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    विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, अधिष्ठाता, विशेष शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन तथा हसनदीन खान, असिस्टेंट प्रोफेसर, विशेष शिक्षा विभाग के समन्वय में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान की विभिन्न कक्षाओं का अवलोकन करते हुए दृष्टिबाधित बालक-बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विशेष रूप से ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाई की प्रक्रिया, स्पर्श आधारित अधिगम , श्रव्य शिक्षण विधियों तथा सहायक उपकरणों जैसे ब्रेल किताबें, ऑडियो डिवाइसेस एवं स्क्रीन रीडर के उपयोग को समझा। विद्यार्थियों ने यह भी जाना कि दृष्टिबाधित बच्चों को दैनिक जीवन कौशल जैसे—स्वयं चलना-फिरना, व्यक्तिगत स्वच्छता, तथा स्वतंत्र जीवन जीने के लिए किस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है। साथ ही, उन्होंने कक्षा शिक्षण में प्रयुक्त विशेष शिक्षण विधियों, ध्वनि संकेतों, स्पर्शात्मक शिक्षण सामग्री एवं अनुकूलित मूल्यांकन पद्धतियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर विशेष शिक्षा विभाग के डी.एड एवं बी.एड के विद्यार्थियों ने कक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न प्रशिक्षण सेवाओं का गहन अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान उत्पन्न जिज्ञासाओं का समाधान डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, हसनदीन खान एवं मनीष कुमार मीणा द्वारा किया गया, जिससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं कौशल-आधारित ज्ञान प्राप्त हुआ। भ्रमण के समापन पर डॉ. वंदना सिंह ठाकुर ने संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ दृष्टिबाधित बच्चों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं आत्मनिर्भर विकास के लिए अत्यंत समर्पण के साथ कार्य कर रहा है और यह विद्यार्थियों के लिए एक उत्कृष्ट शिक्षण प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को समावेशी शिक्षा के व्यावहारिक आयामों से परिचित कराते हैं तथा उनके पेशेवर कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं। प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे अनुभव उन्हें अपने दायित्वों के प्रति अधिक संवेदनशील एवं दक्ष बनाते हैं। कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों में सेवा भाव, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करते हैं। प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि विशेष शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए धैर्य, सहानुभूति एवं व्यावहारिक समझ अत्यंत आवश्यक है, और इस प्रकार के भ्रमण विद्यार्थियों में इन गुणों को विकसित करने में सहायक होते हैं। अंत में यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. प्रेम सुराना ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार समर्पण एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेष शिक्षा विभाग का दिशा स्पेशल स्कूल में शैक्षणिक भ्रमण, विद्यार्थियों ने जाने दिव्यांग शिक्षा के व्यवहारिक आयाम

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा दिशा स्पेशल स्कूल में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, अधिष्ठाता, विशेष शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन तथा मनीष कुमार मीणा, असिस्टेंट प्रोफेसर, विशेष शिक्षा विभाग के समन्वय में संपन्न हुआ। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में जाकर दिव्यांग बालक-बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया। विद्यार्थियों ने न केवल बच्चों के साथ सहभागिता की, बल्कि उनके व्यवहार, अधिगम शैली एवं आवश्यकताओं को भी समझने का प्रयास किया। इस अवसर पर विशेष शिक्षा विभाग के डी.एड एवं बी.एड के विद्यार्थियों ने सभी कक्षाओं एवं थेरेपी सेंटर का गहन अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उत्पन्न शंकाओं का समाधान डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, मनीष कुमार मीणा एवं श्री हसन दीन खान द्वारा किया गया, जिससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। भ्रमण के समापन पर डॉ. वंदना सिंह ठाकुर ने दिशा स्पेशल स्कूल की निदेशक डॉ. भारती कुंटेता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्थान बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यंत समर्पण एवं निष्ठा के साथ कार्य कर रहा है। इस सफल आयोजन पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल एवं प्रशिक्षण क्षमता का निरंतर विकास होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों के व्यावसायिक कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं तथा उन्हें अपने कार्यक्षेत्र के प्रति अधिक जागरूक बनाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक भ्रमण से न केवल कौशल विकास होता है, बल्कि दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता एवं समझ भी बढ़ती है।  