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    हस्तशिल्प को नई पहचान: राजीविका और IICD के बीच हुआ रणनीतिक समझौता 'उन्नति इन्क्यूबेशन हब' के तहत ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मिलेगा डिज़ाइन और बाज़ार का संबल कौशल विकास, नवाचार और विपणन में सहयोग से शिल्प आधारित उद्यमों को मिलेगा बढ़ावा

    3 months ago

    जयपुर।
    ग्रामीण महिलाओं की हस्तशिल्प आधारित आजीविका को सशक्त और समकालीन बाजार की ज़रूरतों के अनुरूप ढालने के लिए राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) ने अपनी पहल 'उन्नति इन्क्यूबेशन हब' के अंतर्गत एक अहम साझेदारी की है। इस कड़ी में भारतीय शिल्प एवं डिजाइन संस्थान (IICD), जयपुर के साथ सोमवार को राजीविका राज्य मुख्यालय में सामझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
    डिज़ाइन विशेषज्ञता और जमीनी पहुँच का मेल
    यह समझौता डिजाइन इंटरवेंशन, उत्पाद विविधीकरण, नवाचार और विपणन सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को कौशल उन्नयन और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त करेगा। राजीविका की गहन संस्थागत पहुँच और IICD की डिज़ाइन विशेषज्ञता का यह सम्मिलन शिल्प आधारित उद्यमों को नया आयाम देगा।
    समझौता कार्यक्रम के दौरान IICD के सचिव नरेंद्र गुप्ता, राजीविका की मिशन निदेशक नेहा गिरि, परियोजना निदेशक प्रीति सिंह और राज्य परियोजना प्रबंधक पूजा शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
    महिलाओं को मिलेगा वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर
    इस साझेदारी के ज़रिए स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिला उद्यमियों को उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाने में मदद मिलेगी। डिज़ाइन और मार्केटिंग के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के साथ-साथ प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और उत्पाद नवाचार की दिशा में भी काम किया जाएगा।
    सतत् आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण की ओर कदम
    राजीविका का यह प्रयास महिला सशक्तिकरण, सतत् आजीविका विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। IICD के साथ यह सहयोग ग्रामीण हस्तशिल्प को न सिर्फ आधुनिक रूप देगा, बल्कि पारंपरिक कारीगरी को भी संरक्षित करते हुए नए बाजारों से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
    निष्कर्षतः, यह साझेदारी न केवल महिला शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त करेगी, बल्कि राजस्थान के समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को एक वैश्विक मंच भी प्रदान करेगी।

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