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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में शिक्षक दिवस समारोह आयोजित

    जयपुर. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के सम्मान में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय के विकास में शिक्षकों एवं सभी फैकल्टी सदस्यों के योगदान को सम्मानित करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था। कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. रजनी माथुर द्वारा तैयार की गई तथा डॉ. प्रेम कुमार ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, डॉ. रजनी माथुर, डॉ. मोनिका शर्मा, डॉ. सीता राम, डॉ. कुलदीप शर्मा, डॉ. रोहित सारस्वत एवं अखिलेश ने अपने विचार व्यक्त किए तथा शिक्षक दिवस के महत्व और शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के सभी फैकल्टी सदस्यों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस पहल का मुख्य संदेश यह रहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति एवं विकास में प्रत्येक फैकल्टी सदस्य का महत्वपूर्ण योगदान होता है और इसलिए प्रत्येक व्यक्ति प्रशंसा एवं सम्मान का पात्र है। इस अवसर पर प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन एवं प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने अपने संदेश के माध्यम से सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं और उनके समर्पण, योगदान एवं सेवाओं की सराहना की। कार्यक्रम का समापन सभी शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त करते हुए किया गया। यह समारोह विश्वविद्यालय परिवार के लिए शिक्षकों के योगदान को पहचानने, प्रोत्साहित करने और सम्मानित करने का प्रेरणादायी अवसर बना।  

    लोकतंत्र का उत्सव: कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने सपरिवार किया मतदान

    -पोलिंग बूथों का लिया जायजा सुमेरपुर। लोकतंत्र के महापर्व के तहत सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और उत्साहजनक माहौल में संपन्न हो रही है। इस अवसर पर पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री तथा स्थानीय विधायक जोराराम कुमावत ने अपने नागरिक कर्तव्य का पालन करते हुए शुक्रवार को सपरिवार मतदान किया। परिजनों के संग बूथ पर पहुंचे मंत्री कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत सुमेरपुर के वार्ड संख्या-22, भैरू चौक स्थित सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता कार्यालय परिसर पहुंचे। यहाँ स्थापित बूथ संख्या-23 पर उन्होंने पूरी सादगी और नियमों का पालन करते हुए वोट डाला। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी श्रीमती धर्मीदेवी, पुत्र दिनेश कुमावत व दीपक कुमावत तथा पुत्रवधु पुष्पा कुमावत एवं गीता कुमावत भी उनके साथ उपस्थित रहीं। पूरे परिवार ने एक साथ मतदान कर आमजन को लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का संदेश दिया। मतदान के बाद क्षेत्र का दौरा और निरीक्षण अपना वोट कास्ट करने के तुरंत बाद कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक कुमावत एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण व शहरी पोलिंग बूथों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, मतदाताओं के लिए छाया-पानी की सुविधाएं और मतदान की गति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुचारू मतदान संपन्न कराने के आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने केंद्र पर आए बुजुर्गों और युवा मतदाताओं से बातचीत कर उनके उत्साह की सराहना की।  

    ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती के बीच जयपुर में होगा ‘हरित संगम 2026’

    14 से 18 नवम्बर तक पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का महाअभियान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के अंतर्गत जयपुर में 14 से 18 नवम्बर 2026 तक ‘हरित संगम 2026’ का आयोजन किया जाएगा। हरित संगम 2026 के पोस्टर का विमोचन राजस्थान के राज्यपाल. हरिभाऊ बागडे द्वारा किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी आधारित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए ‘हरित संगम’ जैसे आयोजनों की आवश्यकता है, जो समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करें। माननीय राज्यपाल जी ने ‘हरित संगम 2026’ के आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएँ भी प्रेषित कीं। हरित संगम 2026 के सचिव अशोक मित्तल ने बताया कि मुख्य आयोजन से पूर्व जयपुर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के उद्देश्य से व्यापक जनभागीदारी अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से प्रारंभ होकर दीपावली, 8 नवम्बर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान में विशेष रूप से मातृशक्ति की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अंतर्गत घर-घर गीले एवं सूखे कचरे का पृथक्करण, घर के बाहर स्वच्छता एवं रंगोली निर्माण, प्रत्येक घर में न्यूनतम तीन पौधों का रोपण, परिवार में ‘मंगल संवाद’ तथा भूले-बिसरे लोकगीतों की सामूहिक प्रतियोगिता जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को विभिन्न स्तरों पर पुरस्कृत भी किया जाएगा। ‘हरित संगम 2026’ का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखते हुए स्वच्छता, हरियाली, सौंदर्य, संस्कृति और जनभागीदारी को जनजीवन का हिस्सा बनाना है।

    वीजीयू में दो दिवसीय एमटीटीएस गणित प्रशिक्षण एवं प्रतिभा खोज कार्यशाला का सफल समापन

    विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने गणितीय अवधारणाओं, समस्या समाधान एवं विश्लेषणात्मक कौशल को किया सुदृढ़ विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू), जयपुर के विज्ञान विभाग द्वारा मैथेमेटिक्स ट्रेनिंग एंड टैलेंट सर्च (एमटीटीएस) ओवरचर के अंतर्गत एमटीटीएस ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे दो दिवसीय गणित प्रशिक्षण एवं प्रतिभा खोज कार्यशाला आयोजन का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 8 एवं 9 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में गणितीय अवधारणाओं की मजबूत समझ विकसित करने के साथ-साथ समस्या समाधान, तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता और अकादमिक कौशल को बढ़ावा देना था। कार्यशाला का आयोजन एवं समन्वय प्रो. (डॉ.) पिंकी लाटा तथा डॉ. मुरली मनोहर गौड़ द्वारा किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विभिन्न अकादमिक सत्रों में विशेषज्ञों से गणितीय विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यशाला में आठ सत्र आयोजित किए गए। प्रत्येक अकादमिक सत्र के बाद विद्यार्थियों के लिए समस्या समाधान एवं संवादात्मक चर्चा सत्र रखे गए, जिनमें विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा और गणितीय समस्याओं को हल करने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की। कार्यशाला में आयोजित चर्चा सत्रों में विद्यार्थियों को केवल विषय की सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए उसे समस्याओं के समाधान में लागू करने का अवसर मिला। विशेषज्ञों के साथ संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने तार्किक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया।  कार्यशाला में शिव नादर विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के गणित विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए. सत्यनारायण रेड्डी ने विषय पर विस्तार से चर्चा की और उसके उपरांत कहा कि ऐसे प्रशिक्षण एवं प्रतिभा खोज कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की पढ़ाई से आगे बढ़कर विशेषज्ञों से सीखने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं। वही जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय, जयपुर की गणित विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मानुषी गुप्ता ने विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन, अभ्यास और जिज्ञासा बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बदलते शैक्षणिक एवं तकनीकी परिवेश में विद्यार्थियों के लिए विश्लेषणात्मक सोच और समस्या समाधान क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है। समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) एन. डी. माथुर ने कहा कि गणित केवल एक विषय नहीं, बल्कि तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। विद्यार्थियों को गणितीय समस्याओं को केवल हल करने के बजाय उनके पीछे की अवधारणाओं और तर्क को समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए विज्ञान विभाग, विशेषज्ञों और आयोजन टीम को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी विद्यार्थियों के ज्ञान एवं प्रतिभा के विकास के लिए ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करता रहेगा। साथ ही प्रो-प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) डी.वी.एस. भागवानुलु ने कहा कि विद्यार्थियों का समग्र विकास केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। गणित जैसे विषय विद्यार्थियों में तार्किक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता, धैर्य और समस्या समाधान की प्रवृत्ति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को विषय की गहराई से समझ विकसित करने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे सही दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यशाला के अंतिम चरण में आयोजित समापन समारोह में एफबीएएस विभाग की डीन प्रो (डॉ.) मृदुला पुरोहित ने समापन संबोधन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को गणितीय अध्ययन के प्रति निरंतर जिज्ञासा बनाए रखने तथा प्राप्त ज्ञान को अपने अकादमिक विकास में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञों ने कार्यशाला के अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्रों और समस्या समाधान गतिविधियों ने गणितीय विषयों को समझने तथा प्रश्नों के तार्किक समाधान खोजने में उन्हें सहायता प्रदान की। कार्यशाला के अंत में विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. गोविंद सहाय शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन टीम तथा सभी प्रतिभागियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया और कार्यशाला को सफल बनाने में उनके योगदान की सराहना की। दो दिवसीय कार्यशाला ने विद्यार्थियों को गणितीय ज्ञान के साथ-साथ तार्किक चिंतन, समस्या समाधान और संवादात्मक सीखने का उपयोगी अनुभव प्रदान किया। वीजीयू के विज्ञान विभाग की यह पहल विद्यार्थियों की अकादमिक क्षमताओं को मजबूत करने तथा उनमें गणितीय प्रतिभा को पहचानने और विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।   

    भगवान श्री देवनारायण की पदयात्रा रवाना, उमड़े भक्त

      • डीजे की ताल पर झूमें श्रद्धालु • भगवान देवनारायण के दर्शन के लिए लगी कतारे • सजाई गई भगवान देवनारायण की मनमोहक झांकी जयपुर। श्री देवनारायण भगवान पदयात्रा मित्र मंडल समिति की ओर से शुक्रवार से 19वीं विशाल पदयात्रा श्री देवनारायण मंदिर (देवधाम) भोपा की ढ़ाणी, बेगस से रवाना हुई। इसमें आस-पास के लोग दर्शनों के लिए उमड़े और डीजे की ताल पर नाचते गाते रहे। आला सुबह से ही भगवान देवनारायण मन्दिर में भगवान श्रीदेवनारायण की नीम के पत्तों और फूल-मालाओं से मनमोहक झांकी सजाई गई। साथ ही मंदिर परिसर में विराजे शंकर भगवान के परिवार, भेरुजी महाराज और भोमिया जी महाराज की भी मनमोहक झांकी फूल मालाओं से सजाई गई, जिसको देखने के लिए और भगवान श्रीदेवनारायण के दर्शन के लिए मन्दिर में श्रद्धालुओं की कतारे लगी। इस दौरान आसपास के गांव के लोग भी भगवान श्रीदेवनारायण के दर्शन करने के लिए आए और महिलाओं ने डीजे पर भगवान देवनारायण के गानों पर डांस की मनमोहक प्रस्तुतियां दी। श्री देवनारायण महा कथा के गायक भोपाजी बिरदी चन्द कुमावत ने यात्रा की शुरूआत में देवनारायण भगवान, शंकर भगवान के परिवार और भेरुजी-भोमिया जी महाराज की पूजा-अर्चना और आरती की। इसके बाद भक्तों को प्रसादी का वितरण किया। भोपाजी बिरदी चन्द कुमावत ने बताया कि यह यात्रा 17 सितंबर को देवनारायण भगवान की जन्मस्थली पर स्थित अंतरराष्ट्रीय मंदिर मालासेरी डूंगरी, भीलवाड़ा पहुंचेगी और वहां पर भगवान देवनारायण के झंड़ा चढ़ाने के बाद पूजा अर्चाना की जाएगी। मालासेरी मंदिर पहुँचने पर मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल यात्रा का स्वागत करेंगे और पूजा अर्चना करवाएंगे। इसके बाद यात्रा के पदाधिकारी आसींद सवाई भोज मंदिर, गोटा स्थित श्री देवनारायण जी का मंदिर और देवमाली स्थित श्री देवनारायण जी के मंदिर के दर्शन करके वहां झंडा चढ़ाएंगे. 7 दिवसीय यात्रा मार्ग एवं रात्रि विश्राम की संपूर्ण रूपरेखा ​11 सितम्बर (शुक्रवार): दोपहर विश्राम नासनोदा तथा रात्रि विश्राम डी.लाइट फ्यूल (गिंदानी इण्डियन ऑयल, प्रमोद कुमार)। ​12 सितम्बर (शनिवार): दोपहर विश्राम नौरिया का बालाजी एवं रात्रि विश्राम श्री देव मार्केट-किशनगढ़ बाईपास। ​13 सितम्बर (रविवार): दोपहर विश्राम बालाजी मंदिर और रात्रि विश्राम श्री चन्दनाथ आदर्श विद्या मंदिर-नसीराबाद। ​14 सितम्बर (सोमवार): दोपहर विश्राम फौजी का ढाबा (बांदनवाड़ा) व रात्रि विश्राम बाफना जैन तीर्थ (27 मील, विजय नगर)। ​15 सितम्बर (मंगलवार): दोपहर विश्राम रूपहाली चौराहा तथा रात्रि विश्राम देवनारायण मंदिर, उखलिया। ​16 सितम्बर (बुधवार): दोपहर विश्राम तांबेशर बावड़ी बालाजी और रात्रि विश्राम मालासेरी डूंगरी, श्री देवनारायण भगवान की जन्मस्थली मंदिर. ​17 सितम्बर (गुरुवार): देव दर्शन मालासेरी डूंगरी, सवाईभोज, गोटा दड़ावट, देवमाली धाम एवं यात्रा का सफल समापन।  

    विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर मनोविज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

      जयपुर: विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा “Changing the Narrative on Suicide” (आत्महत्या के प्रति सोच में परिवर्तन) विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा एक ऐसे सहयोगी एवं संवेदनशील समाज के निर्माण का संदेश देना था, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपनी भावनाओं को साझा कर सके और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सके। कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य एवं विद्यार्थियों के कल्याण से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रेरणा प्रदान की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. तेजेंद्र कौर उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने प्रेरणादायी विचारों एवं अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. चंद्राणी सेन नें सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का आयोजन डॉ ज्योति नें किया । कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता एवं लघु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमे पोस्टर में प्रथम सुरभि , द्वितीय जानिशा व तृतीया वंशिका को पुरस्कार दिया गया। भाषण प्रतियोगिता में प्रथम आइशा , द्वितीय आशी व तृतीया आदित्य को पुरस्कार दिया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सहयोग एवं आत्महत्या रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रचनात्मक माध्यमों से प्रस्तुत किए।कार्यक्रम में राजस्थान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था कि “हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है, हर कहानी मायने रखती है और सहायता के लिए हमेशा रास्ते उपलब्ध हैं।”  

    मनोविज्ञान विभाग द्वारा साइकोलॉजी डिस्कोर्स का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा दिनांक 10 सितम्बर, 2026 को साइकोलॉजी डिस्कोर्स का आयोजन किया गया, जिसमें 100 से अधिक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ ‘‘करियर्स इन सायकॉलोजी’’ विषय पर विभागाध्यक्ष डॉ. शुचि चौधरी एवं प्राध्यापिका शुभी शर्मा के व्याख्यान से हुआ। उन्होंने छात्राओं को मनोविज्ञान में उपलब्ध विभिन्न करियर विकल्पों, उच्च शिक्षा एवं प्रवेश परीक्षाओं, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों एवं अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी दी। साथ ही सरकारी एवं गैर-सरकारी क्षेत्रों में करियर बनाने की प्रक्रिया से भी अवगत करवाया। इसके पश्चात विभाग की द्वितीय, तृतीय एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं की छात्राओं ने नवागंतुक छात्राओं का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। छात्राओं के बीच आपसी परिचय एवं संवाद को बढ़ावा देने के लिए नृत्य, संगीत, क्विज एवं विभिन्न मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया। लघु-नाटिका के माध्यम से नवागंतुक छात्राओं को विभाग की आचार नीतियों एवं अपेक्षाओं से भी परिचित करवाया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्नातकोत्तर की छात्राओं द्वारा ओपन माइक एवं नृत्य प्रस्तुति रही, जिसके माध्यम से उन्होंने विभाग की प्राध्यापिकाओं के प्रति अपनी कृतज्ञता एवं स्नेह व्यक्त किया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें इसी प्रकार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित यह डिस्कोर्स छात्राओं की वैचारिक समझ को नई दिशा देने में मदद करेगा। इस तरह की गतिविधियाँ छात्राओं में विश्लेषणात्मक एवं तार्किक क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्राध्यापिका सुश्री जेनिस हाशमी एवं सुश्री सोना मिश्रा की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ। धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. शुचि चौधरी द्वारा किया गया।  

    " काव्य वही श्रेष्ठ है जो राष्ट्र की उन्नति में सहायक हो " - प्रो नंद किशोर पाण्डेय

    'शब्द रसायन' संस्थान का पहला आयोजन कानोड़िया कॉलेज में सम्पन्न जयपुर। वैचारिक विमर्श के लिए नवगठित 'शब्द रसायन' संस्थान का पहला आयोजन बुधवार को जयपुर के कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। दीप प्रज्वलन और मां शारदे की वंदना के बाद कॉलेज प्राचार्या डॉ सीमा अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। संस्थान के निदेशक डॉ रेवंत दान ने शब्द रसायन की संकल्पना प्रस्तुत करते हुए कहा कि भविष्य में इस संस्थान के माध्यम से साहित्य, शिक्षा, राजनीति, सिनेमा, पत्रकारिता, उद्योग, विज्ञान, खेल और व्यापार जगत से जुड़े सामयिक विषयों पर वैचारिक विमर्श के कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे । संस्थान के सचिव मुरारी गुप्ता ने बताया कि आज के इस आयोजन के अंतर्गत स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता में छात्राओं ने सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण, स्वदेशी और संयुक्त परिवार आदि विषयों पर अपनी स्वरचित कविताएं प्रस्तुत की। प्रतियोगिता में जाह्नवी मंडल ने प्रथम, तेजस्वी सहारिया ने द्वितीय और सीपिका लवानिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो नंदकिशोर पांडेय का विशेष व्याख्यान हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि जो संवेदनशील है उनके भीतर कविता का प्रस्फुटन होता है। उन्होंने कवि वाल्मीकि, पंत और कालिदास का उद्धरण देते हुए कहा कि जो नैसर्गिक कवि है वह अपनी गहरी संवेदना से प्रेरित होकर काव्य रचना करते हैं। उन्होंने कहा कि काव्य और कला वही श्रेष्ठ है जो समाज और राष्ट्र की उन्नति में सहायक हो और सामाजिक समरसता का संचार करें । प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि जीवन को सफल बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसे सार्थक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति ने जहां सृष्टि को मनुष्य के उपभोग के लिए बताया वहीं भारत ने करुणा दृष्टि के साथ सिखाया कि प्रकृति समस्त प्राणियों के लिए हैं। निर्णायक मंडल की डॉ रेखा गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को कॉलेज की पढ़ाई के साथ अपने व्यक्तिव के सर्वांगीण विकास के लिए सह शैक्षणिक गतिविधियों में उत्साह से भाग लेना चाहिए। कार्यक्रम की संयोजक डॉ धर्मा यादव रहीं और धन्यवाद ज्ञापन डॉ शीताभ शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन कशिश गौड़ द्वारा किया गया।  

    आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में 10 सितम्बर, 2026 को आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना और आत्महत्या रोकथाम के महत्व पर जोर देना था। मनोविज्ञान विभाग की छात्राओं द्वारा एक विचारोत्तेजक नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक ने आत्महत्या के विचारों के पीछे के कारकों, जैसे कि शैक्षणिक दबाव, संबंधों में तनाव, सामाजिक अपेक्षाएँ एवं आर्थिक कठिनाइयों को उजागर किया। डॉ. रंजना अग्रवाल, उप-प्राचार्य, अकादमिक ने मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों, दोस्तों और परिवार से मदद लेने की आवश्यकता पर बल देते हुए छात्राओं को आत्महत्या रोकथाम हेतु जागरूक किया। उन्होंने महाविद्यालय की ओर से यह आश्वासन भी दिया कि छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए महाविद्यालय में परामर्श सुविधा सदैव उपलब्ध है, और किसी भी छात्रा को संकोच किए बिना इसका लाभ उठाना चाहिए। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत नाटक का संदेश था कि जीवन को दूसरा मौका देना चाहिए और आत्महत्या के बजाय जीवन के नए अवसरों का सामना करना चाहिए। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने मनोविज्ञान विभाग की सराहना करते हुए बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्राओं में संवेदनशीलता और सहानुभूति का भाव विकसित करते हैं, जिससे वे स्वयं भी सजग रहते हैं और अपने आसपास के लोगों की भी सहायता कर पाते हैं। विभाग से प्राध्यापिका सोना मिश्रा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजनों की निरंतरता पर जोर दिया। कार्यक्रम में लगभग 100 छात्राएँ मौजूद थी। विभागाध्यक्ष डॉ. शुचि चौधरी, प्राध्यापिका जेनिस हाशमी एवं शुभी शर्मा की सक्रिय भागीदारी निभाते हुए कार्यक्रम का सफल संचालन किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज की, 2030 तक जेल में रहने का रास्ता साफ