डॉ. अंशु सुराना, प्रो-चेयरपर्सन (यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलॉजी) ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के क्षेत्र में कार्य करना चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके लिए सहनशीलता, तत्परता एवं व्यावहारिक बुद्धिमत्ता का होना अत्यंत आवश्यक है। अंत में यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. प्रेम सुराना ने भीषण गर्मी के बावजूद विद्यार्थियों की लगन, ईमानदारी एवं समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार की संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में मनाया गया विश्व पुस्तक दिवस

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर की मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विभाग में ‘विश्व पुस्तक दिवस’ के अवसर पर सेमिनार हॉल ए-ब्लॉक में एक गरिमामय एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में पठन-पाठन की संस्कृति को सुदृढ़ करना तथा पुस्तकों के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि- “पुस्तकें मानव सभ्यता की धरोहर हैं, जो ज्ञान, संस्कार और विचारों की निरंतरता को बनाए रखती हैं। डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व अक्षुण्ण है।” प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में कहा कि- “पठन की आदत व्यक्ति के भीतर विश्लेषणात्मक सोच और सृजनात्मकता का विकास करती है, जो किसी भी समाज के बौद्धिक उत्थान के लिए आवश्यक है।”  प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने अपने संदेश में कहा कि- “पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न आयामों को समझने का सशक्त माध्यम हैं, जो हमें संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनाती हैं।” कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि- “विश्वविद्यालयों में पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देना समय की मांग है, जिससे विद्यार्थियों में आत्म-अध्ययन और अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित हो सके।” संयोजक डॉ. प्रेम कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि- “ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को पुस्तकों के प्रति आकर्षित करने और उनके बौद्धिक विकास को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” विभागाध्यक्ष डॉ. सीता राम माली ने अपने वक्तव्य में कहा कि- “विश्व पुस्तक दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि पुस्तकें हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं और इनके माध्यम से हम ज्ञान के नए आयामों को प्राप्त कर सकते हैं।” डॉ. कुलदीप शर्मा, (कृषि विभाग ) ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि- “नियमित पठन से व्यक्ति का व्यक्तित्व समृद्ध होता है और वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम बनता है।” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पुस्तक-पठन के अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन श्री जितेन्द्र कुमार योगी ( सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष) द्वारा किया गया तथा अंत में डॉ . प्रेम कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

    पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करने की सराहनीय पहल की

    भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करने की सराहनीय पहल की गई। विभाग परिसर में पक्षियों की प्यास बुझाने हेतु विभिन्न स्थानों पर परिंडे बांधे गए। यह कार्य विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रताप चंद माली के मार्गदर्शन में संकाय सदस्यों, एम.एससी. विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी से सम्पन्न हुआ। सभी ने मिलकर जल से भरे परिंडे स्थापित किए, जिससे भीषण गर्मी में पक्षियों को राहत मिल सके। इस दौरान विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश भी दिया गया।       इस अवसर पर मुख्य अतिथियों के रूप में डॉ. किशोर रीठे (निदेशक, बम्बई प्राकृतिक इतिहास सोसायटी, मुंबई), डॉ. प्रमोद कांबले (सह प्राध्यापक, पर्यावरण विज्ञान विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान, अजमेर) तथा डॉ. सुजीत मरवड़े (उप निदेशक, बीएनएचएस, अजमेर) उपस्थित रहे। अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तेज गर्मी में पक्षियों के लिए पानी उपलब्ध कराना एक सरल किन्तु अत्यंत आवश्यक प्रयास है। उन्होंने समाज के अन्य लोगों से भी इस प्रकार की पहल करने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक पक्षियों को लाभ मिल सके। यह पहल विभाग की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारी तथा स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    