है: इनोवेशन, संसाधनों का सही इस्तेमाल और पूरी तरह से आत्मनिर्भर होना।

    किशनगढ़ रेनवाल मे अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य समाज की श्री कमला शक्ति माता का 82 वा विशाल वार्षिक तीन दिवसीय मेला उत्सव का मन्दिर परिसर मे भव्य आयोजन

    राजस्थान प्रदेश के जयपुर जिले के किशनगढ़ रेनवाल नगर मे अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य समाज की श्री कमला शक्ति माता का 82 वा विशाल वार्षिक तीन दिवसीय मेला उत्सव का मन्दिर परिसर मे हर साल की तरह इस साल भी भव्य आयोजन धूम धाम से हुआ! मेले मे अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य समाज के 72 गोत्रों सहित 36 कोम के लोगों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया! मेले मे अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य समाज की श्री कमला शक्ति माता के मन्दिर को भव्यता से सजाया गया! वही दूसरी और भजन संध्या, भगवान् की अनेक लीलाओ का आयोजन भी किया गया!मंदीर मे देश भर से खंडेलवाल समाज के लोगों ने भाग लिया एवं किशनगढ़ रेनवाल नगर से जुड़े ग्रामीण छेत्र के लोगों सहित नगर के गणमानय लोगों ने भी उत्साह पूर्वक भाग लिया! मेले के दोरान प्रतिदिन श्री कमला शक्ति माता मन्दिर मे भोग आरती का आयोजन किया जा रहा है एवं आगंतुक भक्तों को प्रसाद वितरण किया जा रहा है! श्री कमला शक्ति माता मेला प्रबंध समिति के विष्णु रावत एवं श्याम रावत ने बताया कि कोलकाता से जितेंद्र रावत एवं राकेश रावत ने माता का मंगल पाठ किया एवं जय माता दी इंटरनेशनल ग्रुप की और से राधा कृष्ण की मनमोहक झाकी भी प्रस्तुत की गई!उत्सव का शुभ आरंभ नगर की महिलाओ की और से कलश यात्रा बड़े मंदीर से श्री कमला शक्ति मंदीर तक निकालकर हुआ! उत्सव के दोरान तीनो दिन माता की महाआरती, फूल बंगला झाकी, रात्रि मे मा भगवती का जागरण, दुर्गा सप्तशदी पाठ का आयोजन किया गया! इसके साथ ही मा शक्ति का 1008 कलशो से दुगधा अभिषेक किया गया एवं छपन भोग की झाकी भी सजाई गई!   अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता ( तुंगा वाले), अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजीव कट्टा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा पत्रिका के मुख्य संपादक राम निरंजन खुटेटा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर रमेश कुमार रावत, सीएआईटी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय युवा सयोजक शरद फरसोईया सहित अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छतीसगढ़, झारखंड, आसाम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, सहित अनेक प्रदेश एवं कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, रतलाम, मुंबई, राजनंद गाव, सहित देश के अनेक प्रमुख शहरों से अनेक पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, आजीवन सदस्यों ने श्री कमला शक्ति माता मन्दिर परिसर मे मेले के आयोजन पर खुशी व्यक्त करते हुए समाज, प्रदेश एवं देश की खुशहाली की कामना की है!  

    एलीट किटी ग्रुप ने पौधों को लगाकर जिंदा रखने का संकल्प लिया

    एलीट किटी ग्रुप के 100परिजनों ने पर्यावरण उन्नयन हेतु पौधे लगाकर उन्हें जिंदा रखने का भी संकल्प लिया। ग्रुप के प्रमोद गुप्ता ने बताया इस अवसर पर आम जाम जामुन बादाम के पौधों को ग्रहण किया। सुनील खंडेलवाल ने बताया कि हम हमारे परिवार के कोई 100 लोग एक एक पौधा लगाएंगे तथा उसे जीवित रखने हेतु पानी की व्यवस्था भी करेंगे। गुप्ता परिवार से रेनू रमेश गुप्ता नेप्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी पौधे निशुल्क उपलब्ध कराए ये पौधे प्रति वर्ष स्व चिरंजीलाल जी गुप्ता की समृति में संस्थाओं को भेट किए जाते हैं। रेनू गुप्ता ने कहा कि फलदार पौधे लगाने से ना सिर्फ ऑक्सीजन बल्कि फलों का उत्पादन भी बढ़ता है। गीता प्रमोद गुप्ता। रश्मि मनु जैन भारत आभा गुप्ता दिनेश सुनीता खंडेलवाल राजू शोभा गुप्ता ब्रजेश सुधा खंडेलवाल आदि ने पौधे ग्रहण किए  