    Yugcharan News / 10-09-2026 नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सलेम ने अदालत के सामने दलील दी थी कि पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण के समय भारत की ओर से दिए गए आश्वासन के तहत तय 25 वर्ष की अधिकतम कैद की अवधि की गणना में जेल में अर्जित रिमिशन और विचाराधीन कैदी के रूप में बिताई गई अवधि को भी शामिल किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल सलेम को राहत नहीं मिली है और उसकी रिहाई का रास्ता 2030 तक टल गया है। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया। अदालत ने इससे पहले मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संकेत दिया था कि याचिका खारिज की जा सकती है। हालांकि, उस समय अदालत ने अंतिम आदेश सुरक्षित रखते हुए पक्षकारों को लिखित दलीलें और संबंधित न्यायिक फैसले दाखिल करने का अवसर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने सलेम की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसके जरिए वह अपनी सजा की गणना में विभिन्न प्रकार की रियायतों को जोड़कर तत्काल रिहाई का दावा कर रहा था। अबू सलेम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने अदालत के समक्ष मुख्य रूप से जेल में बिताई गई अवधि और अर्जित रिमिशन से जुड़े कानूनी पहलुओं पर जोर दिया था। उनका तर्क था कि जिस अवधि में सलेम विचाराधीन कैदी के रूप में हिरासत में रहा, उसे उसकी सजा की अवधि में समायोजित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, अच्छे आचरण के कारण उसे जो अर्जित रिमिशन मिला, उसे भी वास्तविक कारावास की अवधि की गणना में शामिल किया जाना चाहिए। सलेम की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया था कि वह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के तहत मिलने वाली सामान्य या वैधानिक रिमिशन की मांग नहीं कर रहा है। उसका दावा विशेष रूप से उस रिमिशन को लेकर था, जो कैदी को अच्छे व्यवहार, निर्धारित कार्यों के पालन और जेल नियमों के तहत उपलब्ध कराया जाता है। सलेम के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले स्वामी श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर बनाम कर्नाटक राज्य का हवाला देते हुए कहा था कि अच्छे आचरण के आधार पर मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक रूप से मिलने वाली रिमिशन को वास्तविक कारावास की अवधि का हिस्सा माना जा सकता है। उनके अनुसार, सलेम ने जेल में अच्छे आचरण के आधार पर करीब तीन वर्ष और दो महीने की रिमिशन अर्जित की थी। उनका यह भी दावा था कि अन्य मामलों में दोषियों की रिहाई के समय ऐसी रिमिशन को ध्यान में रखा गया है। सलेम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस निष्कर्ष को भी चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने कहा था कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान भारत द्वारा दिए गए आश्वासन के आधार पर तय 25 वर्ष की अवधि को सामान्य जेल रिमिशन के जरिए और कम नहीं किया जा सकता। सलेम की ओर से दलील थी कि 25 वर्ष की अवधि को वास्तविक कारावास की गणना के दौरान इस तरह देखा जाना चाहिए कि विचाराधीन कैदी के रूप में बिताया समय और अर्जित रिमिशन दोनों उसमें समायोजित हों। इस पूरे विवाद की जड़ वर्ष 2002 में हुए अबू सलेम के प्रत्यर्पण से जुड़ी है। भारत ने 17 दिसंबर 2002 को पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि सलेम को भारत में मौत की सजा नहीं दी जाएगी और प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत उसे 25 वर्ष से अधिक समय तक जेल में नहीं रखा जाएगा। बाद में यही आश्वासन सलेम की कानूनी लड़ाई का प्रमुख आधार बन गया। जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रत्यर्पण व्यवस्था पर विचार किया था। अदालत ने कहा था कि पुर्तगाल को दिए गए भारत के आश्वासन और संबंधित प्रत्यर्पण व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सलेम को 25 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद रिहा करना होगा। इसके बाद सलेम ने दावा किया कि उसकी हिरासत की अलग-अलग अवधियों को जोड़ने और जेल में अर्जित रिमिशन को समायोजित करने पर 25 वर्ष की अवधि लगभग पूरी हो चुकी है। सलेम के अनुसार, वह नवंबर 2005 से सितंबर 2017 तक करीब 11 वर्ष, 9 महीने और 26 दिन विचाराधीन कैदी के रूप में हिरासत में रहा था। इसके बाद दोषी ठहराए जाने के बाद उसने लगभग 9 वर्ष, 10 महीने और 4 दिन जेल में बिताए। उसने अच्छे आचरण के आधार पर करीब तीन वर्ष और 16 दिन की रिमिशन का भी दावा किया था। इसके अलावा पुर्तगाल में विचाराधीन कैदी के रूप में बिताई गई अवधि के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई करीब एक महीने की अतिरिक्त राहत को भी उसने अपनी गणना में शामिल किया। इन सभी अवधियों को जोड़कर सलेम का दावा था कि उसने लगभग 25 वर्ष की प्रभावी कारावास अवधि पूरी कर ली है। इसी आधार पर उसने अपनी तत्काल रिहाई की मांग की थी। उसने यह भी कहा था कि लगातार हिरासत में रखा जाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित सवाल पैदा करता है। उसने अदालत से अधिकारियों को उसकी रिहाई की सटीक तारीख निर्धारित करने का निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने अप्रैल 2025 में उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि भारत द्वारा पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन के तहत 25 वर्ष की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है और इसकी समाप्ति नवंबर 2030 में होगी। अदालत ने सलेम की उस मांग को समय से पहले और कानूनी रूप से गलत बताया था, जिसमें उसने अर्जित रिमिशन को 25 वर्ष की अधिकतम सीमा से घटाने की कोशिश की थी। हाई कोर्ट के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल था कि क्या जेल में अच्छे आचरण के आधार पर मिलने वाली सामान्य रिमिशन का इस्तेमाल उस 25 वर्ष की अवधि को और कम करने के लिए किया जा सकता है, जिसे प्रत्यर्पण की अंतरराष्ट्रीय शर्तों के तहत लागू किया गया था। अदालत ने इसका जवाब नकारात्मक दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि 25 वर्ष की सीमा स्वयं एक विशेष व्यवस्था है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में उम्रकैद का अर्थ केवल निश्चित संख्या में वर्षों की सजा नहीं होता। सलेम के मामले में भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण एक विशेष अधिकतम अवधि सामने आई थी। ऐसे में यदि जेल नियमों के तहत मिलने वाली सामान्य रिमिशन को भी इसमें घटा दिया जाए, तो इससे उस व्यवस्था का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। अदालत ने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले में ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं था कि महाराष्ट्र जेल नियमों के तहत मिलने वाली अर्जित रिमिशन को 25 वर्ष की प्रत्यर्पण-आधारित अवधि को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र प्रिजन्स (रिमिशन सिस्टम) रूल्स, 1962 के तहत मिलने वाली रियायतों और सीआरपीसी की धारा 432 के तहत मिलने वाली रिमिशन के बीच भी अंतर को ध्यान में रखा था। हाई कोर्ट ने सलेम की गिरफ्तारी की तारीख 11 नवंबर 2005 को आधार मानते हुए कहा था कि 25 वर्ष की अवधि की साधारण गणना करने पर यह नवंबर 2030 में पूरी होगी। इस निष्कर्ष के बाद सलेम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सलेम की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि उसकी जेल में वास्तविक मौजूदगी और विचाराधीन कैदी के रूप में बिताया समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बचाव पक्ष ने यह समझाने की कोशिश की कि वास्तविक कारावास और रिमिशन के कानूनी प्रभावों को अलग-अलग तरीके से देखने के बजाय सजा की कुल अवधि निर्धारित करते समय उन्हें समग्र रूप से देखा जाना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि इस चरण पर अदालत ने सलेम के पक्ष में ऐसा कोई आदेश देने से इनकार कर दिया है, जिससे 25 वर्ष की अवधि पहले पूरी मानी जाए। इसका सीधा अर्थ यह है कि सलेम की समयपूर्व रिहाई की मौजूदा मांग सफल नहीं हुई। अबू सलेम का नाम भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में लंबे समय से जुड़ा रहा है। 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों ने देश को झकझोर कर रख दिया था और इस मामले की जांच तथा सुनवाई कई वर्षों तक चली। सलेम को इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा मिली। पुर्तगाल से उसका प्रत्यर्पण भी लंबे समय तक कानूनी और कूटनीतिक चर्चा का विषय रहा। मौजूदा विवाद केवल सलेम की व्यक्तिगत रिहाई से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह इस व्यापक कानूनी प्रश्न से भी जुड़ा है कि किसी आरोपी या दोषी के प्रत्यर्पण के दौरान भारत द्वारा दूसरे देश को दिए गए आश्वासन का घरेलू आपराधिक न्याय व्यवस्था में किस तरह प्रभाव पड़ता है। साथ ही, यह मामला जेल रिमिशन, विचाराधीन हिरासत और उम्रकैद की सजा के बीच संबंध को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी बहस सामने लाता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सलेम की ओर से उठाया गया 25 वर्ष की गणना और अर्जित रिमिशन का मुद्दा फिलहाल उसके पक्ष में नहीं गया है। अदालत के निर्णय ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से बरकरार रखा है कि सामान्य जेल रिमिशन को भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण प्रतिबद्धता के तहत तय 25 वर्ष की अवधि को कम करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। फिलहाल सलेम की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज हो चुकी है और नवंबर 2030 की अवधि इस मामले में महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलू और भविष्य में उठने वाली कोई नई चुनौती अलग न्यायिक प्रक्रिया का विषय हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस बात को भी रेखांकित करता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण आश्वासन और घरेलू जेल नियमों के बीच टकराव की स्थिति में अदालतें संबंधित प्रतिबद्धताओं और उनके मूल उद्देश्य को गंभीरता से देखती हैं।