राजस्थान विश्वविद्यालय का 35वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर का 35वां दीक्षांत समारोह आज भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता, परंपरा एवं आधुनिक तकनीकी नवाचारों का समन्वित स्वरूप देखने को मिला। समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय राज्यपाल, राजस्थान एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे द्वारा की गई। इस अवसर पर राजस्थान के माननीय उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा एवं राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह के शुभारम्भ के साथ कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने सभी अतिथियों, गणमान्यजनों, प्राध्यापकों, अभिभावकों व विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत वक्तव्य में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों एवं नवाचारों पर प्रकाश डाला। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि का समापन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन की नई यात्रा का प्रारंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान को केवल डिग्री तक सीमित न रखें, बल्कि उसे ईमानदारी, उद्देश्यपूर्णता और उत्कृष्टता के साथ अपने जीवन में उतारें। उन्होंने देश के विकास के संदर्भ में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले, नवाचारकर्ता और जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता बनें। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वर्ण पदकों में उनकी बढ़ती भागीदारी समाज में सकारात्मक परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संकेत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी देश के नीति-निर्माण और नेतृत्व में और अधिक सुदृढ़ होगी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने, प्रश्न पूछने और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उपराष्ट्रपति महोदय ने विद्यार्थियों को जीवन में नैतिकता, संवेदनशीलता और विनम्रता को अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि वास्तविक सफलता वही है, जिसमें व्यक्तिगत प्रगति के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय हो। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का आह्वान किया तथा विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अंत में उन्होंने सभी स्नातकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय के ध्येय वाक्य “धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा” के माध्यम से भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि कर्तव्य, नैतिकता और सत्य आचरण से है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों के समन्वय की रही है, और विश्वविद्यालय इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित केंद्रीय पुस्तकालय एवं विवेकानंद मेमोरियल जैसे केंद्रों की सराहना करते हुए कहा कि ये विद्यार्थियों को ज्ञान और आत्मविकास के लिए प्रेरित करते हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को जीवन की सफलता का आधार बताया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन का मूल्य केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज को दिए गए योगदान से तय होता है। उन्होंने नैतिकता, सेवा भावना और गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही, समाज में नकारात्मकता को प्रारंभ में ही समाप्त करने और सकारात्मकता को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासित, मूल्यवान और आदर्श जीवन जीने का आह्वान किया। डॉ. प्रेमचन्द बैरवा, उपमुख्यमंत्री ने आज एक प्रेरणादायक संबोधन में युवाओं को शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन है और हर युवा को इसे अपना सर्वोच्च लक्ष्य बनाना चाहिए। अपने उद्बोधन में उन्होंने सफलता के पाँच मूल मंत्र-धैर्य, अनुशासन, अनुकूलन, ईमानदारी और सार्थकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ निरंतर सीखना और स्वयं को ढालना आवश्यक है, जबकि चरित्र और ईमानदारी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। डॉ. बैरवा ने कहा कि युवाओं की शिक्षा तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “यही समय है, सही समय है” मंत्र को दोहराया और युवाओं को “विकसित भारत” के संकल्प में सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का युवा नवाचार, स्टार्टअप और तकनीकी प्रगति के माध्यम से देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने राजस्थान विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में स्थापित यह संस्थान शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का प्रमुख केंद्र रहा है, जिससे सी. राजगोपालाचारी जैसे महान व्यक्तित्व जुड़े रहे हैं। डॉ. अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालयों-महाराजा और महारानी कॉलेज के क्रांतिकारी गौरव को याद करते हुए स्वतंत्रता सेनानी अर्जुन लाल जेटली, रामानंद चौधरी और बिहारीलाल अग्रवाल के बलिदानों को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन शिक्षण संस्थानों ने न केवल शिक्षा दी, बल्कि आजादी के आंदोलन को भी नई दिशा दी। महाभारत के ’यक्ष-प्रश्न’ प्रसंग का उल्लेख करते हुए सांसद ने जोर दिया कि बिना अनुशासन और नैतिक आचरण के केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आचरण को श्रेष्ठ बनाना है। छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा, “आपका व्यवहार ही आपकी असली पहचान होनी चाहिए।“ उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालय की परंपरा को आगे बढ़ाएं ताकि समाज में उनका आचरण संस्थान की प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब बने। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति के स्वभाव और चरित्र में झलकती हो। इस अवसर पर कुल 250 स्वर्ण पदक मेधावी विद्यार्थियों को प्रदान किए गए, जिनमें 197 छात्राएँ एवं 53 छात्र शामिल रहे। इसके अतिरिक्त लगभग 2.71 लाख उपाधियाँ विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय की यह भी एक नई अभिनव पहल रही कि दीक्षान्त समारोह की डिग्रीयों का डाटा आज ही ’डिजी लॉकर’ पर अपलोड कर छात्रों हेतु उपलब्ध करवा दिया गया है।  विशेष उल्लेखनीय है कि इस वर्ष प्रदान की गई उपाधियाँ उन्नत सुरक्षा मानकों एवं आधुनिक तकनीकी विशेषताओं से युक्त हैं। प्रत्येक डिग्री को 4-कलर उच्च गुणवत्ता प्रिंटिंग के साथ तैयार किया गया है, जबकि विशेष 243 GSM/350 माइक्रोन सिंथेटिक, माइक्रोपोरस एवं जलरोधी कागज का उपयोग किया गया है, जिससे यह दीर्घकाल तक सुरक्षित एवं टिकाऊ रहती है। डिग्रियों में QR कोड/ बारकोड आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली सम्मिलित की गई है, जिससे उपाधियों का त्वरित ऑनलाइन सत्यापन संभव है तथा यह विश्वविद्यालय के डिजिटल डेटाबेस से संबद्ध है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक उपाधि पर यूनिक सीरियल नंबर एवं वेरिएबल डेटा फीचर्स अंकित हैं, जो उसकी विशिष्ट पहचान सुनिश्चित करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से डिग्रियों में यूवी इनविजिबल इंक, माइक्रो एवं रिवर्स माइक्रो प्रिंटिंग, वॉइड पैंटोग्राफ (फोटोकॉपी पर 'COPY' का उभरना), हिडन एवं ड्यूल हिडन फीचर्स, इनविजिबल लोगो, एंटी-कॉपी तंत्र एवं कोरिलेशन मार्क जैसे उन्नत उपाय शामिल किए गए हैं, जिससे जालसाजी की संभावना अत्यंत न्यूनतम हो जाती है। साथ ही, डिग्रियों में गोल्ड फॉइल प्रिंटिंग, एम्बॉसिंग, हाई-रिजोल्यूशन बॉर्डर, रेनबो कलर, फाइन लाइन रिलीफ एवं थर्मो-क्रोमिक इंक जैसी उन्नत प्रिंटिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है, जो इन्हें न केवल आकर्षक बनाती हैं, बल्कि सुरक्षा की अतिरिक्त परत भी प्रदान करती हैं। अंत में कुलसचिव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। यह दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि सुरक्षित, पारदर्शी एवं तकनीक-सक्षम डिग्री प्रणाली के माध्यम से विश्वविद्यालय की नवाचार एवं गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण भी बना।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय ने लहराया जीत का परचमः सेमीफाइनल में LPU को हराकर फाइनल में किया प्रवेश

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के खेल मैदान में आयोजित अंतर विश्वविद्यालय हँडबॉल प्रतियोगिता में आज रोमांचक मुकाबलों का दौर जारी रहा। घरेलू मैदान पर खेलते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) की टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर फाइनल में जगह बनाकर खिताच की ओर मजबूत कदम यढ़ा दिए हैं। आयोजन सचिव डॉ. प्रतिभा सिंह रतनू ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित विशिष्ट अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थित्ति दर्ज कराईः राजस्थान विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं महाराजा कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल प्रो. एम.के. पंडित (जूल्लॉजिस्ट) उपस्थित रहे। डॉ. शशिलता पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान यूनिवर्सिटी वुमन एसोसिएशन (RUUWA), डॉ प्रेरणा पुरी विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय संजीव भार्गव प्रांत सचिव, भारत विकास परिषद डॉ. रीता भार्गव पूर्व त्तदस्य, महिला आयोग (राजस्थान) एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर (अंग्रेजी) अतिथियों ने मैदान पर जाकर खिलाडियों से परिचय प्राप्त किया और उनका उत्साहवर्धन करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।   आज के मुख्य आकर्षण में राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) और GNDU के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, जिसमें RU ने 14-7 के अंतर से शानदार जीत दर्ज की। टीम की ओर से सुमित और दिनेश ने सर्वाधिक गोल कर जीत में अहम भूमिका निभाई।   