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    28वाँ सत्र “MGNREGA से VB–GRAM G में परिवर्तन का बहुविषयक प्रभाव” विषय पर आयोजित

    1 hour ago

    HUMPALS का 28वाँ सत्र “MGNREGA से VB–GRAM G में परिवर्तन का बहुविषयक प्रभाव” विषय पर आयोजित किया गया। मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग, एमएनआईटी जयपुर के तत्वावधान में आयोजित इस सत्र ने आत्म-अधिगम, पुनः-अधिगम तथा सह-अधिगम की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के प्रति HUMPALS की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। सत्र की शुरुआत विभाग में नए शोधार्थियों के परिचय के साथ हुई।

     

     

    सत्र का मुख्य केंद्र महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 से विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] ढाँचे की ओर प्रस्तावित वैधानिक एवं नीतिगत परिवर्तन रहा। इस अवसर पर संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने भारत की ग्रामीण रोजगार नीति के परिदृश्य में इस महत्वपूर्ण परिवर्तन के औचित्य, दायरे तथा संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। कार्यकर्म में विभाग की शोधार्थी वर्तिका बोथरा ने कानून में हुए बदलावों को संक्षेप में समझाया।

     

    विचार-विमर्श में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि प्रस्तावित ढाँचा ग्रामीण रोजगार गारंटी तंत्र के उद्देश्यों एवं संरचना दोनों में परिवर्तन लाने का प्रयास करता है। सत्र के दौरान प्रस्तुत नीतिगत सारांशों के अनुसार, प्रस्तावित अधिनियम का उद्देश्य प्रति ग्रामीण परिवार सुनिश्चित रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करना है, साथ ही ग्रामीण अवसंरचना विकास एवं आजीविका-उन्मुख पहलों के साथ समन्वय पर अधिक बल देना है।

     

    चर्चा में इस परिवर्तन से जुड़े व्यापक विमर्शों को भी शामिल किया गया, जिनमें केंद्र और राज्यों के बीच लागत-साझेदारी की व्यवस्था, योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन तंत्र, तथा संस्थागत तैयारियों से संबंधित चिंताएँ प्रमुख रहीं। प्रतिभागियों ने विशेष रूप से संवेदनशील ग्रामीण संदर्भों में श्रमिकों के अधिकारों, कल्याण सुरक्षा तथा शासन में जवाबदेही पर प्रस्तावित ढाँचे के संभावित प्रभावों पर भी विचार किया।

     

    समग्र रूप से, HUMPALS सत्र ने विकसित हो रही ग्रामीण रोजगार नीति पर आर्थिक, समाजशास्त्रीय, राजनीतिक एवं मानवतावादी दृष्टिकोणों से बहुविषयक एवं समालोचनात्मक संवाद को संभव बनाया। सत्र का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए और प्रस्तावित नीतिगत परिवर्तन से उत्पन्न अवसरों एवं चुनौतियों पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए।

     

     

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