    संस्थाओं के पंजीयन में उत्कृष्ट कार्य के लिए रणवीर सिंह परिहार राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित

    जयपुर। राजस्थान सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में उप पंजीयक, संस्था पंजीयन, जयपुर रणवीर सिंह परिहार को संस्थाओं के पंजीयन संबंधी कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन, जनहित के प्रति प्रतिबद्धता, कर्तव्यपरायणता एवं ईमानदारी के साथ कार्य निष्पादन के लिए राज्य स्तरीय प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक तथा शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ, राजस्थान डॉ. समित शर्मा (IAS) ने परिहार को प्रशस्ति-पत्र मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि रणवीर सिंह परिहार ने संस्थाओं के पंजीयन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों का प्रभावी समाधान करते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने पारदर्शिता, समयबद्धता, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ पंजीयन कार्यों का निस्तारण कर राज्य स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, जिसके लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। परिहार ने विभागीय योजनाओं, गतिविधियों एवं नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन में उल्लेखनीय योगदान दिया है।  

    इटली से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन पूर्ण कर लौटे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र

    कुलपति से साझा किए अनुभव ​रोम के प्रतिष्ठित संस्थान 'एकेडेमिया विवारियम नोवम' में 9 माह का आवासीय कार्यक्रम किया पूरा ​पूर्ण छात्रवृत्ति के तहत छात्रों को मिला लैटिन, प्राचीन यूनानी और पाश्चात्य दर्शन का गहन प्रशिक्षण ​जयपुर। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर के छात्र मृदुल कृष्ण शर्मा एवं सदाशिव परिसर पूरी के छात्र शिवम कुमार इटली स्थित प्रतिष्ठित संस्थान 'एकेडेमिया विवारियम नोवम' (Accademia Vivarium Novum - AVN), रोम में नौ माह का अंतरराष्ट्रीय आवासीय अध्ययन कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण कर भारत लौट आए हैं। विश्वविद्यालय मुख्यालय आगमन पर दोनो विद्यार्थियो ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी से नई दिल्ली में शिष्टाचार भेंट की और इटली में प्राप्त अपने शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक अनुभव साझा किए। इस दौरान विद्यार्थियो ने अध्ययन कार्यक्रम के दौरान अर्जित ज्ञान, शोध अनुभव तथा भारतीय एवं पाश्चात्य ज्ञान-परंपराओ के तुलनात्मक अध्ययन से प्राप्त सीख पर विस्तार से चर्चा की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने दोनो विद्यार्थियों को सफलतापूर्वक अध्ययन पूर्ण करने पर बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शिक्षा एवं शोध के वैश्विक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय अकादमिक आदान-प्रदान कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। अंतरराष्ट्रीय सहयोग वृत्त कार्यालय के समन्वयक डॉ. रमण मिश्र ने बताया कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं इटली की 'एकेडेमिया विवारियम नोवम' के मध्य संपन्न समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को रोम में इस आवासीय अध्ययन का अवसर प्रदान किया गया था। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए चयनित दोनों विद्यार्थियों को पूर्ण छात्रवृत्ति (Full Scholarship) प्रदान की गई थी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा, वीज़ा, चिकित्सा बीमा, आवास एवं भोजन सहित सभी प्रमुख व्यय सम्मिलित थे। ​डॉ. मिश्र ने आगे बताया कि नौ माह की इस आवासीय अध्ययन योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों ने लैटिन, प्राचीन यूनानी (Ancient Greek), पाश्चात्य शास्त्रीय साहित्य, दर्शन तथा भारतीय एवं पाश्चात्य ज्ञान-परंपराओं के तुलनात्मक अध्ययन का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के शैक्षणिक, शोध एवं वैश्विक दृष्टिकोण के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ​​इस गौरवपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रो. आर. जी. मुरली कृष्ण, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी, प्रभारी आदर्श प्रो. कुलदीप शर्मा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग वृत्त कार्यालय के समन्वयक डॉ. रमण मिश्र भी उपस्थित रहे।  

    शहिद धन सिंह कोतवाल की श्रद्धांजलि सभा 4 जुलाई को

    भारतीय गुर्जर परिषद के प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बागड़ी तथा जयपुर शहर अध्यक्ष बीरबल doi ने बताया कि भारतीय गुर्जर परिषद ,राजस्थान की शाखा जयपुर शहर द्वारा दिनांक 4 जुलाई 2026 को शहीद धनसिह कोतवाल के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन सायंकाल 4 बजे एम. पी. एस. स्कूल ,ब्रह्मपुरी, गणगौरी बाज़ार ,जयपुर में आयोजित की जाएगी जिसमें गुर्जर समाज के लोग उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे  