LPU बनाम अन्नामलाई यूनिवर्सिटीः LPU ने अन्नामलाई को 43-29 से हराया। LPU की ओर से सुमित सांगवान (10), मनीष (9) और हर्षिल (6) टॉप स्कोरर रहे।   सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी बनाम KAHE कोयंबटूर सौराष्ट्र ने 36-30 से जीत दर्ज की। मनदीप ने 11 और नितिन ने 7 अंक जुटाए।   UEM जयपुर बनाम पेरियार यूनिवर्सिटी UEM जयपुर ने पेरियार यूनिवर्सिटी को 28-24 से हराया। अजय यादव ने 8 और श्याम ने 5 अंक हासिल किए।   शाम को खेले गए महत्वपूर्ण क्वाटर फाइनल मुकाबले में राजस्थान विश्वविद्यालय ने LPU को 33-24 के अंतर से शिकस्त दी। RU की ओर से मोहित और सुमित ने 6-6 गोल, जबकि रोहित, देवेंद्र और दिनेश ने 5-5 गोल किए। वहीं, UEM जयपुर ने सौराष्ट्र (गुजरात) को 48-38 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। अब फाइनल मुकाबला राजस्थान विश्वविद्यालय बनाम UEM जयपुर के बीच खेला प्रात 07:00 बजे खेला जाएगा। तत्तपश्चात समापन समारोह का आयोजन 08:30 पर किया जाऐगा।   प्रतियोगिता के दौरान AIU पर्यवेक्षक के रूप में डॉ. हरीश बी. राबा और तकनीकी निदेशक के रूप में सुरभित सैन ने व्यवस्थाओं और खेल के तकनीकी पहलुओं की कमान संभाली।

    शिक्षा में नैतिकता, मानवीय मूल्यों और संस्कारों का समावेश आवश्यक : मदन दिलावर

    -शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर तारानगर आए, विद्यालय का किया लोकार्पण, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पद्म भूषण देवेंद्र झाझड़िया सहित जनप्रतिनिधि रहे मौजूद*   *-सुखवासी व पंडरेऊ टिब्बा गांव का किया औचक निरीक्षण, सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीण से लिया फीडबैक, अधिकारियों को दिए निर्देश*   चूरू। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर शनिवार को जिले के तारानगर दौरे पर रहे और इस अवसर पर उन्होंने तारानगर उपखंड मुख्यालय पर एक विद्यालय का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में चूरू विधायक हरलाल सहारण, पैरालिंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मभूषण देवेंद्र झाझड़िया सहित जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।   कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि शिक्षा में नैतिकता, मानवीय मूल्यों और संस्कारों का समावेश आवश्यक है। हम सभी मानवीय मूल्यों को आत्मसात करें और देश को सर्वोच्च शिखर पर लेकर जाएं।  उन्होंने कहा कि भामाशाहों ने शिक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए सराहनीय कार्य किया है। बालिका शिक्षा को समर्पित यह विद्यालय बेटियों का आत्मविश्वास सुदृढ़ करेगा और बेटियां पूरे विश्व में हमारा गौरव बढ़ाएंगी।    उन्होंने कहा कि राजस्थान शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है। सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदल रही है। आज विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है व शिक्षण स्तर को निरंतर सुधार किया जा रहा है। विद्यार्थियों में नैतिक व मानव मूल्यों के विकास के लिए प्राचार्यों को प्रशिक्षण दिया गया है और शिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। बोर्ड परीक्षा परिणाम में सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने टॉप किया है।   उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों के लिए शिक्षण के दौरान मोबाइल का उपयोग बंद किया गया है, जिससे शिक्षा स्तर में उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। विद्यालयों में शैक्षिक स्तर के उन्नयन की दिशा में शिक्षकों की अधिकतम भागीदारी को सुनिश्चित किया जा रहा है। इस दिशा में यदि विद्यार्थियों के 80 में से 40 नंबर नहीं आए तो शिक्षकों से कारण पूछे जा रहे हैं। शिक्षा अधिकारियों को 04 दिन गांवों में रात्रि विश्राम के निर्देश दिए गए हैं ताकि ग्रामीण स्तर पर शिक्षा क्षेत्र को लेकर फीडबैक लिया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीणजन सरकारी स्कूलों में जाएं और कहीं भी कोई गुंजाइश हो तो बताएं ताकि सरकार के स्तर से सुधार के प्रयास किए जा सकें।     उन्होंने कहा कि हमारे स्कूलों में पढ़े हुए पूर्व विद्यार्थियों को बुलाकर प्रतिभाओं से मिलाएं और बच्चों को निरंतर उन्नयन के लिए प्रोत्साहित करें। विद्यालयों में अच्छे नागरिक तैयार होंगे तो देश को अच्छे वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी आदि मिलेंगे।    पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि हर नागरिक स्वस्थ रहे, इसके लिए गांवों में नियमित सफाई पर फोकस किया जा रहा है। हमारी सरकार द्वारा छोटी से छोटी ग्राम पंचायत को 01 लाख रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरपंच, प्रधान गण और अधिकारी मिलकर गांवों में सफाई सुनिश्चित करें। थैले का उपयोग करें और आमजन को भी प्रोत्साहित करें। प्लास्टिक थैलियां और कचरा हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में हरियाली को बढ़ावा देने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान में बीज बैंक के माध्यम से विलुप्त हो रही प्रजातियों की वनस्पति के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। हम सभी हरित राजस्थान के स्वप्न को साकार करने के लिए प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें और अधिकाधिक पेड़ लगाएं।    उन्होंने भामाशाहों द्वारा कस्तूरबा विद्यालय तक बालिकाओं के आवागमन हेतु वाहन की व्यवस्था, विभिन्न विद्यालय भवन निर्माण जैसे जनसेवा कार्यों के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने उपस्थितों को स्वच्छता रखने व पॉलीथिन का उपयोग नहीं करने, गौसेवा, जल संरक्षण और अधिकाधिक वृक्षारोपण करने के संकल्प दिलाया।    चूरू विधायक हरलाल सहारण ने कहा कि समय का महत्व समझें। नशामुक्ति अभियान में भागीदारी करें। फिट रहें और खेलकूद गतिविधियों में भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि भामाशाहों ने जन्मभूमि पर सुविधाएं विकसित कर क्षेत्र का मान बढ़ाया है।    पद्मभूषण देवेंद्र झाझड़िया ने कहा कि प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय स्तर पर प्रेरणा मिल रही है और सकारात्मक पहलुओं पर काम हो रहा है।    शिक्षा के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि किताब मनुष्य का भविष्य बदल सकती है। शिक्षा से ही समाज का विकास संभव है। शिक्षा क्षेत्र में दिया गया योगदान वर्षों तक याद किया जाता है। इन विद्यालयों में संस्कारवान शिक्षा से तैयार भावी पीढ़ी देश का गौरव बढ़ाएगी। उन्होंने युवा पीढ़ी से सोशल मीडिया से दूर रहने व आउटडोर गतिविधियों में भागीदारी लेने की आह्वान किया।    पराक्रम राठौड़ ने कहा कि भामाशाहों के सहयोग से क्षेत्र की शिक्षा स्थितियां सुदृढ़ होंगी और संस्कारवान शिक्षा का विस्तार होगा। उन्होंने संस्कार केंद्रों में वाद्य यंत्र उपलब्ध करवाने की बात कही।    इस अवसर पर राकेश जांगिड़, जयपाल स्वामी, शिवप्रसाद, महावीर पूनिया, ओमप्रकाश कंदोई, ओम सारस्वत, विकास चाचाण, ओमप्रकाश सैनी, मदन प्रजापत, भंवरलाल, निरंजन लाल, सुरेश सैनी, श्यामसुंदर सहित अन्य मौजूद रहे।    *सुखवासी व पंडरेऊ टिब्बा गांव का किया औचक निरीक्षण*   इससे पूर्व शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री दिलावर ने पंडरेऊ ताल ग्राम पंचायत के सुखवासी व पंडरेऊ टिब्बा गांव का औचक निरीक्षण किया और गांव में सफाई व्यवस्था देखी।    सुखवासी में बुजुर्गों को चौपाल पर बैठा देख मंत्री मदन दिलावर ने उनके बीच जाकर ग्राम पंचायत द्वारा नियमित सफाई व्यवस्था के बारे में फीडबैक लिया और सफाई व्यवस्था में अनियमितता पर नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों ने नियमित सफाई नहीं होने की बात कही, इस पर मंत्री दिलावर ने विकास अधिकारी से कहा कि राज्य सरकार की मंशानुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए तथा नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करें।  इस के बाद मंत्री दिलावर ने इसी ग्राम पंचायत के पंडरेऊ टिब्बा गांव का दौरा किया और पूरे गांव का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद गांव में आयोजित अभिनन्दन समारोह में शिरकत की।

    वार्षिक साहित्य उत्सव – सागा 2025 का आयोजन

    वार्षिक साहित्य उत्सव – सागा 2025   कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के अंग्रेज़ी विभाग द्वारा 24 और 25 अप्रैल 2026 को अपना वार्षिक साहित्य उत्सव “सागा” आयोजित किया गया। सागा का यह सातवाँ संस्करण “विश्व लोक साहित्य” विषय पर आधारित था, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक कथाओं में निहित खोई हुई कहानियों और परम्पराओं का उत्सव मनाया गया।   कार्यक्रम का शुभारम्भ 24 अप्रैल को प्रातः 10:30 बजे इंडोर पूलसाइड क्षेत्र में एक नाट्य प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें “ततारा और वामीरो” की दुखांत प्रेम कथा का मंचन किया गया। छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत इस लोककथा ने अपनी प्रभावशाली अभिव्यक्ति और प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।   उद्घाटन समारोह की शुरुआत प्राचार्या डॉ. सीमा अग्रवाल के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने भारतीय लोक साहित्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला और लोक साहित्य के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। इसके पश्चात् कार्यक्रम की रूपरेखा महोत्सव संयोजक एवं यूजी प्रमुख डॉ. प्रीति शर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें उन्होंने इस वर्ष के सागा की थीम का परिचय दिया और पिछले सात वर्षों में इस उत्सव द्वारा छात्रों में विकसित की गई साहित्यिक सृजनात्मकता पर विचार व्यक्त किए। औपचारिक उद्घाटन की घोषणा निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी द्वारा की गई, जिन्होंने सागा के साहित्यिक मंच के रूप में महत्व और उद्देश्य पर प्रकाश डाला।   