    स्टालिन का विजय पर पलटवार, बोले- आपातकाल में जेल में पुलिस ने तोड़े थे मेरे जबड़े; विधानसभा बयान पर मचा सियासी घमासान

    Yugcharan News / 10-09-2026 चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में आपातकाल के दौर की घटनाओं को लेकर एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विधानसभा में दिए गए बयान और कथित इशारे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। स्टालिन ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो के माध्यम से अपने पुराने अनुभव को सामने रखते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान जेल में उनके साथ पुलिस ने बर्बर व्यवहार किया था और उनके जबड़े की हड्डियां तक तोड़ दी गई थीं। स्टालिन ने कहा कि विधानसभा में उनके बारे में कथित तौर पर किया गया शारीरिक इशारा केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं था, बल्कि वह उनके जीवन में घट चुकी एक गंभीर घटना की याद दिलाता है। उन्होंने अपने वीडियो में उस दौर की परिस्थितियों का जिक्र किया और बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों को जेल में एक ऐसे वार्ड में रखा गया था, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर कुष्ठ रोगियों के लिए किया जाता था। यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में आगामी राजनीतिक मुकाबलों को लेकर पहले से ही तीखी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री विजय और स्टालिन के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार सार्वजनिक मंचों पर सामने आते रहे हैं। विधानसभा में दिए गए विजय के कथित बयान के बाद स्टालिन ने अपने सोशल मीडिया वीडियो के जरिये सीधे जवाब देकर इस विवाद को और व्यापक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। स्टालिन ने अपने बयान में आपातकाल के दौरान जेल में बिताए गए दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी और उनके जबड़ों पर गंभीर चोटें आई थीं। उनका कहना है कि जेल में पुलिस की कार्रवाई के दौरान उनके जबड़े टूट गए थे। स्टालिन ने इस घटना को अपने राजनीतिक जीवन के बेहद कठिन दौर के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि उस समय उन्होंने तथा अन्य लोगों ने जेल के भीतर प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना किया। आपातकाल भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक बेहद संवेदनशील अध्याय रहा है। 1975 से 1977 के बीच देश में आपातकाल लागू रहा था, जिसके दौरान विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और सरकार की आलोचना करने वाले कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं और राजनीतिक अधिकारों को लेकर देशभर में व्यापक बहस हुई थी। तमिलनाडु भी इससे अछूता नहीं रहा और राज्य के कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उस समय गिरफ्तारी तथा जेल से जुड़े अनुभवों का सामना किया। स्टालिन का मौजूदा बयान इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ले आया है। डीएमके अध्यक्ष ने अपने वीडियो में यह बताने की कोशिश की कि आपातकाल के दौरान उनके साथ क्या हुआ था और क्यों विधानसभा में किया गया कथित इशारा उनके लिए विशेष रूप से गंभीर है। उन्होंने अपने पुराने अनुभव को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधा। स्टालिन के मुताबिक, उन्हें और उनके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों को जिस स्थान पर रखा गया था, वह सामान्य जेल वार्ड से अलग था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक ऐसे वार्ड में रखा गया था जिसे कुष्ठ रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। उनके अनुसार, उस समय की परिस्थितियां बेहद कठिन थीं और जेल के भीतर उनके साथ कथित तौर पर हिंसक व्यवहार किया गया। स्टालिन की ओर से यह बयान जारी किए जाने के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक बहस में आपातकाल का मुद्दा फिर से महत्वपूर्ण हो गया है। इस विवाद में एक तरफ स्टालिन अपने व्यक्तिगत अनुभव और आपातकाल के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री विजय के विधानसभा भाषण को लेकर राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं। तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके लंबे समय से राज्य की प्रमुख राजनीतिक शक्तियों में शामिल रही है। स्टालिन स्वयं पार्टी के अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं और उनका राजनीतिक जीवन कई दशकों में फैला हुआ है। इसलिए आपातकाल से जुड़े उनके व्यक्तिगत अनुभव का राजनीतिक महत्व भी काफी अधिक माना जाता है। किसी भी सार्वजनिक बयान में उस दौर की घटनाओं का उल्लेख डीएमके के समर्थकों और पार्टी के राजनीतिक इतिहास से जुड़े लोगों के बीच विशेष प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर नेताओं द्वारा किए गए बयान और इशारे अक्सर व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में देखे जाते हैं। यदि किसी नेता के बारे में व्यक्तिगत या शारीरिक संदर्भ दिया जाता है, तो उसका जवाब भी उसी स्तर पर सामने आ सकता है। स्टालिन ने इसी संदर्भ में सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपना पक्ष जनता के सामने रखा। उन्होंने अपने वीडियो में केवल मौजूदा विवाद पर प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि लोगों को यह भी याद दिलाने की कोशिश की कि उनके राजनीतिक जीवन में जेल और दमन का अनुभव नया नहीं है। उनका कहना है कि आपातकाल के दौरान हुई कथित पुलिस हिंसा उनके जीवन की वास्तविक घटना है और इसे किसी राजनीतिक मजाक या इशारे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो यह विवाद तमिलनाडु में व्यक्तिगत राजनीतिक इतिहास और वर्तमान राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संबंध को भी सामने लाता है। राज्य की राजनीति में नेताओं के पुराने संघर्ष, आंदोलनों और राजनीतिक घटनाओं का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। ऐसे में आपातकाल जैसे ऐतिहासिक मुद्दे का इस्तेमाल मौजूदा राजनीतिक बहस में होना असामान्य नहीं है। स्टालिन के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि डीएमके नेतृत्व मुख्यमंत्री विजय के बयानों को लेकर आक्रामक राजनीतिक रुख अपना सकता है। विधानसभा में हुई किसी भी घटना को लेकर दोनों पक्षों के बीच आने वाले दिनों में और बयान सामने आ सकते हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण ऐसे विवाद अब केवल सदन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कुछ ही घंटों में व्यापक सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि स्टालिन ने अपने दावे सोशल मीडिया पर जारी वीडियो के माध्यम से रखे हैं। उनके द्वारा बताए गए जेल अनुभव और पुलिस कार्रवाई के विवरण उनके व्यक्तिगत दावे के रूप में सामने आए हैं। ऐसे ऐतिहासिक दावों को समझने के लिए उस दौर के उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य स्वतंत्र स्रोतों का संदर्भ भी महत्वपूर्ण होगा। तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री विजय का उभरना भी मौजूदा समीकरणों को नया रूप दे रहा है। एक ओर पारंपरिक द्रविड़ राजनीति की मजबूत विरासत रखने वाली डीएमके है, तो दूसरी ओर विजय की राजनीतिक उपस्थिति राज्य की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में नए समीकरण पैदा कर रही है। ऐसे माहौल में नेताओं के बीच तीखे बयान और पुराने राजनीतिक मुद्दों का फिर से सामने आना आने वाले समय में चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है। स्टालिन ने जिस तरह अपने पुराने जेल अनुभव को मौजूदा विधानसभा विवाद से जोड़ा है, उससे यह स्पष्ट है कि वह इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत टिप्पणी के रूप में नहीं देख रहे हैं। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक संघर्ष और आपातकाल के दौरान झेली गई कथित ज्यादती से जोड़कर जनता के सामने रखा है। इससे विवाद का दायरा भी बढ़ गया है और अब चर्चा केवल विधानसभा में हुए कथित इशारे तक सीमित नहीं रह गई है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री विजय या उनकी पार्टी की ओर से इस पर प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यदि विजय इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हैं या स्टालिन के आरोपों का जवाब देते हैं, तो राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। वहीं यदि दोनों पक्ष इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाते हैं, तो मामला धीरे-धीरे अन्य राजनीतिक मुद्दों के बीच दब सकता है। फिलहाल, स्टालिन का बयान तमिलनाडु की राजनीति में एक पुराने ऐतिहासिक अध्याय को वर्तमान राजनीतिक संघर्ष से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। आपातकाल के दौरान उनके कथित जेल उत्पीड़न और जबड़े की चोटों का जिक्र कर उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के विधानसभा बयान पर तीखा पलटवार किया है। इस घटनाक्रम ने न केवल दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराने संघर्ष आज भी मौजूदा राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