    मासिक धर्म पर चुप्पी नहीं, जागरूकता जरूरी” — रीजनल कॉलेज ऑफ फार्मेसी में विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    जयपुर। रीजनल कॉलेज ऑफ फार्मेसी, दीपशिखा कला संस्थान, सीतापुरा, जयपुर में विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (World Menstrual Hygiene Day) के अवसर पर महिलाओं एवं छात्राओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक मिथकों एवं संकोच को दूर कर महिलाओं को वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी प्रदान करना था।   कार्यक्रम के दौरान छात्राओं एवं महिलाओं को मासिक धर्म के समय व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी पैड के उपयोग, समय-समय पर पैड बदलने, सैनिटरी पैड के सुरक्षित निस्तारण (Disposal) तथा संक्रमण से बचाव के प्रभावी उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसे लेकर समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच विकसित करना आवश्यक है।   कार्यक्रम का मार्गदर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ताराचंद ने किया। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य परिवार और समाज के स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है। मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा करती है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और गरिमा को भी सशक्त बनाती है।   इस अवसर पर जया शर्मा, नंदिता कुमारी एवं गौरी गुप्ता ने छात्राओं एवं महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता, सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार तथा सैनिटरी पैड के सही उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए मासिक धर्म से जुड़े भ्रम एवं मिथकों को वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से दूर किया और स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।   महाविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज में मासिक धर्म से जुड़े संकोच एवं भ्रांतियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता अभियानों के आयोजन का संकल्प व्यक्त किया।  

    उच्च न्यायालय द्वारा राज्यपाल का आदेश पर स्टे ! डॉ देव स्वरूप की बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय पद पर ससम्मान बहाली

    महाधिवक्ता की मौजूदगी मैं जस्टिस रेखा बोरना ने स्टे किया  उच्च न्यायालय द्वारा राज्यपाल के आदेश जिसमें डॉ देव स्वरूप के राजस्थान विश्वविद्यालय कुलपति कार्यकाल में हुई शिक्षक चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का हवाला देते हुए उन्हें बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया था, को स्टे करते हुए उनकी ससम्मान बहाली की है ! डॉ देव स्वरूप द्वारा याचिका में कहा गया कि राज्यपाल द्वारा वास्तविकता को जाने बगैर एक तरफ़ा कार्रवाई करते हुए अवैधानिक तरीके से उन्हें बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद से हटाया गया है इसलिए राज्यपाल के आदेश को स्टे किया जाए ! याचिका में यह भी कहा है कि 13 वर्ष पूर्व उनके कार्यकाल में सम्पादित हुई शिक्षक चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तथा पारदर्शी थी ! शिक्षकों का चयन किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं किया जाता बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयन समिति जिसमें केवल कुलपति ही नहीं होता बल्कि विषय विशेषज्ञों के अलावा राज्यपाल का प्रतिनिधि भी होता है जिसमें प्रत्येक अभ्यर्थी की परफॉरमेंस के आधार पर उसका मूल्यांकन कर सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाता है इसलिए निहित प्रक्रिया द्वारा लिए गए निर्णय ही अंतिम हैं ! इसलिए ऐसा कोई भी आरोप कि किसी अभ्यर्थी को अधिक या कम अंक दिए गए बिल्कुल ही बेबुनियाद तथा यह उनकी छवि को ख़राब करने का प्रयास है ! याचिका में यह भी कहा गया कि माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय की डिवीज़न बेंच द्वारा भी उक्त चयन प्रक्रिया को सभी पहलुओं से सही पाया गया था ! याचिका में कहा गया कि ऐसी जाँच समिति की क्या विश्वसनीयता है जिसे गठित करने हेतु न तो निर्धारित प्रक्रिया अपनायी गयी और न ही जाँच समिति द्वारा तत्कालीन कुलसचिव, स्क्रीनिंग समिति के सदस्य,चयन समिति के सदस्य, सिंडिकेट के सदस्य तथा तत्कालीन कुलपति से कोई संपर्क कर तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त की गई और न ही इस बात का उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा इन सभी विषयों पर माननीय उच्च न्यायालय में दायर वाद अभी भी विचाराधीन है अर्थात् यह विषय सब ज्यूडिस है !        