उद्घाटन सत्र का मुख्य आकर्षण मुख्य अतिथियों — रेखा भटनागर (पूर्व अध्यक्ष, चित्रकला विभाग) और प्रो. मिनी नंदा (पूर्व अध्यक्ष, अंग्रेज़ी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय) के बीच मंचीय संवाद रहा। डॉ. भटनागर ने अपने अकादमिक अनुभव साझा किए, विशेष रूप से लोक कला के क्षेत्र में अपने कार्य तथा अपनी पुस्तकों धूली चित्र और गोबर धन के संदर्भ में।   वक्ताओं ने लोक साहित्य की सांस्कृतिक गहराई, कलात्मक समृद्धि और समकालीन प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए और अपने-अपने क्षेत्रों में धैर्य एवं रचनात्मक अन्वेषण के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. मिनी नंदा ने राजस्थानी लोक कला की “फड़” परम्परा के महत्व और साहित्य तथा दृश्य कथन के समन्वय में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। सत्र का समापन प्रश्नोत्तर के साथ हुआ, जिसने संवाद को और अधिक समृद्ध किया।   उद्घाटन सत्र का समापन अंग्रेज़ी विभाग की सहायक प्राध्यापिका सुश्री भाव्या पुरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।   उद्घाटन सत्र के पश्चात् “द ड्यूल ऑफ ट्रेडिशनल थॉट्स – ए क्लासिक क्लैश ऑफ माइंड्स” शीर्षक से वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। यह प्रतियोगिता प्रातः 11:30 से 12:30 बजे तक पूलसाइड क्षेत्र में आयोजित हुई। विषय था — “लोक कथाओं को फिल्मों या श्रृंखलाओं में व्यावसायिक रूप देना उनकी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।” प्रतिभागियों ने पक्ष और विपक्ष में सशक्त एवं तार्किक तर्क प्रस्तुत किए।   प्रतियोगिता के निर्णायक प्रो. अरुण सौले (अंग्रेज़ी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय) और डॉ. प्रीति चौधरी (अंग्रेज़ी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय) रहे। महावीर कॉलेज के मितांश मित्तल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि कानोड़िया महाविद्यालय की माही असीजा और कनिष्का सोनी ने क्रमशः द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। यूनिवर्सिटी फाइव ईयर लॉ कॉलेज की प्रियाल कुमारी को प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।   इसके पश्चात् “द वर्ल्ड फोकलोर फैशन एक्स्ट्रावेगेंजा” का आयोजन किया गया, जिसमें फैशन और कहानी को अद्भुत रूप से प्रस्तुत किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ. शिव प्रिया (स्वामी केशवानंद प्रौद्योगिकी, प्रबंधन एवं ग्रामोत्थान संस्थान) और डॉ. ऋचा चतुर्वेदी (गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष) थीं। प्रत्येक प्रतिभागी को अपनी प्रस्तुति के लिए 1–2 मिनट का समय दिया गया, जिसमें उन्होंने प्रॉप्स, संगीत और आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति का प्रभावी उपयोग किया।   इस प्रतियोगिता में कानोड़िया महाविद्यालय की जसलीन कौर चड्ढा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। महाराजा कॉलेज के दीपेश तंवर द्वितीय स्थान पर रहे, जबकि सुबोध कॉलेज के पीयूष पुरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।   दिन का तीसरा और अंतिम कार्यक्रम “परवाज़” दोपहर 2:30 बजे प्रारम्भ हुआ। यह जयपुर स्थित साहित्यिक समुदाय “काव्यवर्स” के सहयोग से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम ने उभरते लेखकों, संगीतकारों और कवियों को मंच प्रदान किया। इस सत्र में भावपूर्ण कविताओं से लेकर मार्मिक लघु कथाओं तक विविध प्रस्तुतियाँ हुईं। निर्णायक के रूप में श्री जितेन्द्र सरस्वत (अंग्रेज़ी शिक्षक) और डॉ. नेहा पारीक (सहायक प्राध्यापिका, अंग्रेज़ी विभाग, एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. कॉलेज) उपस्थित रहीं।   प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हर्षिता हाल्डेनिया (राजकीय कन्या महाविद्यालय) ने प्राप्त किया। द्वितीय स्थान दिशा खंडेलवाल (आर.ए. पोद्दार संस्थान) को मिला और तृतीय स्थान अरविन (राजस्थान विश्वविद्यालय) ने प्राप्त किया। विशेष प्रशंसा पुरस्कार मैना नागर (वी.जी.यू.) और जिज्ञासा (महारानी कॉलेज) को प्रदान किया गया।   सागा के प्रथम दिवस का समापन “लेमन सोडा” बैंड की प्रस्तुति के साथ हुआ। भारतीय मैक्सिमलिज़्म की शैली में उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का पहला दिन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

    दीपशिखा ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के केंद्रीय पुस्तकालय में विश्व पुस्तक दिवस का आयोजन