    कर्नाटक SIR सूची में नंदन नीलेकणी और परिवार के नाम, 43.81 लाख मतदाताओं को नोटिस; जानिए क्या है पूरा मामला

        Yugcharan News / 10-09-2026 नई दिल्ली: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया के बीच कई प्रमुख नामों के चुनावी रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आने से चर्चा तेज हो गई है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी, उनकी पत्नी रोहिणी नीलेकणी और उनके बच्चों जाह्नवी नंदन नीलेकणी तथा निहार नीलेकणी के नाम भी उन मतदाताओं की सूची में शामिल हैं, जिनके मौजूदा चुनावी रिकॉर्ड को 2002 की पुरानी मतदाता सूची से मैप नहीं किया जा सका है। कर्नाटक में चल रही इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज नामों और पुराने चुनावी रिकॉर्ड के बीच सत्यापन करना है। इसी क्रम में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में नाम, अभिभावक का विवरण या अन्य जानकारियों में अंतर सामने आया है। ऐसे मामलों को विसंगति सूची में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम इस सूची में आना अपने आप में उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का संकेत नहीं है। संबंधित मतदाता को दस्तावेजों के माध्यम से अपना रिकॉर्ड सत्यापित करने का अवसर दिया जा रहा है। नंदन नीलेकणी और परिवार का नाम क्यों आया? रिपोर्ट के मुताबिक, नंदन नीलेकणी और उनके परिवार के सदस्यों को “Unmapped with last SIR” श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि मौजूदा चुनावी रिकॉर्ड को 2002 की मतदाता सूची के साथ निर्धारित प्रक्रिया के तहत जोड़ा या मैप नहीं किया जा सका। नंदन नीलेकणी, रोहिणी नीलेकणी, जाह्नवी नंदन नीलेकणी और निहार नीलेकणी के नाम बेंगलुरु के BTM Layout विधानसभा क्षेत्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज बताए गए हैं। परिवार मतदान के लिए कोरमंगला के थर्ड ब्लॉक स्थित रेड्डी जनसंघ हाई स्कूल में बने मतदान केंद्र का इस्तेमाल करता है। अब दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान परिवार को नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। इसके बाद संबंधित मतदाताओं को निर्वाचन आयोग द्वारा स्वीकार किए गए दस्तावेजों में से किसी एक के माध्यम से अपना विवरण सत्यापित करना होगा। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली है। यहां यह समझना जरूरी है कि “Unmapped” का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है या वह मतदान करने के अधिकार से वंचित हो गया है। यह मुख्य रूप से मौजूदा रिकॉर्ड और पुराने रिकॉर्ड के बीच मैपिंग से जुड़ी प्रशासनिक स्थिति है। आगे की प्रक्रिया में दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। 43.81 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के दौरान कुल 43.81 लाख मतदाताओं के संबंध में नोटिस तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO के समक्ष प्रस्तुत किए जाने हैं। नोटिस चरण 22 अक्टूबर तक जारी रहने की बात कही गई है। इसके बाद रिकॉर्ड के सत्यापन और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राज्य की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को जारी होने की योजना है। यह पूरी प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्नाटक में करीब 4.46 करोड़ मतदाताओं का रिकॉर्ड अंतिम सूची में शामिल किया जाना है। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड के सत्यापन के कारण चुनावी प्रशासन के सामने भी व्यापक स्तर पर काम का दबाव है। निखिल कामथ और अभिनेता शिवराजकुमार भी सूची में SIR के दौरान केवल नीलेकणी परिवार ही नहीं, बल्कि कई अन्य चर्चित लोगों के चुनावी रिकॉर्ड में भी विसंगतियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ और कन्नड़ अभिनेता शिवराजकुमार के नाम भी ऐसे मामलों में सामने आए हैं, जहां चुनावी रिकॉर्ड के सत्यापन की जरूरत बताई गई। शिवराजकुमार के मामले में प्रक्रिया को अलग तरीके से पूरा किया गया। उन्हें चुनाव कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ी। अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर रिकॉर्ड का सत्यापन किया। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, प्रमुख या विशेष श्रेणी के मतदाताओं के लिए ऐसी व्यवस्था उपलब्ध है। संबंधित बूथ लेवल अधिकारी मतदाता के घर जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सत्यापन की प्रक्रिया प्रशासनिक रूप से सुविधाजनक तरीके से पूरी हो और किसी मतदाता को केवल औपचारिक सुनवाई के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। वैज्ञानिक CNR राव के मामले में अलग स्थिति भारत रत्न से सम्मानित प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम भी कर्नाटक की विसंगति सूची में सामने आने के बाद भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी। हालांकि, निर्वाचन अधिकारियों ने बाद में स्पष्ट किया कि राव को SIR के संबंध में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। बेंगलुरु अर्बन डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव के अनुसार, राव के चुनावी रिकॉर्ड में एक विसंगति जरूर पाई गई थी। मौजूदा रिकॉर्ड और 2002 की पुरानी मतदाता सूची में उनके नाम के अलग-अलग रूप दर्ज थे। लेकिन संबंधित बूथ लेवल अधिकारी ने रिकॉर्ड की जांच के बाद उनके नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने की सिफारिश कर दी। इसलिए उन्हें अलग से नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। यह मामला बताता है कि SIR प्रक्रिया में सामने आने वाली हर विसंगति का परिणाम नोटिस या नाम हटाए जाने के रूप में नहीं होता। अधिकारियों द्वारा उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के आधार पर अलग-अलग मामलों में निर्णय लिया जा सकता है। पद्मश्री हरेकला हजब्बा को नोटिस पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हरेकला हजब्बा का नाम भी कर्नाटक की विसंगति सूची में शामिल बताया गया है। हालांकि, उनके मामले में नाम से संबंधित अंतर के कारण नोटिस जारी किया गया। मतदाता सूची में नामों की वर्तनी और अलग-अलग भाषाओं में उनके लिप्यंतरण से जुड़ी समस्याएं SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक हैं। अंग्रेजी और कन्नड़ में दर्ज नामों में मामूली अंतर होने पर भी रिकॉर्ड का मिलान प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा माता-पिता के नाम, उपनाम और अन्य व्यक्तिगत विवरणों में छोटे अंतर भी कई मामलों में रिकॉर्ड को पुराने डेटा से जोड़ने में समस्या पैदा कर रहे हैं। आम मतदाताओं को भी परेशानी SIR की प्रक्रिया केवल चर्चित या प्रमुख लोगों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में आम मतदाताओं को भी अपने रिकॉर्ड से संबंधित विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मतदाताओं ने कथित तौर पर शिकायत की है कि उन्हें यह पता लगाने में कठिनाई हो रही है कि उनके मामले से संबंधित बूथ लेवल अधिकारी या Electoral Registration Officer कौन है। कुछ मामलों में नोटिस की पूरी जानकारी, सुनवाई की तारीख और स्थान तक पहुंचने में भी दिक्कत की बात सामने आई है। नामों की स्पेलिंग में मामूली अंतर, अंग्रेजी और कन्नड़ के बीच लिप्यंतरण में बदलाव तथा माता-पिता के नामों में अंतर जैसे कारण रिकॉर्ड के मिलान को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में मतदाताओं के लिए समय पर सही दस्तावेज उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को कर्नाटक में SIR की मौजूदा प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण दस्तावेज सत्यापन है। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति पाई गई है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद आवश्यक निर्णय लेंगे। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने की निर्धारित योजना है। तब यह अधिक स्पष्ट होगा कि कितने नाम बिना बदलाव के बरकरार रहे, कितने रिकॉर्ड में सुधार किया गया और किन मामलों में अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पड़ी। नंदन नीलेकणी और उनके परिवार का नाम विसंगति सूची में आना इसलिए विशेष चर्चा का विषय बना है क्योंकि यह प्रक्रिया देश के प्रमुख उद्योगपतियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों तक भी पहुंची है। लेकिन चुनावी प्रशासन के लिहाज से इसका व्यापक महत्व इससे कहीं अधिक है। 43.81 लाख मतदाताओं से जुड़े मामलों का सत्यापन कर्नाटक में मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने की एक बड़ी प्रशासनिक कवायद है। फिलहाल नंदन नीलेकणी और उनके परिवार के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज हैं और “Unmapped with last SIR” की स्थिति का सामना कर रहे हैं। आगे दस्तावेज सत्यापन के बाद ही उनके रिकॉर्ड की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। इसी तरह अन्य प्रमुख और आम मतदाताओं के मामलों में भी अंतिम निर्णय संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद लिया जाएगा।