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    आर. ए. पोदार प्रबंधन संस्थान में जीवन संतुलन, उद्देश्य एवं आत्मसंतुष्टि की खोज विषय पर व्याख्यान का आयोजन

    2 months ago

    राजस्थान विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के अंतर्गत आने वाले आर. ए. पोदार इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट द्वारा डॉ. राजेश कुमार, आईपीएस, डीजीपी (पश्चिम बंगाल कैडर, 1990 बैच) के साथ एक प्रेरक इंटरएक्टिव सेशन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 400 से अधिक विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों तथा अतिथियों ने भाग लिया।
    संस्थान के निदेशक प्रो. अनुराग शर्मा ने डॉ. राजेश कुमार का हार्दिक स्वागत किया और उनके आने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद छात्रों को प्रेरित करने और कक्षा के अध्ययन को नेतृत्व एवं सार्वजनिक जीवन के अनुभवों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम हैं।
    अपने संबोधन में डॉ. राजेश कुमार ने तीन प्रकार के व्यक्तियों के बारे में विभिन मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लेख किया — पहला, जो असफलता के भय से कुछ नया आरंभ ही नहीं करते; दूसरा, जो आरंभ तो करते हैं पर कठिनाइयों से घबराकर रुक जाते हैं; और तीसरा, जो हर चुनौती के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर डटे रहते हैं। उन्होंने कहा, “श्रेष्ठ वही हैं जो अपने विश्वास के मार्ग पर अडिग रहते हैं।” स्वामी विवेकानंद के विचार “उठो, जागो और जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो, रुकना मत” का उल्लेख करते हुए उन्होंने छात्रों को जीवन में दृढ़ संकल्प बनाए रखने का संदेश दिया।
    अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, “जीवन में कुछ लोग असफलता का और कुछ सफलता का भी कष्ट झेलते हैं। सच्ची उपलब्धि वही है जब हम अपने मन, शरीर और ऊर्जा को संतुलित कर सकें। यदि सफलता के बाद भी खुशी नहीं है, तो वह अधूरी है।” उनके इन विचारों ने छात्रों को जीवन में संतुलन, उद्देश्य और आत्मसंतुष्टि की खोज के लिए प्रेरित किया।
    मुख्य सत्र के बाद ‘PIM Talks’ नामक एक पॉडकास्ट आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. राजेश कुमार ने छात्रों के साथ करियर, नेतृत्व और व्यक्तिगत विकास पर विचार-विमर्श किया। उन्होने विद्यार्थियों से यह आह्वान किया कि यह समय कुछ बनने के बजाय कुछ करने के सपनों के सपनों का हैं।

    कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें डॉ. राजेश कुमार के प्रेरणादायक एवं चिंतनशील संवाद के लिए आभार व्यक्त किया गया। उनका संदेश छात्रों के मन में एक गहरी छाप छोड़ गया।
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