    दीपशिखा ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के केंद्रीय पुस्तकालय में विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर पुस्तकालय जागरूकता सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना तथा पुस्तकों और पुस्तकालय के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम के दौरान मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष सुश्री सोनिया गौर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान का अमूल्य स्रोत हैं और पुस्तकालय विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करने तथा अधिक से अधिक पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष सुश्री मंजू वर्मा एवं फैकल्टी सदस्यों का विशेष समन्वय एवं सहयोग रहा, जिसके कारण यह कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. रीता बिष्ट ने अपने संदेश में कहा कि पुस्तकें हमारे जीवन की सच्ची मार्गदर्शक होती हैं और विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने पुस्तकालय द्वारा आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को पुस्तकालय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। संस्थान के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराणा ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पुस्तकालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और विद्यार्थियों को ज्ञान अर्जित करने के लिए पुस्तकों को अपना सबसे अच्छा मित्र बनाना चाहिए। वाइस चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराणा ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर अध्ययन और पुस्तकों से जुड़ाव ही सफलता की कुंजी है तथा पुस्तकालय के माध्यम से विद्यार्थी अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों को विश्व पुस्तक दिवस की शुभकामनाएँ दी गईं तथा भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका की सामाजिक पहल: कुम्हारियावास के सरकारी विद्यालय में वाटरकुलर स्थापित

      यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व की पहल के अंतर्गत रा. उ.मा.वि. कुम्हारियावास में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए वाटरकुलर फीडिंग हैंड्स संस्था के सहयोग से सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति भी अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ एवं शीतल पेयजल की उपलब्धता विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और एकाग्रता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका सदैव समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए इस प्रकार की सामाजिक पहलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने फीडिंग हैंड्स संस्था के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। अपने संदेश में उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रकार की पहलें न केवल विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान करती हैं, बल्कि उनमें सामाजिक संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को भी विकसित करती हैं। भविष्य में भी विश्वविद्यालय शिक्षा एवं सामाजिक विकास के क्षेत्र में ऐसे कार्य निरंतर करता रहेगा।

    विश्व पृथ्वी दिवस पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में जागरूकता वीडियो कार्यक्रम आयोजित

    विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंस के सहयोग से जागरूकता वीडियो कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के मुख्य सेमिनार हॉल में आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों एवं स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ‘Invest in Our Planet' विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करने संबंधी जागरूकता वीडियो प्रस्तुत किए गए। चयनित वीडियो का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित जनों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक किया।   विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संदेश में कहा कि यह आयोजन संस्थान की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है तथा विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रचनात्मक प्रयास सराहनीय हैं।  प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कार्यक्रम को विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता एवं उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने आयोजन की सफलता पर आईक्यूएसी एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित करते हैं।  वहीं, आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. रजनी माथुर ने प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित हुआ। डॉ. प्रेम कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पृथ्वी संरक्षण केवल संस्थाओं या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है, क्योंकि पृथ्वी की सुरक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है। कार्यक्रम में डॉ. चारु दुबे एवं मनीषा यादव सहित अन्य संकाय सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही। इसके अतिरिक्त सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।