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    16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर दिशा-निर्देशों पर विचार कर रही आंध्र प्रदेश सरकार

    3 months ago

    आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों और किशोरों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने संकेत दिए हैं कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य कम उम्र के बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में मौजूद नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रखना बताया जा रहा है।

    हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि कम उम्र के बच्चे अक्सर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को पूरी तरह समझने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए उचित नीतियां बनाए। उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों में इस दिशा में पहले से ही ठोस कदम उठाए जा चुके हैं और आंध्र प्रदेश सरकार वैश्विक अनुभवों का अध्ययन कर रही है।

    बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाली अनुचित जानकारी, अनावश्यक दबाव और नकारात्मक व्यवहार से दूर रखने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम और असंतुलित डिजिटल उपयोग से बच्चों के व्यवहार, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

    मंत्री नारा लोकेश ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम किसी को दंडित करने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना जरूरी है, जिससे बच्चों को सुरक्षित डिजिटल माहौल मिल सके।

    वैश्विक अनुभवों से सीख

    सरकार द्वारा जिन अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का अध्ययन किया जा रहा है, उनमें कुछ विकसित देशों की नीतियां शामिल हैं, जहां बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर आयु-आधारित दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। इन नीतियों का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया में धीरे-धीरे और समझदारी के साथ प्रवेश कराने का है।

    राज्य सरकार का मानना है कि ऐसे दिशा-निर्देश लागू करने से बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों को भी सहयोग मिलेगा, ताकि वे अपने बच्चों के डिजिटल उपयोग पर बेहतर मार्गदर्शन कर सकें।

    सामाजिक और मानसिक प्रभावों पर चिंता

    राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े कई लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आज के समय में बच्चों का बहुत कम उम्र में सोशल मीडिया से जुड़ जाना कई प्रकार की चुनौतियां पैदा कर रहा है। इनमें ध्यान भटकना, आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक व्यवहार में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।

    एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं होते, इसलिए वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद हर तरह की सामग्री को सही-गलत के रूप में समझ नहीं पाते। ऐसे में सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह समय रहते उचित कदम उठाए।

    अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी नीतियां ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों को डिजिटल साक्षरता सिखाना, उन्हें सही-गलत की पहचान कराना और संतुलित ऑनलाइन व्यवहार के लिए प्रेरित करना समय की मांग है।

    सरकार की योजना में यह भी शामिल है कि भविष्य में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से बच्चों और माता-पिता दोनों को डिजिटल जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों से जोड़ा जाए।

    आगे की दिशा

    फिलहाल यह विषय विचार-विमर्श के चरण में है और सरकार विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेने की प्रक्रिया में है। नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और तकनीकी क्षेत्र के जानकारों से सलाह लेकर एक संतुलित और व्यावहारिक रूपरेखा तैयार करने की बात कही जा रही है।

     

    राज्य सरकार का कहना है कि अंतिम निर्णय बच्चों के हित, समाज की आवश्यकताओं और तकनीकी यथार्थ को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। आने वाले समय में इस दिशा में और स्पष्ट जानकारी साझा किए जाने की संभावना है।

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