    सोने की कीमतों पर दबाव बरकरार, जुलाई में भी गिरावट की आशंका; निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

    Yugcharan News - 02-07-2026 वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के शुरुआती दिनों में भी यह कमजोरी जारी रह सकती है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, मजबूत डॉलर और वैश्विक आर्थिक संकेतों के चलते निवेशकों का रुझान फिलहाल सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से कुछ हद तक कम हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही सोने के लिए पिछले कई वर्षों की सबसे कमजोर तिमाहियों में रही। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद अब कीमतों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना ने सोने की चमक फीकी कर दी है। इसके अलावा मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले और बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगातार कई सप्ताह से दबाव में बनी हुई है। हाल के कारोबारी सत्रों में यह कई महीनों के निचले स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार में कमजोरी का संकेत दे रहे हैं, जिससे निकट भविष्य में तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है। हालांकि, भारत में स्थिति कुछ अलग देखने को मिल रही है। कीमतों में आई गिरावट के बाद घरेलू बाजार में आभूषण खरीदने वालों की दिलचस्पी बढ़ी है। कई शहरों में ज्वेलर्स के अनुसार ग्राहकों की संख्या में सुधार देखा गया है, क्योंकि कम कीमतों का फायदा उठाकर लोग खरीदारी कर रहे हैं। इसके विपरीत चीन जैसे बड़े बाजारों में मांग अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़ों, महंगाई, विनिर्माण गतिविधियों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की टिप्पणियों पर रहेगी। इन आर्थिक संकेतकों के आधार पर यह तय होगा कि ब्याज दरों में आगे क्या रुख अपनाया जा सकता है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इसके साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, विशेषकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय निवेश फंडों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक तनाव दोबारा बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिर से मजबूत हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सोने के बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में नरमी के संकेत मिलते हैं, तो कीमतों में सीमित सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन जब तक मौद्रिक नीति सख्त बनी रहती है, तब तक सोने पर दबाव बने रहने की संभावना अधिक है। चांदी के बाजार को लेकर भी विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं। हालांकि हालिया गिरावट के बाद चांदी में नीचे की ओर दबाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है, जबकि मजबूत तेजी के लिए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आवश्यक होगा। बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में जल्दबाजी में बड़े निवेश करने के बजाय वैश्विक आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चरणबद्ध निवेश की रणनीति अधिक सुरक्षित मानी जा रही है, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को बाजार में बढ़ती अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की आवश्यकता है।   कुल मिलाकर, जुलाई की शुरुआत में सोने के बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि घरेलू मांग में कुछ सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती फिलहाल सोने की कीमतों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले आर्थिक आंकड़े यह तय करेंगे कि सोने में गिरावट जारी रहेगी या बाजार को नई दिशा मिलेगी।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा को अंतरिम राहत देने से किया इनकार, पांच सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के दिए निर्देश

      Yugcharan News - 02-07-2026 दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा द्वारा दायर उस याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित आपत्तिजनक सामग्री, मॉर्फ्ड वीडियो और डीपफेक कंटेंट को हटाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पांच ऐसे पोस्ट हटाने का निर्देश दिया, जिन्हें प्रथम दृष्टया मानहानिकारक माना गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक व्यंग्य और आलोचना को अपने पेशे का स्वाभाविक हिस्सा मानकर स्वीकार करना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन, नीतियों में बदलाव और राजनीतिक घटनाक्रम पर हास्य और व्यंग्य लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं। राघव चड्ढा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर सुनियोजित अभियान चलाया गया। याचिका के अनुसार इस अभियान के तहत कथित रूप से डीपफेक वीडियो, संपादित क्लिप और भ्रामक सामग्री प्रसारित कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि इस तरह की सामग्री से उनकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है और इसे तत्काल विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने की भी मांग की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह मामला व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के उल्लंघन का प्रतीत नहीं होता। अदालत ने कहा कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के संबंध में व्यंग्य, पैरोडी या राजनीतिक टिप्पणी को केवल इस आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता कि उससे संबंधित व्यक्ति असहज महसूस करता है। हालांकि न्यायालय ने यह भी माना कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। यदि कोई सामग्री किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बिना आधार नुकसान पहुंचाती है या प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती है, तो ऐसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। इसी आधार पर अदालत ने सोशल मीडिया पर प्रसारित पांच पोस्ट को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक मानते हुए उन्हें हटाने का निर्देश दिया। बाकी सामग्री के संबंध में अदालत ने तत्काल किसी व्यापक रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि मामले की आगे विस्तृत सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा। यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते डीपफेक कंटेंट, सोशल मीडिया अभियानों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को लेकर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस मामले में आने वाला अंतिम निर्णय राजनीतिक अभिव्यक्ति, ऑनलाइन व्यंग्य और डिजिटल प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय कर सकता है। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों को राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि कोई सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हो तो उसके खिलाफ कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विवाद के अन्य पहलुओं पर भी विस्तार से विचार करेगी।