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    अदभुत लीला: जब देवनारायण ने ग्रहण किया विष का भोजन और माता साडू को दिखाए ब्रह्मांड के दर्शन

    1 day ago

     भगवान श्री देवनारायण की महिमा निराली है। उनके जीवन का हर प्रसंग एक नई सीख और चमत्कार लेकर आता है। हाल ही में मालवा की धरती पर एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल माता साडू का संशय दूर किया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि नारायण ही तीनों लोकों के स्वामी हैं।

    ममता का संशय और विष की थाली

    कथा के अनुसार, जब छोछू भाट जीवित वापस लौटे, तो माता साडू के मन में डर समा गया। इसी घबराहट में उन्होंने भाट के भोजन में विष मिला दिया। लेकिन सर्वव्यापी भगवान देवनारायण से कुछ भी छिपा नहीं था। जब भोजन परोसा गया, तो नारायण ने बड़ी चतुराई से भाट की विष वाली थाली खुद के सामने रख ली और अपनी शुद्ध थाली भाटजी को दे दी।

    > चमत्कार: मुख में दिखा सारा संसार

    > जैसे ही माता साडू को एहसास हुआ कि उनके पुत्र ने विष वाला भोजन खा लिया है, वे फूट-फूट कर रोने लगीं। माता को दुखी देख नारायण ने एक लंबी उबासी ली। उस पल माता साडू के आश्चर्य का ठिकाना न रहा, जब उन्हें बालक नारायण के मुख में धरती, आकाश और विचरण करते जीव-जंतुओं सहित पूरा ब्रह्मांड दिखाई दे गया।

    नीम के कड़वेपन का पौराणिक रहस्य

    भोजन के पश्चात भगवान देवनारायण ने अपनी लीला को पूर्ण किया। वे पास ही स्थित एक 'दुधिया नीम' के वृक्ष के पास गए और सारा विष उगल दिया। जनश्रुति है कि भगवान द्वारा विष त्यागने के कारण ही उस दिन से नीम का स्वाद कड़वा हो गया। यह घटना आज भी भक्तों के बीच श्रद्धा का केंद्र है।

    > प्रतिशोध और न्याय का संकल्प

    > विष प्रसंग के बाद देवनारायण के तेवर बदल गए। उन्होंने छोछू भाट से पूर्वजों के संघर्ष की गाथा सुनी और माता साडू से सवाल किया कि उनके काका और बाबासा के साथ अन्याय किसने किया? नारायण ने स्पष्ट कर दिया कि अब शांति का समय समाप्त हुआ और वे कल ही गोठां प्रस्थान करेंगे ताकि अपने परिवार के बलिदान का बदला ले सकें।

    विदाई की बेला और श्रद्धा का सैलाब

    नारायण की गोठां वापसी की खबर सुनकर पूरे मालवा में भावुक माहौल है। उनके ननिहाल पक्ष के लोग, मामा-मामियां और ग्वाले उन्हें रोकने का जतन कर रहे हैं, लेकिन नारायण अब अपने जीवन के मुख्य उद्देश्य की ओर कदम बढ़ा चुके हैं।

     

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